हमास और इसराइल के बीच समझौते की बातचीत कहां फंसी हुई है

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- Author, पॉल एडम्स
- पदनाम, बीबीसी के डिप्लोमैटिक संवाददाता, यरूशलम से
हमास के बंदूक़धारियों ने बीते साल सात अक्टूबर को दक्षिणी इसराइल में हमला किया था. हमास ने जिन जगहों को निशाना बनाया था, उनमें नोवा फेस्टिवल साइट भी शामिल है.
हमास ने कई लोगों को बंधक बना लिया था. इन बंधकों के परिजनों और दोस्तों ने बुधवार को नोवा फेस्टिवल साइट से यरूशलम तक लिए मार्च शुरू किया.
यह फेस्टिवल साइट किबुत्ज़ रीम के पास है. हमास के हमले में यहां सैकड़ों लोग मारे गए थे. मार्च में शामिल लोग अपने हाथों में उन लोगों की तस्वीरें लिए हुए थे जो अभी भी लापता हैं. मार्च कर रहे लोगों की मांग है कि बाकी बचे 134 बंधकों को वापस लाने के लिए प्रयास किए जाएं.
युद्धविराम समझौते की चर्चा से इन लोगों की उम्मीदें जगी हैं.
मार्च कर रहे लोगों को संबोधित करते हुए रोनेन न्यूट्रा ने कहा, "अपने प्रियजनों के लिए याद में एक सौ पैंतालीस अंतहीन दिन और रातें."
रोनेन के 22 साल के बेटे ओमर को बंधक बनाकर ग़ज़ा में कहीं रखा गया है.
रोनेन ने कहा, ''हम उनसे कहते हैं कि थोड़ा और हिम्मत रखें और थोड़ी देर और इंतज़ार करें."
"ओमर, बस थोड़ी देर और. समझौता संभव है."
पिछले हफ्ते के अंत में अमेरिका, मिस्र और क़तर के मध्यस्थों ने पेरिस में मुलाकात की थी. इसके बाद से ही इसराइली मीडिया लड़ाई रोकने के लिए समझौते की चर्चाओं से भरा हुआ है.
हालांकि समझौते के ताज़ा प्रस्तावों को बताने वाला कोई दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यह कहा कि सोमवार तक समझौता हो सकता है, तो अटकलें और तेज़ हो गईं.
किस तरह का हो सकता है समझौता?

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माना जा रहा है कि युद्धविराम छह हफ्ते का हो सकता है. इस दौरान 40 इसराइली बंधकों को रिहा किया जाएगा. सबसे पहले महिलाओं और सैनिकों को छोड़ा जाएगा.
इसराइल इसके बदले में क़रीब 400 फ़लस्तीनी क़ैदियों को रिहा करेगा. इनमें से कुछ चरमपंथ के गंभीर अपराध के दोषी हैं. इन लोगों को इसराइली जेलों से रिहा किया जाएगा.
समझौते के तहत इसराइली सैनिक ग़ज़ा के कुछ घनी आबादी वाले इलाकों से हटकर दूर जा सकते हैं. अक्टूबर में शुरू हुई लड़ाई की वजह से विस्थापित हुए 18 लाख फ़लस्तीनियों में से कुछ उत्तर में अपने घरों को लौट सकते हैं.
क़तर में बातचीत अभी भी चल रही है. इसमें मिस्र और क़तर के मध्यस्थ और इसराइल-हमास के प्रतिनिधि शामिल हैं. लेकिन अभी किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है.

ख़बरों के मुताबिक़, हर इसराइली बंधक के बदले में रिहा किए जाने वाले फ़लस्तीनी क़ैदियों की संख्या को लेकर अभी भी विवाद बना हुआ है.
इसके साथ ही समझौते में इसराइली सैनिकों की फिर होने वाली तैनाती या फ़लस्तीनी नागरिकों के उनके घरों में वापसी को लेकर भी अभी विचार नहीं हुआ है.
हैम तोमर मोसाद डिवीजन के पूर्व प्रमुख हैं. उन्हें इस तरह की वार्ताओं का अनुभव है. उन्होंने मुझसे कहा कि वो अभी भी आशावादी हैं.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम काफी करीब हैं."
उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हम निश्चित तौर पर बंधकों और फ़लस्तीनी क़ैदियों की रिहाई देखेंगे. लेकिन मुझे लगता है कि बातचीत आगे बढ़ रही है."
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क्या कह रहे हैं हमास के नेता

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उन्होंने क़तर में मौजूद हमास नेता इस्माइल हानिया की टिप्पणियों का हवाला दिया. हानिया ने बुधवार को एक संकेत देते हुए कहा था कि उनका समूह किसी समझौते को लेकर नरम रुख़ अपना सकता है.
टीवी पर दिए एक भाषण में हानिया ने कहा था, "बातचीत में हम जो भी लचीलापन दिखा रहे हैं, वह हमारे लोगों के खून की रक्षा और उनको तबाह करने वाले क्रूर युद्ध में उनके दर्द और बलिदान को ख़त्म करने के लिए है."
बातचीत में हम जो भी लचीलापन दिखा रहे हैं, वह हमारे लोगों के खून की रक्षा और उनको तबाह करने वाले क्रूर युद्ध में उनके दर्द और बलिदान को खत्म करने के लिए है.
हानिया ने कहा कि अगर ज़रूरी हुआ तो हमास लड़ाई जारी रखने के लिए तैयार है. उन्होंने वेस्ट बैंक और यरूशलम के फ़लस्तीनियों से इसराइली पाबंदियों को दरकिनार कर मुस्लिमों के पवित्र महीने रमज़ान में यरूशलम की अल-अक्सा मस्जिद की ओर मार्च करने की अपील की.
इस 'लचीलेपन' से इस बात का संकेत मिलता है कि हमास युद्ध को पूरी तरह से खत्म करने और ग़ज़ा पट्टी से इसराइली सैनिकों की पूरी वापसी जैसी मांगों पर पुनर्विचार कर सकता है. इन मांगों को इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भ्रामक बताया है.
लेकिन हमास ने पेरिस में तैयार प्रस्तावों पर अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.
समझौते पर कैसा है याह्या सिनवार का रुख़

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अभी यह भी पता नहीं है कि ग़ज़ा में हमास के नेता याह्या सिनवार इस समझौते को लेकर क्या सोचते हैं.
उन्हें आख़िरी बार ख़ान यूनिस या रफ़ाह में कहीं एक भूमिगत सुरंग में फिल्माया गया था.
उनकी गुरिल्ला आर्मी धीरे-धीरे ख़त्म हो रही है. इसराइली सरकार ने उन्हें पकड़ने की कसम खाई है.
इसराइली अधिकारियों का कहना है कि साढ़े पांच महीने की भारी बमबारी और हमास के हज़ारों लड़ाकों की मौत से सिनवार की ताकत कम हो गई है.
इस तरह की खबरों को प्रमाणित कर पाना कठिन काम है, लेकिन एक बात तो निश्चित है कि सात अक्टूबर के हमलों को अंजाम देने वाले व्यक्ति से संपर्क साधना और कठिन होता जा रहा है.
इस बीच बाकी इसराइली बंधकों के परिजन और दोस्त सड़क पर हैं. उनका कहना है कि वे शनिवार को यरूशलम पहुंचेंगे.
लेकिन जब वे वहां पहुंचेंगे तो क्या अच्छी ख़बर उनका इंतज़ार कर रही होगी?
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