पाकिस्तान को हराने के बाद ज़ादरान के बयान पर विवाद, मैदान में मज़हब और सियासत पर सवाल

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अफ़ग़ानिस्तान के क्रिकेटर इब्राहिम ज़ादरान को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ वर्ल्ड कप मुक़ाबले में सोमवार को प्लेयर ऑफ द मैच के लिए चुना गया तो उन्होंने यह अवॉर्ड अफ़ग़ानिस्तान के उन शरणार्थियों के नाम कर दिया, जिन्हें पाकिस्तान अपने यहाँ से जबरन वापस भेज रहा है.
ज़ादरान ने 87 रनों की शानदार पारी खेली थी और उनकी इस पारी की अफ़ग़ानिस्तान को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जीत दिलाने में अहम भूमिका रही.
ज़ादरान जब प्लेयर ऑफ द मैच लेने आए तो उनसे पूछा गया कि वह इसे किसे समर्पित करेंगे तो उन्होंने कहा कि यह ट्रोफी उन अफ़ग़ान नागरिकों के लिए है, जिन्हें पाकिस्तान से जबरन निकाला जा रहा है.
ज़ादरान ने कहा, ''शुक्र है कि इस मैच में मैंने अच्छा खेला. मैं सकारात्मक रुख़ के साथ खेलना चाहता था. कई बार मैंने और गुरबाज़ ने बेहतरीन साझेदारी की है. हमने साथ में बहुत क्रिकेट खेले हैं. अंडर-16 के दिनों से ही. मैं ख़ुद के लिए और अपने मुल्क के लिए बहुत ख़ुश हूँ. मैं यह मैन ऑफ द मैच उन अफ़ग़ान शरणार्थियों को समर्पित करता हूँ, जिन्हें पाकिस्तान से जबरन निकाला जा रहा है.''

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पाकिस्तान ने पिछले हफ़्ते ही कहा था कि दसियों हज़ार अफ़ग़ान नागरिक पाकिस्तान छोड़ अफ़ग़ानिस्तान लौट गए हैं. पाकिस्तान की सरकार ने इसी महीने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान के वैसे लोग एक नवंबर तक वापस चले जाएं, जिनके पास वैध दस्तावेज़ नहीं है.
पाकिस्तान ने यह भी कहा था कि जो एक नवंबर तक नहीं लौटेंगे उन्हें निकाल दिया जाएगा. एक अनुमान के मुताबिक़ पाकिस्तान में क़रीब 17 लाख अफ़ग़ान हैं. पाकिस्तान ने शुक्रवार को कहा था कि अब तक 52 हज़ार अफ़ग़ान पुरुष, महिलाएं और बच्चे वापस लौट चुके हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान के इस रुख़ की निंदा की थी और आग्रह किया था कि अफ़ग़ान नागरिकों को वह जबरन न निकाले. वहीं अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार ने भी इसे अस्वीकार्य बताया था. हालांकि तालिबान ने पाकिस्तान से लगी सरहद पर अपने नागरिकों को तत्काल मदद पहुँचाने के लिए टेंट लगाया है और खाने-पीने की व्यवस्था की है.
पाकिस्तान के इस रुख़ को लेकर अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार नाराज़ है और इसकी झलक क्रिकेट मैच में भी दिखी. अफ़ग़ानिस्तान के एक तबके का लंबे समय से मानना रहा है कि पाकिस्तान उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है. अफ़ग़ानिस्तान का एक तबका पाकिस्तान से चिढ़ा रहता है.
जब इब्राहिम ज़ादरान ने प्लेयर ऑफ द मैच पाकिस्तान से बाहर किए जा रहे अफ़ग़ान नागरिकों को समर्पित किया तो यह विवाद एक बार फिर से सतह पर आ गया. इब्राहिम ज़ादरान के इस रुख़ का पाकिस्तान में विरोध हो रहा है.


पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत काज़मी ने इब्राहिम ज़ादरान के उस वीडियो क्लिप को पोस्ट करते हुए ट्विटर पर लिखा है, ''दोहरा मानदंड! अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम के प्लेयर इब्राहिम ज़ादरान ने अपना मैन ऑफ द मैच उन अवैध प्रवासियों को समर्पित किया है, जिन्हें पाकिस्तान से वापस भेजा जा रहा है. यह ज़ादरान का क्रिकेट के मैदान में दिया गया एक राजनीतिक बयान है. क्या आईसीसी सो रहा है या सारे नियम केवल पाकिस्तान के लिए हैं.''
लेकिन इस वर्ल्ड कप में कथित राजनीतिक बयानबाज़ी की शुरुआत पाकिस्तान के विकेटकीपर मोहम्मद रिज़वान ने की थी. मोहम्मद रिज़वान ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ अपने मैच जिताने वाले शतक को ग़ज़ा के लोगों के नाम किया था. ग़ज़ा में इसराइल चरमपंथी संगठन हमास के हमले के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान चला रहा है और इस अभियान में सैकड़ों आम नागरिक भी मारे गए हैं.
12 अक्टूबर को उन्होंने ट्विटर पर लिखा था, “ये ग़ज़ा के हमारे भाइयों और बहनों के लिए है.” रिज़वान ने यह पोस्ट 11 अक्टूबर को क़रीब 12 बजे किया था.
रिज़वान ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ नाबाद 131 रन बनाए थे और अपनी टीम को रिकॉर्ड जीत दिलाई. उन्हें मैन ऑफ़ द मैच चुना गया था.
पाकिस्तान के खिलाड़ी क्रिकेट मैच के दौरान धर्म और राजनीति को पहले भी मैदान में ला चुके हैं. पाकिस्तान के नेता भी क्रिकेट में हार और जीत को मज़हब से जोड़ते रहे हैं.
अक्टूबर 2021 में पाकिस्तान के तत्कालीन गृह मंत्री शेख़ रशीद ने टी-20 वर्ल्ड में भारत के ख़िलाफ़ जीत को इस्लाम की जीत कहा था. रशीद ने जीत के ठीक बाद ट्विटर पर एक वीडियो संदेश पोस्ट किया था और इसी में ये बात कही थी.
रशीद ने यहाँ तक कह दिया था, ''दुनिया के मुसलमान समेत हिन्दुस्तान के मुसलमानों के जज़्बात पाकिस्तान के साथ हैं. इस्लाम को फ़तह मुबारक हो. पाकिस्तान ज़िंदाबाद.''

क्रिकेट और मज़हब

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हालांकि पाकिस्तान की ओर से इस तरह का बयान कोई पहली बार नहीं आया था. 2007 के टी-20 विश्व कप फ़ाइनल में भारत से हारने के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन कप्तान शोएब मलिक ने मुस्लिम दुनिया से माफ़ी मांगी थी. तब शोएब मलिक की भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा से शादी नहीं हुई थी. दोनों की शादी 2010 में हुई थी.
2007 के टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फ़ाइनल मैच में पाकिस्तान की हार हुई थी. तब पाकिस्तानी टीम की कप्तानी शोएब मलिक के पास थी.
भारत से हार के बाद शोएब मलिक ने कहा था, ''मैं अपने मुल्क पाकिस्तान और दुनिया भर के मुसलमानों को समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूँ. बहुत शुक्रिया और मैं वर्ल्ड कप नहीं जीत पाने के लिए माफ़ी मांगता हूँ. हालाँकि हमने खेल में अपना 100 फ़ीसदी दिया था.''
शोएब मलिक तब ये भी भूल गए थे कि उस मैच में भारत के इरफ़ान पठान मैन ऑफ़ द मैच बने थे. शोएब मलिक को आउट इरफ़ान पठान ने ही किया था. तब शोएब मलिक के बयान की भारत के मुस्लिम नेताओं और खिलाड़ियों ने भी कड़ी निंदा की थी.
दिल्ली में अल्पसंख्यक आयोग के भूतपूर्व प्रमुख कमाल फ़ारूक़ी ने कहा था, ''इस तरह से उनकी बोलने की हिम्मत कैसे हुई? क्या पाकिस्तान के भीतर कोई ग़ैर-मुस्लिम समर्थक नहीं है? उनका बयान पाकिस्तान के हिन्दुओं और ईसाइयों का अपमान है.''
तब भारतीय हॉकी के स्टार असलम शेर ख़ान ने कहा था, ''बेचारा भावना में बह गया. अंग्रेज़ी भी उसे बहुत अच्छी नहीं आती है और उसमें भी हार के बाद बोल रहा था.''
मैदान में मज़हब

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कहा जाता है कि पाकिस्तानी क्रिकेटरों की ड्रेसिंग रूम की संस्कृति और वहाँ की राजनीतिक संस्कृति का असर उनके ऊपर ख़ूब रहता है. 2006 में डॉक्टर नसीम अशरफ़ को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था. उन्होंने तब अपने खिलाड़ियों से कहा था कि वे अपनी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी गतिविधियों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित ना करें. हालांकि डॉक्टर नसीम के बयान का असर पाकिस्तान के खिलाड़ियों पर नहीं हुआ.
मोहम्मद रिज़वान अक्सर स्टेडियम में नमाज़ अदा करते दिखते हैं. 2021 में रिज़वान के नमाज़ पढ़ने का वीडियो क्लिप शोएब अख़्तर ने ट्वीट करते हुए लिखा था, ''अल्लाह उस सिर को किसी के आगे झुकने नहीं देता जो उसके सामने झुकता है. सुभानअल्लाह.''
डॉक्टर नसीम अशरफ़ ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा था, ''इसमें कोई शक़ नहीं है कि खिलाड़ियों की धार्मिक आस्था उन्हें प्रेरित करती है. यह एकजुट रखती है. लेकिन क्रिकेट और मज़हब के बीच संतुलन होना चाहिए.''
''मैंने इसे लेकर टीम के कप्तान इंज़माम-उल हक़ (तब कप्तान) से बात की है. हमें निजी आस्था को लेकर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इंज़माम से कहा है कि इस्लाम दूसरों पर अपना विचार थोपने की इजाज़त नहीं देता है.''
कमाल फ़ारूक़ी ने 2007 में शोएब मलिक के बयान के बाद कहा था कि पाकिस्तान के खिलाड़ी इस तरह के बयान देते रहते हैं. फ़ारूक़ी ने वसीम अकरम के एक बयान को याद करते हुए कहा था, ''मुझे याद है कि बांग्लादेश से हारने के बाद वसीम अकरम ने कहा था कि 'ब्रदर नेशन' से हार हुई है. ऐसी टिप्पणियां खेल भावना के ख़िलाफ़ हैं.''
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