अमिताभ बच्चन और शाहरुख़ ख़ान के किस बयान की हो रही है इतनी चर्चा

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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और फ़िल्म इंडस्ट्री में वर्षों से चली आ रही सेंसरशिप का मुद्दा उठाया है. वहीं सुपरस्टार शाहरुख ख़ान ने सोशल मीडिया में नकारात्मकता पर सवाल खड़े किए हैं.
सोशल मीडिया में अमिताभ और शाहरुख़ के इन बयानों पर लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कई लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अमिताभ की टिप्पणी पर आश्चर्य जता रहे हैं.
उन्हें उम्मीद नहीं थी कि अमिताभ इस तरह के मुद्दों पर टिप्पणी करेंगे क्योंकि वो आमतौर पर ऐसी बातें बोलने से बचते रहे हैं.
गुरुवार को अमिताभ बच्चन और शाहरुख़ ख़ान ने 28वें कोलकाता इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में ये टिप्पणी की. फ़िल्म फ़ेस्टिवल का उद्घाटन पश्चिम बंगाल के गवर्नर डॉक्टर सी वी आनंद बोस ने किया था. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अभिनेत्री रानी मुखर्जी और बांग्ला फ़िल्म उद्योग के कई दिग्गज भी मौजूद थे.
अमिताभ बच्चन ने भारतीय सिनेमा में सेंसरशिप का मुद्दा उठाते हुए कहा, ''मुझे यक़ीन है कि मंच पर मेरे सहयोगी इस बात से सहमत होंगे कि अब भी नागरिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल उठाए जा रहे हैं.''
अपनी अगली फ़िल्म 'पठान' की रिलीज़ का इंतज़ार कर रहे शाहरुख़ ने कहा कि 'सोशल मीडिया को विचारों की संकीर्णता के सहारे चलाया जा रहा है.'
उन्होंने अपनी फ़िल्म का एक संवाद भी बोला, ''अपनी कुर्सी की पेटी बांध लीजिये, मौसम बिगड़ने वाला है.''
शाहरुख ने ये टिप्पणी सोशल मीडिया पर 'पठान' के बायकॉट की अपीलों के बाद की है. इस फ़िल्म के एक गाने में दीपिका पादुकोण की पहनी पोशाक पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

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अमिताभ ने क्यों दी सत्यजीत राय की इस फ़िल्म की मिसाल
अपने संबोधन के दौरान अमिताभ बच्चन ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि 'क्या आज के माहौल में सत्यजीत राय भी वैसी ही प्रतिक्रिया जताते जैसी 1990 की उनकी फ़िल्म 'गणशत्रु' के नायक ने की थी.'
उन्होंने कहा, '' राय इस मामले में किस तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करते. इसका अंदाज़ा उनकी फ़िल्म 'गणशत्रु' को देख कर लगाया जा सकता है. इस फिल्म में दूषित पानी से पीलिया फैलने के मामले को सरकार और स्थानीय मंदिर प्रशासन दोनों दबाना चाहता है. लेकिन फ़िल्म के नायक डॉक्टर अशोक गुप्ता न्याय के लिए लड़ते हुए भी लोगों के दुश्मन यानी 'गणशत्रु' बन जाते हैं.''
अमिताभ बच्चन ने कहा, ''शुरुआती समय से लेकर अब तक के कंटेंट में बदलाव आया है. अब कई अलग तरह के सब्जेक्ट हैं. पौराणिक फिल्मों से लेकर आर्ट हाउस, एंग्री यंगमैन की भूमिकाओं वाली फिल्में तो बनती ही रही हैं. अब काल्पनिक अंधराष्ट्रवाद, मोरल पुलिसिंग जैसे कई सबजेक्ट हैं जिन पर फिल्में बन रही हैं. इन सभी विषयों पर सिंगल स्क्रीन और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्में बन रही हैं.''

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शाहरुख़ ने क्या कहा?
अमिताभ के साथ इस कार्यक्रम में अभिनेता शाहरुख़ ख़ान भी मौजूद थे.
पठान के गाने को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे विवाद के बीच अभिनेता शाहरुख़ ख़ान ने कहा है कि सोशल मीडिया की नकारात्मकता से विभाजनकारी और विनाशकारी नैरेटिव तैयार हो रहा है.
उन्होंने कहा कि ऐसे दौर में सिनेमा की भूमिका अहम है. शाहरुख़ ने सिनेमा को इसका काउंटर नैरेटिव बताया.
कोलकाता फ़िल्म फ़ेस्टिवल में बोलते हुए शाहरुख ने कहा, "सिनेमा और अब सोशल मीडिया मानवीय अनुभव और भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है."
"अब हमारे समय के सामूहिक नैरेटिव को सोशल मीडिया आकार दे रहा है. इस धारणा के विपरीत कि सोशल मीडिया सिनेमा को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा, मेरा मानना है कि सिनेमा को अब और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी."
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया अक्सर विचारों की एक संकीर्णता से चलता है जो मानव स्वभाव को उसके निचले स्तर तक सीमित रखता है.
शाहरुख़ ने कहा, "नकारात्मकता सोशल मीडिया की खपत को बढ़ाती है और इस तरह इसके व्यावसायिक मूल्य को भी."
"इन वजहों से सामूहिक नैरेटिव को बल मिलता है, जो सोशल मीडिया को विभाजनकारी और विनाशकारी बनाती हैं."
उन्होंने कहा, "सिनेमा सरल रूप में कहानियों को दिखाकर, मानव स्वभाव की कमज़ोरियों को उजागर करता है. यह हमें एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जानने का अवसर देता है. एक तरह से सिनेमा दर्शकों के कहीं बड़े समूह के साथ, एक काउंटर नैरेटिव को बनाए रखने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में है."

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'बेशर्म रंग' और विवाद
शाहरुख ख़ान और दीपिका पादुकोण स्टारर फ़िल्म पठान का पहला गाना 'बेशर्म रंग' इंटरनेट पर वायरल हो गया लेकिन इसके साथ ही सोशल मीडिया पर फ़िल्म के बहिष्कार की मांग भी उठने लगी.
गाने में दीपिका पादुकोण और शाहरुख ख़ान के बीच केमिस्ट्री दिखाई गई है और एक जगह दीपिका ने 'भगवा रंग' की बिकिनी पहनी है.
कुछ लोगों ने इस गाने को भद्दा और अश्लील बता दिया तो कुछ ने इसे हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाला बताया है.
कई लोगों का कहना है कि दीपिका के कपड़ों का रंग भगवा है और जिस गाने का ये सीन है उसका नाम "बेशर्म रंग" है. भगवा रंग को अक्सर हिंदू धर्म से जोड़ा जाता है.
अमिताभ और शाहरुख के इन बयानों पर सोशल मीडिया में लोग प्रतिक्रिया बढ़-चढ़ कर प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
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अमिताभ और शाहरुख़ की टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर क्या बोले लोग
रोहिणी सिंह ने ट्विटर पर लिखा, ''कल्पना कीजिये फ़ासीवाद और असहमति जताने वाले लोगों को कुचलना किस क़दर बढ़ चुका है अमिताभ बच्चन को नागरिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बोलना पड़ा. ''
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निधि राजदान ने ट्विटर पर लिखा, '' अमिताभ बच्चन ने नागरिक स्वतंत्रता पर दुर्लभ टिप्पणी की है. क्या बॉलीवुड ने अब हालात का सामना करना शुरू किया है.''
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शाहरुख के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूज़र ने लिखा, ''सिनेमा के ख़िलाफ़ नफ़रत से प्रेरित अभियान चल रहे हों तो शाहरुख़ ख़ान सिनेमा का बचाव कर रहे हैं.''
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एक और यूज़र ने शाहरुख़ के इस बयान की तारीफ़ की.
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