इंडोनेशिया जिस सपने को लेकर आगे बढ़ रहा है, उसे कितना पूरा कर पाएगा

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- Author, हन्ना समोसिर और निकी विडाडियो
- पदनाम, बीबीसी इंडोनेशियन, जकार्ता-नुसंतरा
इंडोनेशिया में अधिकांश अधेड़ जोड़े अगर अपना खर्च चलाने के लिए तैयार हैं तो वे रिटायरमेंट के लिए तैयार रहते हैं. लेकिन 55 साल के मुस्मुलियादी और उनकी 50 साल की पत्नी नूरमिस इस ट्रेंड को तोड़ रहे हैं.
वे अभी हाल ही में हज़ारों किलोमीटर दूर इंडोनेशिया की नई राजधानी में रहने आए हैं.
नई राजधानी नुसंतरा औरंगउटानों के बीच एक जंगल में बसाई जा रही है.
मुस्मुलियादी ने बीबीसी इंडोनेशियाई को बताया, "जब तक यहाँ बुनियादी संरचाओं का निर्माण हो रहा है, तब तक यहां काम ढूंढना आसान होना चाहिए."
उनका ठिकना अब नुसंतरा का एक निर्माण स्थल है.
नूरमिस सीमेंट को मिलाने का काम करती हैं तो मुस्मुलियादी टाइल्स बिछाने का काम करते हैं.
उनका सपना इंडोनेशिया का सपना है. मुस्मुलियादी को टिकाऊ नौकरी की तलाश है और इस मेगा परियोजना में छोटा-मोटा ठेकेदार बनने की तमन्ना है.
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो को लोग जोकोवी के नाम से जानते हैं. उन्होंने दो साल पहले नुसंतरा के निर्माण की घोषणा की थी. उसके बाद से व्यापार फल-फूल रहा है.
सरकार का अनुमान है कि 2029 तक यहाँ 20 लाख लोग रहने लगेंगे.
मूलनिवासियों की चिंता

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लेकिन वहां से कई किलोमीटर दूर 51 साल के पांडी और उनकी पत्नी स्याम्सियाह को अपनी ज़मीन से बेदखल कर दिए जाने की चिंता सता रही है.
वे 20,000 मूलनिवासी समुदायों से हैं और उनके पास अपनी ज़मीन का क़ानूनी मालिकाना नहीं है, जहाँ उनका परिवार पीढ़ियों से रह रहा है.
एक सुबह जब पंडी उठे तो पाया कि उनकी ज़मीन बिना किसी पूर्व सूचना के चिह्नित कर दी गई है.
सरकार बाढ़ सुरक्षा के नाम पर उन्हें वहाँ से हटाना चाहती है, लेकिन पंडी इस साल फ़रवरी में अदालत की सहायता से अपनी बेदख़ली रुकवा पाने में कामयाब रहे.
उन्होंने बीबीसी इंडोनेशियाई को बताया, "मैं अपने बच्चों और पोते-पोतियों के भविष्य के लिए यह कर रहा हूँ."
उन्होंने कहा, "अगर मैंने कुछ नहीं किया, तो मेरे बच्चे और पोते-पोतियां सरकार के लिए कूड़ा-करकट की तरह होंगे. हम इसी तरह से अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ते हैं."
यह पंडी के लिए केवल अस्थायी राहत हो सकती है, क्योंकि दूसरे गाँवों में मूलनिवासी समुदायों को पहले ही हटाया जा चुका है. सरकार ने उन्हें उनकी ज़मीन का मुआवजा दिया है, लेकिन ज़मीन की क़ीमत बहुत कम लगाई गई है.
मुस्मुलियादी और पंडी की कहानियां बताती हैं कि कैसे राष्ट्रपति विडोडो की परियोजनाएं अक्सर दोधारी तलवार होती हैं.
दुनिया की पाँच बड़ी अर्थव्यस्थाएं

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अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुताबिक़ विडोडो ने जब 2014 में पहली बार पद संभाला तो क्रय शक्ति क्षमता के मामले में इंडोनेशिया दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी.
अब एक दशक बाद इंडोनेशिया चीन, अमेरिका, भारत, जापान, जर्मनी और रूस के बाद सातवें स्थान पर पहुँच गया है.
ऐसा अनुमान है कि 2027 तक दुनिया में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश इंडोनेशिया आर्थिक मामले में रूस से आगे निकल जाएगा.
इस दक्षिण पूर्व एशियाई देश में 14 फ़रवरी को राष्ट्रपति चुनाव कराए गए थे. इसके अनौपचारिक आंकड़ों से पता चलता है कि रक्षामंत्री प्रबोवो सुबिआंतो पहले ही दौर में जीत की ओर अग्रसर हैं.
उन्होंने निवर्तमान राष्ट्रपति की आर्थिक नीतियों को जारी रखने का वादा किया है. विडोडो के बेटे, जिब्रान राकाबुमिंग राका उनके साथी हैं.
पर्माटा बैंक इंडोनेशिया के टॉप 10 बैंकों में से एक है. जोसुआ पारदेदे इसके मुख्य अर्थशास्त्री हैं. वो कहते हैं, "जोकोवी के कार्यक्रम कागज पर ठीक हैं, ये इंडोनेशिया को आईएमएफ के अनुमान के पास तक ला सकते हैं."
लेकिन इंडोनेशिया की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी साल 2045 तक दुनिया के टॉप -5 अधिक आय वाले देशों में शामिल होना है.
इंडोनेशिया के वित्त मंत्री श्री मुल्यानी के मुताबिक इसे हासिल करने के लिए अर्थव्यवस्था को हर साल 6-7 फ़ीसदी की दर से बढ़ना होगा.
इंडोनेशिया की वर्तमान में विकास दर पाँच फ़ीसदी है.
इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था

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इंडोनेशिया बाली जैसे द्वीप के लिए मशहूर है, लेकिन दुनिया में निकल का सबसे बड़ा भंडार भी यही हैं. निकिल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी बनाने का एक प्रमुख तत्व है.
राष्ट्रपति विडोडो ने 2019 में पहली बार कच्चे निकिल के निर्यात पर पाबंदी लगाई थी. इसके बाद से यूरोपीय संघ ने विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) में इंडोनेशिया के ख़िलाफ़ मुक़दमा कर दिया था.
तब राष्ट्रपति ने कहा था कि वो इंडोनेशिया में निकिल का प्रसंस्करण करना चाहते हैं, जिसे डाउनस्ट्रीमिंग के रूप में जाना जाता है.
इंस्टीट्यूट फॉर डिवेलपमेंट ऑफ इकोनॉमिक फाइनेंस एक स्वतंत्र शोध संस्थान है. इसके एक शोध पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति विडोडो की निकिल नीति ने नौकरियां पैदा की हैं और अर्थव्यवस्था को रफ्तार दी है.
लेकिन निकिल को गलाने वाला बनाने के लिए अब भी बहुत अधिक चीनी निवेश पर निर्भर है. इससे भविष्य पर सवालिया निशान लग रहे हैं, ख़ासकर तब से जब चीन की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार इस साल 5.2 फीसदी से गिरकर 4.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है.
राष्ट्रपति विडोडो की औद्योगिक नीति में ज़मीन विवादों, स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों और पर्यावरणीय विनाश की अनदेखी कर चीनी निवेश के लिए लाल कालीन बिछाने के लिए उनकी आलोचना भी होती है.
इंडोनेशिया के हज़ारों द्वीप

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इंडोनेशिया 17,000 द्वीपों में फैला हुआ है. इसमें तीन टाइम ज़ोन आते हैं. उसकी वर्तमान राजधानी जकार्ता समुद्र में समा रही है. यहां कनेक्टिविटी एक प्रमुख कारक है.
जब दुनिया कोरोना महामारी से उबरने की कोशिश कर रही थी, उस समय राष्ट्रपति विडोडो ने 2022 में राजधानी को स्थानांतरित करने के लिए एक क़ानून पर दस्तखत किए थे. इस पर लोगों ने नाराज़गी जताई थी.
चीन सहित कई देशों ने नई राजधानी में निवेश करने में रुचि दिखाई, लेकिन अभी तक वहां कुछ 'ठोस' नहीं हुआ है.
सेंटर ऑफ इकोनॉमिक एंड लॉ स्टडीज एक स्वतंत्र थिंक टैंक है. इससे जुड़े नेलुल हुडा कहते हैं, "अब तक, नुसंतरा में निवेश के लिए बड़े वैश्विक निवेशकों को लुभा पाना मुश्किल रहा है."
राष्ट्रपति ने निवेश आकर्षित करने के लिए निवेशक हितैषी श्रम क़ानून पारित करने समेत कई तरीक़ों की कोशिश की. इनके बारे में सिविल सोसाइटी के लोगों का कहना है कि ये क़ानून मज़दूरों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं.
राष्ट्रपति विडोडो अक्टूबर में सत्ता सौंप देंगे. ख़बरों के मुताबिक़ नई राजधानी नुसंतारा के निर्माण को वे अपनी स्थायी विरासत के रूप में देखते हैं.
होने वाले राष्ट्रपति की लोक-लुभावन नीतियां

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फ़िरमान नूर सरकारी संस्थान नेशनल इनोवेशन रिसर्च एजेंसी (बीआरआईएन) के राजनीतिक शोधकर्ता हैं. उनका मानना है कि यह एक दागदार घटना है.
नूर कहते हैं, "नुसंतारा इस बात का प्रतिबिंब है कि पिछले 10 साल में विकास और राजनीतिक प्रथाओं में लोकतांत्रिक मूल्य कैसे फीके पड़ गए हैं."
इस बीच नए चुने गए राष्ट्रपित सुबियांतो ने मांओं और बच्चों के लिए मुफ्त दूध और दोपहर के भोजन जैसी लोकलुभावन नीतियों का वादा कर लोगों का दिल-दिमाग़ जीतने की कोशिश की है.
इस पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये परियोजनाएं बजट पर बोझ डाल सकती हैं, जो पहले से ही निवर्तमान राष्ट्रपति की मेगा परियोजनाओं की वजह से तनावपूर्ण है.
हुडा कहते हैं, "मुफ्त दोपहर का भोजन और कई अन्य नीतियां राज्य के बजट को ख़त्म कर देंगी, इससे राष्ट्रीय क़र्ज़ बढ़ जाएगा."
वो कहते हैं, "अगर अगली सरकार की नीतियां इसी तरह लापरवाह रहीं, तो मुझे लगता है कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के सपने के बाद भी 2029 तक क़र्ज़ दोगुना हो सकता है."
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