योगी यूपी में बीजेपी के कमज़ोर प्रदर्शन पर बोले, आगे के लिए किया आगाह

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि 'अति आत्मविश्वास' की वजह से बीजेपी लोकसभा 2024 के चुनाव में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी.
हालांकि उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के प्रति भरोसा जताया और कहा कि 'उप चुनावों में भी सभी दस सीटें भारतीय जनता पार्टी जीतेगी.
योगी ने कहा कि इसके लिए एक-एक कार्यकर्ता को जुटना और लगना पड़ेगा.
रविवार को लखनऊ में बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हुई. लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक थी.

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इस बैठक में बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, कई केंद्रीय और राज्य मंत्री, सासंद, विधायक और लोकसभा के उम्मीदवार शामिल हुए.
हालांकि इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नहीं मौजूद थे, जिनके बारे में माना जाता है कि पार्टी के अहम फ़ैसलों में उनकी प्रमुख भूमिका होती है.
यह बैठक ऐसे समय में हुई, जब लोकसभा चुनावों में झटका लगने के बाद अभी एक दिन पहले ही सात राज्यों में 13 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में भी बीजेपी को मायूसी हाथ लगी.
उपचुनावों में 10 सीटों पर इंडिया गठबंधन और दो पर बीजेपी की जीत हुई है. एक सीट निर्दलीय खाते में गई है.
पिछले कुछ दिनों से क़ानून व्यवस्था को लेकर भी सरकार जूझती दिख रही है और विपक्ष ज़ोर शोर से योगी सरकार को हर बड़े छोटे मुद्दे पर घेर रहा है.
आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की 10 विधानसभा सीटों पर उप चुनाव होने वाले हैं.
हालिया उपचुनावों में जीत को राजनीतिक पंडित इंडिया गठबंधन की नैतिक जीत मान रहे हैं, शायद इसीलिए इस बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत सभी नेताओं ने अपने भाषणों में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और जोश भरने की पूरी कोशिश की.
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योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा

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योगी आदित्यनाथ ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में हमने विपक्ष पर लगातार दबाव बनाए रखा और उत्तर प्रदेश में अपेक्षित सफलता हासिल की, चाहे 2014, 2019 लोकसभा चुनाव हों या 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव. इस बार भी पहले के चुनाव जितना ही बीजेपी को वोट मिला है. लेकिन वोटों में बदलाव और अति आत्मविश्वास ने हमारी उम्मीदों को नुकसान पहुंचाया. इसकी वजह से विपक्ष, जो पिछले चुनावों में धाराशायी हो गया था, आज डींगें हांक रहा है."
लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी की प्राथमिकता में उत्तर प्रदेश के किले को बचाना है. यहां पिछले एक दशक में बीजेपी ने चुनावों में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है और 2027 का विधानसभा चुनाव एक कड़ा इम्तिहान होगा.
योगी ने कहा, "14,19, 22, पंचायत चुनाव, नगर निकाय चुनाव और उप चुनावों में जो जीत का सिलसिला बना रहा, उसे हम आगे ले जाएंगे. यही मोमेंटम 2027 में भी बनेगा. उत्तर प्रदेश को नई पहचान मिली है, जो पहले छठी अर्थव्यवस्था थी, आज वो देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और प्रदेश का सम्मान बढ़ा है."
उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया, "याद रखना भारतीय जनता पार्टी है तो ज़िले में हमारा महापौर भी है, ज़िला पंचायत अध्यक्ष भी है, ब्लॉक प्रमुख भी है, चेयरमैन और पार्षद भी है. तो अगर कोई खरोच आती है तो उसका असर वहाँ भी पड़ने वाला है."
योगी ने विपक्ष पर भी निशाना साधा और उस पर समाज को जातीय आधार पर बाँटने का आरोप लगाया. साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को प्रभावी तौर पर इस्तेमाल किए जाने की ज़रूरत पर बल दिया.
उन्होंने कहा, "विपक्षी पार्टियों ने हमारे ख़िलाफ़ साज़िश रचने के लिए सोशल मीडिया का सफलता पूर्वक इस्तेमाल किया. बीजेपी कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर नज़र बनाए रखनी होगी, तुरंत अफ़वाहों का जवाब देना होगा और अनुसूचित जाति के नेताओं के प्रति पार्टी के सम्मान को ज़ाहिर करना होगा."
योगी ने पार्टी के हर कार्यकर्ता को और सांसद से लेकर पार्षद तक को आगामी विधानसभा की 10 सीटों पर होने वाले उपचुनाव और 2027 के चुनावों की तैयारी शुरू कर देने को कहा.
नड्डा ने साधा कांग्रेस पर निशाना

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समाजवादी पार्टी आम चुनावों में प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और प्रदेश में भी वो मुख्य विपक्षी पार्टी है. बीजेपी नेताओं के निशाने पर सपा भी थी.
जेपी नड्डा ने समाजवादी पार्टी का नाम लिए बिना कई कथित घोटालों का ज़िक्र किया और बीजेपी के शासन में साफ़ सुथरा प्रशासन देने का वादा किया.
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, "आपने तीनों चुनाव में जितना सांसद जीत कर आए, वो भी हमारे 240 को पार नहीं करते हैं. ये है आपकी परिस्थिति."
उन्होंने कहा, "13 राज्यों में कांग्रेस एक भी सीट जीतने में असफल रही. गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 64 सीटों पर जहां कांग्रेस का बीजेपी से सीधा मुकाबला था, उन्हें सिर्फ़ दो सीटें मिलीं."
नड्डा ने कांग्रेस पर संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमज़ोर करने का आरोप लगाया.
ये ज़िक्र इसलिए भी उन्होंने किया क्योंकि आम चुनावों के दौरान जब बीजेपी ने 400 पार का नारा दिया था, विपक्षी पार्टियों ने संविधान के ख़तरे में पड़ने का प्रचार किया.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुछ हद तक ज़मीन तक ये बात पहुंची और बीजेपी को नुक़सान होने का ये भी एक कारण रहा.
यूपी में बीजेपी और योगी

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लोकसभा 2024 में बीजेपी को सबसे अधिक झटका उत्तर प्रदेश में लगा, जहां उसकी सीटें 62 से घटकर सीधे 33 हो गईं.
बीजेपी जो 2019 के लोकसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत से भी अधिक 303 सीटें मिली थीं, जिसका बहुत बड़ा श्रेय उत्तर प्रदेश को दिया गया.
लेकिन इस बार बीजेपी का यह आंकड़ा 240 पर अटक गया और इसका भी कारण यूपी में पार्टी के प्रदर्शन को दिया जा रहा है.
यही वजह है कि मोदी की अगुवाई में बीजेपी को नीतीश कुमार की जेदयू (12 सीटें) और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी (16 सीटें) के सहारे सरकार बना पड़ा.
यूपी में बीजेपी के लचर प्रदर्शन के बाद से ही योगी आदित्यनाथ के भविष्य पर अटकलें भी शुरू हो गई थीं.
हालांकि इन अटकलों को हवा दी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने. उन्होंने बीते मई में दावा किया था कि 'लोकसभा जीतने के तुरंत बाद बीजेपी यूपी में योगी आदित्नयाथ को मुख्यमंत्री पद से हटा देगी.'
लोकसभा चुनावों में प्रचार के लिए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संजोयक अरविंद केजरीवाल को 21 दिनों की अंतरिम ज़मानत मिली थी, उन्होने बाहर आते ही सबसे पहले योगी आदित्यनाथ के भविष्य को लेकर बयान दिया था.
इसे लेकर राजनीतिक विवाद भी हुआ था और बीजेपी की ओर से सफ़ाई भी आई थी.
लेकिन जब लोकसभा चुनावों में यूपी में बीजेपी क़रीब आधे पर आ गई तो योगी के भविष्य पर लगाई जा रही अटकलें राजनीतिक विश्लेषकों को अधिक वास्तविक प्रतीत होने लगी थीं.
प्रदेश में क़ानून व्यवस्था को विपक्ष योगी सरकार पहले से अधिक हमलावर है. चाहे अयोध्या में बारिश के कारण रामपथ के धंसने का मामला हो या हाथरस सत्संग भगदड़ में 120 से अधिक लोगों के मारे जाने का मामला हो.
योगी और मोदी

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योगी आदित्यनाथ 1998 में जब गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए, तो उनकी उम्र महज़ 26 साल हो रही थी.
योगी यहाँ से पाँच बार सांसद चुने गए. योगी मार्च 2017 में 45 साल की उम्र में आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए.
दूसरी ओर नरेंद्र मोदी 51 साल की उम्र में 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे और 2002 में पहली बार राजकोट-2 से विधायक चुने गए थे.
यह मोदी के राजनीतिक जीवन का पहला चुनाव था. नरेद्र मोदी की पहचान हिंदुत्व के झंडाबरदार के रूप में रही है और योगी भी इस मामले में उन्नीस नहीं बैठते हैं.
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