पाकिस्तान में चर्चों पर हमले के ख़िलाफ़ ईसाई अल्पसंख्यकों का प्रदर्शन,

पाकिस्तान के फ़ैसलाबाद में क़ुरान के कथित अपमान की घटना के बाद जरांवाला में ईसाई समुदाय पर हुए हमले के विरोध में ईसाई और सामाजिक संगठनों ने कराची प्रेस क्लब के सामने प्रदर्शन किया है.
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि इन घटनाओं में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज करके उन्हें सज़ा देनी चाहिए.
पाकिस्तान के पंजाब सूबे के बाद सबसे अधिक ईसाई आबादी सिंध सूबे के कराची शहर में रहती है.
बीबीसी से बात करते हुए एक एक्टिविस्ट ने कहा कि ये सब एक आरोप पर हुआ जिसमें कोई सुनवाई नहीं होती है. इसके कोई साक्ष्य नहीं हैं.
उन्होंने कहा, "आरोप लगने के तुरंत बाद उन्होंने आगजनी शुरू कर दी. उन्होंने बाइबिल जला दी और चर्चों को जलाना शुरू कर दिया. लोगों के घर जलाए जा रहे हैं और लोग अपने ही घरों में सुरक्षित नहीं हैं और सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं."

आंखों में आंसू लिए पास्टर ग़ज़ाला शफ़ीक़ ने कहा कि ‘हमारे धार्मिक स्थल सुरक्षित नहीं है, यहां कुछ भी सुरक्षित नहीं है. पाकिस्तान क्यों भारत जैसा होता जा रहा है. हम मांग करते रहे हैं कि ईशनिंदा क़ानून का दुरुपयोग रुकना चाहिए.’
एक ईसाई व्यक्ति ने कहा कि ‘हमें ऐसा लगता है, जैसे हम इस देश में नहीं रहते हैं. ये देश अपनी मां जैसा नहीं है, जैसे हम अनाथ हों, जैसे हम पाकिस्तानी नहीं हों, जैसे हम विदेशी हों और जैसे हम दूसरे देश के नागरिक हों और पाकिस्तान में फंस गए हों.’

सामाजिक कार्यकर्ता सबीर माइकल ने कहा कि ‘इस समय किसी राजनीतिक पार्टी की सरकार नहीं है, सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया बहुत धीमी है, इसीलिए चर्च जलाए गए. हम मांग करके हैं कि घटना की जांच की गाए और इस तरह का आतंक जिन्होंने फैलाया है उन्हें गिरफ़्तार कर सज़ा दी जाए.’
फ़ैसलाबाद में इस घटना के बाद, कराची में पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा और बंदरगाह वाला शहर है.
कराची पुलिस विभाग के प्रवक्ता ने बताया है कि एडिशनल आईजी जावेद आलम ने एक अलर्ट जारी करते हुए संवेदनशील इलाकों जैसे चर्चों, मंदिरों, मस्जिदों के आसपास के इलाकों में सुरक्षा बंदोबस्त और खुफ़िया चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.



























