प्रज्वल रेवन्ना के ख़िलाफ़ कथित यौन उत्पीड़न के मामले पर हासन में कैसी प्रतिक्रिया- ग्राउंड रिपोर्ट

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, हासन से, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत के पूर्व प्रधानमंत्रीएचडी देवगौड़ा के प्रपौत्र और एक लोकसभा क्षेत्र के उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना यौन उत्पीड़न के मामले में घिरे हुए हैं.
उनसे जुड़े वीडियो क्लिप्स के पेन ड्राईव को सार्वजनिक स्थानों पर रखे जाने के एक महीने बाद, उनके निर्वाचन क्षेत्र में बेचैनी बढ़ गई है.
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के छह दशक लंबे राजनीतिक करियर में क़रीब पांच दशकों तक कर्नाटक का हासन ज़िला उनके दबदबे वाला क्षेत्र रहा है.
देवगौड़ा क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस के प्रमुख हैं और बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए में शामिल हैं.
देवगौड़ा के प्रपौत्र प्रज्वल रेवन्ना और मौजूदा सांसद गठबंधन के उम्मीदवार हैं.
इस परिवार के प्रभाव का अंदाज़ा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी दो बार मुख्यमंत्री रहे और उनका दूसरे बेटे एचडी रेवन्ना मंत्री रहे हैं और विधानसभा के सदस्य हैं. रेवन्ना के दूसरे बेटे सूरज रेवन्ना विधान परिषद के सदस्य हैं.
नाम न ज़ाहिर करते हुए एक युवा दुकानदार ने बीबीसी से कहा, “हमारे ज़िले में क्या हुआ इसके बारे में बात करना बेहद शर्मनाक है.”
उन्होंने कहा, “इसका ज़िक्र करना भी घिनौना है. इसकी वजह से हमारे ज़िले की बदनामी हुई है.”
2960 वीडियो क्लिप्स वाले पेन ड्राईव को बस स्टैंडों, पार्कों और अन्य जगहों पर 21 अप्रैल को रखा गया था- हासन संसदीय सीट पर 26 अप्रैल को चुनाव से ठीक चार दिन पहले.
जब विवाद तूल पकड़ा तो पता चला कि प्रज्वल रेवन्ना अगले दिन तड़के ही देश से बाहर चले गए.
वीडियो संदेश में प्रज्वल रेवन्ना ने क्या कहा

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बीते सोमवार को प्रज्वल रेवन्ना आख़िरकार ये कहने के लिए सामने आए कि वो 31 मई को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के सामने जवाब देने के लिए पेश होंगे.
वीडियो में रेप और यौन हिंसा के आरोपों को उन्होंने ‘झूठा’ बताया है.
एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी तक जवाब नहीं दिया था क्योंकि वो अवसाद में थे और ख़ुद को अलग थलग कर लिया था. उन्होंने महिलाओं के यौन उत्पीड़न के कथित आरोपों के पीछे ‘राजनीतिक साज़िश’ बताई.
उन्होंने कहा कि, “मतदान के दिन (26 अप्रैल) को मेरे ख़िलाफ़ कोई मामला नहीं था, मेरी विदेश यात्रा पहले से तय थी. तीन चार दिन बात मैं यूट्यूब चैनल देख रहा था, तब मुझे इसके बारे में पता चला (यौन उत्पीड़न के आरोप के बारे में). एसआईटी की ओर से भेजे गए नोटिस का मैंने जवाब दिया और अपने वकील के माध्यम से मैंने पेश होने के लिए सात दिन का समय मांगा था.”
उन्होंने कहा, “मुझे न्यायपालिका में पूरा भरोसा है और मुझे विश्वास है कि मैं इस मामले से बाहर आऊंगा.”
क्या हैं आरोप

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पुलिस को दी गई शिकायत में एक कथित पीड़िता ने प्रज्वल रेवन्ना पर धमकी देने का आरोप लगाया और एक जनवरी 2021 और 25 अप्रैल 2024 के बीच उनके आधिकारिक सरकारी बंगले पर रेप करने का भी आरोप लगाया.
पीड़िता ने मैजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया है.
लेकिन पीड़िता का बोलना, परिवार को रास नहीं आया. दशकों तक जनता दल (सेक्युलर) के प्रति वफ़ादार रही दंपती को हासन शहर छोड़ना पड़ा. उसके परिवार, दोस्त, भाई-बहन सभी ने संपर्क तोड़ लिए.
कुछ लोगों ने रेवन्ना के परिवार पर उन्हें बचाने के आरोप भी लगाए हैं.
एक पीड़िता के रिश्तेदार ने पूछा, “जब वे विभिन्न सरकारी कार्यालयों में फ़ाइलों पर बारीक़ नज़र रखते हैं, तो आपको लगता है कि देवगौड़ा और एचडी रेवन्ना को अपने प्रपौत्र और बेटे की गतिविधियों के बारे में जानकारी नहीं रही होगी?”
प्रज्वल रेवन्ना के पिता एचडी रेवन्ना भी, परिवार के एक पूर्व कर्मचारी की ओर से दायर पुलिस शिकायत में एक अभियुक्त हैं. उन्होंने आरोपों से इनकार किया है और इन्हें 'राजनीतिक साज़िश' कहा है.
रेवन्ना के दादा, पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा ने भी अपने प्रपौत्र को वापस लौटने और पुलिस जांच का सामना करने के लिए कड़ी चेतावनी जारी की थी.
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर उन्होंने अपना बयान डाला, “मैं लोगों को नहीं समझा सकता कि प्रज्वल की हरकतों से अनभिज्ञ था. मैं उन्हें नहीं समझा सकता कि उसे बचाने की मेरी इच्छा नहीं है. मैं नहीं समझा सकता कि मैं उसकी आवाजाही के बारे में नहीं जानता था और कि मुझे उसकी विदेश यात्रा के बारे में नहीं पता था. मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनने में भरोसा रखता हूं. मैं ईश्वर में विश्वास रखता हूं और मुझे पता है कि सर्वशक्तिमान सच जानता है.”
राज्य महिला आयोग को एक और शिकायत मिलने के बाद राज्य सरकार ने एक एसआईटी गठित की. कथित रेप की दो अन्य शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं.
पासपोर्ट रद्द करने के लिए क्या हुई कार्रवाई?
लेकिन जिन पेन ड्राईव को सार्वजनिक जगहों पर छोड़ा गया था, उसमें रखे वीडियो में उन महिलाओं चेहरे को धुंधला नहीं किया गया था, जिनके यौन उत्पीड़न का आरोप है, इसने उनके परिवारिक रिश्तों को प्रभावित किया है.
एक्टिविस्ट रूपा हासन ने कहा, “कुछ परिवारों ने ज़िला छोड़ दिया है. कई लोग अपने घर से हफ़्तों तक नहीं निकले.”
राज्य सरकार ने प्रज्वल रेवन्ना का पासपोर्ट रद्द करने के लिए मई की शुरुआत में प्रधानमंत्री को लिखा, उसके बाद दूसरा पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई शुरु नहीं की गई.
पूर्व अभियोजक बीटी वेंकटेश ने बीबीसी को बताया, “यह माना जा सकता है कि केंद्र चार जून के बाद ही कोई कार्रवाई करेगा क्योंकि उस दिन आम चुनावों के नतीज़े आएंगे.”
विपक्ष ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.
सीपीएम नेता धर्मेश ने बीबीसी से कहा, “पेन ड्राइव सामने आने के बाद भी देवगौड़ा खुद अपने प्रपौत्र का प्रचार करने के लिए गांवों में गए. ये नहीं कहा जा सकता कि वो इससे अनभिज्ञ थे.”
ज़मीन पर असर

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जबसे सार्वजनिक जगहों पर पेन ड्राइव मिली थी, आम तौर पर दोस्ताना स्वभाव वाले हासन के लोग खुल कर बोलने से बच रहे हैं.
स्थानीय सरकारी साइंस कॉलेज की दो छात्राओं ने शुरू में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया लेकिन उनमें से एक ने कहा कि, “यह घिनौना है. हम जानते हैं कि लड़के इसके बारे में बातें करते हैं. लेकिन क्या हुआ इसके बारे में हमसे सुना भी नहीं जाता.”
एक रीयल एस्टेट एजेंट ने नाम न ज़ाहिर करते हुए कहा, "लोग अपने टीवी सेट बंद कर देते हैं क्योंकि वे केवल इस शर्मनाक प्रकरण को ही दिखाते हैं. लोग इससे तंग आ चुके हैं. हासन ने पहले इतना बुरा नाम नहीं कमाया था."
एक दुकानदार ने कहा, “परिवार के प्रभाव के कारण लोगों में नतीजे भुगतने के डर का एक माहौल है.”
कौन है ज़िम्मेदार?
ये वीडियो क्लिप बीच चुनाव जारी किए गए थे, इस पर भी बहस जारी है.
एक गृहिणी माला रविकुमार ने पूछा, “हम ये कैसे जानते हैं कि महिलाओं के ख़िलाफ़ ब्लैकमैल और ज़ोर ज़बरदस्ती की गई थी? यह राजनीति है.”
लेकिन एक्टिविस्ट रूपा हासना का मानना है कि कथित पीड़िताओं में एक बड़ी संख्या पार्टी वर्करों की है और इसीलिए पीड़िता शिकायत करने के लिए पुलिस स्टेशन तक नहीं गईं.
हालांकि कुमारस्वामी ने पार्टी वर्करों के बारे में तो कुछ नहीं कहा लेकिन रिपोर्टरों से कहा था, “मैं अपने परिवार और प्रज्वल की ओर से उनसे माफ़ी मांगता हूं (पीड़ितों से). लेकिन निश्चित जानिए कि मैं आपके लिए हरसंभव संघर्ष करूंगा.”
देवगौड़ा परिवार का प्रभाव

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राज्य में राजनतीतिक रूप से ताक़तवर वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले देवगौड़ा का हासन पर पांच दशकों से भी अधिक समय से राजनीतिक प्रभाव है.
देवगौड़ा 70 के दशक के अंतिम में कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता बने.
जब मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में कर्नाटक में पहली ग़ैर कांग्रेस सरकार बनी, उनको प्रसिद्धि मिली.
राजनीति में उनका क़द तब और ऊंचा हो गया जब 1996 में क्षेत्रीय पार्टियों के गठबंधन में उन्हें कर्नाटक के मुख्यंत्री पद से प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाया गया.
लेकिन पिछले दो दशकों से उनके बेटे एचडी रेवन्ना, ज़िले में एक ताक़तवर नेता के रूप में उभरे हैं.
एक वरिष्ठ महिला जेडीएस वर्कर ने बीबीसी को बताया कि जब पेन ड्राइव जारी की गई तो पार्टी के वर्कर बहुत “हताश और विचलित” थे.
उन्होंने कहा, “हम देवगौड़ा के परिवार जैसे ही हैं. लेकिन हममें से किसी ने भी ऐसा होने की उम्मीद नहीं की थी.”
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