बढ़ती मुलाक़ातों के बीच क्या पिघल रही है अमेरिका-चीन रिश्तों में जमी बर्फ़?

अमेरिका और चीन के रिश्ते

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इमेज कैप्शन, जून महीने में चीन के दौरे पर अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन शी जिनपिंग के साथ

अमेरिका और चीन के बीच ताज़ा कूटनीतिक आदान-प्रदान, और शी जिनपिंग की दूसरे विश्वयुद्ध में चीन के लिए लड़ने वाले अमेरिकियों (फ़्लाइंग टाइगर्स)' को लिखी चिट्ठी ने दोनों देशों के बीच रिश्तों में गर्माहट आने की अटकलें तेज़ कर दी हैं.

पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम पर नज़र डालें तो पहले चीन के शीर्ष डिप्लोमैट वांग यी ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन से 15 और 16 सितंबर को मुलाक़ात की. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर अमेरिका के विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन चीन के उप-राष्ट्रपति हान झेंग से 18 सितंबर को मिले.

हाल के महीनों में ब्लिंकन, पर्यावरण मामलों के राजदूत जॉन केरी, ट्रेज़री सेक्रेटरी जेनेट येलेन और कॉमर्स सेक्रेटरी जीना रायमॉन्डो ने एक-एक कर के चीन का दौरा किया.

ये सब ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया की इन दोनों महाशक्तियों के बीच फ़ोन चिप, मादक पदार्थ और तिब्बत से लेकर ताइवान तक कई मसलों पर टकराव जारी है.

इन मुलाक़ातों के बीच न तो इसी साल फ़रवरी में 'जासूसी गुब्बारे' वाली घटना और न ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की ओर से शी की तुलना 'तानाशाह' से करना, रुकावट बनी.

क्या पिघल रही है रिश्तों की बर्फ़?

चीन-अमेरिका

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इमेज कैप्शन, 2021 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से जो बाइडन की वर्चुअल मुलाकात

इस सवाल पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है.

कार्नेगी एंडॉमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस थिंकटैंक के डफ़लस पॉल ने हांग-कांग के फ़िनिक्स टीवी पर 31 अगस्त को हुई एक चर्चा के दौरान बताया कि कैसे बमुश्किल एक साल पहले चीन के साथ संवाद अमेरिका में लगभग 'निषेध शब्द' जैसा था. ऐसे में अब वार्ता के रास्तों को फिर से खोलना अच्छा बदलाव है.

चीन के रीजनल ब्रॉडकास्टर शेनज़ेन टीवी के ऑनलाइन ऑउटलेट झी न्यूज़ पर एक टिप्पणीकार ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि उनकी नज़र में हालिया बातचीत से दोनों देशों के रिश्ते अब 'स्थायी सुधार' के दौर में पहुंच गए हैं.

हालांकि, बाकी अभी भी इन बातचीतों पर सतर्क हैं.

बीजिंग यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर जिया चिनगुओ ने फ़िनिक्स टीवी की उसी डिबेट में कहा, "अमेरिका की कोशिशें मुख्यतौर पर वार्ता बहाल करने के लिए हैं, जो अपने आप में ये दिखाता है कि दोनों देशों के रिश्ते किस कदर अविश्वास और राजनीति बाधाओं से भरपूर हैं."

हांग-कांग के लिए एक अन्य टीकाकार ने कहा है कि दोनों देशों के बीच संबंध एक दौर में दाखिल हो रहे हैं.

बाइडन और शी की हो पाएगी मुलाक़ात?

जो बाइडन

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वांग यी और जेक सुलिवन की मुलाकात के बाद व्हाइट हाउस ने अपने बयान में आने वाले सप्ताहों के अंदर और उच्च-स्तरीय संवाद होने के संकेत दिए थे.

नवंबर में सैन फ़्रांसिस्को में एशिया-पैसिफ़िक इकोनॉमिक अफ़ेयर्स कॉर्पोरेशन (एपीईसी) की बैठक होनी है. ये बाइडन और शी जिनपिंग के मिलने के लिए एक संभावित मौका हो सकता है.

हालांकि, अभी तक दोनों ही पक्षों ने ऐसी किसी बैठक के संकेत नहीं दिए. चीन ने कहा है कि एपीईसी में वो शामिल होगा या नहीं, ये समय पर बता दिया जाएगा.

बावजूद इसके, ताइवान सरकार की मान्यता प्राप्त सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (सीएनए) ने शंघाई स्थित अज्ञात अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों के हवाले से ये कहा है कि शी जिनपिंग इस बैठक में शामिल हो सकते हैं.

राजनीतिक मामलों के जानकार ने कहा है कि अमेरिकी अधिकारियों के चीन के हालिया दौरे शीर्ष नेताओं की मुलाकात को लेकर अमेरिकी इच्छाशक्ति दिखाते हैं. और चीन की आर्थिक परेशानियों के बीच एपीईसी में शी जिनपिंग का पहुंचना उनकी घरेलू जनता के लिए भी आश्वासन के तौर पर काम करेगा.

लायनिंग यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर लु चाओ भी इसी विचार को दोहराते हैं.

उनका कहना है कि शीर्ष अधिकारियों के दौरे रिश्तों में धीरे-धीरे हो रही प्रगति को दिखाते हैं.

उन्होंने हांग कांग में सरकारी चाइना न्यूज़ सर्विस (सीएनएस) से कहा कि अमेरिका ने "जानबूझकर चीन के साथ गंभीर चर्चाएं बढ़ाई हैं. ताकि एपीईसी में मुलाकात का रास्ता खुल सके."

फ़्लाइंग टाइगर्स’ की क्या है भूमिका

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इमेज कैप्शन, फ्लाइंग टाइगर्स (अमेरिकी टुकड़ी) ने दूसरे विश्व युद्ध में चीन के लिए लड़ा था

ब्लिंकन और हान की मुलाक़ात के बाद चीनी मीडिया ने प्रमुखता ने शी जिनपिंग का लिखा फ़्लाइंग टाइगर्स के नाम लिखा एक ख़त छापा.

ये अमेरिकी टुकड़ी दूसरे विश्व युद्ध में चीन के लिए लड़ी थी.

ये ख़त लिखा तो 12 सितंबर को था लेकिन इसे उच्च स्तरीय कवरेज ब्लिकंन-हान की मुलाक़ात के बाद 20 सितंबर को मिली

ये खत विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट के अलावा चीनी के सारे सरकारी मीडिया पर छाया रहा.

ये पत्र शिन्हुआ, चाइना डेली, सीसीटीवी और चाइना रेडिया इंटरनेशनल में प्रमुखता से छापा गया.

खत में राष्ट्रपति शी ने चीन और अमेरिका के रिश्तों पर ज़ोर देते हुए लिखा है कि ‘दोनों देशों को आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और सहयोग हासिल करना चाहिए.’

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने ‘हेड ऑफ़ स्टेट डिप्लोमेसी’ के शीर्षक से शायराना अंदाज़ में लिखा - एक ख़त मुलाक़ात जैसा होता है और ये प्यार काफ़ी संजीदा है…

इसी लेख में आगे ज़िक्र किया गया है कि शी ने अमेरिका में और भी कई दोस्ताना लोगों को ख़त लिखा है जिनमें छात्र भी शामिल हैं. ख़त में ज़रूरी संदेश ये है कि चीन-अमेरिका के संबंधों की नींव दोनों देशों के लोग हैं.

20 जुलाई को शी ने पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर से बीजिंग में एक हाई प्रोफ़ाइल मुलाक़ात की थी और उम्मीद जताई थी कि अमेरिका के दूरदर्शी लोग, दोनों देशों के बीच रिश्तों को पटरी पर लाने में रचनात्मक सहयोग करेंगे.

आगे की राह?

चीन का कहना है कि रिश्तों को सुधारने का जिम्मा अमेरिका का है.

बीजिंग से साफ़ कहा है कि हाल में हुई वार्ताओं में जिन क़दमों को उठाने की सहमति हुई थी उन पर अमेरिका को ठोस क़दम उठाने चाहिए.

चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी ने एक्सपर्ट्स के हवाले से कहा है कि इस दिशा में अमेरिका को ठोक कार्रवाई करनी होगी.

19 सितंबर को चैनल की वेबसाइट पर एक एक्सपर्ट ने लिखा, “अमेरिकी नीति फ़िलहाल दो चेहरों वाली लग रही है. एक तरफ़ वो चीन की तरफ़ हाथ बढ़ा रहा है तो दूसरी ओर वो नए शीत युद्ध की रणनीति को अपना रहा है.”

ताइवान के मुद्दे का क्या होगा?

अमेरिका-चीन

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दोनों देशों के बीच ताइवान अब भी एक दुखती रग है.

चीन के अंतरराष्ट्रीय ब्रॉडकास्टर चाइना ग्लोबल टेलिविज़न ने 18 सिंतबर को अपनी वेबासइट पर छापी एक ख़बर में लिखा, “ अमेरिका को जो पहला सबक सीखना चाहिए वो है - ताइवान पर खींची चीन की लाल रेखा का उल्लंघन न करे.”

जेक सुलिवान की वांग यी के साथ मीटिंग के दौरान, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने साफ़ तौर पर लिखा कि उन्होंने ताइवान पर 12 घंटे लंबी एक चर्चा की है.

चीन की रेनमिन यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार शी यिनहोंग ने सीएनए को एक इंटरव्यू में बताया कि दोनों देशों के बीच रिश्तों में कोई ‘अहम और दूरगामी’ परिवर्तन नहीं आया है.

शी यिनहोंग ने हाल ही में ताइवान के ऊपर से गुज़रे 103 चीनी फ़ाइटरों की तरफ़ ध्यान दिलाते हुए कहा - वास्तविकता ये है.

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