अंतरिक्ष में फंसे सुनीता विलियम्स और विल्मोर, अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहने से शरीर पर क्या असर पड़ेगा?

सुनीता विलियम्स और बैरी बुच विल्मोर आठ दिन के मिशन पर अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में पर पिछले जून में गए थे.

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    • Author, जियोर्जिना रानार्ड
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर गए अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों सुनीता विलियम्स और बैरी बुच विल्मोर की वापसी अधर में लटक गई है.

उन्हें ले जाने वाला बोइंग स्टारलाइनर मिशन में दिक्कत पैदा होने की वजह से इन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी के फैसले को नासा से दोबारा टाल दिया है.

बुधवार को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अब इस बारे में अगस्त के अंत में कोई फैसला लिया जाएगा.

नासा के प्रमुख अंतरिक्ष यात्री जो एकाबा ने कहा कि सुनीता विलियम्स और बेरी 'बुच' विल्मोर जैसे अंतरिक्ष यात्री, 'मिशन के विभिन्न पहलुओं और इससे पैदा होने वाली संभावित परिस्थितियां के बारे में अच्छी तरह जानते थे.'

उन्होंने जोड़ा कि 'अंतरिक्ष यात्रियों को ये सुनिश्चित करने के लिए ऐसी ट्रेनिंग दी गई थी कि किसी भी मिशन में आने वाली चुनौतियों के लिए वे मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहें.'

उन्होंने कहा, "यह मिशन एक टेस्ट फ़्लाइट था...वे जानते थे कि यह मिशन परफ़ेक्ट नहीं है."

उनके अनुसार, "मानव युक्त अंतरिक्ष यान अपने आप में जोख़िम भरा होता है और एक अंतरिक्षयात्री के रूप में यह हमारे काम का हिस्सा होता है."

नासा ने ये भी कहा कि दोनों अंतरिक्ष यात्री वहां "अच्छी तरह से रह रहे हैं" और वे अंतरिक्ष में "जोख़िम भरे मिशन" में जाने के लिए तैयार थे.

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आठ दिन की यात्रा आठ महीने में बदल सकती है

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अंतरिक्ष एजेंसी के अधिकारियों ने यह भी कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों का स्पेससूट किसी ऐसे वैकल्पिक अंतरिक्ष यान के लिए उपयुक्त नहीं है जिसे स्टारलाइनर के असुरक्षित होने की स्थिति में इस्तेमाल किया जाए.

बीते पांच जून को विलियम्स और विल्मोर ने अंतरारष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए स्टारलाइनर ने उड़ान भरी थी और आठ दिन के बाद उन्हें वापस धरती पर लौटना था.

लेकिन स्टारलाइनर अंतरिक्षयान जब आईएसएस के क़रीब पहुंचा तो उसमें समस्याएं पैदा हो गईं और इसके पांच थ्रस्टर्स बंद हो गए, जो यान को दिशा देते हैं.

इसमें हीलियम भी ख़त्म हो गया, जिससे जलने वाले ईंधन पर यान को निर्भर होना पड़ा.

इन समस्याओं के आने का मतलब है कि विलियम्स और विल्मोर को आईएसएस पर तबतक रुकना पड़ेगा जबतक इंजीनियर इसकी तकनीकी दिक्कतों को हल नहीं कर लेते.

उनकी वापसी का एक विकल्प ये भी है कि इस साल के अंतिम तिमाही में वहां जाने वाले स्पेसएक्स अंतरिक्ष यान का इस्तेमाल किया जाए.

अगर ऐसा होता है तो वे 2025 की शुरुआत में ही वापस लौट पाएंगे. और इस तरह आठ दिन का यह मिशन आठ महीने में बदल जाएगा.

लेकिन अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहने का इंसानी शरीर पर विपरीत असर भी पड़ सकता है, और इसलिए दोनों अंतरिक्ष यात्रियों का नियमित हेल्थ चेकअप किया जा रहा है.

नासा ने दिए सवालों के जवाब

दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को आठ महीने तक अंतरिक्ष में रुकना पड़ सकता है.

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संवाददाता सम्मेलन में एक पत्रकार ने पूछा कि क्या स्टारलाइनर अभी भी यात्रियों को इमरजेंसी में वापस लाने के लिए सुरक्षित है?

इस पर नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री बॉवरसॉक्स का कहना था कि 'दो लोगों के लिए अभी भी यह इस्तेमाल किया जा सकता है.'

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि आकस्मिक स्थिति में बुच और सुनीता विलियम्स को उस यान में बिठाने का जोख़िम उठाया जा सकता है."

नासा का कहना है कि अगर बिना अंतरिक्ष यात्रियों को लिए स्टारलाइनर वापस आता है तो इसे 'बड़ी दुर्घटना' के रूप में वर्गीकृत करने की ज़रूरत नहीं है.

नासा ने स्टारलाइनर में अपने भरोसे को दुहराया और कहा कि 'अंतरिक्ष यात्री आईएसएस में हफ़्तों बिता सकते हैं और इस दौरान वे यान की तकनीकी दिक्कत को हल करने की कोशिश करेंगे.'

बदलाव की मुश्किलें

अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन 2031 में रिटायर होने वाला है. यह फ़ुटबॉल के एक मैदान के बराबर बड़ा है और 400 टन भारी है.

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अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी का तरीक़ा बदलना कोई आसान काम नहीं है.

अधिकारियों का कहना है कि अंतरिक्ष यात्रियों का स्पेससूट आपस में बदला नहीं जा सकता.

अगर वे इस साल स्पेस एक्स की फ़्लाइट से वापस लौटते हैं तो उन्हें उसके लिए बने सूट के बिना ही आना होगा, जिसमें और जोख़िम है.

अगर उन्हें 2025 के शुरुआत में भेजी जाने वाली उड़ान से वापस लाना है, तब तो सही स्पेस सूट भेजा जा सकता है.

ओपन यूनिवर्सिटी के अंतरिक्ष वैज्ञानिक सिमियोन बार्बर ने बीबीसी से कहा कि 'किसी भी तरह से अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी स्पेस एक्स अंतरिक्षयान से ही संभव है.'

बोइंग ने लगातार कहा है कि उसे पूरा भरोसा है कि स्टारलाइनर दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर सुरक्षित वापस आ सकता है.

संवाददाता सम्मेलन में अधिकारियों ने कहा कि क्रू को वापस लाने को लेकर नासा में 'गंभीर विचार विमर्श' चल रहा है.

एजेंसी ने दुहराया है कि उसे विश्वास है कि स्टारलाइनर अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने में सक्षम होगा और उन्हें स्पेस एक्स से वापस लाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

नासा ने अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए बोइंग और स्पेस एक्स को अरबों डॉलर का कांट्रैक्ट दिया है.

अभी तक स्पेस एक्स ने अंतरिक्ष में मानव युक्त नौ उड़ानों को अंजाम दिया है लेकिन बोइंग का यह पहला मानव युक्त मिशन है.

अगर दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस एक्स अंतरिक्ष यान से उसके स्पेस एक्स सूट में लौटना पड़ा तो यह बोइंग के लिए बहुत बड़ा झटका होगा.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि उसने अंतरिक्ष यान की ख़राबी के लिए प्रोपल्शन सिस्टम के डेटा की जांच करने के लिए बाहरी विशेषज्ञों की सलाह मांगी है.

फैसला लेने से पहले नासा जांच पड़ताल जारी रखेगा.

स्टारलाइनर में क्या गड़बड़ी हुई?

पल्लब घोष, विज्ञान संवाददाता, बीबीसी न्यूज़

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स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान बोइंग कंपनी की टेस्ट फ़्लाइट थी.

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स्टारलाइनर जब भेजा गया तो उसमें एक छोटा हिलीयम लीक होने लगा था और जब वो आईएसएस पर पहुंचा तो दो और लीक होने लगे.

लॉन्च के समय लीक छोटा सा था. लेकिन दूसरा इससे पांच गुना बड़ा था.

जब यान आईएसएस की ओर बढ़ रहा था, 28 मैनुअरिंग थ्रस्टर बंद हो गए थे, जिनमें चार दोबारा शुरू हुए. इसके बाद प्रोपल्शन सिस्टम में दो और हीलियम लीक का पता चला.

ज़मीन पर हुई जांच में पता चला कि थ्रस्टर की समस्या गर्मी के कारण टेफ़्लान सील के फूल जाने से पैदा हुई, जिससे ईंधन कंबशन चैंबर में नहीं जा पाया.

बोइंग के मार्क नापी ने कहा कि ये समस्याएं सिर्फ मानव युक्त फ़्लाइट टेस्ट में ही पता लग सकती थीं.

लेकिन कुछ इंजनीयरों का मानना है कि ये समस्या मानव रहित टेस्ट मिशन या यान की डिज़ाइन के शुरुआती चरण में ही पता लगाई जा सकती थीं.

बोइंग के यान की यह पहली दिक्कत नहीं है

इसकी पहली मानव रहित उड़ान 2019 में हुई थी, लेकिन सॉफ़्टवेयर में गड़बड़ी की वजह से इंजन स्टार्ट नहीं हो पाया और यह अंतरिक्ष स्टेशन तक नहीं पहुंच पाया.

दूसरी कोशिश 2022 में की गई, लेकिन यान में फिर से कुछ थ्रस्टरों और यान के कूलिंग सिस्टम में दिक्कतें आईं.

इस बीच बोइंग के प्रतिद्वंद्वी एलन मस्क के स्पेस एक्स ने चार साल पहले ड्रैगन स्पेसक्राफ़्ट को आईएसएस तक पहुंचा दिया और उसके बाद से वो अंतरिक्ष यात्रियों और सामान को ला ले जा रहा है.

और ये सब तब हो रहा है जब बोइंग के धरती पर उड़ने वाले विमानों में भी गड़बड़ियों को लेकर जांच का दायरा बढ़ रहा है.

अब ये तय लग रहा है कि लांचपैंड बनने के लिए बोइंग स्टारलाइनर को एक लंबा रास्ता तय करना होगा.

अंतरिक्ष में रहने का दिमाग और आंख पर असर

मार्था हेनरिक्स, एडिटर, बीबीसी फ़्यूचर प्लैनेट

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गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं.

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अगर अंतरिक्ष में अधिक समय बिताना पड़े तो बहुत प्रतिबद्ध अंतरिक्ष यात्रियों को भी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

ट्रेनिंग के दौरान जो अनुभव होता है, वो असली मिशन का तीन चौथाई होता है.

लेकिन अगर निर्धारित समय से अधिक वक़्त गुजारना पड़े तो उत्साह में कमी आती है.

अंटार्कटिका में शोध करने वाले वैज्ञानिकों को भी कभी कभार ऐसी मानसिक अवस्था से गुजरना पड़ता है जिसे "साइकोलॉजिकल हिबरनेशन" कहते हैं, जिसमें व्यवक्ति भावना शून्य और बिल्कुल अलग थलग महसूस करने लगता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि ध्रुवीय और अंतरिक्ष मिशन पर जाने वालों के हालात एक जैसे होते हैं और अच्छी नींद लेकर इन दिक्कतों को कम किया जा सकता है.

बीबीसी फ़्यूचर एडिटर रिचर्ड ग्रे के अनुसार, अंतरिक्ष यात्रियों का नियमित हेल्थ चेकअप किया जा रहा है. लेकिन सबसे अधिक ध्यान आंखों पर दिया जा रहा है.

आईएसएस पर मौजूद हर क्रू सदस्य के आंखों की कॉर्निया, लेंस और ऑप्टिक नर्व की जांच की जा रही है.

अंतरिक्ष यात्रा का आंख पर हैरान करने वाला असर पड़ सकता है.

गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण आंख के पीछे खून जमा हो सकता है जिससे एडिमा हो सकता है और चीजों पर ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत हो सकती है.

सूर्य से निकलने वाली कॉस्मिक किरणें और अत्यधित ऊर्जा वाले कण, रेटिना और ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचा सकते हैं और दूसरी समस्याएं खड़ी कर सकते हैं.

इंसानी शरीर पर और क्या असर होता है?

स्टीफेन डॉवलिंग, डिप्टी एडिटर, बीबीसी फ़्यूचर

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स्पेस सूट अलग होने की वजह से उन्हें दूसरे यान में नहीं बिठाया जा सकता.

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कठिन अंतरिक्ष यात्रा के दौरान इंसानी शरीर कुछ आश्चर्यजनक बदलावों से होकर गुजरता है.

वापस आने वाले अंतरिक्षयात्रियों को उनके कैप्सूल से उठाया जाता है क्योंकि अंतरिक्ष में रहते हुए उनकी मांसपेशियों का वज़न कम हो जाता है.

सबसे अधिक उन मांसपेशियों पर प्रभाव पड़ता है जो कमर, गर्दन, जोड़ों को नियंत्रित करती हैं. बहुत कम गुरुत्वाकर्षण में उनसे काम नहीं लिया जाता है इसलिए वो कमज़ोर हो जाती हैं.

छह महीने तक चलने वाले मिशन के बाद शरीर की मांसपेशियों में 30% तक वज़न की कमी आ सकती है.

हड्डियों का भी वज़न हर महीने एक से दो प्रतिशत तक गिर जाता है.

स्वाभाविक है कि इन दोनों यात्रियों के लिए आठ महीने तक अंतरिक्ष में रहने के कारण कई जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है.

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