सीरियाः बशर अल-असद के शासन में उनके खानदान की महिलाओं का कितना था दख़ल

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रविवार को राजधानी दमिश्क पर विद्रोहियों के कब्ज़े के साथ ही सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन का अंत हो गया.
सीरिया की सत्ता पर असद परिवार ने लगभग आधी सदी तक शासन किया था. उनके पिता हाफ़िज़ अल-असद ने साल 2000 तक 30 साल तक शासन किया और उसके बाद उनके छोटे बेटे बशर अल असद ने ढाई दशक तक शासन किया.
साल 2011 में ट्यूनीशिया से शुरू हुए अरब स्प्रिंग के बाद उठे विद्रोह को दबाने में असद सरकार को ईरान और रूस की मदद मिली और 2016 तक लगा कि असद सरकार ने विद्रोह पर काबू पा लिया है.
लेकिन इस बार स्थितियां बदल गई थीं और विद्रोहियों ने एक पखवाड़े से भी कम समय में राजधानी दमिश्क समेत सीरिया के प्रमुख शहरों पर कब्ज़ा कर लिया.

बशर अल-असद ने अपने परिवार के साथ रविवार को देश छोड़ दिया और उन्होंने रूस में शरण ली है.
बशर अल-असद के शासन को अक्सर 'निरंकुश' कहा जाता था, लेकिन उनका नेतृत्व उनके अंदरूनी घेरे की शख़्सियतों पर काफ़ी कुछ निर्भर था.
असद शासन के दौरान नीति निर्माण में बहन बुशरा अल-असद और पत्नी अस्मा अल-अख़रास की प्रमुख भूमिका मानी जाती है. उनकी मां अनीसा मख़लूफ़ सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देती थीं, लेकिन शासन प्रशासन में उनकी राय भी मायने रखती थी.
अनीसा मख़लूफ़

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बशर अल-असद की मां अनीसा मख़लूफ़ का संबंध सीरिया के लताकिया में अल्पसंख्यक अलावाइत समुदाय से था.
उनका जन्म 1957 में एक धनी अलावाइत परिवार में हुआ था.
उनके पांच बच्चे थे, माहेर, बशर, बासेल, माजेद और बुशरा. बशर अल-असद दूसरे नंबर पर आते हैं. माना जाता है कि बशर अल-असद के प्रति वो काफ़ी उदार थीं.
सरकारी मीडिया के अनुसार, उनके मझले बेटे बासेल की 1994 में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई, जिन्हें सत्ता सौंपने के लिए तैयार किया जा रहा था. एक अन्य बेटे माजेद की मौत अज्ञात बीमारी से 2009 में हो गई थी.
सबसे बड़े बेटे माहेर सीरियाई सेना में जनरल और अन्य शीर्ष पदों पर रहे.
अनीसा सार्वजनिक रूप से बहुत लो प्रोफ़ाइल रहा करती थीं, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि प्रशासन के मसलों पर उनकी राय मायने रखती थी.
फ़र्स्ट लेडी को लेकर, उनकी बहू आसमा अल-अख़रास के साथ तनाव भी सुर्खियों में रहा है.
साल 2012 में यूरोपीय संघ ने अनीसा को ब्लैक लिस्ट कर दिया था. उससे पहले वो अपने इलाज़ के लिए जर्मनी जाती रहती थीं.
साल 2016 में 88 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई.
बुशरा अल-असद

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बुशरा अल-असद, बशर अल-असद की इकलौती बहन हैं, जो पेशे से मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी रही हैं.
बुशरा की शादी आसेफ़ शौकत से हुई थी जो सेना में विभिन्न पदों से होते हुए उप रक्षा मंत्री बने.
साल 2012 में एक बम धमाके में आसेफ़ शौकत की मौत हो गई जिसके बाद बुशरा संयुक्त अरब अमीरात चली गईं.
सीरिया में आर्थिक साम्राज्य खड़ा करने वाले ममेरे भाई रामी मख़लूफ़ के व्यवसाय में भी बुशरा का ख़ासा हिस्सा था.
आलोचकों का कहना है कि मख़लूफ़ का विशाल साम्राज्य सत्ता और संपत्ति के गठजोड़ का प्रतीक था. रामी मख़लूफ़ को सीरिया की सबसे धनी शख़्सियत माना जाता है.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि असद शासन के नीति निर्माण में बुशरा अल-असद की भूमिका अहम थी और बशर अल-असद की पत्नी आसमा अल-अख़रास से कुछ मुद्दों पर उनका मनमुटाव भी था.
मीडिया में आई कुछ ख़बरों के अनुसार, बुशरा ने लंबे समय तक आसमा को प्रथम महिला बनने से रोके रखा था क्योंकि वह चाहती थीं कि यह टाइटल उनकी मां अनीसा के पास ही रहे.
आसमा अल- अख़रास

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आसमा अल अख़रास एक सीरियाई परिवार से आती हैं, लेकिन विवाह से पहले उनका सारा जीवन पश्चिम में बीता था.
उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन में कम्प्यूटर साइंस में पढ़ाई की थी और बाद में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए के लिए भी उनका चयन हो गया था.
उन्होंने जेपी मॉर्गन जैसी वित्तीय संस्थाओं में इनवेस्टमेंट बैंकर के तौर पर भी काम किया था.
साल 2000 में जब बशर अल-असद राष्ट्रपति बने तो उसके कुछ महीने बाद आसमा की उनके साथ शादी हुई. उनके तीन बच्चे हैं- हाफ़िज़, ज़ेन और करीम.
शुरू में राजनीतिक सुधार और प्रेस की आज़ादी को लेकर बशर अल-असद के बयानों को आसमा की प्रगतिशील सोच से जोड़कर देखा गया.
आसमा की पश्चिमी शिक्षा से लोगों में बदलाव की एक उम्मीद नज़र आई.
सालों तक यह धारणा थी कि आसमा अल-असद की पश्चिमी शिक्षा और परवरिश सीरिया में सुधार को बढ़ावा देंगी.
हालांकि महंगे ब्रांड और ज्वैलरी को लेकर उनके शौक पर भी विवाद उठा था.
साल 2011 में एक सूत्र ने बीबीसी को बताया था कि विवाह के पीछे बशर अल-असद का एक मक़सद अपनी छवि चमकाना भी था.
पश्चिमी मीडिया में उन्हें लेकर सकारात्मक छवि थी और दिसम्बर 2010 में वोग मैगजीन को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि उनका घर 'लोकतांत्रिक' तरीक़े से चलता है.
वोग में यह इंटरव्यू 'ए रोज़ इन द डिज़र्ट' शीर्षक से मार्च 2011 में छपा था.
लेकिन राष्ट्रपति असद और उनके क़रीबियों पर जब यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाया तो यह प्रतिबंध आसमा की यात्रा और उनकी संपत्तियों पर भी लगा. उनकी संपत्ति को फ़्रीज कर दिया गया था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, इसी साल पता चला था कि आसमा अल-अख़रास को ल्यूकीमिया हो गया था, जो एक किस्म का ब्लड कैंसर है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित


















