ग़ज़ा युद्ध संकट के बीच मध्य पूर्व के लिए अमेरिका का एक 'असंभव लक्ष्य'

ब्लिंकन और नेतन्याहू

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    • Author, टॉम बेटमैन, विदेश मंत्रालय संवाददाता
    • पदनाम, अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ यात्रा करते हुए

एक सुरक्षाकर्मी ने एंटनी ब्लिंकन की बख़्तरबंद गाड़ी का दरवाज़ा ज़ोर से खोला और अमेरिकी विदेश मंत्री कतार में लगे पीले बैरिकेड्स से बाहर निकले.

तेल अवीव में हमास की ओर से अगवा किए गए बंधकों की रिहाई की मांग कर रहे इसराइली प्रदर्शनकारियों के हाथों को थाम कर उन्होंने एलान किया, “उन्हें वापस घर लाने के लिए हम काम कर रहे हैं.”

यह अनोखा पल था लेकिन पूरी तरह से सहज नहीं था.

सुरक्षा अधिकारी प्रदर्शनकारियों तक जाने का रास्ते बना रहे थे और सुरक्षा बहुत कड़ी थी.

हम पत्रकारों की गाड़ी में सवार थे और हमें बताया गया था कि अगले 20 मिनटों में मुलाक़ात की उम्मीद है. आखिरकार यह दृश्य कैमरे में क़ैद हुआ.

इसराइली जनता और इसके प्रधानमंत्री को अमेरिका के शीर्ष राजनयिक की ओर से ये मजबूत संदेश था कि बंधकों की रिहाई के बदले संघर्ष विराम कराने के लिए अमेरिका प्रतिबद्ध है, वार्ता में शामिल है और हर संभव कोशिश कर रहा है.

दूसरे शब्दों में संदेश यह है कि अमेरिका जंग को रोकने की कोशिश कर रहा है, हालांकि कुछ कड़ी शर्तों के साथ.

ग़ज़ा में जारी अभूतपूर्व संकट और नागरिकों की मौतों के पहाड़ जैसे बढ़ते आंकड़ों से अमेरिका पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ रहा है.

ग़ज़ा में अधिक मानवीय सहायता भेजने के मामले में राष्ट्रपति जो बाइडन और ब्लिंकन ने हफ़्तों बिता दिए.

अब वो सार्वजनिक रूप से इसराइल पर दबाव बढ़ा रहे हैं और इलाक़े के भविष्य को लेकर एक योजना विकसित करना चाहते हैं.

लेकिन जैसे-जैसे संकट गहरा होता जा रहा है, अमेरिकी प्रभाव की सीमा और स्पष्ट होती जा रही है.

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इसराइल को चेतावनी

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बैरिकेड के पास जब यह घटना कैमरे में कैद हो रही थी, उससे कुछ घंटे पहले ही अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपने सहयोगी की कार्रवाईयों को आकार देने की कोशिश की.

यह राष्ट्रपति बाइडन की बढ़ती हताशा का संकेत था. अमेरिका की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव में इसराइल से ग़जा में अधिक सहायता सामग्री को प्रवेश करने देने का अपील की गई थी. संयुक्त राष्ट्र ने ग़ज़ा में अकाल की चेतावनी दी है.

प्रस्ताव में बंधकों की रिहाई के बदले युद्ध विराम के लिए क़तर की मध्यस्थता की मौजूदा कोशिशों का समर्थन किया गया था.

लेकिन साथ ही 14 लाख से अधिक लोगों की आबादी वाले रफ़ाह शहर पर सैन्य कार्रवाई करने के ख़िलाफ़ इसराइल को चेतावनी भी दी गई थी और कहा कहा गया कि ये हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का उल्लंघन हो सकता है.

हालांकि यह प्रस्ताव गिर गया. रूस और चीन ने इस पर वीटो कर दिया.

शुक्रवार को बेन गुरियन एयरपोर्ट पर बात करते हुए ब्लिंकन ने इसके ख़िलाफ़ वोट करने वालों की आलोचना की.

उन्होंने कहा कि ऐसा करने के पीछे कोई वाजिब कारण नहीं था, जबकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि रफ़ाह पर हमले से इसराइल को मिलने वाला अंतरराष्ट्रीय समर्थन ख़त्म हो सकता है.

उन्होंने कहा, "इससे और अधिक नागरिकों के मारे जाने का ख़तरा है, इससे मानवीय सहायता पर विनाशकारी असर होने का जोखिम है और पूरी दुनिया में इसराइल और अलग थलग पड़ जाएगा और इसकी दीर्घकालिक सुरक्षा और भी मुश्किल में पड़ जाएगी."

अमेरिका और इसराइली नेता के बीच बढ़ती दरार के बीच नेतन्याहू ने ब्लिंकन के बयान पर पलटवार किया है.

उन्होंने कहा, "मैंने उनसे कहा था कि हम ये अमेरिका के समर्थन से करेंगे, लेकिन अगर हमें करना पड़ा तो अकेले भी करेंगे."

दबाव के बावजूद एक महाशक्ति को पीछे धकेला जा रहा था.

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‘और अधिक मानवीय सहायता भेजने की ज़रूरत’

मौजूदा संकट का हल निकालने के लिए अलग अलग टाइम ज़ोन में दिन रात यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व में ब्लिंकन के साथ रहते हुए, इस सप्ताह मैंने पर्दे के पीछे अमेरिकी कूटनीति की अभूतपूर्व ताक़त को देखा.

अमेरिकी आलोचकों के लिए विरोधाभास बिल्कुल साफ़ हैः एक तरफ़ अमेरिका अपने इस करीबी सहयोगी को हथियार भेज रहा है जबकि दूसरी तरफ़ बिना किसी सफलता के सैन्य अभियान से नागरिकों को होने वाले कष्ट को कम करने की अपील भी कर रहा है.

इसी हफ़्ते संयुक्त राष्ट्र ने खाद्य सुरक्षा को लेकर कहा कि ग़ज़ा में 11 लाख लोग विनाशकारी भूख और भुखमरी से जूझ रहे हैं. इसके साथ ही चेतावनी दी कि ग़ज़ा में अब से लेकर मई तक मानव निर्मित अकाल है.

अमेरिका में अब और अधिक राजनेता इसको लेकर बोलने लगे हैं.

इसी हफ़्ते डेमोक्रेटिक सीनेटरों का एक समूह और अमेरिका के लगभग 70 पूर्व अधिकारियों, राजनयिकों और सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति से अपील की.

इसमें कहा गया कि इसराइल ग़ज़ा में अगर मानवीय सहायता जाने से रोकना जारी रखता है तो उसे हथियारों की आपूर्ति में कटौती करने पर राष्ट्रपति को विचार करना चाहिए.

आपूर्ति वितरण की असफलता के लिए इसराइल संयुक्त राष्ट्र पर आरोप लगाता है. संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट तौर पर इसको ख़ारिज किया है लेकिन इसराइल अड़ा है कि चेक प्वाइंट पर पाबंदियां और काफ़िलों की सुरक्षा में लगी पुलिस पर हमले, हमास को ख़त्म करने के उसके अभियान का अहम हिस्सा है.

मनीला में मैंने ब्लिंकन से पूछा कि ग़ज़ा में सुरक्षा का ये शून्य कहीं ग़ज़ा का भविष्य तो नहीं.

वो अपने प्रस्तावों को स्वीकार करने के लिए इसराइल को कैसे मना सकते हैं?

उन्होंने कहा कि हमास इस मानवीय संकट को कल ही ख़त्म कर सकता है, अगर वो आत्मसमर्पण कर दे. लेकिन उन्होंने दोहराया कि और अधिक मानवीय सहायता ग़ज़ा में जाने देना होगा.

मेरे सवाल के जवाब में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समर्थित उपाय पर पहली बार अमेरिकी रज़ामंदी देते हुए कहा, "ग़ज़ा की 100 प्रतिशत आबादी भयंकर खाद्य असुरक्षा के गंभीर स्तर पर पहुंच गई है. ऐसा पहली बार है कि पूरी आबादी इस स्थिति में है."

ब्लिंकन

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असंभव लगने वाला अमेरिकी लक्ष्य

हालांकि ब्लिंकन के दौरे का बड़ा हिस्सा संकट सुलझाने की कोशिश के नाम थाः ग़ज़ा में सहायता सामग्री पहुंचाना, बंधकों को छुड़ाना और संघर्ष को ख़त्म करना.

हालांकि अमेरिका का कहना है कि संघर्ष ख़त्म करने के साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि सात अक्टूबर को इसराइल पर हुए हमास के हमले जैसी कार्रवाई फिर दोबारा न हो.

और इसी समय अमेरिका ग़ज़ा के भविष्य को तय करने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका चाहता है कि फ़लस्तीनी प्राधिकरण ग़ज़ा का प्रशासन अपने हाथ में ले.

1990 के दशक में ओस्लो समझौते के बाद प्राधिकरण बना था और 2007 में हमास ने उसे ग़ज़ा छोड़ने पर मजबूर कर दिया था.

अमेरिकी सोचते हैं कि वे मध्य पूर्व के लिए एक बड़ा समझौता करा सकते हैं.

वे वेस्ट बैंक, पूर्व यरूशलम और ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित स्वतंत्र राज्य के मुद्दे को बढ़ाना चाहते हैं, भले ही इसकी खुद की सेना न हो और साथ ही एक सुरक्षित इसराइल भी हो. यानी कथित द्विराष्ट्र सिद्धांत.

ग़ज़ा का पुनः निर्माण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन प्राप्त फ़लस्तीनी प्राधिकरण करेगा, जिसे पैसा मुहैया कराया जाएगा और सऊदी अरब समेत अरब देशों की ओर से प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी दिए जाएंगे.

इसके बदले रियाद इसराइल को मान्यता देगा, जो कि इसराइल लंबे समय से चाहता था जिससे वो इस क्षेत्र से और जुड़ पाएगा.

इसके बदले सऊदी अत्याधुनिक अमेरिकी हथियार, वॉशिंगटन के साथ एक रक्षा समझौता और अमेरिका समर्थित नागरिक परमाणु ऊर्जा प्रोग्राम हासिल कर सकेगा.

यह असंभव रूप से महत्वाकांक्षी लगता है और शायद है भी.

इस क्षेत्र के आधुनिक इतिहास में सबसे भयंकर खून खराबों में से एक जारी है और इस बीच मध्य पूर्व में सबसे काल्पनिक लक्ष्यों को पाने की संभावनाओं के बीच अमेरिकी नासमझ नहीं हैं.

लेकिन जैसा उन्होंने बैरिकेड पर किया, ब्लिंकन सोचते हैं कि इस ओर पहलकदमी लेने के लिए वो संकट के क्षण का इस्तेमाल कर सकते हैं.

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