अफ़ग़ानिस्तान की जीत पर वहाँ के मीडिया में क्या छपा है? इरफ़ान पठान डांस कर पाकिस्तान में घिरे

राशिद ख़ान और हशमतुल्लाह शाहिदी

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आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप में पाकिस्तान पर अफ़ग़ानिस्तान की जीत की ख़ुशी से अफ़ग़ान गदगद हैं.

अफ़ग़ानों के जश्न के वीडियो देश के अलग-अलग इलाक़ों से आ रहे हैं. ऐसा लग रहा है कि सियासी रूप से बँटे अफ़ग़ानिस्तान को क्रिकेट की एक जीत ने एकजुट कर दिया है.

अफ़ग़ानिस्तान के मीडिया में कहा जा रहा है कि वर्ल्ड कप में पाकिस्तान पर अफ़ग़ानिस्तान की आठ विकेट की जीत को लंबे समय तक याद रखा जाएगा.

अफ़ग़ानिस्तान के लिए यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक है. पहला तो यही कि अफ़ग़ानिस्तान ने आज तक वनडे क्रिकेट में पाकिस्तान को हराया नहीं था. दूसरा यह कि पूरे मैच में ऐसा कभी नहीं लगा कि अफ़ग़ानिस्तान की टीम किसी भी मामले में पाकिस्तान से कमतर है.

अफ़ग़ानिस्तान पहली बार 283 रनों के लक्ष्य का पीछा करने में कामयाब रहा है. इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान के बारे में कहा जाता था कि वह रन चेस करने में नाकाम रहता है.

2014 में यूएई के ख़िलाफ़ अफ़ग़ानिस्तान ने 276 रन बनाए थे और अब क़रीब एक दशक बाद वो पाकिस्तान के 283 रनों के टारगेट को भेदने में कामयाब रहा.

इस वर्ल्ड कप से पहले अफ़ग़ानिस्तान 2015 के विश्व कप में स्कॉटलैंड को हराने में कामयाब रहा था.

अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम

सड़कों पर मना जश्न

अफ़ग़ानिस्तान के मीडिया में भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जीत को प्रमुखता से जगह मिली है.

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अफ़ग़ानिस्तान के टोलो न्यूज़ से काबुल निवासी अशरफ़ आलम ने कहा, "पिछली रात मैंने अपने परिवार के साथ पूरा मैच टीवी पर देखा. यहाँ तक कि मेरे घर के छोटे बच्चे भी बेहद ख़ुश थे. हर कोई जश्न के मूड में था."

काबुल के ही कबीर ने टोलो न्यूज़ से कहा, "हमारे लिए ख़ुशी का एकमात्र ज़रिया क्रिकेट है. या यूं कहें कि क्रिकेट एकमात्र कारण है, जिससे हमें ख़ुशी मिलती है."

अफ़ग़ानिस्तान के क्रिकेट एक्सपर्ट रहमान रहीमी ने टोलो न्यूज़ से कहा, "जब पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में मैच होता है तो सियासी मुद्दे भी इससे जुड़ जाते हैं. यही कारण है कि अफ़ग़ान खिलाड़ियों ने मैच के दौरान एक भी ग़लती नहीं की."

पाकिस्तान की हार के बाद आम अफ़ग़ान जश्न मनाने सड़कों पर उतर गए. लोग गाते हुए डांस कर रहे थे और ख़ुशी में गनफायर भी करते दिखे.

अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान हश्मातुल्लाह शाहिदी ने कहा है, "हम आने वाले मैचों में भी अपने देशवासियों को इसी तरह की ख़ुशी देने की कोशिश करेंगे. हम अपने देशवासियों से अनुरोध करते हैं कि अच्छे और बुरे वक़्त दोनों में अपनी टीम का समर्थन जारी रखें."

अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम

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तालिबान भी ख़ुश

अफ़ग़ानिस्तान के अमु टीवी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जीत से यहां के तालिबान शासक भी ख़ुश है.

तालिबान के प्रधानमंत्री कार्यालय में पॉलिटिकल डेप्युटी मौलवी अब्दुल कबीर ने ट्विटर पर लिखा, "हम अफ़ग़ानिस्तान की क्रिकेट टीम, क्रिकेट बोर्ड और सभी अफ़ग़ानों को इस जीत की बधाई देते हैं. इस जीत से साबित होता है कि अफ़ग़ान युवा किसी भी क्षेत्र में जीत हासिल कर सकते हैं. और कामयाबी के लिए हमारी तरफ़ से शुभकानाएं."

बीबीसी पश्तो ने लिखा है, "अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान के साथ पहला वनडे क्रिकेट मैच 11 साल पहले फ़रवरी 2012 में यूएई में खेला था और पाकिस्तान को जीत मिली थी."

"लेकिन 2023 के वर्ल्ड कप में अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ पाकिस्तान ने 50 ओवर में सात विकेट पर 283 रन बनाए और इस टारगेट को अफ़ग़ान खिलाड़ियों ने 49 ओवर में दो विकेट खोकर हासिल कर लिया. पाकिस्तान की टीम इस हार के बाद से अपने मुल्क में बुरी तरह से घिर गई है और जमकर आलोचना हो रही है."

अफ़ग़ानिस्तान की जीत के बाद स्टेडियम में भारत के पूर्व क्रिकेटर इरफ़ान पठान अफ़ग़ान प्लेयर राशिद ख़ान के साथ डांस करते दिखे.

यह वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसकी चर्चा पाकिस्तान में भी ख़ूब है. पाकिस्तान के टीवी एक प्रोग्राम में इरफ़ान पठान की जमकर आलोचना की गई.

इरफ़ान पठान को लेकर एक एंकर ने कहा, "क्रिकेट में इरफ़ान कुछ कर नहीं पाए तो मैदान में राशिद ख़ान के साथ भंगड़े डाल रहे हैं. किस ख़ुशी में इरफ़ान ख़ान भंगड़े डाल रहे हैं?"

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इस पर टीवी स्टूडियो में बैठा एक एक्सपर्ट ने कहा, "जीत अफ़ग़ानिस्तान की हुई है तो तुम क्यों डांस कर रहे हो? ये सीन बिल्कुल नहीं होना चाहिए था."

इस पर एक तीसरे एक्सपर्ट ने कहा, "इरफ़ान जिस तरीक़े से डांस करते दिखे, वो वही नफ़रत है जो हम वर्ल्ड कप के आग़ाज़ से देख रहे हैं. न हमारे पत्रकारों को वीज़ा दिया गया और न ही हमारे क्रिकेट प्रशंसकों को. एक पत्रकार भारत से मैच कवर करके आए हैं, उनका कहना है कि भारत में उन्होंने अब वो मोहब्बत नहीं देखी."

"हम जिस तरीक़े की मोहब्बत दिया करते थे, उसमें इरफ़ान पठान का डांस करना अच्छा नहीं लगा. इब्राहिम ज़ादरान का बयान और इरफ़ान पठान के डांस में कोई न कोई तो संबंध है."

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अफ़ग़ानिस्तान के पत्रकार हबीबी ख़ान ने एक पाकिस्तानी क्रिकेट प्रशंसक का वीडियो क्लिप शेयर किया है जो नाराज़गी में कह रहे हैं कि वो इंडिया से हार बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन अफ़ग़ानों से नहीं.

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पाकिस्तान में क्या कह रहे हैं लोग?

पाकिस्तान के पत्रकार भी अफ़ग़ानिस्तान से टीम की हार के बाद अपनी टीम से ख़ासे नाराज़ हैं.

पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार डॉन में स्पोर्ट्स के हेड अब्दुल ग़फ़्फ़ार का कहना है, "सबसे ज़्यादा सवाल कप्तान बाबर आज़म पर उठाए जा रहे हैं लेकिन शाहीन शाह अफ़रीदी से क्या नहीं पूछा जाना चाहिए? शाहीन शाह अफ़रीदी को बुमराह और सिराज की गेंदबाज़ी देखनी चाहिए."

"बाबर आज़म की तुलना में सबसे ज़्यादा निराश शाहीन शाह अफ़रीदी ने किया है. मैं पाकिस्तानी प्रशंसकों से कहूंगा कि वे अपनी टीम को सेमीफ़ाइनल में जगह दिलाने के लिए दुआ करें. या अल्लाह आज नीदरलैंड्स ऑस्ट्रेलिया को हरा दे."

अब्दुल ग़फ़्फ़ार कहते हैं, "सेमीफ़ाइनल के लिए अब पाकिस्तान को सभी चार मैच जीतने होंगे. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ़्रीका को बाक़ी मैच हारने होंगे. साथ ही पाकिस्तान को रन रेट भी दुरुस्त करना होगा."

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पाकिस्तान के मीडिया आउटलेट्स में पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान मैच को लेकर कई विश्लेषण छपे हैं, इनमें अधिकतर का विषय है- पाकिस्तान की क्रिकेट टीम हालत ऐसी क्यों हो गई?

जीओ टीवी में एक विश्लेषण छपा है कि पाकिस्तानी टीम के साथ 2023 के वर्ल्ड कप में क्या ग़लत हो रहा है?

पाकिस्तान ने अब तक कुल पाँच मैच खेले हैं, जिसमें से तीन में उसे हार मिली है. उसे जीत नीदरलैंड्स और श्रीलंका के ख़िलाफ़ मिली है और हार भारत, ऑस्ट्रेलिया के अलावा अफ़ग़ानिस्तान से. पाकिस्तान को अभी दक्षिण अफ़्रीका, बांग्लादेश, न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड से मैच खेलना बाक़ी है.

पाकिस्तान को अगर वर्ल्ड में बने रहना है तो बाक़ी के सभी मैच जीतने होंगे. जीओ न्यूज़ ने अपने विश्लेषण में लिखा है, "इस वर्ल्ड कप में ज़ाहिर है कि इंडिया पसंदीदा टीम है लेकिन पाकिस्तान को भी बुरी टीम के तौर पर नहीं देखा जा रहा था. पाकिस्तान ने शुरुआत भी अच्छी की थी. ऑस्ट्रेलिया, भारत और अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ पाकिस्तान की टीम की कई कमज़ोरियां खुलकर सामने आईं."

और तो और इसके साथ ही योजना की कमी और लीक से हटकर सोचने जैसा कुछ दिखाई नहीं दिया.

मिकी आर्थर

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बेहतरीन टीम औंधे मुँह गिरी

कुछ महीने पहले तक पाकिस्तान की क्रिकेट टीम को गेंदबाज़ी में अटैक करने के मामले में दुनिया की बेहतरीन टीम माना जा रहा था, लेकिन ये हमलावर रवैया अब कहीं नहीं दिख रहा.

ये समझ पाना मुश्किल है कि केवल नसीम शाह के न रहने के कारण गेंदबाज़ी में वो धार दिखाई नहीं दी. ये एक कारण हो सकता है, लेकिन फिर स्थिति को देखते हुए गेंदबाज़ी में ज़रूरी बदलाव नहीं करने के लिए कौन ज़िम्मेदार है?

जियो टीवी के अनुसार, ऐसा लगता है कि पाकिस्तान ने व्यवस्थित तरीक़े से अपनी टीम को ख़ुद ही नुक़सान पहुँचाया है और अब वो ख़ुद इसकी बड़ी क़ीमत चुका रहा है.

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वसीम अकरम ने कहा था कि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में हमारे ख़िलाड़ियों की दिलचस्पी न के बराबर है, शायद वो सही थे. और ये एक कारण हो सकता है कि जहां टीम टी20 इंटरनेशनल में जबर्दस्त प्रदर्शन करती है, वहीं एकदिवसीय मैच में उसका प्रदर्शन औसत रहता है.

एक और समस्या जो बाबर आज़म झेल रहे हैं वो है टीम के अपने दूसरे साथियों की तरफ से कोशिश. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेलते हुए पाकिस्तान की टीम ने तीन कैच छोड़ दिए. एक ख़ास कैच का ज़िक्र ज़रूरी है, जब ओसामा मीर ने वॉर्नर का कैच छोड़कर उन्हें एक तरह से नया जीवन दे दिया.

इसके अलावा एक मुद्दा फील्डिंग का भी है, अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ मैदान में फील्डिंग करते हुए टीम का प्रदर्शन औसत से भी कम रहा, ये अपने आप में खिलाड़ियों की फिटनेस पर सवालिया निशान लगाती है.

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम

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जियो न्यूज़ लिखता है कि ये कहना थोड़ा कठोर लग सकता है लेकिन पाकिस्तान टीम की फील्डिंग किसी स्थानीय क्लब की टीम से भी बुरी थी. न कोई कोशिश की जा रही थी, न खिलाड़ियों में एनर्जी थी, न उनमें इच्छाशक्ति थी और न ही रवैया वैसा दिखा. कुछ भी नहीं दिखा. मैच की शुरुआत से ही खिलाड़ी सुस्त नज़र आ रहे थे.

विश्लेषक मानते हैं कि पाकिस्तान क्रिकेट टीम डायरेक्टर मिकी आर्थर, पाकिस्तान टीम के हेड कोच ग्रांट ब्रैडबर्न और टीम के कप्तान बाबर आज़म के लिए वो वक्त आ गया है जब वो अपनी रणनीति को लेकर फिर से विचार करें और नए सिरे से योजना बनाएं.

पाकिस्तान हारा ज़रूरी है लेकिन अभी भी वो टूर्नामेन्ट से बाहर नहीं हुआ है.

जियो न्यूज़ लिखता है, पाकिस्तान को नई रणनीति अपनाते हुए अपना वो "पाकिस्तानी तरीक़ा" दिखाना होगा जिसके बारे में चर्चा की जाती रही है, न कि पारंपरिक "पाकिस्तानी तरीक़ा" दिखाना चाहिए जहां आख़िरी स्टेज में क्वॉलिफ़ाई करने के लिए पाकिस्तान को अपने भाग्य पर निर्भर न करना पड़े बल्कि उसका प्रदर्शन उसकी राह बनाए.

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