पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान बॉर्डर पर फिर चली गोलियां, क्या है विवाद की जड़?

चमन बॉर्डर

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पाकिस्तान ने अफ़ग़ान तालिबान पर पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच एक बॉर्डर क्रॉसिंग पर 'बिना उकसावे और बिना सोचे-समझे' गोलियां चलाने का आरोप लगाया है.

पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि दोनों के बीच चमन बॉर्डर में तालिबान के जवानों ने उनके इलाक़े में मोर्टार से गोले दाग़े हैं जिससे कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि कई घायल हुए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि अफ़ग़ान सैनिकों ने दक्षिण पश्चिम में मौजूद चमन बॉर्डर के पास असैनिक इलाक़ों पर 'बिना सोचे-समझे' गोलियां चलाई हैं.

इसके बाद चमन सीमा के पास के कुछ गांवों को खाली कराया गया है और अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है.

हाल में दिनों में ये इस तरह की दूसरी घटना है. इससे पहले अफ़ग़ान और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच हुई एक झड़प में छह आम नागरिकों की मौत हो गई थी.

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तालिबान के एक अधिकारी ने पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर पहले गोलियां चलाने का आरोप लगाया है. उन्होंने स्थिति सामान्य करने के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत पर ज़ोर दिया है.

अफ़ग़ान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि पाकिस्तान की तरफ से पहले गोलियां चलनी शुरू हुईं. मंत्रालय ने कहा, "नकारात्मक कार्रवाई और संघर्ष के बहाने देने से किसी का कोई लाभ नहीं होगा."

क्या है मामला?

चमन बॉर्डर

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पाकिस्तान के निजी टीवी न्यूज़ चैनल जियो टीवी के अनुसार ये मामला सीमा के पास शेख़ लाल मोहम्मद सेक्टर में एक बैरक की मरम्मत से जुड़ा है. जब पाकिस्तानी अधिकारी मरम्मत के काम में लगे थे उस वक्त उन्हें अफ़ग़ान सैनिकों ने रोका, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प शुरू हुई.

रिपोर्ट के अनुसार अफ़ग़ान सैनिकों की तरफ से आम नागरिकों के इलाक़े पर कई राउंड गोलियां चलीं जिसके बाद पाकिस्तानी सैनिकों ने इसका 'उचित' जवाब दिया.

जीयो टीवी ने चमन के डिप्टी कमिश्नर के हवाले से लिखा है कि चमन जिला अस्पताल में आपातकाल की घोषणा कर दी गई है और मॉल रोड, बोगा रोड बाईपास और बॉर्डर रोड के आपपास रहने वाले आम नागरिकों को इलाक़े से बाहर निकलने को कहा गया है.

अफ़ग़ानिस्तान के न्यूज़ चैनल, टोलोन्यूज़ ने इस घटना से जुड़ा एक वीडियो पोस्ट किया है और दावा किया है कि पाक और अफ़ग़ान सेना के बीच फिर से झड़प शुरू हो गई है.

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पाकिस्तान अख़बार द न्यूज़ डेली ने कहा है कि पाक सेना के मीडिया विंग आईएसपीआर के घटना की पुष्टि की है है और कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के भीतर से चमन में आम नागरिकों पर 'बिना सोचेसमझे रुक-रुक कर' गोलियां चलाई जा रही हैं.

सप्ताह भर में ये दूसरी बार है जब पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच चमन बॉर्डर पर झड़प हुई है. रविवार दोपहर भी सीमा पर गोलीबारी हुई थी.

इससे पहले 11 दिसंबर की घटना के बाद भी पाकिस्तानी सेना जन सपंर्क विभाग ने इस पर बयान जारी किया था.

आईएसपीआर ने बयान में कहा था कि 11 दिसंबर को अफ़ग़ान सीमा पर तैनात सुरक्षाबलों ने बिना उकसावे के भारी हथियारों का इस्तेमाल करते हुए चमन में आम नागरिकों पर गोलियां दाग़ी थीं. इस घटना में छह लोगों की मौत हुई थी और 17 लोग घायल हुए थे.

पाक सेना का कहना था कि उन्होंने काबुल में अफ़ग़ान अधिकारियों से संपर्क कर स्थिति की गंभीता से अवगत कराया है और कहा है कि इस तरह की घटना दोबारा न हो.

इस मामले में सोमवार को पाक रक्षा मंत्री ख़्वाज़ा आसिफ़ ने पाक नेशनल असेंबली को बताया कि अफ़ग़ान ने इस मामले में 'माफ़ी मांगी है'. उन्होंने स्पष्ट किया कि 'मामला सुलझा लिया गया है.'

पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान की सरहद पर क्या है विवाद

पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच चमन बॉर्डर पर खड़े लोग और सुरक्षाकर्मी

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच चमन बॉर्डर पर खड़े लोग और सुरक्षाकर्मी

हालांकि इस क्षेत्र में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच हिंसक झड़प पहले भी कई बार हुई है.

पिछले महीने इसी तरह के संघर्ष के बाद ये रास्ता कई दिनों तक बंद रहा था. उस मामले में एक हथियारबंद अफ़ग़ानी शख़्स ने सीमा पार करके पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर हमला बोल दिया था जिसमें एक पाकिस्तानी सैनिक की मौत हो गई थी और दो लोग घायल हुए थे.

इसके साथ ही पिछले महीने ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के कुर्रम ज़िले में सड़क निर्माण को लेकर विवाद खड़ा होने के बाद सीमा पार से हुई अफ़ग़ान गोलीबारी में आठ लोग घायल हुए थे जिनमें दो बच्चे और तीन पैरा-मिलिट्री जवान शामिल थे.

अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा को डूरंड लाइन नाम से जाना जाता है. अफ़ग़ानिस्तान इसे अपनी सरहद के तौर पर स्वीकार नहीं करता.

ब्रिटिश सरकार ने तत्कालीन भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों पर नियंत्रण मज़बूत करने के लिए 1893 में अफ़ग़ानिस्तान के साथ 2640 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा खींची थी.

ये समझौता काबुल में ब्रिटिश इंडिया के तत्कालीन विदेश सचिव सर मॉर्टिमर डूरंड और अमीर अब्दुर रहमान ख़ान के बीच हुआ था. लेकिन काबुल पर जो चाहे राज करे, डूरंड लाइन पर कभी सहमति नहीं बनी है.

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