इसराइल-हमास युद्ध के बीच अमेरिका और भारत की अहम बैठक, इरादा क्या है?

अमेरिका और भारत का झंडा

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

सात अक्टूबर को हमास के घातक हमलों के बाद से ग़ज़ा पर जारी इसराइली आक्रमण के परिप्रेक्ष्य में लगातार ख़तरा इस बात का बना हुआ है कि कहीं हिंसा पूरे पश्चिमी एशिया में ना फ़ैल जाए.

अगर ऐसा होता है, जिसकी संभावना से विशेषज्ञ इनकार नहीं कर रहे हैं तो भारत पर इसका क्या प्रभाव होगा?

अमेरिका में 2009 से 2011 तक भारत की राजदूत रही मीरा शंकर कहती हैं कि इसका भारत पर गहरा असर पड़ सकता है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, “भारत के लिए ख़ास तौर से समस्या हो सकती है क्योंकि ऊर्जा को लेकर हम वेस्ट एशिया पर निर्भर हैं. दूसरा ये कि वहां काम करने वाले भारतीय लोगों की संख्या बहुत अधिक है. तो अगर वहां युद्ध बढ़ता है तो हमारे लिए बहुत समस्या होगी, क्योंकि तब कई लोग वापस आएंगे, रेमिटेंस पर भी असर पड़ेगा, आर्थिक तौर से बैलेंस ऑफ़ पेमेंट पर प्रभाव पड़ेगा. तो हमारे हित में तो ये है कि ये युद्ध जल्द से जल्द ख़त्म हो और वहां युद्ध-विराम तो कम से कम हो.“

द्विपक्षीय बैठक

अमेरिकी कांग्रेस के कर्मचारी ग़ज़ा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, अमेरिकी कांग्रेस के कर्मचारी ग़ज़ा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए

गुरुवार और शुक्रवार को दिल्ली में भारत, अमेरिका के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच "2+2" कही जाने वाली वार्षिक द्विपक्षीय बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी.

जैसा कि अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के उप विदेश मंत्री (असिस्टेंट सेक्रेटरी) डोनाल्ड लू ने कुछ दिन पहले वाशिंगटन में कहा, "इसराइल-हमास मामले पर, भारत सरकार ने हमास आतंकवादी हमले की सीधे तौर पर निंदा की और भारत, अमेरिका सहित उन देशों में से है जिसने ग़ज़ा में मानवीय मदद पहुँचाने की बात की है. भारत के साथ, हम इस युद्ध को फैलने से रोकने और मध्य-पूर्व में स्थिरता बनाए रखने और दो-राज्य समाधान को आगे बढ़ाने का लक्ष्य पूरा करने का इरादा रखते हैं."

वॉशिंगटन में नेशनल डिफेन्स यूनिवर्सिटी के रक्षा मामलों के विशेषज्ञ प्रो शॉन मैकफ़ेट ने बीबीसी से कहा कि बैठक में हमास-इसराइल युद्ध के फ़ैलने की संभावना पर ज़रूर चर्चा होगी.

वे कहते हैं, "हां, बैठक में इसराइल और हमास के बीच युद्ध पर चर्चा होगी क्योंकि भारत की आशंका वाजिब है कि यह जंग व्यापक मध्य-पूर्व युद्ध में बदल सकता है. यह अमेरिका और ईरान को युद्ध में धकेल सकता है. यह एक बदतर स्थिति है. साथ ही भारत के नेताओं की यह चिंता भी सही है कि इस युद्ध का असर उन पर (भारत पर) पड़ेगा."

दो दिवसीय इस अहम बैठक में भारत का नेतृत्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे जबकि अमेरिका की ओर से बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन हिस्सा लेंगे.

अमेरिका भारत का सब से बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. पिछले साल दोनों देशों के बीच गुड्स और सर्विसेज़ में द्विपक्षीय व्यापार 191 अरब डॉलर का रहा, जो ये दर्शाता है कि दोनों देश एक दूसरे पर काफ़ी निर्भर हो चुके हैं.

'टू प्लस टू' वार्ता क्या है?

अमरीकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, अमरीकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो)

'टू प्लस टू वार्ता' विदेशी कूटनीति में इस्तेमाल होने वाले शब्द हैं जिनका मतलब दो देशों के बीच रक्षा और विदेश नीतियों पर बातचीत से है.

भारत और अमेरिका के बीच इस सालाना वार्ता का आग़ाज़ 2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शासनकाल में हुआ था.

इस बार दिल्ली में पांचवीं बैठक हो रही है. ये बैठक बारी-बारी से दिल्ली और वॉशिंगटन में होती है.

बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समेत वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होती है.

भारत 'टू प्लस टू वार्ता' जापान, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ भी करता है, लेकिन विदेश सचिव और रक्षा सचिव स्तर पर.

Getty Images
अब जीई (GE) और एचएएल (HAL) के बीच F414 जेट इंजन बनाने के लिए एक समझौता हुआ है जो तेजस एमके-2 में लगाया जाएगा
मीरा शंकर
अमेरिका में भारत की पूर्व राजदूत

केवल अमेरिका के साथ ही भारत मंत्री स्तर की वार्ता करता है, ख़ास तौर से रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में.

अब तक भारत और अमेरिका के बीच हुई टू प्लस टू वार्ता पर नज़र डालें तो ये साफ़ समझ में आता है कि इन दो देशों के बीच नज़दीकियां बढ़ी हैं.

अमेरिका में भारत की राजदूत रहीं मीरा शंकर कहती हैं- तब से अब तक दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में रिश्ते बहुत मज़बूत हुए हैं.

वो कहती हैं, "जब मैं वहां थी तो रक्षा निर्यात के लिए या दोहरे उपयोग की टेक्नोलॉजी के निर्यात के लिए सुरक्षा के क्षेत्र में भारत को सबसे नीचे की कैटेगरी में रखा हुआ था. धीरे-धीरे इसमें मज़बूती आई. अब वहां भारत को एक बड़े डिफेन्स फ़ोर्स के रूप में देखा जाता है और ये भी कहा जाता है कि वो भारत को डिफेन्स एक्सपोर्ट में वैसे ही देखेंगे जैसे वो अपने सबसे बड़े मित्र देशों को देखते हैं. इसका मतलब ये है कि हथियार और टेक्नोलॉजी दोनों के एक्सपोर्ट अमेरिका से भारत के लिए अब थोड़ा आसान हो गया है."

भारत और अमेरिका के समझौते

मीरा शंकर कहती हैं कि दोनों देशों के बीच इस तरह की सालाना बैठकों और दूसरी मीटिंग के कारण दोनों देशों ने ये ठाना है कि इन हथियारों को भारत में बनाने की भी कोशिश करेंगे.

वे कहती हैं, "अब जीई (GE) और एचएएल (HAL) के बीच F414 जेट इंजन बनाने के लिए एक समझौता हुआ है जो तेजस एमके-2 में लगाया जाएगा."

"यह एक बड़ा क़दम है जो दोनों देशों ने लिया है क्योंकि तेजस को हम लोग काफ़ी सालों तक चलाएंगे."

इस बातचीत के परिणामस्वरूप लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ़ एग्रीमेंट (LEMOA) और कम्युनिकेशन कंपैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (COMCASA) नामक समझौते हुए हैं.

LEMOA दोनों देशों को ईंधन भरने और पुनः पूर्ति के लिए एक-दूसरे की निर्दिष्ट सैन्य सुविधाओं तक पहुंच की अनुमति देता है जबकि COMCASA एक विशिष्ट भारतीय समझौता है, जो भारतीय नौसेना के लिए अमेरिकी नौसेना से वास्तविक समय में जानकारी के आदान प्रदान की सुविधा मुहैया करता है.

'टू प्लस टू' मीटिंग का एजेंडा क्या है?

जो बाइडेन और जस्टिन ट्रूडो

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, जी 20 सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के उप विदेश मंत्री (असिस्टेंट सेक्रेटरी) डोनाल्ड लू कहते हैं कि हाल के वर्षों में 'टू प्लस टू' डायलॉग का एक अहम पहलू भारत के साथ रक्षा सह-उत्पादन रहा है.

वे कहते हैं, "हमारा इरादा भारतीय रक्षा ज़रूरतों को पूरा करने और वैश्विक सुरक्षा में अधिक योगदान करने के लिए विश्व स्तरीय रक्षा उपकरणों का उत्पादन करने में अधिक सहयोग को प्रोत्साहित करना है. इसके अलावा हम लोकतंत्र और मानवाधिकार को प्रमोट करने के प्रयासों पर भी चर्चा करेंगे. अधिकार, साथ ही स्वच्छ ऊर्जा, काउंटर टेररिज़्म आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष और सेमीकंडक्टर निर्माण के अपने सहयोग को आगे बढ़ाने पर बात करेंगे."

क्या भारत और कनाडा के बीच जारी कूटनीतिक संकट पर भी चर्चा होगी?

इसके जवाब में डोनाल्ड लू कहते हैं, "हमने सार्वजनिक और निजी तौर पर भारत सरकार से प्रधानमंत्री ट्रूडो के लगाए गए आरोपों की जांच में कनाडा के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है. हम कनाडा के साथ लगातार संपर्क में हैं और हमें उम्मीद है कि कनाडा की जांच आगे बढ़ेगी और अपराधियों को न्याय के कघठरे में लाया जाएगा."

सितंबर में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने वैंकूवर में हरदीप सिंह निज्जर नामी एक भारतीय सिख की हत्या में "भारत सरकार के एजेंटों" का हाथ होने का आरोप लगाया था.

भारत सरकार निज्जर को आतंकवादी मानती है. ट्रूडो के इल्ज़ाम के बाद भारत और कनाडा के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं.

भारत ने इन दावों को ख़ारिज किया है और आरोपों को "बेतुका और प्रेरित" बताया है.

इसके बाद कनाडा ने भारत से 41 राजनयिकों और उनके परिवार के सदस्यों को वापस बुला लिया है. कहा जा रहा है कि भारत इस मुद्दे को भी इस बैठक में उठाने का इरादा रखता है.

अमेरिकी प्राथमिकता एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर नज़र रखना

फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन

क्या इसराइल-हमास युद्ध से अमेरिका का ध्यान भारत-प्रशांत क्षेत्र से हट जाएगा?

पिछले साल फ़रवरी में यूक्रेन पर रूसी हमलों के बाद से अमेरिका का पूरा ध्यान यूक्रेन की मदद पर रहा है. पर अब 7 अक्तूबर के हमास के इसराइल पर हमलों के बाद अमेरिका का पूरी तरह से ध्यान इसराइल की रक्षा पर लगा है.

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ताज़ा स्थिति के कारण अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति में रुचि कम नहीं हुई है क्योंकि इंडो-पैसिफिक हमेशा से अमेरिकी भू-रणनीति के एक स्तंभ की तरह रहा है, जिसमे चीन का मुक़ाबला करना शामिल है और इसने क्षेत्र में चीन के प्रभाव को रोकने के लिए भारत के साथ अपने संबंधों को गहरा किया है.

मीरा शंकर कहती हैं कि अमेरिका द्विपक्षीय संबंध को प्राथमिकता देता रहेगा.

वे कहती हैं, "अमेरिका तो एक महाशक्ति है, और वो दुनिया की विभिन्न समस्याओं से एक साथ जूझता है. कभी ज़्यादा ध्यान देकर तो कभी कम ध्यान देकर. मुझे लगता है कि जो वेस्ट एशिया में समस्या आई है, ये अमेरिका को खींचेगी क्योंकि ये अभी लंबा चलेगा. लेकिन अगर आप देखें तो राष्ट्रपति बाइडन ने हाल में कर्ट कैंपबेल को उप विदेश मंत्री बनाया है और वो व्हाइट हाउस में एशिया पैसिफिक पॉलिसी के आर्किटेक्ट थे."

"ऐसा इस वजह से किया गया है कि अमेरिका में भी चुनाव आ रहा है. दुनिया में इतनी समस्याएं हो गई हैं. यूक्रेन में युद्ध, ग़ज़ा में युद्ध. पश्चिमी एशिया में भी तनाव बढ़ रहा है. लेकिन इसके बावजूद एक सीनियर आदमी ऐसा हो जो एशिया पैसिफिक पर ध्यान रखे तो ये एक अच्छा क़दम है."

कर्ट कैंपबेल को उप विदेश मंत्री बनाए जाने पर वॉशिंगटन में नेशनल डिफेन्स यूनिवर्सिटी के रक्षा मामलों के विशेषज्ञ प्रो शॉन मैकफेट कहते हैं, "अमेरिका और भारत चीन के ख़िलाफ़ आपसी गठबंधन बनाना चाह रहे हैं, मगर दोनों देशों के बीच कई मामलों पर काम किया जाना बाक़ी है. लेकिन ये भी सच है कि अमेरिका और चीन के बीच तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं. चीन के विदेश मंत्री ने हाल में अमेरिका की यात्रा की और अमेरिका के विदेश मंत्री ब्लिंकन के साथ एक लंबी मुलाक़ात की. अब कुछ हफ़्तों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका जा रहे हैं जहाँ वो राष्ट्रपति बाइडेन से मुलाक़ात करेंगे."

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, चीन की संबंध सुधारने की कवायद

अरुणाचल में भारत-चीन सीमा की एक भारतीय चौकी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, अरुणाचल में भारत-चीन सीमा की एक भारतीय चौकी

उधर अमेरिका का एशिया पैसिफिक में भारत के अलावा दूसरा बड़ा पार्टनर ऑस्ट्रेलिया है जिसके चीन के साथ संबंध बहुत ख़राब हो चुके हैं.

इसी हफ़्ते ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज़ ने भी चीन का दौरा किया ताकि दोनों देशों के बीच तनाव कम हो.

तो क्या अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया चीन से संबंध में सुधार लाने के बाद भारत को नज़र अंदाज़ करेंगे?

अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के उप विदेश मंत्री (असिस्टेंट सेक्रेटरी) डोनाल्ड लू कहते हैं ऐसा नहीं होगा और उनकी मीटिंग में सब कुछ एजेंडे पर होगा.

वे कहते हैं, "एक स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित और समृद्ध इंडो-पैसिफिक का समर्थन करने के हमारे प्रयासों के संदर्भ में इस क्षेत्र में सहयोग औपचारिक रूप से एजेंडे में है. मुझे लगता है कि यह सुनने में दिलचस्पी होगी कि सीमा मुद्दों से संबंधित चीन के साथ भारत की चर्चा कैसी चल रही है और मुझे यकीन है कि हमारे भारतीय साथी वांग यी (चीनी विदेश मंत्री) की अमेरिका की यात्रा और राष्ट्रपति बाइडन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच घोषित बैठक के बारे में सुनने में बहुत रुचि लेंगे."

भारत की पूर्व राजनयिक मीरा शंकर कहती हैं कि अमेरिका और भारत के बीच रिश्ते गहरे हुए हैं और इसमें जो गहराई है वो 'टू प्लस टू' मीटिंग में दिखेगी.

वे कहती हैं, "इस मीटिंग में ये ग़ौर किया जाएगा कि एशिया पैसिफिक को लेकर जो समझौते हुए थे उसमें किस हद तक प्रोग्रेस हुआ है, किस हद तक कठिनाइयां आई हैं और आगे कैसे बढ़ा जाए."

वे कहती हैं, ''पश्चिमी एशिया कॉरिडोर पर भी बात होगी. आप देखें भारत और अमेरिका के बीच वेस्ट एशिया कॉरिडोर पर बात हुई थी अब उस पर ज़रूर प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि सऊदी अरब और इसराइल के बीच संबंध स्थापित करने के मामले पर आगे जल्द तो कुछ होने वाला नहीं. तो इस पर भी मीटिंग में चर्चा होगी."

GETTY IMAGES
इस मीटिंग में ये ग़ौर किया जाएगा कि एशिया पैसिफिक को लेकर जो समझौते हुए थे उसमे किस हद तक प्रोग्रेस हुआ है, किस हद तक कठिनाइयां आई हैं और आगे कैसे बढ़ा जाए.
मीरा शंकर
अमेरिका में भारत की पूर्व राजदूत

अगले साल अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव है.

अगर राष्ट्रपति बाइडन हार गए तो 'टू प्लस टू' वार्ता के आगे जारी रहने में कोई बाधा आ सकती है?

विशेषज्ञ कहते हैं अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे से इस पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा.

वे कहते हैं कि इसकी शुरुआत तो राष्ट्रपति ट्रंप के ज़माने में हुई थी और जब जो बाइडन राष्ट्रपति बने तो उन्होंने इसको न केवल जारी रखा बल्कि इसे प्राथमिकता भी दी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)