पश्चिम बंगाल: वायरल वीडियो में पिटाई करने वाले जेसीबी का इलाक़े में कितना है आतंक?: ग्राउंड रिपोर्ट

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    • Author, प्रभाकर मणि तिवारी
    • पदनाम, चोपड़ा (उत्तर दिनाजपुर से) बीबीसी हिंदी के लिए

पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर ज़िले के इस्लामपुर सब-डिवीज़न के चोपड़ा इलाके के एक गांव से रविवार दोपहर बाद एक वीडियो वायरल हुआ.

उस वायरल वीडियो में ताजिमूल उर्फ 'जेसीबी' नाम का एक शख़्स एक महिला और एक पुरुष को डंडे से बुरी तरह से पीटते हुए देखा जा सकता है. दोनों के लगातार चीखने के बावजूद चारों ओर खड़े लोग तमाशा देख रहे हैं और कोई उनको बचाने सामने नहीं आता है.

दरअसल, यह पश्चिम बंगाल में चलने वाली 'सालिसी सभा' (कंगारू अदालत) और उस अदालत में लिए गए फ़ैसले का मामला है.

पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में स्थानीय स्तर पर ऐसी अदालतें लगती हैं और उनके फ़ैसले को चुनौती भी नहीं दी जाती. ये अदालतें ख़ुद फ़ैसले करती हैं और मौके पर ही सज़ा भी सुनाती हैं.

ये वायरल वीडियो ऐसी ही एक अदालत की ताक़त को दर्शाती है और इस वायरल वीडियो के केंद्र में 'सालिसी सभा' में मौक़े पर सज़ा सुनाने वाले और पिटाई करने वाले तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय दबंग नेता ताजिमूल इस्लाम को वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है.

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'जेसीबी' के नाम से ताजिमूल इस्लाम को जाना जाता है

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ताजिमूल इस्लाम स्थानीय इलाके में जेसीबी के उपनाम से जाने जाते हैं.

इलाके में उनकी छवि दंबग की है और सत्तारूढ़ पार्टी से कथित नज़दीकियों के बावजूद उन पर चोपड़ा थाने में एक दर्जन मामले दर्ज हैं.

स्थानीय पुलिस ने सोमवार को उसे जब इस्लामपुर सबडिवीज़नल कोर्ट में पेश किया तो संबंधित कागज़ात में इन मामलों का ज़िक्र किया गया था.

इस मामले के सरकारी वकील संजय भवाल बताते हैं, "ताजिमूल उर्फ जेसीबी के ख़िलाफ़ हत्या समेत एक दर्जन मामले दर्ज हैं."

इस बीच, चोपड़ा थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर को सोमवार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

दूसरी ओर, राज्य पुलिस ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि कुछ तत्व इस पूरी घटना को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं.

रविवार को जिन दो युवकों ने घटना का वीडियो वायरल किया था, उन पर भी सालिसी सभा की ओर से कथित रूप से 50-50 हजार का जुर्माना लगाने की चर्चा भी स्थानीय लोगों ने की है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है. वीडियो के वायरल होने के बाद दोनों युवकों का पता नहीं चल पाया है.

क्या है वायरल वीडियो का पूरा मामला?

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पुलिस और स्थानीय लोगों से बातचीत से पता चलता है कि वीडियो वाली घटना 28 जून को हुई थी. इसकी पुष्टि इस्लामपुर के पुलिस अधीक्षक जॉबी थॉमस के. ने भी बीबीसी हिंदी से की है.

इस्लामपुर के कई लोगों ने बताया है कि जेसीबी जिस महिला को ज़मीन पर गिरा कर मार रहे थे, वो विवाहित हैं. लेकिन वो किसी दूसरे विवाहित व्यक्ति के साथ घर छोड़ कहीं चली गई थी. इन दोनों के बीच प्रेम था और दोनों अपने पति/पत्नी से तलाक़ लेकर साथ रहना चाहते थे. लेकिन कुछ दिनों बाद जब दोनों गांव लौट कर आए तो 28 जून को सालिसी सभा का आयोजन किया गया था.

इस सभा में उन पर दस हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया गया. कंगारू कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि यह रकम नहीं देने की स्थिति में उनको उस गांव तो क्या इलाके में भी नहीं रहने दिया जाएगा. उस जुर्माने का भुगतान नहीं करने की वजह से ही उनके साथ मारपीट की गई.

इस मारपीट की घटना के दो दिनों बाद तक किसी को इस घटना की कानोंकान ख़बर नहीं लगी.

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए पांच धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आनन-फानन में जेसीबी को गिरफ्तार कर लिया. इनमें से दो धाराएं गैर-ज़मानती हैं.

सोमवार को अदालत में पेश किए जाने पर जज ने उन्हें पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया. स्थानीय लोग बताते हैं कि जेसीबी का चोपड़ा के तृणमूल कांग्रेस विधायक हमीदुल के साथ क़रीबी संबंध हैं.

हालांकि वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद टीएमसी विधायक ने इसे गांव का झगड़ा बताते हुए पार्टी के साथ इसका कोई संबंध होने से इनकार किया था.

लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर इस्लामपुर ज़िला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल ने चोपड़ा के विधायक हमीदुल को उनके कथित विवादित बयान के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है.

हालांकि हमीदुल का कहना है कि उनको भी यह नोटिस नहीं मिला है, मिलने पर वो उसका जवाब देंगे.

इलाके में आतंक

स्थानीय लोग बताते हैं कि जेसीबी का चोपड़ा के तृणमूल कांग्रेस विधायक हमीदुल के साथ क़रीबी संबंध हैं.

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इमेज कैप्शन, स्थानीय लोग बताते हैं कि जेसीबी का चोपड़ा के तृणमूल कांग्रेस विधायक हमीदुल के साथ क़रीबी संबंध हैं.

चोपड़ा के जिस लक्ष्मीपुर ग्राम पंचायत दफ्तर के सामने प्रेमी युगल की सरेराह पिटाई का वीडियो रविवार को वायरल हुआ, वहां जेसीबी का कैसा दबदबा है, इसे ऐसे समझा जा सकता है कि वहां तक पहुंचना लगभग असंभव है.

मुख्य सड़क से भीतर की ओर जाते ही अचानक कुछ युवक सड़क पर पहुंच कर रास्ता घेर लेते हैं. कहां से आए हैं, कहां जाना है, किससे मिलना है और क्या काम है.... जैसे जितने मुंह, उतने सवाल हवा में तैरने लगते हैं.

बीबीसी की टीम के साथ भी यही हुआ. दो-दो बार की कोशिश के बाद लक्ष्मीपुर ग्राम पंचायत दफ्तर तक ही पहुंचना संभव हो सका.

लेकिन वीडियो में दर्जनों की भीड़ नजर आने के बावजूद तमाम स्थानीय लोगों ने अपने मुंह पर ताला लगा लिया है.

कलम और कैमरा देख कर आम लोग लोग पास भी नहीं फटकते. किसी तरह दो-तीन लोगों से बात हो पाई तो किसी ने कहा कि वो उस दिन बाहर थे, तो किसी ने कहा कि वो खेत में काम कर रहे थे. पता नहीं यहां क्या हुआ था?

ये इलाके में जेसीबी के 'आतंक' का सबूत है. उस गांव के एक व्यक्ति ने चोपड़ा थाने के सामने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, "आखिर हमें यहीं रहना है. हम पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर कैसे कर सकते हैं?"

ऐसे में इस पूरे घटना के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए पिटाई खाने वाले जोड़े के गांव या फिर जेसीबी के गांव जाने का विकल्प बेहतर लगा. जिन पुरुष और महिला की पिटाई हुई वो दीघलगांव के हैं जबकि जेसीबी का गांव डांगापाड़ा है. ये दोनों जगहें पंचायत दफ्तर से करीब 16-17 किलोमीटर दूर हैं.

'आगे मत जाइए, कोई फ़ायदा नहीं होगा'

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लेकिन जिस तरह से ज़िला पंचायत दफ़्तर के बाहर से लोगों ने बताना शुरू किया, उससे इन गांवों तक पहुंचना संभव नहीं हो पाया. उसके बाद धमकी भरी नसीहत दी जाती है कि आगे मत जाएं. कोई फ़ायदा नहीं होगा. गांव का कोई भी व्यक्ति मुंह नहीं खोलेगा.

ज़िले के एक पुलिस अधिकारी ने भी अनौपचारिक तौर पर उस गांव से दूर रहने की नसीहत दी. यह इलाके में जेसीबी के दबदबे का सूचक भी लगा.

इसी आतंक की वजह से स्थानीय सीपीएम नेता कैमरे पर तो दूर फोन पर भी बात नहीं करना चाहते.

पार्टी के एक नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, "दो-तीन बार गिरफ़्तार करने के बावजूद पुलिस उसे कुछ दिनों बाद छोड़ देती थी. इलाके में जेसीबी का रुतबा साल 2017 से बढ़ने लगा था. अब वह इलाके में तमाम सालिसी सभाएं कर मौके पर ही सज़ा सुनाता और देता था. ये वीडियो वायरल नहीं होता तो उसकी गतिविधियां पहले की तरह ही जारी रहतीं."

यह आतंक ही है जिसकी वजह से बुरी तरह पिटाई खाने के बावजूद उन दोनों पीड़ितों ने पुलिस में अब तक कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई है. इस बारे में बार-बार पूछने के बावजूद उन दोनों ने एक शब्द भी नहीं कहा. हालांकि सोमवार सुबह पुलिस उन दोनों को उनके घर से ले गई.

सोमवार दोपहर में इस्लामपुर सब-डिवीज़नल अस्पताल में उनकी मेडिकल जांच कराई गई.

इस्लामपुर के पुलिस अधीक्षक जॉबी थॉमस के. ने कहा, "तमाम कार्रवाई क़ानूनी प्रावधानों के तहत ही की जा रही है."

लेकिन इस सवाल का कहीं से कोई जवाब नहीं मिल सका कि 28 जून की घटना में घायल होने के तीन दिनों बाद उनकी मेडिकल जांच क्यों कराई गई और उनका कोई इलाज क्यों नहीं कराया गया?

कौन है ये जेसीबी

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ताजिमूल का जन्म चोपड़ा के लक्ष्मीपुर ग्राम पंचायत के डांगापाड़ा गांव में हुआ था. ताजिमूल इस्लाम उर्फ जेसीबी का नाम चोपड़ा के लक्ष्मीपुर ग्राम पंचायत इलाके के लोगों के लिए नया नहीं है.

स्थानीय लोग बताते हैं कि तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय विधायक के क़रीबी कहे जाने वाले ताजिमूल का मुख्य धंधा ही कंगारू अदालतों के आयोजन के जरिए गांव में होने वाले किसी भी विवाद को निपटाना था.

किसी दौर में वो लेफ़्ट फ्रंट के क़रीबी थे. लेकिन वर्ष 2011 में तृणमूल कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद उन्होंने पाला बदल लिया. साल 2017 से उनकी राजनीतिक पकड़ और दबंगई तेजी से बढ़ी थी.

जेसीबी मशीन जिस तरह अवैध निर्माण ढहा देती है उसी तरह ताजिमूल भू इलाके में विरोधियों का मुंह बंद कर मौके पर न्याय करने के लिए कुख्यात थे. इसी वजह से उन्हें जेसीबी कहा जाता है.

विपक्ष के स्थानीय नेताओं का कहना है कि जेसीबी कंगारू अदालतों के जरिए अवैध संबंधों से लेकर संपत्ति के विवाद तक हर तरह के मामले निपटाता था. कथित दोषियों के साथ मारपीट करने के अलावा वह उन पर जुर्माना भी लगाते थे. यही उनका मुख्य धंधा था. जहां भी विवाद हो, वहां जेसीबी हाजिर रहते थे. वह सालिसी सभा का आयोजन कर मौके पर ही 'न्याय' कर देते थे.

सीपीएम के एक नेता दावा करते हैं, "जेसीबी हर महीने इलाके में ऐसे तीन-चार मामले निपटाते थे. वह तो एक घटना का वीडियो वायरल होने पर बवाल मचा हुआ है. उससे पहले तक कोई उसके ख़िलाफ़ मुंह खलने की हिम्मत नहीं करता था."

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लक्ष्मीपुर इलाके के लोगों में अब भी आतंक है. हर गली-नुक्कड़ पर लोग इसी मुद्दे पर चर्चा करते नजर आते हैं. लेकिन किसी बाहरी व्यक्ति को देखते ही वो चुप्पी साध लेते हैं. लोगों के मन में इस बात का डर है कि जेसीबी ज़मानत पर बाहर आने के बाद क्या करेगा. वह अपनी गिरफ़्तारी का बदला कहीं इलाके के लोगों से तो नहीं लेगा.

सीपीएम के ज़िला सचिव अनवारुल हक कहते हैं, "लक्ष्मीपुर पंचायत का पूरा इलाका जेसीबी और उसकी टीम के नियंत्रण में था. राजनीतिक संरक्षण की वजह से पूरे इलाके में उसका समानांतर प्रशासन चलता था."

उसके बाद से ही जेसीबी के ख़िलाफ़ आम लोगों पर अत्याचार, मारपीट, हत्या और अपहरण के आरोप लगते रहे हैं.

चोपड़ा के रहने वाले रुस्तम अली ने 4 नवंबर, 2018 को जेसीबी के ख़िलाफ़ चोपड़ा थाने में पहली एफ़आईआर दर्ज कराई थी. उसमें उन पर ग़ुलाम मुस्तफा और अब्दुल नामक दो लोगों पर घातक हथियारों से हमले का आरोप लगाया गया था.

उसके बाद 11 मार्च, 2019 को अजिना खातून नाम की एक महिला ने चोपड़ा थाने में दर्ज़ अपनी शिकायत में ताजिमूल और उसके गुर्गो पर मारपीट का आरोप लगाया था.

इस्लामपुर के पुलिस अधीक्षक जॉबी थॉमस के. बताते हैं, "ताजिमूल तृणमूल कांग्रेस का नेता हैं या नहीं, यह नहीं कह सकता. लेकिन वो अपराधी हैं और उनके ख़िलाफ़ हत्या समेत कई गंभीर मामले हैं."

सीपीएम के एक स्थानीय नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, "जेसीबी हमेशा स्थानीय टीएमसी विधायक हमीदुल के साथ रहते थे. शायद इसी वजह से पुलिस उसे छूने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. कई बार गिरफ़्तार होने के बावजूद उसे कुछ दिनों में ही छोड़ दिया जाता था."

चोपड़ा में कांग्रेस के स्थानीय प्रमुख मसीरुद्दीन भी यही बात दोहराते हैं.

वह कहते हैं, "विधायक के संरक्षण के कारण पुलिस जेसीबी पर हाथ डालने से डरती थी. लक्ष्मीपुर इलाके में उसके आतंक की वजह से कोई उसके ख़िलाफ़ सिर नहीं उठा सकता था."

चोपड़ा के विधायक बयान से पलटे

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चोपड़ा के विधायक हमीदुल रहमान ने भी सोमवार को अपने पिछले बयान के उलट इस घटना पर दुख जताया है. उन्होंने रविवार को कहा था कि उनको इस घटना की जानकारी है. तब उन्होंने पीड़िता को 'कलंकिनी' बताते हुए कहा था कि उसने भी ग़लती की है.

उनका कहना था, "ग्रामीण इलाकों में सालिसी सभा के जरिए विवादों को निपटाने का रिवाज है. लेकिन इस मामले में सज़ा कुछ ज़्यादा हो गई."

लेकिन टीएमसी विधायक ने सोमवार को कहा, "मैं मानता हूं कि जो हुआ, ठीक नहीं हुआ. इस इलाके में जातपात की समस्या होने पर सालिसी सभा के जरिए उसे निपटाया जाता है. मैं या मेरी पार्टी इसका समर्थन नहीं करती. मेरे रविवार के बयान की ग़लत व्याख्या की जा रही है."

इस बीच, सोमवार को ऐसी ही एक अन्य घटना का वीडियो भी सामने आया है. ये दूसरा वीडियो कब का है, बीबीसी हिंदी इसकी पुष्टि नहीं कर पाया है. हालांकि यह मामला भी लक्ष्मीपुर ग्राम पंचायत के ही एक अन्य गांव मोहनगंज का बताया जा रहा है.

सीपीएम के एक स्थानीय नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर दावा करते हैं कि दूसरी घटना बीते 16 जून की है. उसमें भी ताजिमूल एक प्रेमी युगल को ऐसी ही पीटते नजर आ रहे हैं. हालांकि चोपड़ा पुलिस ने दूसरे मामले की जांच की बात कह कर ज़्यादा जानकारी देने से इनकार किया.

तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने भी अब इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है.

इस्लामपुर के टीएमसी विधायक कन्हैया लाल अग्रवाल ने फोन पर बीबीसी से कहा, "मैं इस मामले में आपकी कोई मदद नहीं कर सका. आप चोपड़ा थाने से संपर्क करें."

यही स्थिति ताजिमूल और पीड़ित युवक अंसार और पीड़िता मेहरूनिशा की है. उन्होंने थाने से बाहर निकलते समय पत्रकारों के सवालों पर कोई टिप्पणी नहीं की.

पीड़ित युगल पर दबाव

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इस बीच, वायरल वीडियो में बुरी तरह पिटते नजर आने वाले प्रेमी युगल ने अचानक अपना रुख बदल लिया है. उस महिला ने वीडियो वायरल करने वालों के ख़िलाफ़ थाने में शिकायत की है और उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "मेरी अनुमति के बिना वीडियो वायरल करने से मेरे मान-सम्मान को नुक़सान पहुंचा है. दोषी को कड़ी सजा मिलनी चाहिए. मुझे पुलिस पर पूरा भरोसा है. मुझे जो कहना था वीडियो में कह दिया है. इससे ज़्यादा कुछ नहीं कह सकती."

बार-बार पूछने के बावजूद उन्होंने इस मामले और अपने निजी जीवन के बारे में कुछ कहने से इनकार कर दिया.

दूसरी ओर, उस युवक का कहना था, "मैंने एक ग़लती की थी. लेकिन गांव वालों ने मिल कर मामले को निपटा दिया. मेरे साथ ज़्यादा मारपीट नहीं हुई. वह महिला मेरे घर आई थी. यह ग़लती थी. लेकिन हमने सालिसी सभा के जरिए इस ग़लती को दूर कर दिया. मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है और मैं आतंकित भी नहीं हूं. अब अपने घर पर रह रहा हूं. मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है."

यहां इस बात का ज़िक्र ज़रूरी है कि इन दोनों ने पहले दिन से ही कभी न तो ताजिमूल का नाम नहीं लिया है और न ही इस मामले में पुलिस से कोई शिकायत की है. अब उल्टे पीड़ित महिला वीडियो वायरल करने वालों को ही पूरे मामले के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रही हैं. उनके ख़िलाफ़ ही थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है.

विपक्ष के नेताओं का कहना है कि जेसीबी के गुर्गों की धमकी और इलाके में उनके आतंक के कारण ही इन दोनों ने अपने बयान बदले हैं.

सीपीएम के एक नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, "दोनों ने अपने बयान में कहीं भी जेसीबी का नाम नहीं लिया है. साफ़ है कि जेसीबी के ख़िलाफ़ मामले को कमज़ोर करने के लिए ही उन दोनों पर दबाव डाला गया है."

दोनों लोग सोमवार रात से अपने-अपने घर पर ही हैं. उस इलाके में जगह-जगह पुलिस का पहरा बिठाया गया है. महिला के घर के सामने तैनात पुलिस के जवान किसी को भीतर जाने की अनुमति नहीं देते.

सीपीएम के नेताओं का आरोप है कि मजबूत कद-काठी के जेसीबी का नाम इलाके में आतंक का पर्याय बन चुका है. जेसीबी लक्ष्मीपुर ग्राम पंचायत इलाके में अघोषित जज की भूमिका निभा रहे थे.

कांग्रेस नेता मसीरुद्दीन कहते हैं, "जेसीबी की गिरफ़्तारी के बाद उनके भाई आलमगीर घर-घर जाकर लोगों को मुंह बंद रखने की धमकी दे रहे थे. इस मामले में पीड़ित युवक-युवती को भी धमकियां दी गई हैं. उन दोनों ने अपना जो बयान बदला है, वह इसी धमकी का नतीजा है."

ममता सरकार पर विपक्ष का निशाना

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सरकारी वकील संजय भवाल बताते हैं, "रविवार को नया फौजदारी कानून लागू नहीं होने के कारण ताजिमूल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 307, 323,325 और 34 के तहत ही मामला दायर किया गया है."

वहीं, तमाम विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

सीपीएम नेता मोहम्मद सलीम कहते हैं, "यह घटना ममता बनर्जी के शासनकाल में टीएमसी के एक नेता की ओर से मौके पर ही त्वरित न्याय की परंपरा का सबूत है. इसकी जितनी निंदा की जाए कम है."

भाजपा के विधायकों ने सोमवार को इस मुद्दे पर विधानसभा परिसर में धरना दिया.

उधर, तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष ने कहा है, "चोपड़ा की घटना का समर्थन नहीं किया जा सकता. पुलिस ने इसका संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज कर अभियुक्त को कुछ घंटों के भीतर ही गिरफ़्तार कर लिया है. बाकी अभियुक्तों को भी शीघ्र गिरफ़्तार किया जाएगा. उनका कहना था कि वाममोर्चा के लंबे शासनकाल में ऐसी कई घटनाएं हुई थी. लेकिन किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया."

वैसे दिलचस्प है कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस का मंगलवार को दिल्ली से सीधे चोपड़ा आने का कार्यक्रम था लेकिन वे सिलीगुड़ी से ही लौट गए. पीड़ितों ने उनसे फ़ोन पर बात तो की लेकिन मिलने से साफ़ मना कर दिया. खुद राज्यपाल ने बागडोगरा एयरपोर्ट पर इसकी जानकारी दी. माना जा रहा है कि वे इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे.

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