अंतरिक्ष में चीन को पछाड़ने के लिए अमेरिका कौन सी रणनीति अपना रहा?

स्पेस एक्स के रॉकेट की उड़ान.

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इमेज कैप्शन, अंतरराष्ट्रीय स्पेश स्टेशन पर ले जाने के लिए स्पेस एक्स के रॉकेट का इस्तेमाल हो रहा है.
    • Author, जोनाथन जोसेफ
    • पदनाम, बिज़नेस रिपोर्टर, बीबीसी न्यूज़

अंतरिक्ष एजेंसी नासा के प्रमुख बिल नेल्सन ने कहा है कि अमेरिका की चांद पर फिर जाने के लिए चीन से होड़ है.

बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में नेल्सन ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हम ही वहां पहले पहुंचें.

उनके इस बयान ने 1960 और 1970 के दशक की याद दिला दी है, जब अमेरिका की अंतरिक्ष को लेकर सोवियत संघ से होड़ रहती थी. लेकिन करीब आधी शताब्दी बाद नासा इसमें से अधिकांश काम के लिए प्राइवेट कंपनियों को नियुक्त कर रहा है.

नेल्सन कहते हैं कि यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इस पर आने वाली भारी लागत को साझा करने की सहूलियत देता है. यह नासा को निजी क्षेत्र में उद्यमियों की रचनात्मकता का लाभ उठाने की इजाज़त देता है.

इस क्रम में वो एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स का हवाला देते हैं. उसे 2021 में चांद पर उतरने के लिए लैंडर बनाने के लिए तीन अरब डॉलर का ठेका दिया गया था. उसने अब तक के सबसे ताक़तवर रॉकेट का निर्माण किया है.

अंतरिक्ष में मुनाफ़ा

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के प्रमुख बिल नेल्सन.
इमेज कैप्शन, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के प्रमुख बिल नेल्सन.

अंतरिक्ष की इस दौड़ में अन्य प्राइवेट कंपनियों को भी मुनाफ़ा नजर आ रहा है. इस साल के शुरू में नासा ने जेफ़ बेजोस की कंपनी ब्लू ऑरिजिन के साथ 3.4 अरब डॉलर का एक समझौता किया था. यह समझौता भी लैंडर बनाने के लिए था. बाद में इसे मून लैंडर में बदल दिया गया था.

ये दोनों वो कंपनियां है, जिन्होंने सरकार की अरबों डॉलर की सरकारी सहायता का लाभ उठाया है. इनमें से कुछ पैसा कुछ हद तक चीन से आगे रहने की कोशिशों पर खर्च किया जा रहा है.

दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव के बीच यह होड़ और बढ़ गई है.

इस साल अगस्त में भारत चंद्रमा पर पहुंचने वाला चौथा देश बन गया था. वहीं वह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश है.

इस सफलता के बाद भी चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम एक ऐसा कार्यक्रम है, जिस पर नासा करीबी नजर रखे हुए है.

अंतरिक्ष में चीन की सफलता

चीन का अंतरिक्ष स्टेशन.

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इमेज कैप्शन, चीन का अंतरिक्ष स्टेशन.

चीन एकमात्र ऐसा देश है, जिसका अपना अंतरिक्ष स्टेशन है. वह चंद्रमा से नमूने लेकर पृथ्वी पर वापस आ चुका है. वह चंद्रमा के ध्रुवीय इलाके पर पहुंचने की योजना बना रहा है.

नेल्सन इससे चिंतित हैं. वो कहते हैं, "मुझे इस बात की चिंता है कि हमें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी मिला है, चीन वहां पहुंच कर कहता है कि यह हमारा क्षेत्र है और आप यहां नहीं आ सकते हैं."

नेल्सन इसके समर्थन में साउथ चाइना सी के कुछ हिस्सों पर अपना दावा पुख्ता करने के लिए चीन की ओर से कृत्रिम द्वीप बनाने का उदाहरण देते हैं.

नेल्सन यह भी बताते हैं कि चीन ने अमेरिकी नेतृत्व वाले आर्टेमिस समझौते पर दस्तखत नहीं किए हैं. इस समझौते का उद्देश्य अंतरिक्ष और चंद्रमा पर गतिविधि की एक रूपरेखा बनाना है.

वहीं चीन का कहना है कि वह अंतरिक्ष में शांतिपूर्ण खोजों के लिए प्रतिबद्ध है. उसने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के बारे में अमेरिकी चिंताओं को उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम को बदनाम करने का एक अभियान बताते हुए खारिज कर दिया था.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा कहां कर रहा है निवेश

स्पेस एक्स का रॉकेट.

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इस प्रतिस्पर्धा में नासा बड़े पैमाने में निवेश कर रहा है. नासा ने कहा कि सितंबर 2021 में ख़त्म हुए साल में उसने 71.2 अरब डॉलर का खर्च किया था. यह इससे पहले के साल की तुलना में 10.7 फ़ीसदी अधिक था.

नेल्सन कहते हैं, "हमारे ख़र्च का एक चौथाई हिस्सा छोटे व्यवसायों पर हो रहा है."

हॉवर्ड बिजनेस स्कूल में अंतरिक्ष की अर्थव्यवस्था पढ़ाने वाले सिनैड ओसुलिवन कहते हैं, ''यह पैसा छोटी फ़र्मों के ग्रोथ ख़ासकर स्टार्टअप को बढ़ा सकता है.'' ओसुलिवन पहले नासा में इंजीनियर थे.

वो कहते हैं कि सरकार अक्सर स्टार्ट-अप कंपनियों के लिए पहले ग्राहक के तौर पर काम करती है. उनका कहना है कि ये अनुबंध उन्हें निजी निवेशकों से संपर्क कर और अधिक धन जुटाने की इजाज़त दे सकते हैं.

चंद्रमा पर वापस जाने की दौड़ काफी हाई प्रोफाइल हो सकती है, लेकिन इसने अन्य अंतरिक्ष गतिविधियों को तेजी से बढ़ावा देने में मदद की है, जो कहीं अधिक फायदेमंद हो सकती हैं.

रूस 1957 में कक्षा में उपग्रह स्थापित करने वाला पहला देश बन गया था. उसकी इस क्षेत्र में अमेरिका के साथ होड़ थी. यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक इस समय 10 हजार 500 से अधिक उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं.

अंतरिक्ष में बढ़ता निवेश

चाड एंडरसन ने पिछले दशक में इनवेस्ट फ़र्म स्पेस कैपिटल की स्थापना की थी. अंतरिक्ष के क्षेत्र में आई तेजी का श्रेय वो स्पेस एक्स को देते हैं.

वो कहते हैं, ''आज हम स्पेश को इनवेस्टमेंट के एक क्षेत्र के रूप में बात कर रहे हैं, इसका एकमात्र कारण स्पेस एक्स है. आज से करीब 10 साल पहले उनकी पहली व्यावसायिक उड़ान से पहले तक पूरा बाज़ार सरकार के प्रभुत्व वाला था.''

एनॉलिटिक फ़र्म ब्रीसटेक के मुताबिक, अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहे करीब आधे उपग्रह पिछले तीन साल में लांच किए गए हैं.

वो मुख्य तौर पर दो कंपनियों वन वेब और एलन मस्क की स्टारलिंक का धन्यवाद करते हैं.

एंडरसन बताते हैं, "अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था केवल रॉकेट और सैटेलाइट हार्डवेयर से कहीं अधिक विस्तृत है. यह अदृश्य रीढ़ है जो हमारी वैश्विक अर्थव्यवस्था को शक्ति देती है."

वो कहते हैं कि अंतरिक्ष में सैटेलाइट की बढ़ती हुई संख्या और बढ़ती हुई कंपनियां, इन सैटेलाइटों की ओर से उपलब्ध कराए गए डाटा का नए इस्तेमाल की तलाश कर रही हैं, इनमें कृषि, बीमा और जहाजरानी उद्योग शामिल हैं.

स्पेस एक्स को किससे मिल रही है चुनौती

रॉकेट लैब के संस्थापक पीटर बेक.

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इमेज कैप्शन, रॉकेट लैब के संस्थापक पीटर बेक.

न्यूज़ीलैंड की रॉकेटलैब अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की एक प्रमुख खिलाड़ी है. यह स्पेस एक्स की प्रतिद्वंदी कंपनी है. उसने अबतक 40 सैटेलाइट लांच किए हैं, इनमें नासा और अन्य अमेरिकी एजेंसियों के सैटेलाइट शामिल हैं.

रॉकेटलैब के संस्थापक पीटर बेक पहले बर्तन धोने वाली मशीन के इंजीनियर थे. अब वो अंतरिक्ष में सैटेलाइट लांच कर रहे हैं. वो कहते हैं कि धरती से इतर वित्तिय संभावनाओं की बात हो तो यह एक विशाल हिमखंड का एक छोटा सा हिस्सा भर है.

वो कहते हैं, ''लांच में करीब 10 अरब डॉलर खर्च होते हैं. इसके बाद सैटेलाइट का निर्माण भी करीब 30 अरब डॉलर की लागत का होता है. इसके बाद उनके प्रयोग भी हैं, जो कि करीब 830 अरब डॉलर का है.''

इस तरह के बड़े दावे करने वाले वो अकेले नहीं हैं. अमेरिकी निवेश बैंक मॉर्गन स्टैनली का अनुमान है कि 2040 तक स्पेस इकॉनमी एक ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक की होगी.

अंतरिक्ष क्षेत्र की निजी कंपनियां आगे क्या कर सकती हैं हो सकता है?

भारत का चंद्रयान-तीन

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बेक चंद्रमा पर अवसरों को लेकर सजग हैं, खासकर वहां खनन को लेकर. वो कहते हैं, ''फिलहाल, चंद्रमा पर जाना और वहां खनन करना और उसे वापस पृथ्वी पर वापस लाना आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं है."

वहीं नासा के नेल्सन को चिकित्सा के क्षेत्र में संभावनाएं नजर आ रही हैं. वो दवा कंपनी मर्क द्वारा 2019 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर किए गए क्रिस्टल विकास पर उपयोगी शोध का हवाला देते हैं, जिससे कैंसर का इलाज विकसित करने में मदद मिली थी.

वह यह भी कहते हैं कि शून्य गुरुत्वाकर्षण में ऑप्टिक फ़ाइबर को बहुत प्रभावी तरीके से बनाया जा सकता है.

वो कहते हैं, "अंततः आप जो देखेंगे वह यह कि पृथ्वी की निचली कक्षा में बहुत सारी व्यावसायिक गतिविधियां हो रही हैं."

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