इसराइली जासूस एली कोहेन से जुड़े मोसाद के सीक्रेट ऑपरेशन की चर्चा क्यों?

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- Author, भरत शर्मा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इसराइल के दिग्गज जासूस एली कोहेन एक बार फिर चर्चा में हैं.
इसराइली सरकार का कहना है कि उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद ने सहयोगी विदेशी खुफ़िया एजेंसी के साथ मिलकर एक कोवर्ट और जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया.
और इस ऑपरेशन में एली कोहेन से जुड़ा सीरिया का आधिकारिक आर्काइव हासिल कर इसराइल लाने में कामयाबी मिली है.
इसराइल के मुताबिक़ इस सीक्रेट ऑपरेशन में एली कोहेन की तस्वीरों और निजी सामान समेत क़रीब ढाई हज़ार दस्तावेज़ सीरिया से इसराइल लाए गए हैं.
मोसाद का कहना है कि ये सभी दस्तावेज़ अब तक सीरियाई सुरक्षाबलों के पास थे, जो उन्होंने अलग-अलग रखे हुए थे.
हालांकि, समाचार एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सीरियाई नेतृत्व ने एली कोहेन का सामान ख़ुद इसराइल को सौंपने की मंज़ूरी दी. रायटर्स के मुताबिक उसे तीन सूत्रों ने ये जानकारी दी है.
कोहेन को 18 मई, 1965 को सीरिया में सार्वजनिक फांसी से मौत की सज़ा दी गई थी. एली कोहेन का पूरा नाम एलीआहू बेन शॉल कोहेन था.
इन्हें इसराइल का सबसे बहादुर और साहसी जासूस भी कहा जाता है. वो जासूस जिसने चार साल न केवल दुश्मनों के बीच सीरिया में गुज़ारे, बल्कि वहां सत्ता के गलियारों में ऐसी पैठ बनाई कि शीर्ष स्तर तक पहुंच बनाने में कामयाब रहे.
एली कोहेन से जुड़ा क्या-क्या सामान मिला?

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इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के आधिकारिक एक्स हैंडल पर फोटो और वीडियो पोस्ट किए गए हैं, जिनमें वो एली से जुड़ा सामान उनकी पत्नी नादिया कोहेन को दिखा रहे हैं.
जिन दस्तावेज़ों का ज़िक्र किया जा रहा है, उनमें एली कोहेन का आख़िरी वसीयतनामा भी शामिल हैं, जो उनकी फांसी से ठीक पहले लिखा गया था.
मोसाद का कहना है कि इस ऑपरेशन में कोहेन की पूछताछ संबंधी फाइलों से ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य सामान भी हासिल किया गया है. साथ ही उन लोगों से जुड़ी फ़ाइल भी हैं, जो कोहेन के संपर्क में थे.
इसके अलावा सीरिया में उनके मिशन के दौरान ली गई तस्वीरें मिलने का दावा भी किया गया है जो अब से पहले नहीं देखी गई थीं. कोहेन जो पत्र अपने परिवार को लिखते थे, वो और गिरफ्तारी के बाद उनके निवास से हासिल सामान भी बरामद किए गए दस्तावेज़ों में शामिल हैं.
मोसाद के मुताबिक़ कोहेन के सीरिया के अपार्टमेंट से जो नोटबुक और डायरी बरामद की गई है, उनमें ख़ुफ़िया मिशन से जुड़े वो निर्देश भी थे, जो उन्हें इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी से मिले थे.
इसके अलावा कोहेन की सीरिया वाले अपार्टमेंट की चाबी, उनका पासपोर्ट और पहचान से जुड़े नकली दस्तावेज भी मिले हैं, जो वो मिशन के दौरान इस्तेमाल कर रहे थे. इनमें से एक दस्तावेज कोहेन की लिखाई में है, जो उन्होंने अपनी फांसी से ठीक पहले लिखा था.
सीरिया ने ख़ुद इसराइल को सौंपे दस्तावेज़: रिपोर्ट

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मोसाद को कोहेन की फांसी का वो आदेश भी मिला है, जिसमें उन्हें दमिश्क में यहूदी समुदाय के प्रमुख रब्बी निसिम इंदिबो से मिलने की इजाज़त दी गई थी.
हालांकि, रायटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक सीरियाई सुरक्षा सूत्र, सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के एक सलाहकार और दोनों देशों के बीच बैकचैनल बातचीत की जानकारी रखने वाले एक शख़्स ने बताया कि ये आर्काइव मेटेरियल असल में सीरियाई नेतृत्व ने इसराइल को ख़ुद दिया है.
इसे शरा की तरफ़ से इसराइल के साथ तनाव कम करने और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भरोसा जीतने की कोशिश की तरह देखा जा रहा है.
इसराइल बीते लंबे समय से मांग करता रहा है कि सीरिया एली कोहेन का शव उसे सौंप दे ताकि इसराइल में उसे दफ़न किया जा सके, लेकिन अब तक इस बारे में सीरिया की तरफ़ से कुछ नहीं कहा गया है.
कोहेन के आर्काइव को लेकर सीरिया की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के कार्यालय, सीरिया के अधिकारियों और व्हाइट हाउस ने ख़बर लिखे जाने तक कोई टिप्पणी नहीं की.
ऐसा कहा जाता है कि कोहेन की जुटाई ख़ुफिया जानकारी ने साल 1967 के अरब-इसराइल युद्ध में इसराइल की जीत में अहम भूमिका निभाई.
ये शख़्स ना इसराइल में जन्मे थे, ना सीरिया या अर्जेंटीना में. एली का जन्म साल 1924 में मिस्र के एलेग्ज़ेंड्रिया में एक सीरियाई-यहूदी परिवार में हुआ था.
इससे पहले मिली थी कोहेन की घड़ी
इससे पहले साल 2018 में इसराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद ने कोहेन की घड़ी हासिल करने की घोषणा की थी.
ऐसा कहा गया था कि ये घड़ी एली कोहेन ने अपने अंतिम समय तक पहनी थी.
मिस्र में पैदा हुए कोहेन को मोसाद ने 1960 के दशक की शुरुआत में नियुक्त किया था और वो सीरियाई सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने में कामयाब रहे थे.
उन्होंने इसराइल को सीरिया से जुड़ी कई ख़ुफ़िया जानकारी मुहैया कराई थीं. वो साल 1965 में पकड़े गए और दमिश्क में उन्हें सरेआम फांसी की सज़ा दी गई.
सीरिया ये बताने से इनकार करता रहा है कि उन्हें कहां दफ़नाया गया था.
सीरियाई कारोबारी कमाल अमीन थाबेत बनकर एली कोहेन ने साल 1962 में सीरिया के कई दौरे किए थे.
इस दौरान उन्होंने राजनीति, कारोबारी जगत और सीरियाई सेना के बीच कई लोगों से दोस्ती कर ली थी और कई दिग्गजों का भरोसा जीत लिया था.
कोहेन की कहानी इसलिए दिलचस्प बन जाती है कि उन्हें लेकर ये दावा किया जाता है कि उन्हें सीरिया का डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर बनाए जाने के बारे में सोचा जाने लगा था, हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिलता.
1967 की जंग में इसराइल को पहुंचाई मदद

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सीरिया में काम करते हुए कोहेन ने कई गोपनीय दस्तावेज़ हासिल कर इसराइल को सौंपे थे.
गोलान हाइट्स पर सीरियाई सुरक्षाबलों का जो ब्योरा उन्होंने इसराइल को सौंपा, ऐसा कहा जाता है कि उस ब्योरे ने इसराइल को 1967 मिडल ईस्ट वॉर में सीरिया को हराने में अहम भूमिका निभाई.
साल 1964 में सीरिया के सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें पकड़ लिया था. उन्हें टॉर्चर किया गया और सैन्य ट्रायल के बाद फांसी की सज़ा सुनाई गई.
जब कोहेन की घड़ी मिली थी तो इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने एक बयान में कहा था, 'मैं इस साहसिक अभियान के लिए मोसाद के लड़ाकों की तारीफ़ करता हूं, जिनका मकसद इसराइल को उस महान योद्धा का स्मृति चिन्ह लाकर देना था, जिसने हमारे देश की सुरक्षा में अहम रोल निभाया.'
ये घड़ी साल 2018 की मई में कोहेन की पत्नी नादिया को दी गई थी. उस समय उन्होंने इसराइली टीवी से कहा था, 'जब मुझे इस बारे में जानकारी दी गई तो मेरा गला सूख गया और रोंगटे खड़े हो गए.'
नादिया ने कहा था, 'इस समय मुझे लग रहा है कि मैं उनका हाथ महसूस कर सकती हूं, मैं महसूस कर रही हूं कि उनका एक हिस्सा मेरे साथ है.'
रेडियो ट्रांसमिशन में लापरवाही पड़ी भारी?

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ज्यूइश वर्चुअल लाइब्रेरी के मुताबिक, जासूसी पर कोहेन की ज़बरदस्त पकड़ के बावजूद उनमें लापरवाही की एक झलक भी दिखती थी. इसराइल में उनके हैंडलर बार-बार उन्हें रेडियो ट्रांसमिशन के समय चौकन्ना रहने की हिदायत दिया करते थे.
साथ ही उन्हें ये निर्देश भी थे कि एक दिन में दो बार रेडियो ट्रांसमिशन ना करें. लेकिन कोहेन बार-बार इन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया करते थे और उनके अंत की वजह यही लापरवाही बनी.
जनवरी 1965 में सीरिया के काउंटर-इंटेलीजेंस अफ़सरों को उनके रेडियो सिग्नल की भनक लग गई और उन्हें ट्रांसमिशन भेजते समय रंगे हाथ पकड़ लिया गया. कोहेन से पूछताछ हुई, सैन्य मुक़दमा चला और आख़िरकार उन्हें सज़ा-ए-मौत सुनाई गई.
कोहेन को साल 1965 में 18 मई को दमिश्क में एक चौराहे पर फांसी दी गई थी. उनके गले में एक बैनर डाला गया था, जिसका शीर्षक था 'सीरिया में मौजूद अरबी लोगों की तरफ़ से.'
इसराइल ने पहले उनकी फांसी की सज़ा माफ़ करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया लेकिन सीरिया नहीं माना. कोहेन की मौत के बाद इसराइल ने उनका शव और अवशेष लौटाने की कई बार गुहार लगाई लेकिन सीरिया ने हर बार इनकार किया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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