बॉलीवुड के बंगले: शाहरुख़ ख़ान के मन्नत से भारत भूषण के 'भूत बंगले' तक

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- Author, मधु पाल
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
बॉलीवुड के फ़िल्मी सितारों की जितनी लोकप्रियता रही है, उनके बंगलों के बारे में भी उनके चाहने वाले उतने ही उत्सुक रहते हैं.
शाहरुख ख़ान के जन्मदिन पर उनकी एक झलक पाने के लिए उनके बंगले 'मन्नत' पर प्रशंसकों की भीड़ जमा हो जाती है. ऐसी ही भीड़ अमिताभ बच्चन के बंगले 'जलसा' पर भी दिखती
सितारों के बंगलों को लेकर कई तरह की चर्चाएं आम रही हैं. उन्हीं में से एक चर्चा सितारों के भूत बंगलों की भी होती रहती है.
साल 1950 में जब कार्टर रोड पर नौशाद साहब के पड़ोस में भारत भूषण ने एक बंगला खरीदा तो इसे 'भूत बंगला' कहा जाता था.
वरिष्ठ पत्रकार शांति स्वरूप कहते हैं, "यह बंगला खरीदते ही भारत भूषण की किस्मत चमकी. शुरू में कामयाबी मिली लेकिन बाद में पैसो की तंगी की वजह से उन्होंने बंगला राजेंद्र कुमार को बेच दिया."
कहा जाता है कि इस घर को खरीदने के लिए राजेंद्र कुमार ने बीआर चोपड़ा की 'कानून' और दूसरी फिल्में साइन कीं.
उन्हें भी यहां खूब कामयाबी मिली, कई सुपर हिट फिल्में दीं. इसके बाद ही वे जुबली कुमार के नाम से जाने जाने लगे.

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पत्रकार शांति स्वरूप बताते हैं कि बाद में राजेंद्र कुमार ने दूसरा बंगला बना लिया और वहां चले गए.
1970 में उन्होंने एक बांग्ला राजेश खन्ना को बेच दिया.
दिलचस्प है कि राजेश खन्ना ने भी इस बंगले को खरीदने के लिए 'हाथी मेरे साथी' के निर्माता से रकम एडवांस ली. इस बंगले का नाम उन्होंने 'आशीर्वाद' नाम रखा.
'हाथी मेरे साथी' की पेंटिंग इस बंगले की दीवारों पर आखिरी दिन तक रही. इसी बंगले में रहते हुए उन्होंने कई सुपर हिट फिल्में दीं.
राजेश खन्ना इसमें अंत तक रहे. इसे राजेश खन्ना की बेटियों ट्विंकल और रिंकी ने अलकार्गो के चेयरमैन शशि किरण शेट्टी को बेच दिया.
70 साल पुराने ‘आशीर्वाद’ बंगले को शशि किरण शेट्टी ने तुड़वा दिया.

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सितारों के बंगले थे टूरिस्ट अट्रैक्शन
फ़िल्म हिस्टोरियन एसएमएम औसाजा कहते हैं, “1940 के बाद के ये बंगले अपने ज़माने में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र थे. इनमें अशोक कुमार, भूषण तक, देवानंद, राज कपूर, किशोर कुमार, मनोज कुमार, दिलीप कुमार, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना और सुनील दत्त के भव्य बंगले शामिल हैं. इन्हें देखने वालों का तांता लगा रहता था.”
लोगों में उत्सुकता होती थी जिन सितारों को वो पर्दे पर देखते थे उनके आशियाने कैसे होंगे?
इस दौरान फ़ैन्स को अपने पसंदीदा अभिनेता-अभिनेत्री की एक झलक पाने की भी उम्मीद रहती थी.
फ़ैंस बंगले के बाहर अपनी फ़ोटो खिंचवाते और उन्हें अपनी यादों में संजो लेते.
औसादा कहते हैं कि ये प्रशंसकों के लिए गर्व की बात होती थी. शाहरुख खान का मन्नत बांग्ला आज भी कई मायनों में लैंडमार्क बना हुआ है.

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बंगले के लिए बदली फ़िल्म की स्क्रिप्ट
इतिहासकार औसाजा कहते हैं, “अमिताभ बच्चन को अपना बंगला खरीदने के लिए बड़ी मेहनत करनी पड़ी है. पहले वो मंगलम बिल्डिंग में रहते थे, फिर उन्होंने ‘प्रतीक्षा’ बनाया और उसके बाद ‘जलसा’ और ‘जनक’ ख़रीदा.”
सितारों के लिए आशियाना बनाना एक अहम बात होती थी. खरीदने से पहले वो उसका वास्तु ठीक से देखते थे.
औसाजा बताते हैं कि अगर किसी सुपर स्टार को कोई घर पसंद आया तो उसे अपना बनाने में वो पूरी जान लगा दिया करते थे.
वो कहते हैं, “मुझे जावेद अख़्तर ने एक किस्सा बताया था कि राजेश खन्ना को एक बंगला बहुत पसंद आया था इसके लिए वो फ़िल्म ‘हाथी मेरे साथी’ के निर्माता से पैसे ले चुके थे. लेकिन उन्हें इसकी स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई.”
“उन्हें लगा कि ये फ़िल्म डूब जायेगी इसलिए तब उन्होंने जावेद और सलीम से इसे दोबारा लिखने की गुज़ारिश की. स्क्रिप्ट बदली गई और इस फ़िल्म ने अच्छी कमाई की और वो सारी रकम लग गई उनके बंगले में.”

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सितारों के बंगले
जाने माने प्रॉपर्टी एक्सपर्ट पंकज कपूर का कहना है कि फ़िल्मी सितारों के कई बंगलों को बने हुए 30 से 40 साल हो गए हैं.
इस दौरान मुंबई की प्रॉपर्टी में काफी बदलाव आया है. पहले साउथ मुंबई में घरों की क़ीमत 1 से 2 करोड़ होती थी लेकिन अब 4 से 5 करोड़ हो गई है.
वो कहते हैं कि अब सभी एक्टर्स बंगले की ज़मीन का पूरी तरह से इस्तेमाल करके उससे ज़्यादा से ज़्यादा कमाई करना चाहते हैं.
अब अधिकतर सितारे तो फ्लैट और रेजिडेंशियल अपार्टमेंट में शिफ्ट हो गए हैं.
पंकज कपूर के मुताबिक, एक्टर दिलीप कुमार के बंगले के पास प्रॉपर्टी का रेट 80 हज़ार से एक लाख रुपये प्रति वर्गफुट तक पहुंच गया है.
कपूर कहते हैं कि हाऊस टैक्स, रखरखाव और अन्य खर्चे इतने बढ़ गए हैं कि बंगला रखना खर्चीला हो गया है.
उनके अनुसार, "दिलीप कुमार के बंगले की जगह टॉवर बन रहा है और वहां संग्राहलय बनाने की बात हो रही है. अब देखना ये है कि वाकई ऐसा होता है या नहीं.”

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अपार्टमेंट कल्चर बढ़ा
वरिष्ठ पत्रकार और फ़िल्म आलोचक डॉ. रामचंद्रन श्रीनिवासन कहते हैं कि सुनील दत्त के बंगले को गिराकर उनके बेटे संजय दत्त ने अब इम्पीरियल हाइट्स नाम का टॉवर बना दिया है.
मशहूर एक्टर निर्देशक राज कपूर का स्टूडियो और घर गोदरेज को बेच दिये गए थे.
राजेश खन्ना का बंगला उनकी बेटियों ने बिजनेसमैन शशि किरण शेट्टी को बेच दिया था.
इसके अलावा दिलीप कुमार के बंगले के पास पाली हिल में देवानंद का ऑफिस हुआ करता था. अब वहां भी एक बहुमंज़िला इमारत है.
वो कहते हैं, “आज की पीढ़ी को बंगला कल्चर पसंद नहीं. इसलिए धीरे-धीरे बंगले मुंबई के बहार शिफ्ट हो रहे हैं.”

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शाहरुख के बंगले मन्नत की कहानी
श्रीनिवासन कहते हैं कि जो स्टार मुंबई से बाहर के हैं, उन्हें खुद का बड़ा आशियाना लुभाता है, जैसे शाहरुख़ ख़ान. वो दिल्ली से थे और जब उन्होंने मन्नत लेना चाहा तो अपनी पूरी कोशिश लगा दी.
शुरू में शाहरुख़ ख़ान किसी के घर रहा करते थे जो मन्नत के पास था. वो हर रोज़ मन्नत को खरीदने का सपना देखा करते थे. पहले मन्नत एक शूटिंग लोकेशन था.
लेकिन शाहरुख़ ने रतन जैन, यश चोपड़ा और कई लोगों से पैसे एडवांस लिए, सबकी फिल्में कीं और फिर ये बंगला खरीदा.
मन्नत शाहरुख ख़ान के लिए लकी साबित हुआ और यहीं रहते हुए वो अपने करियर की ऊंचाई पर पहुंच कर सुपरस्टार बन गए.

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डॉ. रामचंद्रन श्रीनिवासन कहते हैं कि कई सुपरस्टार बंगले की डील करते हैं बड़े बिल्डर से और उन्हें वहीं पर कुछ फ्लैट मिल जाते हैं.
संजय दत्त, रणबीर कपूर, रणधीर कपूर, मनोज कुमार, फ़िरोज़ ख़ान और राकेश रोशन ने भी कुछ ऐसा ही किया.
यहाँ उन्हें सिक्योरिटी से लेकर रखरखाव की चिंता नहीं लेनी पड़ती है. ज़ाहिर है कि समय के साथ जीवनशैली बदली तो रहने के तरीके में भी बदलाव आया.
लेकिन सितारों के बंगलों का क्रेज आज भी वैसा ही बना हुआ है.
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