अंकिता भंडारी मर्डर केस: उनके वॉट्सऐप चैट में क्या मिला- प्रेस रिव्यू

इमेज स्रोत, ANI

ख़ास बातें
- उत्तराखंड के लक्ष्मण झूला इलाक़े के एक रिसोर्ट की रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी का शव छह दिन बाद एक नहर से मिला
- एम्स-ऋषिकेश में अंकिता भंडारी का पोस्टमॉर्टम हुआ, शुरुआती रिपोर्ट में मौत से पहले पिटाई की बात सामने आई
- अंकिता का शव अंतिम संस्कार के लिए पौड़ी-गढ़वाल के श्रीनगर में अंतिम संस्कार के लिए भेजा गया
- पुलिस ने मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य, रिसॉर्ट के मैनेजर और एक व्यक्ति को अब तक गिरफ़्तार किया
- हत्या की जांच के लिए उत्तराखंड पुलिस ने डीआईजी के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया

उत्तराखंड के अंकिता भंडारी मर्डर केस में शनिवार को एक नहर से पुलिस ने छह दिन बाद शव बरामद कर लिया.
19 साल की अंकिता लक्ष्मण झूला इलाक़े में एक रिसॉर्ट की रिसेप्शनिस्ट थीं और बीते छह दिनों से लापता थीं. इस मामले में शुक्रवार को पुलिस ने रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य को गिरफ़्तार कर लिया था वो राज्य के पूर्व मंत्री विनोद आर्य के बेटे हैं.
पुलकित के अलावा इस मामले में रिसॉर्ट के मैनेजर सौरभ भास्कर और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है.
द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार से बातचीत में उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा है कि पुलिस को ऐसे सुबूत मिले हैं जो बताते हैं कि अभियुक्त अंकिता पर रिसॉर्ट में आने वाले कुछ मेहमानों को 'स्पेशल सर्विस' देने का दबाव डाल रहे थे, जिसका विरोध करने पर उनकी हत्या कर दी गई.
अंकिता के परिजनों ने अख़बार से कहा है कि अंकिता ने 28 अगस्त को रिसॉर्ट में नौकरी शुरू की थी जो कि उसके गाँव दोभ श्रीकोट से 130 किलोमीटर दूर था.

इमेज स्रोत, ANI
परिवार की मदद के लिए शुरू की थी नौकरी

अंकिता की चाची लीलावती ने अख़बार से कहा, "परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण उन्होंने 12वीं के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ दी और काम करना शुरू कर दिया. अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी सिक्यॉरिटी गार्ड की नौकरी करते थे लेकिन कुछ सालों पहले उनकी नौकरी चली गई. परिवार में इकलौता कमाने वाला सिर्फ़ उनकी मां सोनी भंडारी थीं जो एक आंगनवाड़ी कर्मचारी हैं. उनका बड़ा भाई सचिन दिल्ली में पढ़ता है."
लीलावती ने बताया, "परिवार की स्थिति अच्छी नहीं थी और इसी वजह से जब उन्हें रिसॉर्ट में नौकरी मिली तो उन्होंने गाँव छोड़ दिया. हमें नहीं पता कि उनसे कैसे संपर्क किया गया था लेकिन 28 अगस्त को रिसॉर्ट से एक कार उन्हें लेकर गई थी. रिसॉर्ट में एक कमरा उन्हें दिया गया था और उन्हें वहीं रहना था. रिसेप्शनिस्ट की नौकरी के लिए उन्हें हर महीने 10,000 रुपये तनख़्वाह दी जानी थी लेकिन हमें नहीं पता था कि पहली तनख़्वाह मिलने से पहले ही वे उसे मार डालेंगे."
एम्स-ऋषिकेश की मॉर्चरी के बाहर शव का इंतज़ार कर रहीं लीलावती ने बताया कि अंकिता आगे पढ़ना चाहती थीं लेकिन परिवार के लिए पढ़ाई छोड़ने से वो निराश थीं.
उन्होंने कहा, "हम सोच रहे थे कि जो वो कर रही हैं शायद उसमें उसका भविष्य होगा. हालांकि कुछ सप्ताह के बाद ही वो छोड़ गईं, उनकी मां ने मुझे बताया था कि अंकिता पहले की तरह नहीं लग रही थीं और ऐसा लग रहा था कि उनको कुछ परेशान कर रहा था. उस समय हमने इसके बारे में ज़्यादा सोचा नहीं था. शायद हमें सोचना चाहिए था."

इमेज स्रोत, ANI
'स्पेशल सर्विसेज़' देने का था दबाव: डीजीपी

डीजीपी अशोक कुमार ने बताया है कि पुलिस को अंकिता और उसकी जम्मू में रह रही एक दोस्त के बीच व्हाट्सऐप चैट मिली है.
डीजीपी ने कहा, "मैसेज में उन्होंने (अंकिता ने) साफ़ किया है कि वे (अभियुक्त) चाहते थे कि वो 'स्पेशल सर्विसेज़' दे. उनकी दोस्त और वो चैट हमारे पास बड़ा सुबूत है. हमको शव उसी नहर (चिल्ला पावर हाउस के पास शक्ति नहर) में मिला है, जहाँ पर अभियुक्त ने उसे धक्का देने की बात स्वीकार की थी."
अख़बार ने पुलिस सूत्रों के हवाले से लिखा है कि व्हाट्सऐप चैट में अंकिता ने बताया था कि वो रिसोर्ट में असुरक्षित महसूस कर रही है क्योंकि एक अभियुक्त ने कथित तौर पर उसे 10,000 रुपये के बदले 'स्पेशल सर्विसेज़' देने को कहा है.
पुलकित के वनंत्र रिसॉर्ट का एक हिस्सा पौड़ी गढ़वाल प्रशासन ने 'अवैध निर्माण' बताते हुए ढहा दिया है. इस हिस्से में वो कमरा था जिसमें अंकिता रहती थीं, इसके अलावा रिसेप्शन एरिया और रिसॉर्ट का आगे का हिस्सा था.
यह क़दम तब उठाया गया है जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी ज़िला मैजिस्ट्रेट्स को अपने-अपने इलाक़ों के रिसॉर्ट्स के बारे में जांच करने के लिए कहा है. अवैध तौर पर जारी रिसॉर्ट के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को भी कहा गया है.
धामी ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन डीआईजी पी. रेणुका देवी के नेतृत्व में किया है जो इस हत्या मामले की जांच करेगी.

इमेज स्रोत, ANI
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या आया सामने

बीजेपी ने पुलकित के पिता विनोद आर्य और उसके बड़े भाई अंकित आर्य को पार्टी से बर्ख़ास्त कर दिया है. अंकित आर्य को उत्तराखंड ओबीसी कमिशन के उपाध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया है.
हालांकि इस कार्रवाई के बाद भी स्थानीय लोगों में इस हत्या के बाद ग़ुस्सा कम नहीं हुआ है.
अंकिता का शव मिलने और उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने के बाद ग़ुस्साए प्रदर्शनकारियों ने रिसोर्ट के पीछे के हिस्से में लगी प्रोसेसिंग यूनिट में आग लगा दी. कुछ प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय बीजेपी विधायक रेणु बिष्ट की गाड़ी पर भी हमला किया.
पोस्टमॉर्टम के बाद अंकिता के शव को पौड़ी गढ़वाल ज़िले के श्रीनगर में अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया गया है.
अंकिता के पोस्टमॉर्टम के बाद आई प्रोविज़नल रिपोर्ट के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार ने ख़बर छापी है.
अख़बार लिखता है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि अंकिता की मौत डूबने से हुई थी लेकिन उससे पहले शारीरिक तौर पर उसे बहुत प्रताड़ित किया गया था.
एम्स-ऋषिकेश के फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टोक्सिकोलोजी डिपार्टमेंट ने पोस्टमॉर्टम किया है जिसमें मौत से पहले मारपीट की बात सामने आई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि किस प्रकार की चोटें शरीर पर हैं उसकी जानकारी पोस्टमॉर्टम की विस्तृत रिपोर्ट में दी जाएगी.

इमेज स्रोत, ANI
राजस्थान का नया सीएम कौन होगा?

राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों के बीच कांग्रेस पार्टी ने रविवार, 25 सितंबर को जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाई है. इस बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राजस्थान प्रभारी अजय माकन भी मौजूद रहेंगे.
दैनिक जागरण अख़बार लिखता है कि राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए लॉबिंग तेज़ हो गई है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का उत्तराधिकारी चुनने को लेकर कांग्रेस विधायक दल की रविवार शाम सात बजे मुख्यमंत्री निवास पर बैठक बुलाई गई है.
खड़गे और अजय माकन सीएम पद को लेकर विधायकों से राय लेने के साथ ही पार्टी आलाकमान का फ़ैसला भी सुना सकते हैं.
पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमे के नेताओं का कहना है कि गांधी परिवार की तरफ़ से उन्हें अगला सीएम बनाए जाने के संकेत मिल गए हैं. हालांकि, गहलोत अब भी पायलट को सीएम बनाए जाने के पक्ष में नहीं हैं.
अख़बार के मुताबिक़, गहलोत खेमे ने पहले विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का नाम आगे किया था, लेकिन अब कृषि मंत्री लालचंद कटारिया के समर्थन में चर्चा शुरू हो गई है.

ये भी पढ़ें..

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














