अंकिता भंडारी हत्याकांडः पत्रकार की गिरफ़्तारी से एक बार फिर सुर्ख़ियों में क्यों आया?

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- Author, राजेश डोबरियाल
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, देहरादून से
उत्तराखंड का अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है. इस बार इसकी वजह एक पत्रकार की गिरफ़्तारी है.
पत्रकार पर दर्ज मुक़दमे को वापस लेने की मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता बीती 26 फरवरी से श्रीनगर में धरने पर बैठे हुए हैं, इसी बीच 5 मार्च को पत्रकार आशुतोष नेगी को गिरफ्तार कर लिया गया.
उत्तराखंड पुलिस ने आशुतोष नेगी को स्वयंभू समाजसेवी बताते हुए कहा कि उनके ख़िलाफ़ षड्यंत्र करने के सबूत मिले तो उन पर और सख़्त कार्रवाई की जाएगी.
गिरफ़्तारी और केस का विरोध

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पत्रकार आशुतोष नेगी को 5 मार्च को एससी-एसटी एक्ट में गिरफ़्तार किया गया था. उसी दिन उन पर पुलिस से अभद्रता करने और सरकारी काम में बाधा डालने का एक और मामला दर्ज कर लिया गया.
अंकिता के माता-पिता समेत स्थानीय लोग अंकिता भंडारी को इंसाफ़ दिलाए जाने की मांग के साथ ही आशुतोष नेगी पर दर्ज मामले को फ़र्ज़ी बताते हुए श्रीनगर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए थे. यह धरना अब भी चल रहा है.
आशुतोष नेगी उत्तराखंड की ख़बरों पर आधारित एक न्यूज़ पोर्टल 'जागो उत्तराखंड' चलाते हैं. वह अंकिता के गांव के ही हैं और उन्होंने अपने न्यूज़ पोर्टल के ज़रिये अंकिता भंडारी हत्याकांड को लगातार और पुरज़ोर तरीके से उठाया था.

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हालांकि अन्य मीडिया आउटलेट्स ने भी इस मामले से संबंधित ख़बरें दिखाई थीं लेकिन आशुतोष नेगी इस मुद्दे पर अंकिता के माता-पिता के साथ लगातार खड़े रहे. उन्होंने केस लड़ने के लिए फंड जुटाने में भी मदद की और एक बार तो यह भी दावा किया था कि उन्हें इस केस को उठाने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही हैं.
उन्होंने राजेश कोली के मामले को भी अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ते हुए कहा कि अंकिता भंडारी को इंसाफ़ की लड़ाई को कमज़ोर करने के लिए ही यह फ़र्ज़ी केस दर्ज करवाया गया है हालांकि स्थानीय पत्रकार इस बात से सहमत नहीं दिखते.
अंकिता के माता-पिता ने भी पुलिस और प्रशासन से आशुतोष नेगी पर दर्ज केस वापस लेने की मांग की थी.
आशुतोष नेगी को समर्थन

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मूल निवास भू कानून समन्वय संघर्ष समिति ने अंकिता भंडारी के माता-पिता के धरने को समर्थन दिया और इसके नेता श्रीनगर में धरने पर बैठे भी. आशुतोष नेगी की गिरफ़्तारी के बाद समिति ने देहरादून में विरोध प्रदर्शन भी किया.
कांग्रेस ने भी अंकिता भंडारी के माता-पिता के धरने का समर्थन किया. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और पौड़ी के पूर्व विधायक गणेश गोदियाल 7 मार्च को श्रीनगर में निकाले गए मशाल जुलूस में अंकिता के परिजनों के साथ शामिल हुए.
यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा- "पत्रकार आशुतोष नेगी का गुनाह सिर्फ इतना है कि वो #justiceForAnkitaBhandari के लिए लगातार भाजपा के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रहे थे. आखिर कौन था वो वीवीआईपी जिसको बचाने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी मशीनरी झोंक रखी है?"
आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने एक्स पर लिखा- "उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी की हत्या के विरोध में परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की तो पुलिस ने उल्टा इस हत्या को रिपोर्ट करने वाले पत्रकार को ही गिरफ्तार कर लिया! अपराधियों को गिरफ़्तार करने की बजाय, व्हिसलब्लोअर को गिरफ़्तार करने से क़ानून व्यवस्था कैसे सुधरेगी?"
आरोप लगाने वालों का एजेंडा हैः डीजीपी

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उत्तराखंड के डीजीपी अभिनव कुमार ने आशुतोष नेगी की गिरफ़्तारी के मामले पर बात करते हुए समाचार एजेंसी एएनआई को कहा, "जो भी लोग इसकी गिरफ़्तारी पर, पुलिस पर या सरकार पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं, वह या तो भावनाओं में बह रहे हैं या उनका अपना कोई एजेंडा है."
उन्होंने कहा कि वह साफ़ करना चाहते हैं कि अंकिता भंडारी केस की जांच के दौरान पुलिस पर कोई दबाव नहीं था. सरकार की ओर से, मुख्यमंत्री जी की ओर से पुलिस को इस केस में पूरा समर्थन मिला कि सबूतों के आधार पर केस में सख़्त से सख़्त कार्रवाई करे.
डीजीपी ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस ने जो कार्रवाई की है वह निष्पक्ष और निर्भीक होकर की है.
उन्होंने कहा, "आशुतोष नेगी की गिरफ़्तारी को लेकर जो भी लोग अंकिता भंडारी केस को जोड़ रहे हैं, उसके बारे में अनर्गल कयास लगा रहे हैं, मेरी बस उनसे- सभी नागरिकों से हाथ जोड़कर अपील है कि कृपया इस प्रकार की अफ़वाहों पर ध्यान न दें."

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आशुतोष नेगी को लेकर सख़्ती दिखाते हुए डीजीपी ने कहा, "आशुतोष नेगी जैसे जो स्वयंभू, तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता हैं, इनका मक़सद मेरी समझ से कुछ और है. इन्हें अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं है. इनका मक़सद हमारे समाज में अराजकता फैलाना है, वैमनस्य फैलाना है."
उन्होंने चेतावनी देने के लहजे में कहा, "और जिस प्रकार से लग रहा है कि यह बहुत बड़ा षड्यंत्र है, इसकी भी पुलिस जांच कर रही है और अगर जांच में कुछ तथ्य आते हैं तो इनके ख़िलाफ़ और सख़्त कार्रवाई की जाएगी."
केस क्या है?

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मई 2022 में राजेश कोली नाम के एक व्यक्ति ने आशुतोष नेगी समेत 4 लोगों के ख़िलाफ़ अभद्रता करने और जातिसूचक शब्द कहने का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी थी.
इस पर जब 31 दिसंबर, 2023 तक मुक़दमा दर्ज नहीं हुआ तो राजेश कोली ने एक जनवरी, 2024 को एसएसपी ऑफ़िस के बाहर धरना दिया और फिर 4 जनवरी को डीएम ऑफ़िस के बाहर धरना दिया.
इसके बाद 5 जनवरी को आशुतोष नेगी और अन्य नामजदों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया गया. हालांकि पुलिस का कहना था कि इस मामले की जांच सीओ सदर कर रहे थे और उनकी जांच में मामला सही पाया गया तो मुक़दमा दर्ज किया गया.
एक स्थानीय पत्रकार ने बीबीसी को बताया कि राजेश कोली भी सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्ति हैं और आरटीआई एक्टिविस्ट भी हैं. उन्होंने कुछ अशासकीय विद्यालयों में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत की थी जिनमें से एक के प्रबंधक आशुतोष नेगी के मित्र भी थे.
कहा जा रहा है कि आशुतोष नेगी शिकायत वापस लेने को लेकर दबाव बना रहे थे और इसी को लेकर दोनों के बीच तनातनी हुई थी.
5 जनवरी को गिरफ़्तारी से पहले आशुतोष नेगी लगातार अपनी गिरफ़्तारी की आशंका जता रहे थे और अंकिता भंडारी को न्याय की लड़ाई कमज़ोर न होने देने की अपील कर रहे थे.
दूसरी तरफ़ राजेश कोली लगातार उनकी गिरफ़्तारी का दबाव बनाए हुए थे. उनकी शिकायत पर आशुतोष नेगी समेत दो लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है और दो की गिरफ़्तारी की कोशिशें की जा रही हैं.
अंकिता भंडारी हत्याकांड

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उत्तराखंड के ज़िले पौड़ी गढ़वाल के डोभ श्रीकोट की रहने वाली अंकिता भंडारी ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला थाना क्षेत्र और चीला के बीच मौजूद वंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी कर रही थी. 20 तारीख़ को अंकिता के लापता होने की ख़बर मिली थी. 24 तारीख़ को सवेरे चीला नहर से अंकिता का शव बरामद किया गया था.
पुलिस के अनुसार 19 वर्षीय अंकिता की हत्या रिज़ॉर्ट संचालक और भाजपा नेता और पूर्व राज्यमंत्री विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य, रिज़ॉर्ट मैनेजर सौरभ भास्कर और एक अन्य कर्मी अंकित ने की थी.
पुलकित के भाई अंकित भी उत्तराखंड में अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष थे, जिन्हें यह मामला सामने आने के बाद इस पद से हटा दिया गया था.
पुलिस का कहना था कि अंकिता को 'अनैतिक कार्य' के लिए मजबूर किया जा रहा था और जब अंकिता ने इस बारे में दूसरों को बताने की धमकी दी तो उनकी हत्या कर दी गई.
इस मामले में पुलिस की जांच और मुकदमे की पैरवी पर अंकिता के माता-पिता लगातार सवाल उठाते रहे हैं. उनका आरोप है कि सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है.
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