रोहित वेमुला मामले की जाँच बंद करने को लेकर उठे सवाल, अब आगे तफ़्तीश की बात कही पुलिस ने

इमेज स्रोत, NOAH SEELAM/AFP via Getty Images
रोहित वेमुला की आत्महत्या मामले में तेलंगाना पुलिस की क्लोज़र रिपोर्ट के बाद हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
शुक्रवार की रात बड़ी संख्या में यूनिवर्सिटी के छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति इरानी के खिलाफ नारे लगाए.
छात्र रोहित वेमुला मामले में दायर पुलिस की क्लोज़र रिपोर्ट का विरोध कर रहे हैं.
शुक्रवार से ही यह दावा किया जा रहा है कि पुलिस ने अपनी क्लोज़र रिपोर्ट में सभी अभियुक्तों को क्लीन चिट दे दी है.
क्लोज़र रिपोर्ट के मुताबिक रोहित वेमुला का संबंध अनुसूचित जाति से नहीं था. यानी ये कि वो दलित नहीं थे.

इमेज स्रोत, Getty Images
रिपोर्ट के मुताबिक रोहित वेमुला का संबंध वड्डेरा जाति से है, जो अनुसूचित जाति में नहीं आती है. इसी को आधार बनाकर कहा गया है कि इस मामले में अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण क़ानून लागू नहीं होता है.
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि पुलिस ने रोहित वेमुला के मामले में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर अप्पा राव पिंदिले, पूर्व केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय और स्मृति इरानी के रोल की जांच नहीं की है.
छात्र ने कहा, "पुलिस ने अपनी 60 पेज की रिपोर्ट पेश की है उससे लगता है कि जाँच का फ़ोकस आत्महत्या न होकर रोहित वेमुला की जाति पर है."
छात्रों का कहना है कि जिस पहचान के कारण रोहित वेमुला को पूरी ज़िंदगी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, वो पहचान भी उससे छीन ली गई है.
प्रदर्शनकारी छात्र आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में बीजेपी और आरएसएस के छात्र संगठन एबीवीपी की बातों को ही दोहराया है.

इमेज स्रोत, ANI
परिवार ने क्या कहा
प्रदर्शनकारी छात्र ये भी कह रहे हैं कि पुलिस ने गलत तरीके से यह साबित किया है कि रोहित वेमुला दलित नहीं थे.
रोहित वेमुला के भाई राजा ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''क्लोज़र रिपोर्ट जमा करने के बाद डीजीपी ने खुद बयान दिया है कि मामले की दोबारा जांच की जाएगी और इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका भी डाली जाएगी.''
''हमने सीएम को ज्ञापन दिया है और उन्होंने रोहित को न्याय दिलाने के लिए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है.''
''कांग्रेस सरकार इस मामले की जांच करेगी और हमें भरोसा है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच की जाएगी. हम उसका इंतज़ार कर रहे हैं.''

इमेज स्रोत, ANI
तेलंगाना पुलिस का बयान
रोहित वेमुला की आत्महत्या मामले में मीडिया में चल रही ख़बरों पर तेलंगाना पुलिस ने बयान जारी किया है.
तेलंगाना पुलिस के डीजीपी का कहना है कि इस मामले में पहले आई क्लोज़र रिपोर्ट पर आगे जांच की जाएगी.
पहले हुई जांच पर रोहित वेमुला की मां और उनके क़रीबियों ने सवाल उठाए थे जिसके बाद तेलंगाना पुलिस ने यह फैसला लिया है.
डीजीपी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ''जिस रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है वो 2018 में तैयार की गई थी और उसे जांच अधिकारी के सामने 21 मार्च 2024 को पेश किया गया था.''
बयान में कहा गया, ''जो जांच हुई है उस पर रोहित वेमुला की मां ने सवाल उठाए हैं और इसलिए हम इस मामले में आगे जांच करेंगे. जांच आगे बढ़ाने को लेकर संबंधित न्यायालय में याचिका दाखिल करके अनुमति ली जाएगी.''

इमेज स्रोत, BBC
रोहित की जाति को लेकर क्लोज़र रिपोर्ट में क्या कहा गया?
क्लोज़र रिपोर्ट में कई सबूतों का हवाला देकर बताया गया है कि रोहित वेमुला का संबंध वड्डेरा जाति से है, जो बैकवर्ड क्लास में आती है लेकिन एससी नहीं है.
रिपोर्ट में गुंटूर ज़िले की तहसीलदार बी रजनी कुमारी के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने राधिका वेमुला (रोहित की मां) और उनके दो भाइयों को जाति प्रमाण पत्र जारी किया था, जिसमें उनकी जाति वड्डेरा बताई गई थी.
इसके अलावा गुंटूर ज़िले के तहसीलदार जी.वी.ए फनेंद्र बाबू के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने रोहित वेमुला के पिता वेमुला मनी कुमार को वड्डेरा (बैकवर्ड क्लास) का जाति प्रमाण पत्र जारी किया था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि गुंटूर ज़िले के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर कांतिलाल ने रोहित वेमुला के मामले में जाति की जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रोहित वेमुला और उनकी मां वड्डेरा जाति से संबंध रखती हैं.
क्लोज़र रिपोर्ट के पेज नंबर 55 पर कहा गया है कि जांच के दौरान रोहित के पिता मनी कुमार से भी बातचीत की गई. उन्होंने अपनी पत्नी से अलग होने और अपने बेटे के बारे में बात की. रिपोर्ट के मुताबिक रोहित के पिता ने बताया कि वे और उनकी पत्नी वड्डेरा जाति से संबंध रखती हैं.
इसके अलावा कई अन्य लोगों का भी रिपोर्ट में हवाला दिया गया है, जो बता रहे हैं कि रोहित वेमुला वड्डेरा जाति से संबंध रखते थे.

इमेज स्रोत, Getty Images
जाति पर रोहित की मां का पक्ष
रोहित, दलित थे या नहीं? इस पर काफी लंबे समय से विवाद चल रहा है.
रोहित की मां वी. राधिका ने एक बयान जारी कर बताया था कि उनका जन्म अनुसूचित जाति (माला) में हुआ था, लेकिन उनकी शादी वड्डेरा समुदाय के मनी कुमार से हुई थी.
वड्डेरा समुदाय को तेलंगाना में पिछड़ी जाति का दर्जा हासिल है.
वी. राधिका के मुताबिक वे आखिरी बच्चा पैदा करने के बाद निजी कारणों से अपने पति से अलग हो गई थीं.

इमेज स्रोत, Getty Images
उन्होंने बताया था कि पति से अलग होने के बाद वो अपने तीनों बच्चों को लेकर अनुसूचित जाति (माला) इलाके में रहने के लिए चली गईं, क्योंकि वे खुद जन्म से माला समुदाय से थीं.
रोहित की मां का कहना था कि वे पांच साल की उम्र से ही वे वड्डेरा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले परिवार में पली-बढ़ीं.
राधिका के मुताबिक, "उन्होंने और उनके बच्चों ने अनुसूचित जाति समुदाय की सभी परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन किया."
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में अपने एक फ़ैसले में कहा था कि माता या पिता में से कोई एक भी दलित है तो उनका बच्चा भी दलित माना जाएगा.
क्या है पूरा मामला?
17 जनवरी 2016 को हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र रोहित वेमुला ने खुदकुशी कर ली थी. वे आम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के सदस्य थे.
खुदकुशी से पहले रोहित वेमुला और उनके चार साथियों को यूनिवर्सिटी ने हॉस्टल से निकाल दिया था.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक सदस्य ने इन छात्रों पर मारपीट का आरोप लगाया था.
हालांकि यूनिवर्सिटी की पहली जांच में यह आरोप बेबुनियाद पाया गया, जिसके बाद रोहित और उनके अन्य साथियों को आरोपमुक्त कर दिया गया.
लेकिन इसके बाद विश्वविद्यालय में नए कुलपति आए और उनके कार्यकाल में बिना कोई नई वजह बताए पुराने फैसले को पलट दिया गया. फिर से रोहित और उनके मित्रों के लिए हॉस्टल और यूनिवर्सिटी की अन्य सार्वजनिक जगहों पर जाने को लेकर प्रतिबंध लगा दिया गया.

इमेज स्रोत, BBC
उसी समय सिकंदराबाद से बीजेपी सांसद बंडारू दत्तात्रेय (वर्तमान में हरियाणा के राज्यपाल) ने तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति इरानी को एक पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी को राष्ट्र विरोधियों का अड्डा बताते हुए हस्तक्षेप करने की मांग की थी.
दत्तात्रेय के पत्र के बाद मानव संसाधन मंत्रालय ने विश्वविद्यालय को एक पैनल बनाने का आदेश दिया था, जिसने रोहित वेमुला के साथ अन्य छात्रों के निलंबन का फैसला लिया था.
इस पत्र का हवाला देते हुए आंबेडकर छात्र संघ ने आरोप लगाया था कि दत्तात्रेय के पत्र के बाद से यूनिवर्सिटी में समस्याएं शुरू हुई हैं, जिसके बाद कुछ अन्य दलित छात्रों ने सामाजिक भेदभाव के कारण आत्महत्याएं की हैं.
इस मामले में बंडारू दत्तात्रेय के खिलाफ आत्महत्या के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी. इसके साथ ही उन पर एससी-एसटी कानून के तहत भी मामला दर्ज किया गया था.
हालांकि तब मीडिया से बात करते हुए दत्तात्रेय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उनके लिखे पत्र का रोहित वेमुला की आत्महत्या से कोई संबंध नहीं है.
यदि आपको आत्महत्या के विचार आ रहे हैं या आपकी जानकारी में किसी और के साथ ऐसा होता है, तो आप भारत में आसरा वेबसाइट या वैश्विक स्तर पर बीफ्रेंडर्स वर्ल्डवाइड के ज़रिए सहयोग ले सकते हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















