मध्य पूर्व में जंग शुरू होने के बाद एक भारतीय की कैसे हुई मौत और वो कौन थे?

- Author, अल्पेश करकरे
- पदनाम, बीबीसी मराठी के लिए
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू किए थे. उसके बाद मध्य-पूर्व इलाक़े में लगातार जंग जारी है और इसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है.
अमेरिका-ईरान युद्ध में मारे गए शख़्स का नाम दीक्षित सोलंकी था. 32 साल के दीक्षित मूलरूप से दीव के रहने वाले थे, लेकिन उनका परिवार अभी मुंबई के कांदिवली में रहता है.
दीक्षित के पिता अमृतलाल ने बीबीसी को बताया कि दीक्षित एमकेडी व्योम नामक एक तेल टैंकर पर ऑयलर नाविक के रूप में काम कर रहे थे, जो खनिज तेल ले जाता था.
उनका कहना है, "युद्ध में हमने अपना बेटा खो दिया, हमारा जीवन बर्बाद हो गया. अब हम कैसे जी सकते हैं? हम अपने बेटे के शव के आने का इंतज़ार कर रहे हैं, ताकि उसे अंतिम विदाई दे सकें."
1 मार्च की सुबह, ओमान की खाड़ी से गुज़रते समय एमकेडी व्योम पर हमला हुआ और उसमें आग लग गई. इस घटना में दीक्षित की मृत्यु हो गई.
हालांकि, ख़बर लिखे जाने तक घटना के पांच दिन गुज़रने के बाद भी दीक्षित का शव भारत नहीं लाया गया है.
सोलंकी परिवार और नाविक संघ ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ संबंधित कंपनी ने भी अभी तक परिवार से संपर्क नहीं किया है.
दीक्षित के जहाज़ के साथ क्या हुआ था?

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, लंदन स्थित मुख्यालय वाली व्ही शिप्स नामक कंपनी एमकेडी व्योम टैंकर का प्रबंधन करती है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने 1 मार्च को व्ही शिप्स से जुड़ी एक घटना का हवाला देते हुए बताया कि ओमान के मस्कट तट के पास जहाज़ पर हमला हुआ था, जिसमें उसके भारतीय चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई थी.
रॉयटर्स के मुताबिक़ व्ही शिप्स ने एक बयान में बताया, "1 मार्च को, जब जहाज़ मस्कट के तट के पास था, तब उस पर एक संदिग्ध मिसाइल से हमला हुआ, जिससे विस्फोट हुआ और बाद में आग लग गई. हमें यह बताते हुए गहरा दुख हो रहा है कि घटना के समय इंजन रूम में मौजूद एक चालक दल के सदस्य की मृत्यु हो गई है."
दीक्षित सोलंकी पिछले छह वर्षों से ऑयलर के रूप में काम कर रहे थे.
उनका जन्म 1994 में दीव में हुआ था. हालांकि, पिछले सात वर्षों से वो मुंबई के कांदिवली पश्चिम स्थित महावीर नगर में रह रहे थे.
उनके परिवार में उनके पिता अमृतलाल और 28 साल की एक बहन हैं. बहन दुबई में काम करती हैं. उनकी मां का निधन चार महीने पहले हो गया था.
दीक्षित ने दीव और मुंबई में 12वीं तक विज्ञान की शिक्षा प्राप्त की. उसके बाद, उन्होंने जीपी रेटिंग और एसटीसीडब्ल्यू कोर्स की पढ़ाई पूरी की.
उनके पिता ने बताया कि वह पिछले छह वर्षों से विभिन्न कंपनियों में तेल टैंकर नाविक के रूप में काम कर रहे थे.
दीक्षित के पिता भी पिछले 20 वर्षों से इसी क्षेत्र में फिटर के रूप में काम कर रहे थे.
दीक्षित पिछले चार महीनों से उसी कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं, जहाँ उनके पिता काम करते थे.
अपनी मौजूदा ड्यूटी पर वो पिछले साल 10 दिसंबर को गए थे.उन्हें 10 सितंबर 2026 को भारत लौटना था.
पिता ने शव सौंपने और विस्तृत रिपोर्ट की मांग की

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बीबीसी मराठी से बात करते हुए दीक्षित के पिता अमृतलाल ने कहा, "कंपनी के कुछ लोग एक दिन हमारे घर आए और हमें इस घटना के बारे में बताया. हम यह सुनकर स्तब्ध रह गए."
अमृतलाल ने कहा, "हमने उसे बड़े प्यार से पाला-पोसा और हमारा जीवन बहुत अच्छा चल रहा था. इस घटना ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है. उनका (पत्नी) देहांत चार महीने पहले हो गया था. अब बेटे की मृत्यु से हम अकेले हो गए हैं. हमें किसी भी तरह अपने बेटे का शव चाहिए. हम अंतिम दर्शन करना चाहते हैं और सभी रस्में पूरी करना चाहते हैं."
उन्होंने आगे कहा, "हम संबंधित कंपनी और यात्रा में शामिल नाविकों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा है. केंद्र और राज्य सरकारों ने भी कोई जांच नहीं की है. हम मांग करते हैं कि शव हमें जल्द से जल्द सौंपा जाए और घटना कैसे हुई और मृत्यु कैसे हुई, इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट दी जाए."
'हम दीक्षित की शादी करवाना चाहते थे'
दीक्षित की चाची शर्मिलाबेन दीव में रहती हैं. बीबीसी गुजराती से बात करते हुए उन्होंने कहा कि दीक्षित पिछले चार महीनों से लगातार ड्यूटी पर थे.
शर्मिलाबेन ने कहा, "दीक्षित अपनी माँ के देहांत के बाद घर आए थे. सभी रस्में पूरी होने और छुट्टी ख़त्म होने के बाद वह काम पर वापस चले गए."
"उसके बाद, वह लगभग चार महीने तक घर नहीं आए. अब वह बड़े हो गए थे. हम उनकी शादी करवाने की सोच रहे थे. लेकिन तक़दीर को कुछ और ही मंज़ूर था. दस दिन पहले उनसे फ़ोन पर हमारी बातचीत हुई थी."
दीक्षित ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और अपने पिता और चाचा के नक्शेकदम पर चलते हुए लगभग छह साल पहले मर्चेंट नेवी में नौकरी शुरू की.
भारत सरकार ने क्या कहा?

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ओमान की राजधानी मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने भी ओमान में हुई घटना में एक भारतीय नाविक की मौत की पुष्टि की, लेकिन दीक्षित का नाम नहीं बताया.
भारतीय दूतावास ने 2 मार्च को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "भारतीय दूतावास एमकेडी व्योम के एक भारतीय नागरिक की दुखद मृत्यु पर गहरी संवेदना व्यक्त करता है."
"दूतावास ओमान में स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि उस जहाज़ पर सवार हमारे नागरिकों की सुरक्षित और शीघ्र वापसी सुनिश्चित की जा सके."
5 मार्च, गुरुवार की शाम तक दीक्षित का शव परिवार को नहीं सौंपा गया था.
जहाज़ के कर्मचारियों की क्या प्रतिक्रिया थी?
1 मार्च, 2026 को ओमान के मस्कट तट से दूर एक संदिग्ध हमले के कारण एमकेडी व्योम में विस्फोट हुआ और आग लग गई.
जहाज़ का प्रबंधन करने वाली कंपनी व्ही शिप्स एशिया ने घटना के बारे में जानकारी मुहैया कराई.
कंपनी का कहना है, "सभी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित रूप से उनके देशों में वापस भेज दिया गया है और वे अब अपने परिवारों के साथ हैं. कंपनी मृत चालक दल के सदस्य के परिवार को पूरा सहयोग कर रही है और उनके साथ निरंतर संपर्क में है."
व्ही शिप्स एशिया ने यह भी कहा कि जहाज़ को एक सुरक्षित और स्थिर स्थान पर ले जाने के लिए टोइंग ऑपरेशन चल रहे हैं, जहां इसका निरीक्षण किया जाएगा और ज़रूरी मरम्मत की जाएगी.
खाड़ी देशों में फंसे हैं हज़ारों नाविक

नाविक संघ ने कहा है कि हज़ारों नाविक इस समय खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं. उन्हें भारत वापस लाने और उनकी मदद करने के प्रयास किए जाने चाहिए.
सेलर्स यूनियन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष आर पी वीट्टील ने बीबीसी मराठी से बात करते हुए कहा, "यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. शिपिंग कंपनी को इस घटना के संबंध में उचित जानकारी के साथ परिवार से तुरंत संपर्क बनाना चाहिए. लेकिन इस घटना में समन्वय की कमी है और कंपनी ने परिवार को उचित जानकारी नहीं दी है."
"घटना के बाद कंपनी को तुरंत ही परिवार को शव सौंपने के लिए क़दम उठाने चाहिए. साथ ही परिवार को नियमों के अनुसार सहायता मिलनी चाहिए."
वीट्टील ने कहा, "हम केंद्र सरकार और राज्य सरकार से अनुरोध करते हैं कि वे खाड़ी देशों में फंसे हज़ारों नाविकों को भारत वापस लाने और उनकी मदद करने के प्रयास करें."
वो बताते हैं, "हमारी जानकारी के अनुसार क़रीब 1500 शिप्स इन खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. हम केंद्र सरकार और संबंधित प्रशासन से यह भी अनुरोध करते हैं कि वे यह देखें कि उन्हें उचित भोजन और सहायता मिल रही है या नहीं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















