क़तर में गिरफ़्तार पूर्व भारतीय नौसैनिकों की मुश्किलें और बढ़ीं, बुधवार अहम

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- Author, शकील अख्तर
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी
क़तर में कथित जासूसी के आरोप में गिरफ़्तार आठ भारतीय नागरिकों के मामले में अब अगली सुनवाई बुधवार, तीन मई को होगी. गिरफ़्तार किए गए आठ भारतीय नागरिक नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं.
ज़ाहिरा अल आलमी नाम की सुरक्षा कंपनी में काम करने वाले इन कर्मचारियों के परिजनों को हाल ही में इनसे मिलने की इजाज़त भी दी गई थी.
वहीं कंपनी ने गिरफ़्तार किए गए इन कर्मचारियों के परिजनों के हवाई टिकट और क़तर में रुकने की व्यवस्था भी की थी.
ये कंपनी दोहा में अपनी सभी सेवाएं 31 मई से बंद करने जा रही है और सभी भारतीय कर्मचारियों को बता दिया गया है कि उनकी नौकरी ख़त्म कर दी जाएगी.
रिपोर्टों के मुताबिक़, दोहा स्थित ज़ाहिरा अल आलमी ने अपने सभी भारतीय कर्मचारियों से कहा है कि वो इस्तीफ़ा दे दें.
कंपनी में भारतीय नागरिकता रखने वाले कर्मचारियों की संख्या 75 है. इनमें से अधिकांश भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं.
कांट्रेक्ट के मुताबिक़, इन कर्मचारियों की नौकरी साल 2029 तक थी. लेकिन अब सभी से कहा गया है कि 31 मई 2023 को उनकी नौकरी समाप्त हो जाएगी.
जासूसी के आरोप में गिरफ़्तार आठ कर्मचारियों को पहले ही बर्ख़ास्त कर दिया गया है और उनके वेतन का हिसाब-किताब भी कर दिया गया है.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, गिरफ़्तार किए गए कर्मचारियों ने संवेदनशील जानकारी इसराइल को दी थी.
क़तर में जासूसी के आरोप अगर तय होते हैं तो गिरफ़्तार किए गए इन कर्मचारियों को फांसी तक की सज़ा दी जा सकती है.
द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 'एडवांस्ड सर्विसेज़ एंड मेंटेनेंस' नाम की एक कंपनी ज़ाहिरा अल आलमी की इमारतों, ठेकों और भारतीय कर्मचारियों समेत सभी संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले रही है.
क़तर की एएसएम कही जाने वाली इस कंपनी की बागडोर दो फ़्रांसीसी अधिकारियों के हाथ में है. इस कंपनी में ब्रितानी, फ्रेंच और ओमानी नागरिक कर्मचारी हैं जो अब क़तर की नोसेना को प्रशिक्षण देंगे.

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क्या हैं आरोप?
सितंबर 2022 में क़तर सरकार ने 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों को गिरफ़्तार किया था. मार्च में इन पर जासूसी के आरोप तय किए गए थे. हालांकि क़तर सरकार ने भारत सरकार को इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी है. ना ही अभी तक इन अधिकारियों पर लगे आरोपों की पुष्टि की गई है.
ये माना जा रहा है कि बुधवार को सुनवाई से पहले क़तर भारतीय अधिकारियों के रिश्तेदारों को उन पर लगे आरोपों के बारे में अधिक जानकारी दे सकता है.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, कंपनी के प्रमुख खमीस अल अजामी और गिरफ़्तार किए गए 8 भारतीयों के ख़िलाफ़ कुछ आरोप सामान्य हैं जबकि कुछ ख़ास क़िस्म के हैं.
गिरफ़्तार भारतीय अधिकारियों के रिश्तेदारों ने इन आरोपों का खंडन किया है.
ख़मीस अल अज़ामी ओमान की रॉयल एयर फ़ोर्स से सेवानिवृत्त स्वॉड्रन लीडर हैं. उन्हें सितंबर में भारतीय अधिकारियों के साथ गिरफ़्तार किया गया था, लेकिन बाद में नवंबर में रिहा कर दिया गया था.
भारतीय मीडिया और अन्य ग्लोबल मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़, इन पूर्व नौसैनिकों पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर अति उन्नत इतालवी पनडुब्बी को ख़रीदने से संबंधित क़तर के ख़ुफ़िया कार्यक्रम के बारे में इसराइल को जानकारी दी थी. यानी इन नौसैनिकों पर इसराइल के लिए जासूसी करने के आरोप भी लगाए जा सकते हैं.
क़तर की ख़ुफ़िया एजेंसी का दावा है कि उसके पास इस कथित जासूसी के बारे में इलेक्ट्रॉनिक सबूत मौजूद हैं.

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क्या कर रही है भारत सरकार?
क़तर की निजी सुरक्षा कंपनी ज़ाहिरा अल आलमी के लिए काम करने वाले भारतीय नौसेना के ये पूर्व अधिकारी क़तर की नौसेना को कई तरह के प्रशिक्षण देते थे. इन्हें भारत और क़तर के बीच एक समझौते के तहत नियुक्त किया गया था.
भारत सरकार इस मामले में बहुत सावधानी से कार्रवाई कर रही है. पिछले सप्ताह जब भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से इस संबंध में सवाल किया गया था तो उन्होंने कहा था कि सरकार इस मुद्दे को बहुत महत्व दे रही है.
अरिंदम बागची ने कहा था कि सरकार संबंधित अधिकारियों के परिजनों के संपर्क में है. जब इस मामले में क़ानूनी प्रक्रिया शुरू होगी तो सरकार इस पर पैनी नज़र रखेगी.
पिछले साल सितंबर में जब भारतीय अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया था तब उनके परिजनों ने सोशल मीडिया पर उनकी रिहाई के लिए अभियान भी चलाया था. लेकिन धीरे-धीरे उनके लिए उठने वाली आवाज़ें ख़ामोश हो गईं.

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विपक्ष ने की प्रधानमंत्री की आलोचना?
पिछले सप्ताह जब भारतीय मीडिया में इन गिरफ़्तार अधिकारियों पर लगे आरोपों के बारे में जानकारी प्रकाशित हुई और कयास लगाया गया कि उन्हें मौत की सज़ा सुनाई जा सकती है तो भारत में विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर क़तर में गिरफ़्तार भारतीय नाविकों के मामले में दख़ल न देने के आरोप लगाए.
खड़गे ने ट्विटर पर लिखा, "भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को क़तर में अगस्त 2022 से क़ैद में रखा गया और वो मौत की संभावित सज़ा का सामना कर रहे हैं. विदेश मंत्रालय कहता है कि क़तर ने आरोपों के बारे में भारत को जानकारी नहीं दी है."
खड़गे ने लिखा, "मोदी सरकार ने ख़ामोशी से आत्मसमर्पण कर दिया है. इससे भारत को विश्वगुरु बनाने के उनके दावों की भी हवा निकल गई है."

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क्या करती है ज़ाहिरा अल आलमी?
कंपनी की वेबसाइट पर उसे क़तर के रक्षा मंत्रालय, सुरक्षा और दूसरी सरकारी एजेंसियों का स्थानीय व्यापारिक पार्टनर बताया गया है.
कंपनी ने ख़ुद को रक्षा उपकरणों को चलाने और उनकी मरम्मत और देखभाल करने का विशेषज्ञ बताया है.
इस वेबसाइट पर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों और उनके पद की पूरी जानकारी दी गई है.
उनमें कई भारतीय भी शामिल हैं.
कंपनी के लिंक्डइन पेज पर लिखा है, "यह रक्षा उपकरणों को चलाने और लोगों को प्रशिक्षण देने के मामले में क़तर में सबसे आगे है."
आगे लिखा है, "अल ज़ाहिरा कंपनी सुरक्षा और ऐरोस्पेस के मामले में क़तर में विशेष हैसियत रखती है."
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