दीप्ति शर्मा की वो फिरकी, जिसके सामने टिक नहीं पाई पाकिस्तानी क्रिकेट टीम

    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

भारत ने गेंदबाजों के बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत वीमेन एशिया कप में जीत के साथ अपना अभियान शुरू किया है.

भारत ने श्रीलंका के दांबुला में खेले गए मैच में पाकिस्तानी टीम को सात विकेट से हराया.

भारत की जीत में दीप्ति शर्मा ने अहम भूमिका निभाई. दीप्ति ने 20 रन पर तीन विकेट निकालकर पाकिस्तान की पारी को 108 रनों पर समेटने में अहम भूमिका निभाई.

दीप्ति को इसमें स्पिनर श्रेयांका पाटिल से भी अच्छा सहयोग मिला.

भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि पहला मैच दवाब वाला होता है, पर इस जीत ने ट्रेंड सेट कर दिया है.

टीम की सफलता की प्रमुख वजह इसका एकजुट होकर खेलना है.

दीप्ति बनती जा रही हैं टीम की जान

दीप्ति शर्मा को हालांकि इस मैच में बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिला. पर उन्होंने पिछले कुछ समय में एक ऑलराउंडर की तौर पर अपनी धाक जमाई है.

दीप्ति की गेंदबाजी में पैनापन आने से भारतीय स्पिन आक्रमण और मजबूत हुआ है. इस कारण से मध्य ओवरों में भारत ज्यादा विकेट निकालने लगा है.

दीप्ति अभी कुछ ही समय पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शानदार गेंदबाजी से खासी सुर्खियां बटोर चुकी हैं. इसके अलावा वह जरूरत के समय अपनी बल्लेबाजी का भी प्रभाव छोड़ती रही हैं.

दीप्ति ने इस मैच में 20 रन देकर तीन विकेट निकाले. वह पाकिस्तान की कप्तान निदा डार के विकेट को सबसे महत्वपूर्ण मानती हैं.

'प्लेयर ऑफ द मैच' रहीं दीप्ति ने कहा कि निदा अच्छी बल्लेबाज हैं, इसलिए उनका विकेट निकलने से रनों पर ब्रेक लगाने में आसानी हुई.

अपनी उपलब्धि से वाक़िफ़ नहीं

दीप्ति शर्मा से जब मैच के बाद पूछा गया कि क्या आपको पता है कि आज तीन विकेट लेने से वह तीनों प्रारूपों में 250 विकेट लेने वाली गेंदबाज बन गई हैं, तो उन्होंने कहा कि मुझे इसकी जानकारी नहीं थी.

मौजूदा समय में क्रिकेट में जितने आंकड़े रहते हैं, उतने अन्य खेलों में देखने को नहीं मिलते हैं. पर दीप्ति जैसी क्रिकेटर को अपनी उपलब्धि की जानकारी ना होना, उनकी सादगी को दर्शाता है.

दीप्ति ने कहा कि उन्होंने योजना के मुताबिक़ गेंदबाजी की और सफलताएं भी इसी कारण मिल रही हैं.

उन्होंने कहा, ''दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सिरीज के बाद मैंने अपनी गेंदबाजी पर बहुत काम किया है. साथ ही शिविर लगने का भी बहुत फायदा हुआ है.''

पेस गेंदबाजों से आक्रमण में आया है दम

भारतीय गेंदबाजी पहले स्पिनरों की सफलताओं पर निर्भर रहती थी. पर अब इस क्षेत्र में बदलाव देखने को मिल रहा है.

अब भारतीय गेंदबाज शुरुआत में ही विकेट नहीं निकाल रहे हैं, बल्कि मध्य के ओवरों में विकेट निकाल रहे हैं. पाकिस्तान के खिलाफ जीत के दौरान यह खूबी देखने को मिली.

पूजा वस्त्रकर ने अपने पहले दो ओवरों में पाकिस्तान के दोनों ओपनरों गुल फिरोजा और मुनीबा अली के विकेट निकालकर जो झटके दिए, उससे पाकिस्तान की टीम कभी उबरती नजर नहीं आई.

वहीं दूसरी पेस गेंदबाज रेणुका सिंह ने मध्य के ओवरों में सिदरा अमीन और इराम जावेद के विकेट निकाले.

भारत की बेहतरीन गेंदबाज रहीं पूनम यादव ने भी पेस गेंदबाजी में आए इस बदलाव को टीम की हाल की सफलताओं में अहम माना.

शेफाली और स्मृति की नायाब ओपनिंग जोड़ी

स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा दोनों ही आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने में विश्वास रखती हैं. यह जोड़ी जब लय में खेल रही हो तो किसी भी आक्रमण का उनके सामने टिक पाना आसान नहीं होता है.

इस जोड़ी की खूबी यह है कि दोनों ही स्पिन और पेस दोनों गेंदबाजों को अच्छे से खेलती हैं. यही वजह है कि पाकिस्तान को स्पिन के साथ पारी की शुरुआत करना भी काम नहीं आया.

मंधाना और शेफाली ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज को अपनाकर मात्र 9.3 ओवरों में 85 रनों की ओपनिंग साझेदारी निभा दी, जिसने मैच का परिणाम किसी हद तक तय कर दिया.

मंधाना ने 145 से ज्यादा की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करके 31 गेंदों में 45 रन बनाए. इसमें उन्होंने 9 चौके लगाए. वहीं शेफाली वर्मा ने 29 गेंदों में 40 रन बनाए. इसमें उन्होंने छह चौके और एक छक्का लगाया.

बल्लेबाजों को अति उत्साह से बचने की जरूरत

स्मृति मंधाना के आउट होने के समय ही भारत की जीत तय हो चुकी थी. इसके बाद शेफाली वर्मा और दयालान हेमलता की जोड़ी स्कोर को 100 रनों तक ले गई. यह मौका था, जब भारत को दूसरे किसी नुकसान के लक्ष्य तक पहुंचने की जरूरत थी.

लेकिन पहले शेफाली वर्मा लेग ब्रेक गुगली गेंदबाज साईदा अरूब शाह की गेंद को आगे निकलकर मारने के प्रयास में बोल्ड हो गईं. इसके बाद हेमलता नासरा संधू पर लगातर तीन चौके लगाने के बाद आगे निकलकर शॉट खेलने के प्रयास में कैच हो गईं.

शेफाली और हेमलता दोनों ही जल्द ही लक्ष्य तक पहुंचने के प्रयास में विकेट गंवा बैठीं. यह सही है कि इस मैच में भारत की जीत तय हो चुकी थी. पर भारतीय बल्लेबाजों को यह ध्यान में रखने की जरूरत है कि इस साल अक्टूबर में टी-20 विश्व कप का आयोजन होना है, उसमें ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमों के खिलाफ इस तरह अति उत्साह दिखाना महंगा भी पड़ सकता है.

बेहतर होता कि शेफाली और हेमलता दोनों टीम को जिताकर लौटतीं.

अरूब शाह छाप छोड़ने में सफल रहीं

पाकिस्तान की युवा स्पिनर साईदा अरूब शाह अपनी टीम की हार के दौरान भी अपनी छाप छोड़ने में सफल रहीं.

यह 20 साल की गेंदबाज हाल ही में सीनियर टीम का हिस्सा बनी हैं. पर उन्होंने मुश्किल स्थिति में भी अपनी धड़कनों को काबू में रखा.

उन्होंने नपी-तुली गेंदबाजी करके तीन ओवरों में मात्र नौ रन देकर दो विकेट निकाले. उन्होंने विकेट भी दोनों ओपनरों स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा के निकाले. इस प्रदर्शन से उनका मनोबल जरूर बढ़ा होगा.

पाकिस्तान टीम की दिक्कत यह रही है कि वह बहुत जल्दी-जल्दी टीम में बदलाव करती है. इससे खिलाड़ियों के मन में प्रदर्शन नहीं कर पाने पर टीम से बाहर होने का डर बना रहता है.

यह डर ही उन्हें अपना बेस्ट नहीं देने देता है. बेहतर हो कि खिलाड़ियों को एक-दो सिरीज खेलने की गारंटी दी जाए तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं

इस ग्रुप से दो टीमों को सेमीफाइनल में स्थान बनाना है. इस ग्रुप की दो अन्य टीमें नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात हैं.

इसलिए पाकिस्तान के लिए सेमीफाइनल में पहुंचने की अभी भी संभावनाएं हैं.

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