वसुंधरा राजे सिंधिया को बीजेपी क्या किनारे कर रही है?

वसुंधरा राजे

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    • Author, मोहर सिंह मीणा
    • पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए

राजस्थान विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी ने हाल ही में दो समितियां गठित की हैं. इन दोनों समितियों में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम नहीं होने से उनके समर्थकों में नाराज़गी है.

बीजेपी में चुनाव समितियों का बड़ा महत्व माना जाता है.

इसलिए दोनों समितियों में वसुंधरा राजे का नाम नहीं होने से फिर एक बार बीजेपी में उनकी अहमियत को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

हालांकि, बीजेपी का कहना है कि वसुंधरा राजे बीजेपी की बड़ी नेता हैं. वे चुनावों में प्रचार-प्रसार करेंगी.

इस पूरे मामले में अब तक वसुंधरा राजे की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

दूसरी तरफ़ कांग्रेस ने राजस्थान में नाराज़ चल रहे सचिन पायलट को कांग्रेस वर्किंग कमिटी में शामिल कर लिया है. रविवार को कांग्रेस वर्किंग कमिटी की जो लिस्ट आई उसमें सचिन पायलट का भी नाम है.

जहाँ कांग्रेस सचिन पायलट को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है, वहीं बीजेपी में वसुंधरा राज्य निर्णायक भूमिका में नहीं दिख रही हैं.

बीजेपी पहली बार राजस्थान में कैंपेनिंग कमिटी की घोषणा भी करने वाली है. चुनावों में बीजेपी की कैंपेनिंग कमिटी को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

ऐसे में वसुंधरा राजे की भूमिका को लेकर सबकी निगाहें अब कैंपेनिंग कमिटी की घोषणा पर टिकी हुई हैं.

17 अगस्त के दिन जयपुर में बीजपी ने कोर कमिटी की बैठक बुलाई थी. लेकिन, इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शामिल नहीं हुईं.

इस बैठक से पहले बीजेपी ने आगामी राजस्थान विधानसभा चुनाव के दो समितियों की घोषणा की.

प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति और प्रदेश संकल्प पत्र समिति. इन दोनों ही समितियों से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम नहीं है.

वसुंधरा राजे सिंधिया और अमित शाह

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वसुंधरा राजे के नाम की चर्चा

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इन समितियों की घोषणा पर राजनीति विश्लेषक, मिलाप चंद डांडी बीबीसी से कहते हैं, “राजनीतिक घोषणाओं के सभी अपने-अपने मतलब निकाल लेते हैं.

लेकिन, अभी से कैसे मान लिया जाए कि जिन तीन-चार नेताओं को दोनों कमिटियों में शामिल नहीं किया गया है, उन्हें कोई महत्व नहीं दिया जाएगा. या इन्हें साइड लाइन कर दिया गया है.”

“ऐसा तो हो नहीं सकता है कि इनको साइडलाइन कर दिया जाए.”

वरिष्ठ पत्रकार आनंद चौधरी मानते हैं कि आगामी कमिटियों में भी वसुंधरा राजे को कमान मिलती नज़र नहीं आ रही है.

वह कहते हैं, “कई और कमिटियां बनेंगी तो संभव है कि उसमें इन नामों को शामिल किया जाएगा. लेकिन, लगता नहीं कि चुनाव प्रचार अभियान कमिटी की कमान वसुंधरा राजे को मिल पाएगी. क्योंकि इस कमिटी में देशभर के नाम होते हैं.”

अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास बीबीसी से कहते हैं, “कौन कहता है कि बीजेपी वसुंधरा राजे को चेहरा बना देगी तो कांग्रेस को नुकसान होगा. पिछले चुनाव में बीजेपी को बुरी तरह हराया है.”

“इस बार भी वसुंधरा राजे को चेहरा बनेंगी तो भी बीजेपी हारेगी. इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है कि बीजेपी किसे चेहरा बनाती है.”

बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष डॉ सतीष पूनियां का कहना है, “इन समितियों में नए लोगों और ऑफिस वर्किंग करने वाले लोगों को रखा जाता है, जिनका राजनीतिक रूप से ज़्यादा कोई रोल नहीं होता है. जहाँ इनको पेपर वर्किंग, प्लानिंग समेत बैकअप के लिए यह होती है. इसमें अगर हम लोग शामिल हो जाएं तो अन्य काम कौन करेगा.”

वह कहते हैं, “वसुंधरा राजे का क़द बहुत बड़ा है तो वह इन समितियों में थोड़े ही आएंगी. अभी कैंडिडेट्स के सिलेक्शन के लिए कमिटी बनेगी. यह जो कमिटियां बनी हैं, यह इतनी महत्वपूर्ण कमिटी भी नहीं हैं कि जिनको कहा जाए कि इन नेताओं को क्यों नहीं लिया है.”

समितियों की घोषणा के बाद बीजेपी के प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने जयपुर में कहा कि, “वसुंधरा हमारी सम्मानित लीडर हैं, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और वह प्रचार-प्रसार करेंगी.”

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और वसुंधरा राजे

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इमेज कैप्शन, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और वसुंधरा राजे

दो समितियों में कौन-कौन

बीजेपी ने प्रदेश संकल्प पत्र समिति का संयोजक बीकानेर से सांसद और केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को सौंपी है.

राजस्थान में अर्जुनराम मेघवाल बीजेपी के बड़े दलित चेहरा हैं.

राजनीति में आने से पहले वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं.

संकल्प पत्र समिति में राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी और राज्यसभा सांसद डॉ किरोड़ी लाल मीणा हैं.

ये दोनों ही नेता एक समय पर वसुंधरा राजे के धुर विरोध रहे हैं. संकल्प पत्र समिति में छह सह संयोजक और 17 सदस्य समेत कुल 25 नेता शामिल हैं.

प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक नारायण पंचारिया को बनाया गया है.

पंचारिया बीजेपी से पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष और सांसद रहे हैं. वे केंद्रीय नेतृत्व के क़रीबी माने जाते हैं.

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जयपुर ग्रामीण सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौर समेत छह सह संयोजक और 14 सदस्यों समेत 21 नेताओं को समिति में शामिल किया गया है.

वसुंधरा राजे

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क्या वसुंधरा की अहमियत कम हो रही है?

वसुंधरा राजे के चेहरे पर 2018 में राजस्थान विधानसभा चुवाव में बीजेपी सत्ता से बाहर हो गई थी.

इसके बाद से ही दिल्ली के बीच उनके मतभेद देखने को मिले हैं. चर्चाएं रहीं कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व वसुंधरा राजे को महत्व नहीं दे रहा है.

इस बार इसलिए भी सवाल उठाए जा रहे हैं क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे का चुनावों के लिए बनाई गईं सभी समितियों में नाम था.

तब चुनाव प्रबंधन समिति में भी वसुंधरा राजे शामिल रहीं थीं लेकिन इस बार उनका नाम नहीं है.

आनंद चौधरी भी मानते हैं कि वसुंधरा राजे का महत्व बीजेपी में कम हो रहा है.

वह कहते हैं, “वसुंधरा राजे का पिछले चुनावों में जो क़द था, वो इस बार नहीं रहा है. इसका अब कारण दिल्ली से राज्यों का चुनाव संचालन हो सकता है."

"चुनाव में प्रत्याशियों के चयन से लेकर चुनावी रणनीति तक सभी फ़ैसलों पर दिल्ली की पकड़ मज़बूत हो गई है. इसके बाद से ऐसा देखा नहीं गया कि वसुंधरा राजे को कोई बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी गई हो.”

उन्होंने यह भी कहा, “वसुंधरा राजे ज़रूर यह प्रयास कर रहीं थीं कि उनका नाम घोषित हो जाए. वसुंधरा समर्थक चाहते हैं कि उनको राजस्थान सीएम का चेहरा बनाया जाए."

"जहां पार्टी के केंद्रीय नेता पूरी कमान अपने हाथों रखते हैं, वहाँ एसा नहीं देखा जाता है. अरूण सिंह लगातार आ रहे हैं, अध्यक्ष जेपी नड्डा कई बार आए हैं, अमित शाह और ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई दौरे कर चुके हैं.”

कैंपेनिंग कमिटी पर निगाहें

बीजेपी में सबसे महत्वपूर्ण कैंपेन कमिटी मानी जाती है. इस कमिटी का चेहरा चुनावों का चेहरा माना जाता है और इसलिए सब की निगाहें कैंपेन कमिटी पर टिकी हैं.

राजस्थान में पहली बार कैंपेन कमिटी की घोषणा होने जा रही है.

माना जा रहा है कि कैंपेन कमिटी में वसुंधरा राजे को शामिल किया जा सकता है. अगर नहीं किया जाएगा तो बीजेपी आलाकमान का यह सीधा संदेश होगा कि वसुंधरा राजे को दरकिनार करके चुनावों में जा रहे हैं.

पहली बार साल 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान कैंपेनिंग कमिटी बनाई गई थी, जिसका अध्यक्ष नरेंद्र मोदी को बनाया गया था. इसलिए माना जाता है कि कैंपेनिंग कमिटी का चेहरा ही आगामी चुनाव का चेहरा होगा.

राजनीतिक पत्रकार हेमंत कुमार बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, “वसुंधरा राजे और उनके खेमे की ओर से इसको लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं है. लेकिन, अंदरखाने यह चर्चाएं हैं कि अगर वसुंधरा राजे को कैंपेनिंग कमिटी में महत्वपूर्ण भूमिका नहीं दी जाती है तो आगामी दिनों में अपनी रणनीति का एलान करेंगी.”

आनंद चौधरी कहते हैं, “इस कमिटी में कहा जा रहा है कि वसुंधरा राजे को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, लेकिन इन कमिटी में वसुंधरा राजे के अलावा भी जिन्हें राजस्थान से बड़े नेता मानते हैं, वह इस कमिटी में नहीं है. अभी कई और कमेटियों की घोषणा बाक़ी है, नज़रअंदाज़ की बात कहना जल्दबाज़ी है.”

डॉ सतीष पूनियां कहते हैं, “कॉन्सिट्यूशनल तो इलेक्शन कमिटी (चुनाव समिति) होती है, जिसका चेयरमैन प्रदेश अध्यक्ष होता है, उसमें सारे सीनियर लीडर होते हैं. टिकटों का पैनल समिति से ही बनाकर भेजा जाता है, तय तो पार्लियामेंट्री बोर्ड करता है.”

डॉ. सतीष पूनियां दावा करते हैं, वसुंधरा राजे समेत सभी सीनियर लीडर कैंपेनिंग कमिटी में शामिल होंगे. वे कहते हैं, “हमारे यहाँ पहली बार चुनाव अभियान समिति बनाई जा रही है. पहले मध्य प्रदेश में बनाई गई थी.”

“इलेक्शन कमिटी की तर्ज़ पर ही है. इसमें सीनियर लीडर होते हैं, इस समिति में वसुंधरा राजे, राजेंद्र राठौड़, गजेंद्र सिंह शेखावत, हम सभी रहेंगे उसमें.”

मोदी के साथ वसुंधरा राजे

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पीएम नरेंद्र मोदी बनाम सीएम अशोक गहलोत

राजस्थान विभानसभा चुनाव से पहले बीजेपी प्रदेश स्तर पर एक बड़ी यात्रा निकालती रही है.

पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष डॉ सतीष पूनियां कहते हैं कि पहले एक यात्रा होती थी, लेकिन इस बार चार होंगी. उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम से निकाली जाएंगी.

टीवी पत्रकार हेमंत कुमार कहते हैं, “बीजेपी राजस्थान में परिवर्तन यात्रा निकाल रही है, तो माना जा रहा है कि बीजपी परिवर्तन यात्रा में वसुंधरा राजे को महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी दे सकती है. हालांकि, इस बार परिवर्तन यात्रा एक चेहरे पर नहीं बल्कि चार दिशाओं से चार चेहरों पर टिकी होगी.”

वे कहते हैं, “ऐसे में यह भी क़यास लगाए जा रहे हैं कि इस बार यह यात्रा सिर्फ़ वसुंधरा राजे को साइडलाइन करने के लिए किया गया है.”

राजनीतिक विश्लेषक मिलाप चंद डांडी कहते हैं, “राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ही चेहरे पर ही चुनाव लड़ा जाएगा. मुझे नहीं लगता कि वसुंधरा राजे का चेहरा सामने किया जाएगा. क्योंकि उन पर गहलोत से मिले होने के आरोप हैं."

"अभी तक तो एसा लग रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव मोदी बनाम गहलोत होगा.”

कांग्रेस प्रवक्ता और प्रदेश संगठन महासचिव आरसी चौधरी कहते हैं, “बीजेपी के पास न मुद्दे हैं और न काम है. राजस्थान बीजेपी में अंदरूनी पॉलिटिक्स है, वहां अंदरूनी लड़ाई है.”

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