मानीज़ा: ओलंपिक का ख़्वाब संजोए 'कभी हार न मानने वाली' अफ़ग़ान लड़की चली पेरिस

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- Author, कवून ख़ेमोश
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
मानिज़ा तलाश इस गर्मी में पेरिस में इतिहास रचने वाली हैं. वह ओलंपिक खेलों में इस साल शामिल होने वाले ब्रेकिंग - स्ट्रीट डांस की एक शैली के मुकाबले में शामिल होने वाले सबसे पहले लोगों में से एक होंगी.
हालांकि मानीज़ा अपने देश अफ़ग़ानिस्तान का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगी. वे रिफ़्यूजी ओलंपिक टीम का हिस्सा होंगी. अगस्त 2021 में तालिबान की वापसी के बाद वहां लड़कियों का खेलों में हिस्सा लेने बंद हो चुकी है.
मानिज़ा की पेरिस की राह आसान नहीं रही है.
वह अफ़ग़ानिस्तान में पली-बढ़ी हैं, जहां उन्हें धमकियों, बमों का सामना करना पड़ा है और तालिबान की सत्ता में वापसी को झेलना पड़ा है.
मानिज़ा उस दोपहर को याद करते हुए बताती हैं, जब अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में उनके प्रशिक्षण क्लब पर हमला करने की कोशिश करन वाले एक चरमपंथी को गिरफ़्तार किया गया था.
वे बताती हैं, "सुरक्षा बलों ने हमारे क्लब में दाख़िल हुए, एक आदमी के पास गए और उसके सिर पर हुड डाल दिया. उन्होंने हमें कहा कि इस बार बचा गए हो और अगर हमें अपनी जानें प्यारी हैं, तो हमें इस क्लब को बंद कर देना चाहिए."
यह पहली बार नहीं था जब इस दल पर ख़तरा मंडराया था. एक साल पहले, 2020 में, उसी सड़क पर एक कार बम में विस्फ़ोट हुआ था जिस पर यह क्लब स्थित है.
21 वर्षीय मानिज़ा स्वीकार करती हैं कि वो उस दिन सचमुच बहुत डर गई थीं.
उन्होंने अपना अंतिम नाम बदलकर तलाश कर लिया, जिसका अर्थ फ़ारसी में "कोशिश" या "कड़ी मेहनत" है और ब्रेकिंग को जारी रखा.
नाम में यह बदलाव सिर्फ़ प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि उन्हें यह भी उम्मीद थी कि अगर उन्हें खेल से जुड़े रहने की वजह से धमकियां दी गईं तो इससे उनका परिवार बच सकेगा.
लेकिन जैसे-जैसे अफ़ग़ानिस्तान में तनाव बढ़ता गया, मानिज़ा का प्रिय क्लब सुरक्षा कारणों से बंद हो गया.
जब 2021 में विदेशी सेनाओं ने अफ़ग़ानिस्तान को पूरी तरह से छोड़कर वापसी कर ली और देश में तालिबान ने फिर से शासन करना शुरू कर दिया, तब नृत्य और संगीत पर प्रभावी रूप से प्रतिबंध लग गया.
लेकिन इसमें से कुछ भी मानिज़ा की इस उम्मीद पर ग्रहण नहीं लगा सका कि वह फिर से ब्रेक करेंगी.
मानिज़ा ने ब्रेकिंग देर से शुरू की थी

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बचपन में उन्होंने अपने पिता के साथ काबुल की सड़कों पर उनकी रेहड़ी से किराने का सामान बेचने का काम किया था.
उस समय अफ़ग़ानिस्तान में एक लड़की के लिए ऐसा काम करना असामान्य था और ख़तरनाक साबित हो सकता था. उन्होंने खुद की सुरक्षा करने के लिए शूट बॉक्सिंग, एक तरह की जापानी मार्शल आर्ट जिसमें कुश्ती और किक बॉक्सिंग का मिश्रण होता है, सीखना शुरू कर दिया. लेकिन कुछ मैचों में उनका कंधा टूट गया और उन्हें इसे तिलांजलि देनी पड़ी.
जब वह किशोरी थीं तब उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो देखे और उन्हें काबुल में स्थित एक ब्रेकिंग संस्था सुपीरियर्स क्रू के बारे में पता चला और उन्हें उससे प्यार हो गया.
वह कहती हैं, "मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि यह सच था."
मानिज़ा को सुपीरियर्स क्रू के बारे में पता चलना और ब्रेकिंग के पेरिस 2024 ओलंपिक में पदार्पण करने की घोषणा साथ-साथ ही हुई.
वह 17 साल की थीं और उन्होंने ओलंपिक में मुकाबला करने का सपना देखना शुरू कर दिया था. बस उन्हें वहां पहुंचना ही था.
वह पश्चिमी काबुल में सुपीरियर्स क्रू के प्रशिक्षण क्लब पहुंचीं, जिसे देश के हिप-हॉप और ब्रेकिंग के अग्रणी केंद्र के रूप में माना जाता था, लेकिन यह वैसा नहीं था जैसी उन्हें उम्मीद थी.
मानिज़ा याद करती हैं, "जब मैंने क्लब में प्रवेश किया तो वह लड़कों से भरा हुआ था."
सुपीरियर्स क्रू के कोच जवाद सबेरी ने भी तुरंत उनके आकार को लेकर राय बना ली.
वह बताते हैं, "वह बहुत छोटी सी थी".
वह कहते हैं, "मुझे आशंका थी क्योंकि कुछ अन्य बी-गर्ल्स थीं जो लंबे समय तक रहीं नहीं."
वह बी-गर्ल्स का इस्तेमाल ब्रेकिंग करने वाली महिला कलाकार के लिए करते हैं और ऐसे लोगों के क्लब को निशाना बनाने का ज़िक़्र करते हैं जो इस खेल को पसंद नहीं करते.
हालांकि, जवाद की बातों में सराहना भी थी.
वह कहते हैं, "हम पर हमला हो रहा था, लेकिन वह वापस आ गई, मुझे दिखा कि उसका पेरिस-2024 जाने का सपना था - वह उसके लिए लड़ रही थी. मैंने कहा: 'वह यह कर सकती है.' मैंने भविष्य देखा."
दिक्कतों से जूझ रही थीं मानिज़ा

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इस समय मानिज़ा का पारिवारिक जीवन भी मुश्किलों भरा था. एक ख़ौफ़नाक झटका तब लगा जब उनके पिता का घुसपैठियों ने अपहरण कर लिया. उसके बाद से उन्हें किसी ने नहीं देखा.
अब वह अपने परिवार की मुख्य कमाऊ सदस्य बन गई थीं. अपनी मां, बहन और दो भाइयों को पालने के लिए पहले उन्होंने किराने का सामान बेचा और फिर अस्पताल में काम किया.
हर हफ़्ते वह अपनी कमाई का एक हिस्सा प्रशिक्षण के लिए भुगतान करने के लिए बचाती थीं और अपनी मां को यह यकीन दिलाती थीं कि इस खेल में शामिल होकर वह एक काम का कौशल हासिल कर रही हैं.
मानिज़ा कहती हैं. "ज़्यादातर लोगों को यह भ्रम होता है कि यह नृत्य है, लेकिन मेरा मानना है कि यह एक खेल है क्योंकि इसके लिए आपको शारीरिक रूप से मज़बूत होने और ताकत के साथ चालें चलने की ज़रूरत होती है."
लेकिन जवाद और सुपीरियर्स क्रू संस्था के साथ ही मानिज़ा का ब्रेकिंग के प्रति जुनून जोखिम भरा था और लोग इससे खुश नहीं थे.
क्लब के बाहर 2020 की बमबारी का ज़िक़्र करते हुए वह कहती हैं, "पहले सोशल मीडिया पर कमेंट आए, जिन्हें मैंने गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन जब 2020 में क्लब के बाहर बम हमला हुआ तो इसने वास्तव में मुझे डरा दिया,"
हालांकि ,वह विस्फोट से बहुत डरी हुई थीं और क्लब पर बमबारी करने की कोशिश करने वाले व्यक्ति की गिरफ़्तारी के बाद क्लब भी बंद हो गया था, लेकिन मानिज़ा ने ब्रेकिंग करना बंद नहीं किया.
वह घर में उपलब्ध बेहद कम जगह में अभ्यास करती थीं. लेकिन जैसे-जैसे काबुल में सुरक्षा स्थिति खराब होती गईं, वह इस बारे में परेशान होने लगीं कि पड़ोसी उनके प्रशिक्षण जारी रखने के बारे में क्या सोच रहे होंगे.
तालिबान के सत्ता में लौटने का असर

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फिर, 2021 में, तालिबान सत्ता में लौट आया और उन्होंने शरिया (इस्लामी धार्मिक कानून) की अपनी सख़्त व्याख्या के अनुरूप उसे लागू कर दिया.
किशोरियों और महिलाओं को कक्षाओं और जिमों से बाहर कर दिया गया और फ़ैसला सुनाया गया कि महिलाओं को सिर से पैर के अंगूठे तक को ढकने वाले कपड़े पहनने चाहिए.
संगीत और नृत्य पर भी प्रभावी रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया और ब्रेकिंग बंद हो गई.
नए प्रतिबंधों के चलते मानिज़ा और उसके ब्रेक डांस करने वाले दोस्तों को एक फ़ैसला लेने पर मजबूर होना पड़ा - उन्हें देश छोड़ना पड़ा.
वह कहती हैं, "अगर मैं अफ़ग़ानिस्तान में रहती, तो मुझे नहीं लगता कि मैं ज़िंदा बचती. या तो वे मुझे मौत की सज़ा दे देते या पत्थर मार-मारकर जान ले लेते."
मानिज़ा और सुपीरियर्स क्रू के कुछ सदस्य, जिनमें जवाद भी शामिल हैं, स्पेन के मैड्रिड भाग गए.
उन्होंने वह हर काम ढूंढने की कोशिश की, जो वे कर सकते थे और अपने परिवारों को घर पैसा भेजा. उन्होंने ब्रेकिंग करने वाले स्थानीय लोगों से संपर्क बनाए और जहा मौका मिला, वहीं अभ्यास किया- क्लबों में, सड़कों पर और यहां तक कि शॉपिंग मॉल में भी.
लेकिन यह सब आसान नहीं था.
मानिज़ा स्वीकार करती हैं, "हर रात जब मैं बिस्तर पर जाती थी, तो मुझे बहुत सारे सवालों से जूझना पड़ता था."
मैं खुद से पूछती थी. "अफ़ग़ान महिलाएं क्या कर सकती हैं? मैं उनके लिए कुछ क्यों नहीं कर सकती?"
वह जानती थीं कि तालिबान की वापसी के बाद, वह ओलंपिक में अपने देश के लिए नहीं खेल पाएंगी. इसने महिलाओं के खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया था और यह महिला एथलीटों को खेलों में नहीं भेजने वाला था.
''अफ़ग़ान लड़कियां हार नहीं मानेंगी''

लेकिन मानिज़ा के पास पेरिस जाने का एक और रास्ता था.
उन्हें पता चल गया था कि वह रिफ़्यूजी ओलंपिक टीम की ओर से मुकाबले में हिस्सा लेने के लिए पात्र थीं. यह टीम उन एथलीटों के लिए थी जिनके देशों में संघर्ष या गृहयुद्ध चल रहा हो, जिससे उनके लिए वापसी बहुत ख़तरनाक हो जाती है.
मई में, वह खेलों में रिफ़्यूजी टीम का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनी गई एथलीटों में से एक थीं और अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने उनके लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था करने में मदद की.
मानिज़ा कहती हैं, "जब उन्होंने मेरे नाम की घोषणा की तो, तो मैं एक ही साथ खुश और परेशान दोनों हुई. मुझे दुख इसलिए था क्योंकि जब मैंने अफ़ग़ानिस्तान छोड़ा था, तो मुझे अपने परिवार को पीछे छोड़ना पड़ा था. मैंने उनकी सुरक्षा के मुकाबले अपने लक्ष्य को तरजीह दी थी."
उन्हें चिंता थी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबले के लिए चुने जाने से उनकी मां और भाई-बहनों को ख़तरा हो सकता है.
लेकिन उनके चुने जाने की घोषणा के बाद, मानिज़ा को ख़बर मिली कि उनका परिवार अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने में कामयाब हो गया है. दो साल से अधिक समय के अलगाव के बाद अब वे स्पेन में उनके साथ आ गए हैं.
अपने परिवार के साथ आने के बाद अब उनका ध्यान आने वाली चुनौती पर है.
वह स्वीकार करती हैं, "ओलंपिक की तैयारी वाकई मुश्किल है. मैं किसी ऐसे व्यक्ति के साथ तैयारी कर रही हूं जिसके पास 21 साल का अनुभव है. तो जैसे-जैसे मैं ओलंपिक के लिए तैयारी कर रही हूं, मुझे उन सभी खोए हुए वर्षों की भरपाई भी करनी होगी."
मानिज़ा का कहना है कि यह संभावना काफ़ी क्षीण है कि वह पेरिस से पदक लेकर घर आएंगी, लेकिन पोडियम पर जगह बनाना उनकी प्राथमिकता नहीं है.
वह कहती हैं, "मैं अपने दोस्तों के लिए और उनके सपनों और आशाओं के लिए मुक़ाबला करूंगी." इस विश्वास के साथ कि उनकी उपस्थिति से एक महत्वपूर्ण संदेश जाएगा.
"अफ़ग़ानिस्तान की लड़कियां कभी हार नहीं मानेंगीं. आप अफ़ग़ानी लड़की पर जो भी दबाव डालेंगे, उस पर प्रतिबंध लगाएंगे या उसे जेल में भी डाल देंगे - निश्चित रूप से वह बाहर निकलने का रास्ता खोज लेगी और तय है कि वह अपने लक्ष्यों को हासिल करके रहेगी. हम लड़ते हैं और हम जीतेंगे."
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