चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चीनी अंतरिक्ष यान की सफ़ल लैंडिंग
- Author, जॉर्जिना रन्नार्ड, लौरा बिकर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़

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चीन ने बताया कि उसका मानवरहित अंतरिक्ष यान, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव-एटकेन बेसिन (चंद्रमा का वो हिस्सा जो पृथ्वी से नहीं दिखता) पर सफ़लतापूर्वक लैंड कर चुका है.
अभी तक इस अज्ञात जगह पर किसी भी दूसरे देश ने अपना यान भेजने की कोशिश नहीं की है.
चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन(सीएनएसए) के मुताबिक़ चीनी समय के अनुसार रविवार सुबह 6 :23 बजे 'चांग'इ-6' अंतरिक्ष यान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव-एटकेन बेसिन पर लैंड किया.
3 मई को लॉन्च किए गए इस मिशन का लक्ष्य इस क्षेत्र से दुर्लभ चट्टान और मिट्टी इकट्ठा करना है.
यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित एक विशाल गड्ढे से कुछ सबसे पुरानी चट्टानों से सामग्री को बाहर निकालने का काम करेगा.
जोखिम भरी थी लैंडिंग

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यह लैंडिंग जोखिमों से भरी थी, क्योंकि चंद्रमा के इस हिस्से में पहुंचने के बाद अंतरिक्ष यान के साथ संचार करना बहुत मुश्किल होता है. चीन एकमात्र ऐसा देश है जिसने साल 2019 में अपने चांग'ई-4 को उतारकर यह उपलब्धि हासिल की थी.
वेनचांग स्पेस लॉन्च सेंटर से लॉन्चिंग के बाद चांग'ई-6 अंतरिक्ष यान ने उतरने से पहले चंद्रमा की परिक्रमा की. इसके बाद मिशन के लैंडर का एक भाग चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव-एटकेन बेसिन पर उतरने के लिए ऑर्बिटर से अलग हो गया.
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने सीएनएसए के हवाले से बताया कि इस मिशन में एक ऐसी प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है जो यान के चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद खुद से बाधाओं का पता लगाकर उसका हल निकाल सकेगी.
इसमें मौजूद 'विज़िबल लाइट कैमरा' ने चंद्रमा की सतह की चमक और अंधेरे के आधार पर तुलनात्मक रूप से सुरक्षित लैंडिंग क्षेत्र को चुना.
लैंडिंग से पहले लैंडर सुरक्षित लैंडिंग क्षेत्र से लगभग 100 मीटर (328 फीट) ऊपर कुछ समय तक मंडराता रहा. लैंडर ने धीमी गति से नीचे उतरने से पहले एक 3D लेजर स्कैनर का उपयोग किया.
सीएनएसए ने बताया कि 'क्यूकियाओ-2 रिले सैटेलाइट' ने इस ऑपरेशन में मदद की है.
चीनी मीडिया ने सफ़ल लैंडिंग को ऐतिहासिक क्षण बताया. देश के सरकारी प्रसारक ने बताया कि 'रविवार की सुबह जब चांग'ई 6 लैंडिंग क्राफ्ट चंद्रमा पर उतरा तब बीजिंग एयरोस्पेस फ्लाइट कंट्रोल सेंटर में तालियां बज उठीं.'
चट्टानों का होगा विश्लेषण

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सीएनएसए ने कहा कि लैंडर को सतह से सामग्री इकट्ठा करने में तीन दिन तक का समय लगेगा. इसमें 'कई नई खोज, ख़तरा और बड़ी कठिनाइयां' शामिल होंगी.
मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के प्रोफे़सर जॉन पर्नेट-फिशर (चंद्र भूविज्ञान के विशेषज्ञ) ने कहा कि 'सभी बहुत उत्साहित हैं कि हमें ऐसी चट्टानें देखने को मिलेंगी जिन्हें पहले कभी किसी ने नहीं देखा होगा.'
प्रोफ़ेसर ने अमेरिकी अपोलो मिशन और पिछले चीनी मिशनों से वापस लाई गई अन्य चंद्र चट्टानों का विश्लेषण किया है.
लेकिन उनका कहना है कि चंद्रमा के बिल्कुल अलग क्षेत्र से चट्टान का विश्लेषण करने का मौका काफी अलग है. यहां ग्रह कैसे बनते हैं- जैसे बुनियादी सवालों का जवाब मिल सकता है.
अब तक इकट्ठा की गई अधिकांश चट्टानें ज्वालामुखीय हैं, जो हमें आइसलैंड या हवाई में मिल सकती हैं.
लेकिन चंद्रमा के ऐसे अज्ञात हिस्से से लाई गई सामग्री में अलग तरह का रसायन शास्त्र हो सकता है.
प्रोफेसर ने कहा, "ग्रह कैसे बनते हैं, परतें क्यों बनती हैं, सौर मंडल में पानी की उत्पत्ति कैसी हुई? इस तरह के बड़े सवालों का जवाब ढूंढने में वहां से लाई गई सामग्री से हमें मदद मिलेगी."
सीएनएसए के अनुसार, मिशन का लक्ष्य एक ड्रिल और मैकेनिकल आर्म का उपयोग करके चंद्रमा के दक्षिणी पोल से लगभग 2 किलोग्राम (4.4 पाउंड) सामग्री इकट्ठा करना है.
दक्षिणी ध्रुव-एटकेन बेसिन चंद्रमा के सतह पर मौजूद सबसे बड़े गड्ढों में से एक है.
प्रोफेसर पर्नेट फिशर कहते हैं कि रोबोट वहां से उस सामग्री को इकट्ठा कर सकता है जो चंद्रमा के आंतरिक कोर से आती है.
जीवन की तलाश

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चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ज्यादा रिसर्च नहीं हो सकी है. सभी देश इस क्षेत्र को समझने के इच्छुक हैं क्योंकि यहां बर्फ होने की संभावना है.
चंद्रमा पर पानी मिलने से वैज्ञानिक रिसर्च के लिए चंद्रमा पर सफलतापूर्वक मानव बस्ती बनाने की संभावना बढ़ जाएगी.
अगर मिशन सफ़ल होता है तो अंतरिक्ष यान दुर्लभ नमूनों के साथ पृथ्वी पर लौट आएगा.
चंद्रमा से लाई गई सामग्री को उसी अवस्था में बनाए रखने के लिए विशेष स्थिति में रखा जाएगा.
चीनी वैज्ञानिकों को सबसे पहले चंद्रमा से लाई गई चट्टानों का विश्लेषण करने का मौका मिलेगा. इसके बाद विश्व के शोधकर्ता इसके लिए आवेदन कर सकते हैं.
यह दूसरी बार है जब चीन ने चंद्रमा से सैंपल इकट्ठा करने के लिए मिशन शुरू किया है. साल 2020 में चांग'ई 5 अंतरिक्ष यान चंद्रमा के ओशनस प्रोसेलरम नामक क्षेत्र से 1.7 किलोग्राम सामग्री वापस लाया था.
चीन इस दशक में तीन और मानव रहित मिशनों की योजना बना रहा है. जिनकी मदद से चीन चंद्रमा पर पानी की तलाश कर वहां एक स्थायी बेस स्थापित करना चाहता है.
चीन की रणनीति है कि वो 2030 तक चीनी अंतरिक्ष यात्री को चांद की सतह पर चलते हुए देखे.
अमेरिका का लक्ष्य भी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजना है. इसके लिए 'नासा' साल 2026 में अपने आर्टेमिस 3 मिशन को लॉन्च करेगा.
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