उत्तराखंड: अंकिता भंडारी हत्या मामले में अब तक जो बातें पता है

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- Author, शहबाज़ अनवर
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

उत्तराखंड के एक रिज़ॉर्ट में अंकिता की हत्या का मामला.
20 तारीख़ को अंकिता के लापता होने की ख़बर परिवार को मिली. 24 तारीख़ को सवेरे चीला नहर से अंकिता का शव मिला.
हत्या का आरोप रिज़ॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और अन्य दो लोगों पर है.
पुलकित भाजपा नेता और पूर्व राज्यमंत्री विनोद आर्य के बेटे हैं.राज्य सरकार ने बनाई एसआईटी और दिए जल्द जांच के आदेश.

उत्तराखंड के जनपद पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर ब्लॉक में मौजूद वंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या की मीडिया में ख़ूब चर्चा हो रही है.
पुलिस का कहना है कि लगभग 19 वर्षीय अंकिता की हत्या रिज़ॉर्ट संचालक और भाजपा नेता और पूर्व राज्यमंत्री विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य, रिज़ॉर्ट मैनेजर सौरभ भास्कर और एक अन्य कर्मी अंकित ने की है.
पुलकित के भाई अंकित भी उत्तराखंड में अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष हैं, हालांकि, उन्हें अब इस पद से हटा दिया गया है.
पुलिस के मुताबिक़ अंकिता को 'अनैतिक कार्य' के लिए मजबूर किया जा रहा था और जब अंकिता ने इस बारे में दूसरों को बताने की धमकी दी तो उनकी हत्या कर दी गई. शनिवार को अंकिता का शव ऋषिकेश- हरिद्वार मार्ग पर चीला शक्ति नहर के पावर हाउस के पास बरामद किया गया है.
अंकिता उत्तराखंड के ही जनपद पौड़ी गढ़वाल के डोम श्रीकोट की रहने वालीं थीं. वो ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला थाना क्षेत्र और चीला के बीच मौजूद वंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्सिनिस्ट की नौकरी कर रही थीं.
इस बारे में उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा, "वंतरा रिज़ॉर्ट लक्ष्मण झूला थाना क्षेत्र और चीला के बीच स्थित है. ये राजस्व पुलिस का क्षेत्र पड़ता है. 22 सितंबर को विवेचना रेग्यूलर पुलिस को मिली और 24 घंटे के भीतर अंकिता हत्याकांड के सभी अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया."

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क्या है परिवार का आरोप?

अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी को सूचना मिली कि उनकी बेटी वंतरा रिज़ॉर्ट से ग़ायब हैं. उन्होंने मीडिया से कहा, "मेरी बेटी 28 अगस्त को वंतरा में रिसेप्सिनिस्ट की नौकरी करने के लिए आई थी. मुझे 19 सितंबर को पता चला कि मेरी बेटी लापता है. मुझे ये जानकारी होटल मालिक ने दी. साथ कुछ अन्य लड़कों ने भी मुझे ये जानकारी दी. इसके बाद शाम को ही मैं वहां से चल दिया."
वह बताते हैं, "हमने अपनी बेटी के लापता होने की रिपोर्ट राजस्व पुलिस को दी, लेकिन उन्होंने हमारी रिपोर्ट नहीं लिखी. हमें वह होटल मालिक के पक्ष में दिखे."
यमकेश्वर तहसील का चार्ज देख रहे एसडीएम कोटद्वार प्रमोद कुमार ने मीडिया से कहा, "मामले से संबंधित सभी मोबाइल नंबर सर्विलांस पर डालने के लिए थाने भेजे गए थे. उनकी कॉल डीटेल्स निकालने के लिए पुलिस के माध्यम से एसओजी से भी बात हो गई थी. जैसे ही मामला गंभीर हुआ तत्काल डीएम से वार्ता कर इस मामले को रेग्यूलर पुलिस को ट्रांसफ़र कर दिया गया."
अंकिता के परिवार में उनके पिता वीरेंद्र भंडारी, भाई अजय भंडारी और मां सोनी देवी हैं.
स्थानीय पत्रकार जितेंद्र जोशी कहते हैं, "अंकिता भंडारी ने हाल ही में श्रीकोटा से 12वीं कक्षा पास की थी. वह अब होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रहीं थी. उनकी मां आंगनबाड़ी में काम करती हैं और उनका भाई एक निजी कंपनी में छोटी-मोटी जॉब करते हैं."
पिता के बारे में वह बताते हैं कि वह पहले एक एनजीओ चलाते थे, उसके बाद उन्होंने एक जगह छोटी-मोटी नौकरी की पर कोविड के बाद से वह ख़ाली थे. परिवार की आर्थिक स्थित बेहतर नहीं है इसी कारण अंकिता नौकरी कर रही थीं.
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पुलिस ने क्या कहा?

पौड़ी के एडिशनल सुपरिंटेन्डेंट ऑफ़ पुलिस (एएसपी) शेखर सुयाल ने बीबीसी से कहा, "वंतरा रिज़ॉर्ट में काम करने वाली अंकिता भंडारी अचानक लापता हो गई थीं. इस बारे में 20 सितंबर को पिता की तहरीर पर राजस्व पुलिस में युवती की गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी. ज़िलाधिकारी पौड़ी के निर्देशानुसार 22 सितंबर को ये मामला रेग्यूलर पुलिस को हस्तांतरित किया गया."
एएसपी ने कहा, "पुलिस को केस हस्तांरित होने के बाद हमने आला अधिकारियों के निर्देश पर तेज़ी से काम किया. मोबाइल ट्रेसिंग, सीसीटीवी की कवरेज सर्विलांस पर लिए गए. 23 सितंबर की शाम को ही पुष्टि हो गई थी कि रिज़ॉर्ट से बाहर जाने वालों में पुलकित, सौरभ और अंकित के साथ अंकिता भंडारी थीं जबकि अंकिता को छोड़ तीनों लोग वापस लौट आए थे."
एएसपी ने कहा, "जब सख़्ती से पुलकित, अंकित और सौरभ से पूछताछ की गई तो उन्होंने ख़ुद माना कि किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ, हाथापाई हुई और उन्होंने अंकिता को नहर में गिरा दिया. शुरू में अभियुक्तों ने पुलिस को गुमराह किया, बाद में ख़ुद ही वादी बन गए थे."
एक सवाल के जवाब में एएसपी ने कहा, "अभियुक्त अंकिता भंडारी पर संभवतः किसी अनैतिक कार्य के लिए दबाव डाल रहे थे, लेकिन वह ये सब करने को तैयार नहीं थी. इसी बात को लेकर पुलकित, सौरभ और अंकित से कहासुनी हुई और अंकिता की हत्या कर दी गई."

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अंकिता को लेकर सहानुभूति

अंकिता भंडारी की हत्या के मामले को लेकर क्षेत्र में लोगों की सहानुभूति देखी जा सकती है.
इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराज़गी है. शनिवार को गुस्साए लोगों ने रिज़ॉर्ट में आग लगा दी.
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ब्लॉक प्रमुख दियुली रूचि कुकरेती कहती हैं, "क्षेत्र में जो घटना हुई शर्मनाक है. मेरा मानना है कि प्रशासन की ओर से इसमें काफ़ी देरी हुई है जबकि पहले ही लोगों को ये अंदेशा हो गया था कि घटना किस कारण हुई है. हम चाहते हैं कि अभियुक्तों के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो."
वहीं क्षेत्रीय ज़िला पंचायत सदस्य क्रांति कपूर्वाण भी ग़ुस्से में नज़र आते हैं. वह कहते हैं कि घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी का एक भी नेता यहां नहीं था.

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इस मामले पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने अफ़सोस जताया है.
उन्होंने कहा, "घटना बहुत दुखद है. उत्तराखंड ने एक नौजवान बेटी खोई है. इस मामले को लेकर पौड़ी के तमाम आला अधिकारियों से मेरी बात चल रही थी. सभी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, फास्ट ट्रैक पर होनी चाहिए. उत्तराखंड का समाज इसको बर्दाश्त नहीं करेगा. उत्तराखंड के ये संस्कार भी नहीं हैं."

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी ने मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य के पिता विनोद आर्य और भाई अंकित आर्य को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निकाल दिया है.
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संवाददाताओं से बात करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि "जो भी इसमें शामिल है उनके ख़िलाफ़ हम कार्रवाई कर रहे हैं. अपराधियों को जेल में डाल दिया गया है."
"ये रिज़ॉर्ट सरकारी और वनभूमि पर बना था इसलिए उसे ध्वस्त करने की कार्रवाई चल रही है. साथ ही फॉरेंसिक जांच के आदेश दिए गए हैं. एविडेंस सुरक्षित रहे इसके लिए कुछ कमरों को प्रशासन ने सील कर दिया है."
"जांच के लिए उप महानिरीक्षक रेणुका देवी के नेतृत्व में स्पेशल जांच टीम का गठन किया गया है. हम चाहते हैं कि कोई पहलू जांच में न छूटे. सरकार इसे फास्ट ट्रैक पर ले जाए इसकी पूरी कोशिश की जाएगी."
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