हाथरस हादसा: वो एक सवाल, जिससे यूपी पुलिस बचती दिखी

हाथरस हादसे के वो पीड़ित, जिन्होंने अपनों को खोया

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उत्तर प्रदेश पुलिस ने हाथरस हादसे के दो दिन बाद गुरुवार को दो महिलाओं सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया है.

दो जुलाई को हाथरस के सिकन्द्राराऊ इलाके में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान भगदड़ मचने से 121 लोगों की मौत हुई थी.

पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, वो उस समिति का हिस्सा थे जिसने सूरज पाल जाटव यानी नारायण साकार उर्फ़ ‘भोले बाबा’ का सत्संग आयोजित किया था.

पुलिस ने घटना के मुख्य अभियुक्त और कार्यक्रम के आयोजक देवप्रकाश मधुकर की जानकारी देने वाले को एक लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा भी की है.

लेकिन कहीं भी एफआईआर में ‘भोले बाबा’ का जिक्र नहीं है. यहां तक कि उनसे पुलिस ने अभी तक कोई पूछताछ भी नहीं की है.

अलीगढ़ के आईजी शलभ माथुर

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‘बाबा’ का नाम क्यों नहीं?

गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने कई बार अलीगढ़ के आईजी शलभ माथुर से एक ही सवाल किया.

सवाल था कि सत्संग में प्रवचन देने वाले ‘भोले बाबा’ का नाम एफआईआर में क्यों नहीं है? क्यों उन्हें नामजद अभियुक्त नहीं बनाया गया है.

जवाब में शलभ माथुर ने कहा कि भगदड़ की स्थिति जब हुई तो आयोजनकर्ता मौके से भाग गए थे.

उन्होंने कहा कि आयोजन की जिम्मेदारी आयोजनकर्ताओं की थी, इसलिए उनकी जिम्मेदारी फ्रेम करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

बीबीसी

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नारायण सरकार उर्फ ‘भोले बाबा’

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शलभ माथुर ने कहा कि फिलहाल ‘बाबा’ से पूछताछ नहीं हुई है और अगर विवेचना में किसी का भी रोल निकल कर सामने आता है तो उसकी जांच की जाएगी.

उन्होंने कहा, “अगर जरूरत पड़ेगी तो पूछताछ की जाएगी. ‘बाबा’ का रोल है या नहीं. अभी इस पर बात करना जल्दबाजी होगी. एफआईआर के अंदर उनका नाम नहीं है. एफआईआर में जिम्मेदारी आयोजक की होती है. आयोजक की जिम्मेदारी फ्रेम करते हुए उनका नाम डाला गया है.”

पुलिस ने साफ तौर पर हाथरस हादसे के लिए आयोजकों और सेवादारों को जिम्मेदार बताया और ‘बाबा’ की भूमिका पर बात करने से बचते नज़र आए.

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कौन हैं वे लोग जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया

पुलिस के मुताबिक, हाथरस में हुए सत्संग के लिए एक समिति ने परमिशन ली थी, जिसके मुखिया वेद प्रकाश मुधकर हैं. फिलहाल वे अपने परिवार के साथ फरार हैं.

शलभ माथुर ने बताया कि जिन छह लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है वे सभी आयोजन समिति के सदस्य हैं और ‘सेवादार’ के रूप में काम करते हैं.

गिरफ्तार लोगों की जानकारी- चार पुरुष, दो महिलाएं

  • राम लड़ैते पुत्र रहबारी सिंह यादव, मैनपुरी
  • उपेंद्र सिंह यादव पुत्र रामेश्वर सिंह, फिरोजाबाद
  • मेघसिंह पुत्र हुकुम सिंह, हाथरस
  • मंजू यादव पत्नी सुशील कुमार, हाथरस
  • मुकेश कुमार पुत्र मोहर सिंह, हाथरस
  • मंजू देवी पत्नी किशन कुमार यादव, हाथरस

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शलभ माथुर ने बताया कि गिरफ्तार किए लोग पहले भी कई आयोजनों में हिस्सा ले चुके हैं.

उनके मुताबिक- आयोजक और इनकी सत्संग कमेटी भीड़ इकट्ठा करना, चंदा जमा करने से लेकर बेरिकेडिंग के ज़रिए भीड़ पर नियंत्रण करना, श्रद्धालुओं के लिए पंडाल, वाहनों की पार्किंग, कार्यक्रम स्थल पर बिजली, जेनरेटर और सफाई व्यवस्था जैसी चीजों की व्यवस्था करते हैं.

पुलिस ने बताया कि सेवादारों ने ‘बाबा’ के चरणरज लेने के लिए भीड़ को अनियंत्रित छोड़ दिया, जिसके बाद महिलाएं और बच्चे एक दूसरे के ऊपर गिर गए और इसके बाद सेवादार वहां से फरार हो गए.

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यूपी के पूर्व डीजीपी का क्या कहना है?

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2007 से 2009 तक उत्तर प्रदेश के डीजीपी रहे विक्रम सिंह ने बीबीसी संवाददाता अभिनव गोयल से बातचीत में कहा कि हाथरस हादसे की जड़ में बाबा हैं.

उन्होंने कहा, “एफआईआर घटना की सूचना होती है और विवेचना के दौरान इसमें और भी नाम शामिल हो सकते हैं, लेकिन मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि सारी मुसीबत, फसाद और अपराध की जड़ बाबा है और एफआईआर में उसका नाम सबसे पहले होना चाहिए था.”

विक्रम सिंह कहते हैं, “बाबा का नाम बाद में क्यों आएगा? सत्संग करवाने वाली समिति किसकी थी? ये समिति बाबा की थी. बाबा का नाम एफआईआर में ना देना, दिखाता है कि उसके प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाया गया है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए था.”

उनका कहना है, “पुलिस प्रशासन ने इससे पहले कुंभ, अर्धकुंभ, चुनाव, कांवड़ और वीआईपी ड्यूटी करवाई है, कहीं कुछ नहीं हुआ. ये कहां से हो गया. जाहिर है आपने दावतनामा दिया. सूचना मिले या ना मिले, दोनों स्थितियों में जिम्मेदारी पुलिस की होती है.”

“पुलिस के पास इंटेलिजेंस है, संपर्क सूत्र हैं. पुलिस को पता होना चाहिए था कि वहां कितनी भीड़ है. वहां बैरिकेडिंग, ट्रैफिक, वाच टावर, कंट्रोल रूप से समन्वय होना चाहिए था, जो नहीं था.”

विक्रम सिंह ने कहा- हादसे के लिए सिर्फ आयोजकों और सेवादारों को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है, इसमें पुलिस की भी बड़ी भूमिका है.

हाथरस हादसा

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क्या राजनीतिक दबाव काम कर रहा है?

राजनीति के जानकार लोगों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में 'भोले बाबा' के लाखों भक्त हैं और उनका दलित समाज के बीच अच्छा रसूख है.

स्थानीय पत्रकार पी एन शर्मा बताते हैं, “भोले बाबा खुद जाटव समाज से आते हैं और इनके भक्तों में 80 प्रतिशत लोग भी इसी समाज से हैं, जिसमें महिलाओं की संख्या ज्यादा है. इसके अलावा ओबीसी वर्ग से भी लोग इनके साथ जुड़े हैं.”

वे कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में 20 से ज्यादा जिलों में ‘भोले बाबा’ का नेटवर्क है जिसके तहत लाखों दलित वर्ग के लोग उनसे जुड़े हुए हैं. बाबा’ खुद को हरि यानी विष्णु का अवतार मानते हैं.

पी एन शर्मा कहते हैं, “मैंने भोले बाबा के 20 से ज्यादा कार्यक्रम देखे हैं. हर कार्यक्रम में एक लाख से ज्यादा लोग जुटते हैं और इसमें ज्यादातर दलित होते हैं.”

‘भोले बाबा’ के इस नेटवर्क की बात करते हुए उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ला कहते हैं- हर पार्टी के लिए वे वोट बैंक हैं.

बृजेश शुक्ला कहते हैं कि हर पार्टी पीड़ितों की बात तो कर रही है, लेकिन कोई भी 'बाबा' का नाम लेने को तैयार नहीं है, क्योंकि कोई भी अपना वोट बैंक खराब नहीं करना चाहता है, क्योंकि ‘बाबा’ को दलितों के बीच में अच्छा खासा प्रभाव है.

अगर उत्तर प्रदेश में दलितों की आबादी की बात करें तो यह करीब बीस प्रतिशत है.

हालांकि पीएन शर्मा कहते हैं कि चुनावों में उन्होंने कभी नहीं देखा कि ‘भोले बाबा’ ने किसी राजनीतिक पार्टी का समर्थन किया हो.

हालांकि उनके एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव के जाने की तस्वीर सोशल मीडिया पर हाथरस हादसे के बाद से साझा हो रही हैं.

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