इसराइल-ग़ज़ा युद्ध: राहत सामग्री का इंतज़ार कर रहे 'फ़लस्तीनियों पर चली गोलियां, 100 से ज्यादा की मौत'

सोशल मीडिया पर जारी हुआ वीडियो जिसमें शवों को गाड़ियों पर रखा जा रहा है
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    • Author, डेविड ग्रिटेन
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

उत्तरी ग़ज़ा में राहत सामग्री का इंतज़ार कर रहे सौ से ज़्यादा फ़लस्तीनियों के मारे जाने की ख़बर आ रही है.

हमास नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके लिए इसराइली सेना को ज़िम्मेदार ठहराया है.

इसके साथ ही फ़लस्तीनी मीडिया ने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया है कि इसराइली सेना ने भीड़ पर गोलियां चलाई हैं.

वहीं, इसराइली सेना के एक सूत्र ने बताया है कि सैनिकों को लगा कि उनकी जान जोख़िम में है, इसलिए गोलियां चलाई गईं.

इसराइली सेना ने जारी किया संदेश

इसराइली सैनिक

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इमेज कैप्शन, ग़ज़ा पट्टी से लौटता हुआ एक इसराइली सैनिक

हालांकि, इसराइली सेना की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि ट्रकों से कुचले जाने की वजह से दर्जनों लोगों की मौत हुई है.

ग़ज़ा शहर में मौजूद एक पत्रकार ने बीबीसी को बताया है कि लोग मदद सामग्री लेने के लिए आए थे और इसराइली टैंकों ने उन पर गोलियां चलाना शुरू कर दिया.

लेकिन इसराइली सेना ने कहा है कि उसे इस क्षेत्र में गोलाबारी की कोई ख़बर नहीं मिली है और इस मामले की समीक्षा की जा रही है.

सोशल मीडिया पर जारी एक विचलित करने वाले वीडियो में दिख रहा है कि मृतकों के शवों को राहत सामग्री लेकर आए खाली ट्रकों और गधा गाड़ियों पर रखा जा रहा है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान से पहले

कब्र पर दुआ पढ़ती एक बच्ची

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इमेज कैप्शन, हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि इस युद्ध में तीस हज़ार लोगों की मौत हुई है जिसमें 21000 महिलाएं और बच्चे हैं

ये घटना ग़ज़ा के हमास नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इस युद्ध में मरने वाले कुल लोगों की संख्या जारी करने से कुछ घंटे पहले ही हुई है.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि इस युद्ध में 30,000 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं जिनमें 21,000 बच्चे और महिलाएं शामिल हैं.

कुछ सात हज़ार लोग अभी भी गुमशुदा हैं और पिछले चार महीनों में 70,450 घायलों का इलाज़ किया गया है.

ग़ज़ा में तबाह हुई धार्मिक इमारतें
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संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि उत्तरी ग़ज़ा में भुखमरी फैलने का ख़तरा मंडरा रहा है क्योंकि यहां लगभग तीन लाख लोगों के पास बहुत कम खाने पीने का सामान और साफ पानी बचा है.

इसराइली सेना ने पिछले साल आठ अक्टूबर को ग़ज़ा के संगठन हमास को ख़त्म करने के लिए हवा से लेकर ज़मीन तक व्यापक युद्ध शुरू किया था.

इसराइल और ब्रिटेन समेत कई अन्य मुल्कों ने हमास को एक आतंकवादी संगठन के रूप में घोषित किया हुआ है.

हमास ने पिछले साल 7 अक्टूबर को इसराइल पर अभूतपूर्व हमला करके लगभग 1200 लोगों को मार दिया था और 253 लोगों को अग़वा कर लिया था.

ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अशरफ़ अल-क़ुद्रा ने बताया है कि गुरुवार की सुबह राशिद रोड के नबुलसी चौराहे पर 104 लोगों की मौत हो गई है और 760 लोग घायल हुए हैं.

उन्होंने इसके लिए इसराइली सेना को ज़िम्मेदार ठहराते हुए इसे “नरसंहार” की संज्ञा दी है.

उन्होंने कहा है कि दर्जनों लोग गंभीर रूप से जख़्मी हैं जिन्हें ग़ज़ा सिटी में स्थित नजदीकी अस्पताल अल-शिफ़ा लाया गया है और स्वास्थ्यकर्मी घायलों की ज़्यादा संख्या और उनकी गंभीरता की वजह से दबाव महसूस कर रहे हैं.

उत्तरी कस्बे बेत लाहिया में स्थित कमाल अदवान अस्पताल के निदेशक हुस्साम अबु साफियेह ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि उनके पास पश्चिमी ग़ज़ा सिटी से 10 लोगों के शव आए हैं और दर्जनों घायल लोग आ रहे हैं.

उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता है कि दूसरे अस्पतालों में कितने लोग मौजूद हैं.”

ज़मीन पर बिखरे हैं शव

कमाल अदवान अस्पताल में पहुंचते घायल

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पैरामेडिक फ़ेयर अफ़ाना ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को यह भी बताया कि एंबुलेंस कर्मचारियों को घटनास्थल पर ‘दर्जनों या सैकड़ों’ लोग जमीन पर पड़े हुए मिले थे. 

उन्होंने कहा कि कुछ मृतकों और घायलों को गधा गाड़ियों पर लादकर अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा था, क्योंकि पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस नहीं थीं. 

आधिकारिक फलस्तीनी समाचार एजेंसी वाफ़ा ने मेडिकल सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि इसराइली सैनिकों ने गज़ा शहर और अन्य उत्तरी क्षेत्रों के हजारों लोगों पर तब गोलीबारी की, जब वे नबुलसी चौराहे पर मानवीय सहायता से भरी गाड़ियों के आने का इंतज़ार कर रहे थे. 

इसराइल के ज़मीनी हमले के पहले चरण में उत्तरी गज़ा को मुख्य तौर पर निशाना बनाया गया, जिसके बाद वहां भारी पैमाने पर तबाही हुई है. 

संयुक्त राष्ट्र सहायता एजेंसियों इस इलाके में राहत सामग्री पहुंचाने का प्रयास ज़रूर कर रही हं.

लेकिन कई महीनों से यहां ठीक ढंग से मानवीय सहायता पहुंच नहीं पा रही है. एक तरीके से यह इलाका कटा हुआ है, जिसके चलते लोगों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. 

पिछले हफ़्ते विश्व खाद्य प्रोग्राम ने कहा था कि वह उत्तरी ग़ज़ा में सहायता नहीं भेज पा रहा है और उसे खाने पीने की सप्लाई को निलंबित करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

क्योंकि तीन हफ़्ते में उनकी पहली खेप ग़ज़ा के वाडी चेकप्वाइंट पर भूखे लोगों से घिरी हुई थी और उससे आगे नहीं बढ़ पा रही थी और इसके बाद ग़जा शहर में लोगों को गोलीबारी का सामना करना पड़ा. 

इसके अलावा राहत सामग्री की एक अन्य खेप के साथ भी ऐसा ही हुआ. हालात ये हैं कि मध्य ग़ज़ा में कई राहत सामग्री से भरी गाड़ियों को लूट लिया गया और एक ड्राइवर के साथ मारपीट भी की गई. बहुत मुश्किल से बचे हुए आटे को ग़ज़ा शहर में बांटा गया.

मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी कि ग़ज़ा पट्टी में कम से कम 5 लाख 76 हजार लोग भयावह स्तर पर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं और यह एक चौथाई जनसंख्या अकाल के ख़तरे में है. 

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि उत्तरी ग़ज़ा में हालात ऐसे हैं कि दो साल के कम उम्र के हर छह बच्चों में से एक बच्चा गंभीर रूप से कुपोषण और कमजोरी का शिकार है. 

बुधवार को गज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि उत्तरी ग़ज़ा के अस्पतालों में डिहाइड्रेशन और कुपोषण के चलते छह बच्चों की मौत हो गई है. 

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक दो मौतें अल-शिफा अस्पताल और चार मौतें कमाल अदवान में हुई हैं.

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