पाकिस्तान लाखों अफ़ग़ान नागरिकों को निकालने की तैयारी में, भड़का तालिबान

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- Author, शुमाएला जाफ़री
- पदनाम, बीबीसी न्यूज, इस्लामाबाद
पाकिस्तान सरकार ने अवैध प्रवासियों को चेतावनी दी है. उसने अवैध प्रवासियों से कहा है कि या तो वे एक नवंबर तक देश छोड़ दें, नहीं तों उनको निकालने की कार्रवाई की जाएगी.
पाकिस्तान में अवैध प्रवासियों में सबसे अधिक संख्या अफ़ग़ान नागरिकों की है.
बलूचिस्तान और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत में हुए दो धमाकों के बाद सरकार ने यह घोषणा की है.
इन धमाकों में क़रीब 60 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे. ये धमाके पैग़ंबर मोहम्मद की जयंती पर आयोजित धार्मिक समागम के दौरान हुए थे.
कुछ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान सरकार की इस नीति पर चिंता जताई है. वहीं अफग़ान तालिबान ने पाकिस्तान से निष्कासन की योजना की समीक्षा का अनुरोध किया है.
पाकिस्तान का तर्क

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पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार के गृहमंत्री सरफ़राज़ बुगती ने इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई सभी देशों के नागरिकों पर की जाएगी. उन्होंने बताया कि अवैध प्रवासियों में क़रीब 17 लाख अफ़ग़ान नागरिक हैं.
गृह मंत्री ने बिना वैध काग़जात के रह रहे प्रवासियों को चेतावनी दी कि वो ख़ुद अक्टूबर के अंत तक अपने देश वापस चले जाएं.
उन्होंने कहा कि ऐसा न करने वालों को गिरफ़्तार किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि बिना वैध काग़ज़ात वाले प्रवासियों के कारोबार और संपत्ति को सरकार जब्त कर लेगी.
उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासियों की सूचना देने वाले लोगों को सरकार इनाम देगी. बुगती ने कहा कि इसके लिए एक ख़ास सावर्जनिक फोन लाइन बनाई जा रही है. बुगती ने कहा कि नक़ली राष्ट्रीय पहचान पत्रों की जांच कर उन्हें ख़त्म करने के लिए एक टास्क फोर्स बनाई गई है.
आव्रजन से जुड़ी नई घोषणाएं चरमपंथ के ख़िलाफ़ सुरक्षा और राष्ट्रीय कार्य योजना पर शीर्ष समिति की बैठक के बाद की गई.
बैठक की अध्यक्षता अंतरिम प्रधानमंत्री अनवारुल हक़ काकड़ ने की. इसमें सेना प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर और अन्य लोग मौजूद थे. बैठक में शामिल लोगों ने नई नीति की घोषणा से पहले उसका समर्थन किया.
इससे पहले पाक-अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर क़बिलाई लोगों को विशेष यात्रा परमिट देने की नीति थी. गृहमंत्री ने कहा कि अब केवल वैध पासपोर्ट और वीज़ा वाले अफ़ग़ान नागरिक ही पाकिस्तान में प्रवेश कर सकते हैं और यहाँ रह सकते हैं.
पाकिस्तान में बढ़ते चरमपंथी हमले

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देश में बढ़ते हमलों के बाद आव्रजन नीति में बदलाव किया गया है. हमलों में इजाफे के लिए पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद आतंकवादी समूहों को ज़िम्मेदार ठहराता है.
ख़ासकर, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान या टीटीपी को. पाकिस्तान का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान शासन पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद से टीटीपी के अधिकांश बड़े नेता और संचालक अफ़ग़ानिस्तान चले गए हैं. वहाँ उन्हें सीमाई इलाक़ों में शरण मिली हुई है.
पाकिस्तान में 2023 में 24 बड़े धमाके हुए हैं. बुगती ने दावा किया कि इनमें से 14 धमाके अफ़ग़ान नागरिकों ने किए हैं.
उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में बलूचिस्तान में सेना के दो प्रतिष्ठानों पर हुए हमले में शामिल 11 चरमपंथियों में से आठ अफ़ग़ान नागरिक हैं.
उन्होंने कहा, ''हमारे पास इस बात के सबूत हैं कि इन हमलों में अफ़ग़ान शामिल हैं. इस मामले को हम विदेश मंत्रालय के ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के अधिकारियों के साथ उठा रहे हैं. ''
पिछले एक साल में पाकिस्तान ने इस मामले को कई बार अफ़ग़ानिस्तान के साथ उठाया है.
कई उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के दौरे भी हुए हैं. विदेश कार्यालय ने अफ़ग़ान राजनयिकों को तलब कर हमलों में अफ़ग़ान नागरिकों के शामिल होने के सबूत सौंपे हैं.
हालाँकि, अफ़ग़ान तालिबान ने पाकिस्तान में हमलों के लिए अपनी धरती के इस्तेमाल से हमेशा इनकार किया है. वह इसे पाकिस्तान की घरेलू सुरक्षा का मामला बताता रहा है.
पाकिस्तान की नई नीति पर तालिबान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान सरकार की नई आप्रवासन नीति पर अफ़ग़ानिस्तान की अंतरिम तालिबान सरकार के प्रवक्ता जैबुल्लाह ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान शरणार्थियों के प्रति पाकिस्तान का व्यवहार अस्वीकार्य है. उन्होंने पाकिस्तान से इस पर फिर से विचार करने की अपील की है.
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ''अफ़ग़ान शरणार्थी पाकिस्तान की सुरक्षा समस्याओं में शामिल नहीं हैं. जब तक वे स्वेच्छा से चले नहीं जाते हैं, पाकिस्तान को उन्हें रहने देना चाहिए.
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वहीं ट्विटर पर अफ़ग़ानिस्तान के दूतावास ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद और उसके आसपास के इलाक़ों में पुलिस अफ़ग़ान नागरिकों को परेशान कर रही है.
''उनके घरों पर दिन रात छापे डाले जा रहे हैं. अब तक हज़ारों लोगों को चरमपंथ विरोधी पुलिस ने गिरफ़्तार किया है, इनमें से आधे वे लोग हैं, जिनके पास यात्रा के वैध काग़ज़ात हैं.''
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इस्लामाबाद और कराची में गिरफ़्तारियां

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इस्लामाबाद पुलिस के मुताबिक़ राजधानी में अब तक अवैध प्रवासियों के ख़िलाफ़ 65 मामले दर्ज किए गए हैं. पुलिस ने होटलों और अन्य जगहों से क़रीब 400 लोगों को हिरासत में लिया है. वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी तरह की गिरफ़्तारियां कराची में भी हुई हैं.
पहले हज़ारों अफ़ग़ान के पास पाकिस्तानी मूल का होने का कार्ड था. ये कार्ड उन्हें पाकिस्तान में रहने की इजाज़त देता है. लेकिन इनमें से अधिकांश कार्ड अब एक्सपायर हो चुके हैं और सरकार ने उनका अबतक नवीनीकरण नहीं किया है.
पाकिस्तान की नई आप्रवासन नीति पर मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गहरी चिंता जताई है. एमनेस्टी ने एक बयान में कहा कि इन लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया, गिरफ्तारियां की गईं और उन्हें निर्वासित करने की धमकियां दी गईं हैं.
संस्था ने कहा है कि यह बेहद चिंताजनक है कि पाकिस्तान में अफ़ग़ान शरणार्थियों की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठीक से ध्यान नहीं दिया जा रहा है."
वहीं कुछ स्थानीय मानवाधिकार कार्यकताओं ने भी इस नीति की आलोचना की है. इन कार्यकर्ताओं ने सरकार से उन अफ़ग़ान नागरिकों को अपवाद बनाने को कहा है जो अनिश्चित परिस्थितियों में हैं और मानवीय गरिमा को बरकरार रखने की मांग कर रहे हैं.
इस घटनाक्रम पर पत्रकार एजाज सईद ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि गृह मंत्री सरफ़राज बुगती के पास चरमपंथ और और हिंसाग्रस्त बलूचिस्तान में गृह मंत्रालय चलाने का अनुभव है, इसके बाद भी ऐसा लगता है कि उन्होंने जिन उपायों की घोषणा की है, उन पर अमल करने में उनके सामने कई चुनौतियाँ होंगी.
यूएनएचसीआर भी आया विरोध में

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शरणार्थियों पर संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) भी अप्रवासियों को वापस जाने के लिए बेबस करने और इसकी समय सीमा तय करने का विरोध कर रहे हैं.
इस्लामाबाद में यूएनएचआरसी के प्रवक्ता कैसर अफ़रीदी ने बीबीसी को बताया कि बिना काग़जात वाले अफ़ग़ान नागरिकों में से कई ऐसे हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरत है.
इन लोगों को यदि वापस लौटने के लिए विवश किया गया तो उनका जीवन ख़तरे में पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि यूएनएचआरसी पाकिस्तान से उन लोगों के प्रबंधन के लिए एक योजना तैयार करने का आग्रह कर रहा है जो अपंजीकृत हैं, ताकि उन्हें व्यवस्थित कर सिस्टम में लाया जा सके.
प्रवक्ता ने कहा, "पाकिस्तान ने दशकों से लाखों अफ़ग़ान शरणार्थियों की बहुत उदारता से मेज़बानी की है. हम उनके सहयोग से इस काम को जारी रखने की उम्मीद कर रहे हैं."
सिराजुद्दीन पेशावर के वरिष्ठ पत्रकार हैं. वो सरकार की नई निती को लेकर संशय में हैं. उन्हें लगता है कि इसका शायद ही कोई फल निकले.
वो कहते हैं, ''यह पहली बार नहीं है, जब हम इस तरह की घोषणा देखी है. साल 2014 में पेशावर आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए हमले के ठीक बाद इसी तरह के क़दम उठाए थे. उस समय भी कार्रवाई की गई थी. सैकड़ों लोग गिरफ्तार किए गए थे और निर्वासित किए गए थे.यह कुछ समय तक चला और फिर धीरे-धीरे ख़त्म हो गया.''
पाकिस्तान की गिरती अर्थव्यवस्था और अफ़ग़ान नागरिक

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सिराजुद्दीन इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि नई नीति काम कैसे करेगी.
वो कहते हैं, ''सुरक्षा के बारे में चिंता वैध और वास्तविक है. लेकिन यह मुद्दा जितना लगता है, उससे कहीं अधिक जटिल है. इसका असर हज़ारों परिवारों और उनकी आजीविका पर पड़ने वाला है. बिना काग़ज़ात वाले अफ़ग़ान शरणार्थी पाकिस्तान की ग्रे इकोनॉमी का हिस्सा बन गए हैं.''
''वे खुले तौर पर व्यापार कर रहे हैं और संपत्तियों के मालिक हैं. कुछ लोग यहां पीढ़ियों से रह रहे हैं. अगर यह नीति काम करती है तो मुझे बहुत आश्चर्य होगा. हालाँकि उनका मानना है कि अगर ऐसा होता है, तो यह स्थानीय लोगों के लिए अधिक अवसर पैदा करेगा.''
पाकिस्तान की हताशा केवल बिगड़ती सुरक्षा हालात से नहीं उपजी है. यह देश की बीमार अर्थव्यवस्था की वजह से भी है, जिसने चुनौतियाँ खड़ी की हैं. पाकिस्तान का मानना है कि कई काग़जात वाले और बिना कागजात वाले अफगान स्थानीय लोगों से मिलीभगत कर चीनी और गेहूं जैसे चीज़ों की तस्करी और डॉलर की हेराफेरी में शामिल हैं.''
''अधिकारियों का मानना है कि इस वजह से अंतरबैंक और खुले बाज़ार में डॉलर के विनिमय दरों में अंतर बढ़ गया है. पाकिस्तान फॉरेक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मलिक बोस्तान के मुताबिक 90 फ़ीसदी से अधिक विनिमय कारोबार काले बाज़ार में चला गया है.
इस साल के शुरू में आई ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान प्रतिदिन लाखों डॉलर की तस्करी की जाती है.
यह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर कहर बरपा रही है और अफ़ग़ान तालिबान के लिए लाइफ़ लाइन बन रही है. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि डॉलर की यह तस्करी अफ़ग़ानिस्तान पर 2021 में तालिबान के कब्जे के बाद उसकी सरकार पर लगी पाबंदियों से बचने में उनकी मदद कर रहा था.
पत्रकार सिराजुद्दीन का कहना है कि अफ़ग़ान लोग डॉलर की जमाखोरी और कालाबाज़ारी में बड़े पैमाने पर शामिल थे.
उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने सितंबर में इस तरह के जमाखोरों और कालाबाज़ारियों पर कार्रवाई शुरू की. इसका परिणाम यह हुआ कि डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी रुपये के मूल्य में इजाफा हुआ.
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का अफ़ग़ान विरोधाभास नया नहीं है. पाकिस्तान ने जो घोषणा की है उसे वह लागू कर पाएगा या नहीं, यह तो समय ही बताएग, लेकिन एक बात साफ़ है कि इससे उसके अफ़ग़ानिस्तान के साथ संबंधों के साथ-साथ उसकी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ साझेदारी पर भी काफ़ी दबाव पड़ेगा.
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