नसीरुद्दीन शाह ने पाकिस्तान के सिंधियों से क्यों मांगी माफ़ी

मिर्ज़ा एबी बेग

बीबीसी उर्दू, नई दिल्ली

नसीरुद्दीन शाह

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नसीरुद्दीन शाह भारतीय फ़िल्म जगत के अब तक के सबसे अनुभवी अभिनेताओं में से एक हैं लेकिन उनका विवादों से चोली दामन का नाता रहा है.

वह अपनी बेबाक टिप्पणियों के कारण अतीत में विवादों का केंद्र रहे हैं.

उनके शब्दों के तीर से न तो दिलीप कुमार बच सके और न ही भारत के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना या फिर साथी अदाकार अनुपम खेर.

नसीरुद्दीन शाह ने कभी भी अपनी बात कहने से परहेज़ नहीं किया चाहे वह किसी के ख़िलाफ़ ही क्यों न हो और वह अपनी बात पर टिके रहने के लिए भी जाने जाते हैं.

लेकिन हाल ही में उन्होंने सिंधी भाषा पर दिए एक विवादास्पद बयान पर माफ़ी मांगी है, जिस पर कई पाकिस्तानियों ने उन्हें सराहा है. दूसरी और उन्हें भारत में मराठी भाषा को फ़ारसी से जोड़ने पर भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

नसीरुद्दीन शाह

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नसीरुद्दीन शाह ने किस बात पर माफ़ी मांगी?

असल में नसीरुद्दीन शाह को अपने हाल के एक इंटरव्यू की वजह से काफ़ी निशाना बनाया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में अब सिंधी भाषा नहीं बोली जाती.

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इसके तुरंत बाद उन्होंने फ़ेसबुक पर माफ़ीनामा जारी किया और इसे अपनी तरफ़ से 'ग़लती' और 'ग़लत बयान' बताया.

उनके इस माफ़ीनामे के बाद पाकिस्तानी अदाकार अदनान सिद्दीक़ी ने ट्विटर पर यह पोस्ट शेयर करते हुए नसीरुद्दीन शाह की तारीफ़ की और लिखा, "ग़लती पर माफ़ी मांगना किसी इंसान के व्यक्तित्व और उसके विवेक की निशानी है. नसीर साहब की हाल की स्वीकारोक्ति ने मुझे उनका और बड़ा प्रशंसक बना दिया है."

"अपनी ग़लतियों को मान लेना और उनकी ज़िम्मेदारी लेने के लिए हिम्मत और विनम्रता की ज़रूरत होती है."

नसीरुद्दीन शाह ने फ़ेसबुक पर लिखा, "मैं पाकिस्तान के सभी सिंधी भाषियों से क्षमा चाहता हूं, जिनको मैंने अपनी ग़लत राय से बहुत दुख पहुंचाया है. मैं मानता हूं कि मेरी जानकारी ग़लत थी लेकिन क्या इसके लिए मुझे सूली पर चढ़ाना ज़रूरी है?"

उनका कहना था, "बहुत वर्षों तक ग़लत तौर पर प्रतिभावान व्यक्ति समझे जाने के बाद 'जाहिल' और 'नक़ली बुद्धिजीवी' कहलाए जाने से काफ़ी आनंद ले रहा हूं. यह बड़ा बदलाव है!"

सोशल मीडिया यूज़र्स भी नसीरुद्दीन शाह के बयान और माफ़ी पर टिप्पणी कर रहे हैं. बहुत से लोगों ने कहा कि वह उनके प्रिय अभिनेता हैं और वह अब इस बात को दिल पर न लें.

लेकिन इरफ़ना मल्लाह नाम की यूज़र ने लिखा, "नसीरुद्दीन शाह साहब, हम आपको सूली पर नहीं चढ़ा रहे हैं लेकिन आप जैसी शख़्सियत से इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं रखते."

"सिंधी आपको पसंद करते हैं और आपकी मोहब्बत चाहते हैं. हम अपनी भाषा के बारे में बहुत संवेदनशील हैं क्योंकि यह हमारी पहचान है."

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मराठी भाषा को फ़ारसी से जोड़ने पर विवाद

हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि मराठी में फ़ारसी भाषा के शब्द भी हैं मगर बहुत से लोगों ने इसका मतलब यह लिया कि उन्होंने मराठी को कमतर कहा है. उन्होंने इसके बारे में भी स्पष्टीकरण दिया है.

नसीरुद्दीन शाह ने अपने फ़ेसबुक पेज पर लिखा: "ऐसा लगता है कि हाल में मैंने जो कहा है, उस पर पूरी तरह दो ग़ैर ज़रूरी विवाद पैदा हुए हैं."

"एक पाकिस्तान में सिंधी भाषा के बारे में मेरी ग़लत बयानी से संबंधित है. मैं ग़लती पर था. दूसरा वह है जो मैंने मराठी और फ़ारसी के संबंध के बारे में कहा था."

"मेरे सही शब्द यह थे कि बहुत से मराठी शब्द फ़ारसी के हैं. मेरा मक़सद मराठी भाषा को कम दिखाना नहीं था बल्कि यह बताना था कि किस तरह विविधता सभी संस्कृतियों को मालामाल करती है."

वह कहते हैं कि उर्दू ख़ुद हिंदी, फ़ारसी, तुर्की और अरबी भाषाओं का मिश्रण है. "अंग्रेज़ी ने सभी यूरोपीय भाषाओं से शब्द उधार लिए हैं, जिनमें हिंदुस्तानी भी शामिल है और मुझे लगता है कि यह धरती पर बोली जाने वाली हर भाषा के लिए सही है."

नसीरुद्दीन शाह

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नसीरुद्दीन शाह

केरला स्टोरी पर टिप्पणी

मुसलमानों के ख़िलाफ़ भारत में कथित नफ़रत के माहौल पर उन्होंने खुलकर राय दी है, जिसके कारण उन्हें एक वर्ग ने पाकिस्तान चले जाने का भी मशवरा दे डाला है.

हाल में उन्होंने 'द केरला स्टोरी' पर टिप्पणी करते हुए 'इंडियन एक्सप्रेस' में अपने विचार प्रकट किए थे. उन्होंने इंटरव्यू के दौरान कहा: "निश्चित रूप से यह बिल्कुल मुश्किल घड़ी है. ऐसी बातों को, जो विशुद्ध और खुला प्रोपेगैंडा हैं, उन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है."

नसीरुद्दीन शाह ने कहा, "मुसलमानों से नफ़रत आजकल फ़ैशन बन चुका है, यहां तक कि पढ़े-लिखे लोगों में भी. इसे सत्ताधारी दल ने बड़ी चालाकी से लोगों के मन में डाल दिया है."

"आप हर बात में धर्म को क्यों ले आते हैं?"

नसीरुद्दीन शाह ज़ी फ़ाइव की आने वाली वेब सिरीज़ 'ताज: डिवाइडेड बाई ब्लड' में मुग़ल बादशाह अकबर का रोल अदा कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "मुग़ल हिंदुस्तान लूटने के लिए नहीं आए थे बल्कि वह उसे अपना घर बनाने के लिए आए थे. आप बहुत हो तो उन्हें शरणार्थी कह सकते हैं."

भारत में एक वर्ग मुग़लों को लुटेरों के तौर पर पेश करता रहा है.

नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि मुग़लों ने बहुत सारी विरासत छोड़ी है, जिनमें संगीत, नृत्य और पेंटिंग की परंपराएं भी शामिल हैं.

उनके इस दृष्टिकोण को एक वर्ग पसंद नहीं करता है और उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ता है.

दिलीप कुमार

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दिलीप कुमार, राजेश खन्ना और अनुपम खेर पर भी टिप्पणी

नसीरुद्दीन शाह की अदाकारी के बारे में किसी को शक नहीं लेकिन उनके बयान कई बार विवादों का कारण बने हैं.

एक बार उन्होंने अपने साथी अदाकार अनुपम खेर को 'जोकर' कह दिया था.

उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, "अनुपम खेर बहुत बोलता है. मुझे नहीं लगता कि उसे गंभीरता से लेने की ज़रूरत है. वह एक मसख़रा है. एनएसडी यानी नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा और एफ़टीआईआई यानी फ़िल्म ऐंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया में से उनका कोई भी समकालीन उनकी ख़ुशामदी फ़ितरत की पुष्टि कर सकता है. यह उनके ख़ून में है, वह इससे नहीं निकल सकते."

इसी तरह उन्होंने दिलीप कुमार के बारे में कहा था कि उन्होंने भारतीय सिनेमा के लिए कुछ ख़ास नहीं किया. "उन्होंने केवल एक फ़िल्म प्रोड्यूस की और उस किसी फ़िल्म का निर्देशन नहीं किया. उन्होंने अपने पीछे आने वाले अदाकारों के लिए कोई ख़ास सीख नहीं छोड़ी."

इसी तरह उन्होंने एक बार राजेश खन्ना पर फ़िल्मों में औसत दर्जे को लाने का आरोप लगाया और उन्हें ख़राब अदाकार कहा. उन्होंने कहा था, "यह 1970 का दशक था जब हिंदी फ़िल्मों में औसत दर्जे को पसंद किया जाने लगा."

"उस समय राजेश खन्ना नाम के अदाकार ने इंडस्ट्री में क़दम रखा था. उनकी सभी सफलताओं के बावजूद मेरे ख़्याल में मिस्टर खन्ना बहुत ही सीमित अर्थों में अभिनेता थे. वास्तव में वह ख़राब अदाकार थे."

राजेश खन्ना

पाकिस्तान का टिकट बुक करा दिया..

नसीरुद्दीन शाह ने सन 2018 में कहा था कि भारत एक ऐसा देश बनता जा रहा है, जहाँ एक पुलिस वाले से अधिक गाय को महत्व दिया जाता है क्योंकि भीड़ ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक पुलिस वाले को पीट-पीटकर मार डाला था.

उनकी इस बात पर कुछ लोगों ने उन्हें ग़द्दार कह दिया था तो एक ने उनके लिए कराची का टिकट बुक कराने की बात कही थी.

भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने उनकी फ़िल्म 'सरफ़रोश' का उल्लेख करते हुए कहा था कि वह अपने पात्र की तरह होते जा रहे हैं.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष अमित जानी ने उनके लिए पाकिस्तान का एक तरफ़ का टिकट भी बुक करवा दिया था.

अमित जानी ने कहा था, "अगर नसीरुद्दीन शाह भारत में रहने से डरते हैं तो उन्हें तुरंत पाकिस्तान रवाना होना चाहिए. मैंने उनके लिए 14 अगस्त की फ़्लाइट का टिकट बुक कराया है ताकि वह पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर पहुंच सकें और भारत छोड़ दें ताकि यहां एक ग़द्दार कम हो."

नसीरुद्दीन शाह ने 'निशांत' फिल्म से सन 1975 में सिनेमा में क़दम रखा और स्पर्श, आक्रोश और बाज़ार जैसी यादगार कला फ़िल्में दीं.

फिर जाने भी दो यारों, मासूम और मंडी फ़िल्मों में अलग अलग भूमिका से अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया.

उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में अदाकारी की है और टीवी सीरियल 'ग़ालिब' में उन्होंने ग़ालिब के किरदार को जीवंत कर दिया था.

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