दीपक चाहर ने वो नहीं किया, जो दीप्ति शर्मा ने किया

दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ तीसरे टी-20 मैच में भारत की टीम हार गई. हालाँकि भारत ने ये सिरीज़ 2-1 से जीत ली है.

टी-20 वर्ल्ड कप से पहले भारत ने ऑस्ट्रेलिया को भी टी-20 सिरीज़ में मात दी थी.

दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ तीसरे टी-20 में भारत की टीम का प्रदर्शन काफ़ी ख़राब रहा और भारत ये मैच 49 रनों से हार गया.

भारत ने इस मैच में विराट कोहली और केएल राहुल को आराम दिया था.

इस मैच में भारत की निराश करने वाली गेंदबाज़ी और ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक का ग़ैर ज़िम्मेदार शॉट लगाकर आउट होने की चर्चा तो हुई है, दीपक चाहर की भी चर्चा हो रही है.

दरअसल इस मैच के दौरान एक क्षण ऐसा भी आया, जब दीपर चाहर ने दक्षिण अफ़्रीकी बल्लेबाज़ स्टब्स को चेतावनी दी.

दीपक चाहर की वो चेतावनी चर्चा का विषय बनी हुई है. दरअसल पिछले दिनों भारतीय महिला क्रिकेट टीम की गेंदबाज़ दीप्ति शर्मा को लेकर ख़ूब चर्चा हुई थी, जब उन्होंने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ वनडे मैच में नॉन स्ट्राइकर चार्ली डीन को रन आउट कर दिया था.

इस मैच के दौरान दीप्ति शर्मा गेंदबाज़ी कर रही थीं. तभी नॉन स्ट्राइकर चार्ली डीन ने गेंद फेंके जाने से पहले ही क्रीज़ छोड़ दी और दीप्ति शर्मा ने विकेट की गिल्ली गिरा दी और आउट की अपील की. बाद में चार्ली डीन को आउट करार दिया गया.

दीप्ति शर्मा के उस रन आउट को लेकर क्रिकेट की दुनिया बँट गई थी. एक ओर जहाँ कई पूर्व और मौजूदा क्रिकेटर्स ने दीप्ति शर्मा के क़दम को खेल भावना के विपरीत बताया, तो दूसरी ओर कई जानकारों और क्रिकेटरों ने कहा कि अगर आईसीसी का नियम है, तो दीप्ति ने कोई ग़लत काम नहीं किया है.

इंदौर में मंगलवार को हुए तीसरे टी-20 के दौरान दीपक चाहर के सामने भी ऐसा ही मौक़ा आया. उस समय मैच का 16वाँ ओवर चल रहा था. दीपक चाहर गेंदबाज़ी कर रहे थे और नॉन स्ट्राइकर थे स्टब्स.

दीपक चाहर के गेंद फेंकने से पहले ही स्टब्स क्रीज़ से बहुत आगे निकल गए थे. लेकिन दीपक चाहर ने उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया. दीपक चाहर ने उन्हें आउट नहीं किया.

इसके बाद स्टब्स के चेहरे पर राहत देखी जा सकती थी, जबकि दीपर चाहर और कप्तान रोहित शर्मा के चेहरे पर हल्की हँसी दिखी.

बाद में दक्षिण अफ़्रीका की टीम ने 20 ओवरों में तीन विकेट पर 227 रन बनाए और स्टब्स ने 18 गेंदों पर 23 रन बनाए.

सोशल मीडिया पर दीपक चाहर की चर्चा है और लोग उनके रन आउट न करने को लेकर टिप्पणी कर रहे हैं.

नॉन स्ट्राइकर को रन आउट करने की शुरुआत

नॉन स्ट्राइकर रन आउट की शुरुआत बहुत पहले हुई थी. सबसे पहले इस तरह के आउट की चर्चा 1835 में हुई थी, जब इंग्लैंड में फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट में थॉमस बेकर ने जॉर्ज बेजेंट को इस तरह आउट किया था.

लेकिन इसकी सबसे ज़्यादा चर्चा उस समय हुई जब ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मैच में भारत के वीनू मनकड ने इसे आज़माया था.

13 दिसंबर 1947 को वीनू मनकड ने सिडनी टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के बिल ब्राउन को इस तरह रन आउट किया था. तभी से इसे मनकडिंग कहा जाने लगा.

उस समय भी वीनू मनकड की खेल भावना पर सवाल उठे थे. लेकिन उस समय ऑस्ट्रेलिया के कप्तान डॉन ब्रैडमन वीनू मनकड के समर्थन में आए थे और कहा था कि इस मामले में खिलाड़ी को निशाना नहीं बनाना चाहिए क्योंकि क्रिकेट के नियम कहते हैं कि नॉन स्ट्राइकर को गेंद फेंके जाने तक अपनी क्रीज़ में रहना चाहिए.

इसके बाद भारत के कपिल देव की भी चर्चा होती है, जब उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका के पीटर कर्स्टन को ऐसे ही रन आउट किया था. 9 दिसंबर 1992 को भारत और दक्षिण अफ़्रीका के बीच फ़्रेंडशिप सिरीज़ के दौरान कपिल देव ने ऐसा किया था.

लेकिन इससे पहले कपिल देव ने तीन बार पीटर कर्स्टन को चेतावनी भी दी थी. लेकिन कर्स्टन बार-बार क्रीज़ से बाहर निकल रहे थे. तीसरी बार कपिल देव ने उन्हें रन आउट कर दिया. हालांकि इससे पीटर कर्स्टन काफ़ी नाराज़ दिख रहे थे.

सबसे हालिया घटना 2019 के आईपीएल की है, जब आर अश्विन ने जोस बटलर को इस तरह आउट किया था. उस समय भी बटलर काफ़ी ग़ुस्सा हुए थे और अश्विन पर उस दौरान भी ख़ूब सवाल उठे.

दीप्ति शर्मा मामले में क्रिकेट का नियम बनाने वाली संस्थान एमसीसी ने दीप्ति शर्मा मामले पर बयान जारी किया था.

एमसीसी ने कहा था कि हाल ही में क्रिकेट के नियम बदले गए हैं और नॉन स्ट्राइकर एंड पर रन आउट को नियम संख्या 41 से हटाकर 38 में डाल दिया गया है.

पहले इस तरह के रन आउट को आउट तो दिया जाता था, फिर इस तरह के आउट को अनफ़ेयर प्ले की श्रेणी में रखा गया था, लेकिन अब इसे रन आउट माना गया है.

हालांकि आईसीसी ने स्पष्ट किया था कि नए नियम एक अक्तूबर से लागू होंगे. लेकिन इस नियम के लागू होने से पहले भी अंपायर इस तरह के रन आउट की अपील को ख़ारिज नहीं कर सकते.

एमसीसी का ये भी कहना है कि नॉन स्ट्राइकर्स को गेंद फेंके जाने तक अपनी क्रीज़ में ही रहना चाहिए.

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