बाबर आज़म पर लटकती तलवार और वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के ख़राब प्रदर्शन का कारण

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- Author, मोहम्मद सुहैब
- पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम
"हम चमत्कारों में विश्वास रखते हैं और विश्वास से चमत्कार होते हैं. इससे पहले भी हम ऐसी स्थितियों में आने के बाद सफल हुए हैं."
यह पाकिस्तान के उप कप्तान शादाब ख़ान थे जो पाकिस्तान के दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ महत्वपूर्ण मैच से पहले मीडिया से बात कर रहे थे. वे एक बार फिर एक ऐसी स्थिति का उल्लेख कर रहे थे जिसमें पाकिस्तानी टीम एक आईसीसी इवेंट में फंस चुकी है.
पाकिस्तानी टीम की यह परंपरा बहुत पुरानी है कि जब वह किसी टूर्नामेंट में बुरी शुरुआत करे तो फिर अचानक उसे होश आता है और फिर टीम की जीत का सिलसिला शुरू हो जाता है.
लेकिन पाकिस्तान के पिछले तीन मैचों पर नज़र डालें तो उसकी खराब फ़ील्डिंग और गेंदबाज़ों और बेंच पर बैठे वैकल्पिक खिलाड़ियों को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि यह टीम स्थिति को बदल पाएगी. लेकिन सवाल यह ज़रूर बनता है की बात यहां तक पहुंची कैसे?

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वर्ल्ड कप से पहले की पाकिस्तान टीम
वर्ल्ड कप शुरू होने से लगभग पांच महीने पहले पाकिस्तान ने न्यूज़ीलैंड को पाकिस्तान में खेली गई पांच मैचों की वनडे सिरीज़ में 4-1 से हरा दिया था.
उस सिरीज़ में पाकिस्तान के लिए ओपनर फ़ख़र ज़मान ने तीन लगातार शतक लगाए थे और 'प्लेयर ऑफ़ द सिरीज़' घोषित किए गए थे जबकि हारिस रऊफ़, नसीम शाह और ओसामा मीर काफ़ी कामयाब रहे थे.
कप्तान बाबर आज़म भी अच्छी फ़ॉर्म में थे और सिरीज़ में दो अर्द्धशतक और एक शतक बना चुके थे. सिरीज़ समाप्त होने के बाद पाकिस्तान के तीन बल्लेबाज़ आईसीसी वनडे रैंकिंग में टॉप फ़ाइव में थे और पाकिस्तान टीम रैंकिंग में पहले नंबर पर आ चुकी थी.
तो फिर पिछले पांच महीनों में ऐसा क्या हुआ कि हर क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली टीम भारत जाकर गेंदबाज़ी और फ़ील्डिंग में विशेष तौर पर बुरी तरह नाकाम दिखाई दी?

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पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में बदलाव
वर्ल्ड कप का साल आमतौर पर वैसे ही महत्वपूर्ण होता है, जैसे किसी राजनीतिक दल के लिए चुनाव का साल. इस साल के दौरान आमतौर पर दुनिया भर की टीम उन पंद्रह खिलाड़ियों के दल को अंतिम रूप देती है जो क्रिकेट का सबसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट खेलेगा.
लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट के लिए यही वर्ल्ड कप का साल आमतौर पर बोर्ड के स्तर पर सबसे अधिक बदलाव का साल होता है.
पिछले एक साल के दौरान पहले रमीज़ राजा की जगह नजम सेठी को चेयरमैन बनाया गया और फिर ठीक वर्ल्ड कप से कुछ महीने पहले ज़का अशरफ़ को चेयरमैन बना दिया गया.
आंकड़े बहुत महत्व रखते हैं और अगर बाबर आज़म अच्छा परफ़ॉर्म करेंगे तो उन्हें कप्तान बरक़रार रखा जाएगा वर्ना आप समेत दूसरे पत्रकार उनकी कप्तानी पर सवाल करेंगे.
इस दौरान बाबर आज़म की कप्तानी पर पुनर्विचार के बारे में भी विवाद बना रहा. शान मसूद, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में चार साल तक कोई वनडे नहीं खेला था, अचानक बतौर उप कप्तान टीम में शामिल कर लिए गए.
यही नहीं मार्च में अफ़ग़ानिस्तान के साथ टी 20 सिरीज़ से पहले शाहीन शाह आफ़रीदी को कप्तान बनाने की भी अफ़वाहें फैली थीं जिसके बाद शाहीन की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर बाबर आज़म और मोहम्मद रिज़वान के साथ एक तस्वीर पोस्ट की गई जिससे यह समझा गया कि वह बाबर आज़म का समर्थन कर रहे हैं.
नजम सेठी ने एक यूट्यूब चैनल पर पत्रकार वहीद ख़ान को इंटरव्यू में कहा था उनके लिए "आंकड़े बहुत महत्व रखते हैं और अगर बाबर आज़म अच्छा परफ़ॉर्म करेंगे तो उन्हें कप्तान बरक़रार रखा जाएगा वर्ना आप समेत दूसरे पत्रकार उनकी कप्तानी पर सवाल करेंगे."

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पाकिस्तान के कप्तान पर दबाव
बोर्ड चेयरमैन की ओर से दिया गया ऐसा बयान निश्चित रूप से किसी भी कप्तान पर दबाव बढ़ाता है, और बाबर आज़म ने, जो पहले ही इंग्लैंड के ख़िलाफ़ होम टेस्ट सिरीज़ हारने के कारण दबाव में थे, अगले कई मैचों के लिए टीम में अधिक बदलाव न करने का फ़ैसला किया.
इसका नतीजा पाकिस्तान को वर्ल्ड कप से पहले खिलाड़ियों के आउट ऑफ़ फ़ॉर्म होने और घायल होने के रूप में भुगतना पड़ा जब बेंच पर वैकल्पिक खिलाड़ी मौजूद ही नहीं थे.
लेकिन उस इंटरव्यू में उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात यह भी बताई थी कि न्यूज़ीलैंड सिरीज़ से पहले जब उन्होंने अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी संभाली तो प्रभारी सेलेक्शन कमेटी राष्ट्रीय टीम में बदलाव के अलावा कप्तान को भी बदलना चाहती थी. इस प्रभारी सेलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष शाहिद अफ़रीदी थे.
इसके बाद शाहिद अफ़रीदी की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया था कि नजम सेठी की ओर से दिए गए बयान में उनके बारे में बात नहीं की गई थी.
इन परिस्थितियों में न केवल पाकिस्तान ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में किसी को आराम नहीं दिया बल्कि अफ़ग़ानिस्तान की सिरीज़ और एशिया कप में भी अधिक बदलाव नहीं किए गए.
नतीजा यह निकला कि जब नसीम शाह घायल हुए तो उनका विकल्प हसन अली सामने आए जो एक साल से टीम के वनडे प्लान में नहीं थे. इसी तरह फ़ख़र ज़मान के आउट ऑफ़ फ़ॉर्म होने के बाद अब्दुल्ला शफ़ीक़ को एशिया कप के अंतिम मैच में चांस दिया गया और सऊद शकील को वर्ल्ड कप से पहले बिल्कुल भी अवसर नहीं मिला.
ये तीनों ही खिलाड़ी अब तक वर्ल्ड कप में काफ़ी हद तक बेहतर प्रदर्शन दिखाने में कामयाब रहे हैं.

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टी 20 क्रिकेट पर ज़ोर
इस वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की बॉलिंग और फ़ील्डिंग दोनों ही बहुत ख़राब रही है. इसकी वजह साफ़ तौर पर पाकिस्तानी खिलाड़ियों में थकावट के संकेत हैं. इस थकावट के कारण एशिया कप के शेड्यूल और श्रीलंका में उमस भरी गर्मी में खेली जाने वाली लंका प्रीमियर लीग और अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ सिरीज़ हो सकते हैं.
पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने पहले श्रीलंका में जुलाई में दो टेस्ट मैचों की सिरीज़ खेली जिसमें गेंदबाज़ी के लिए नसीम शाह और शाहीन शाह अफ़रीदी दोनों मौजूद थे.
इसके बाद लंका प्रीमियर लीग में कप्तान बाबर आज़म समेत पाकिस्तान के कई खिलाड़ी शामिल हुए जबकि दूसरे खिलाड़ी 'दी हंड्रेड' नाम के फ़ॉर्मेट में खेलने इंग्लैंड चले गए थे.
इससे पहले खिलाड़ियों ने अमेरिका में मेजर लीग क्रिकेट नाम के टी 20 टूर्नामेंट और कनाडा ग्लोबल टी 20 लीग में भी हिस्सा लिया था.
यही वजह थी कि ज़्यादातर खिलाड़ी इंटरनेशनल क्रिकेट न होते हुए भी वनडे वर्ल्ड कप के लिए तैयारी करने की जगह टी 20 लीग खेल रहे थे.
इन टूर्नामेंटों में खेलने के लिए कई महीने पहले कॉन्ट्रैक्ट किए जाते हैं और यहां नीतिगत रूप में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की ओर से दूरदर्शिता का परिचय दिया जाना था, जो नहीं दिया गया.
इसी तरह एशिया कप में पाकिस्तान टीम के थका देने वाले शेड्यूल और श्रीलंका में ही अफ़ग़ानिस्तान से सिरीज़ खेलने से भी खिलाड़ियों पर और दबाव बढ़ा.

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खिलाड़ी फॉर्म में नहीं हैं?
इसी तरह जब टीम के सेलेक्शन का मौक़ा आया तो कप्तान बाबर आज़म की ओर से उन्हीं खिलाड़ियों पर भरोसा किया गया जो लंबे समय से टीम के साथ मौजूद थे हालांकि वह हाल के दिनों में आउट ऑफ़ फ़ॉर्म थे.
सन 2019 के वर्ल्ड कप से इस साल 15 जुलाई तक पाकिस्तान ने केवल 27 वनडे खेले थे. यही वजह थी कि इस बारे में टीम में बदलाव का इस्तेमाल नहीं किया जा सका और ध्यान टी 20 पर रहा.
इसके अलावा कई खिलाड़ी एक साथी आउट ऑफ़ फ़ॉर्म हुए जिनमें सबसे ऊपर पाकिस्तान के गेंदबाज़ हैं.
स्पिनर मोहम्मद नवाज़ इस साल अप्रैल तक अच्छे फ़ॉर्म में थे और पाकिस्तान को बीच के ओवर में विकेट लेकर दे रहे थे. इस साल अप्रैल से पहले खेले गए 11 वनडे मैचों में उनका औसत 21 का था जबकि उसके बाद से खेले गए मैचों में उनका औसत 88 का है.
शादाब ख़ान, जो चोटों का शिकार रहे हैं, खुद को वनडे क्रिकेट में बेहतर गेंदबाज़ मनवाने में नाकाम रहे हैं और तभी उनकी जगह ओसामा मीर को बैकअप के तौर पर खिलाया गया और उन्होंने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ सिरीज़ में अच्छा प्रदर्शन भी किया लेकिन उन्हें बाद में वर्ल्ड कप से पहले मैचों में मौक़ा नहीं दिया गया जो समझ से परे है.
शाहीन शाह अफ़रीदी भी शुरुआत के मैचों में अपनी बेहतरीन फ़ॉर्म में दिखाई नहीं दिए और हारिस रऊफ़ भी बहुत महंगे साबित हुए हैं.
अब देखना होगा कि पाकिस्तान वर्ल्ड कप के बाक़ी मैचों में भी निराशाजनक प्रदर्शन करता है या वह स्विच ढूंढने में कामयाब हो पाएगा जो आमतौर पर ऐसे मौक़ों पर पहले की पाकिस्तानी टीम तलाश पाई है और जिसका उल्लेख शादाब ख़ान कर रहे थे.
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