बिहारः दरोग़ा की मौत के बाद भी क्या रुकेगा बालू का अवैध कारोबार?

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    • Author, विष्णु नारायण
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, पटना और हाजीपुर से

बिहार के जमुई में दीपावली के दो दिन बाद एक दरोग़ा प्रभात रंजन की ड्यूटी पर हत्या हो गई. उनकी हत्या में कथित तौर पर बालू माफ़ियाओं का हाथ बताया गया है.

प्रभात रंजन को न तो दीपावली की छुट्टी मिली और न ही छठ में मिलने वाली थी.

वे ड्यूटी पर ही थे जब कथित बालू माफ़ियाओं ने उनकी हत्या की.

बुधवार की सुबह तिरंगे में लिपटा उनका (प्रभात रंजन का) पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा तो श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ था.

वहीं खड़े पिता, मां, पत्नी, बड़े भाई, बड़ी बहन को कुछ सूझ नहीं रहा कि अचानक ये कैसे हो गया.

उनकी पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल है तो दो अबोध बच्चों को ये अनुमान भी नहीं है कि उन्होंने अपने पिता को खो दिया है.

बड़े भाई डायलिसिस पर हैं. मां ने एक किडनी दी है पर स्थिति कुछ संभली नहीं और इलाज के लिए दिल्ली गए हुए थे कि यह ख़बर मिली तो जैसे तैसे घर पहुंचे हैं.

वैसे तो प्रभात रंजन की कथित तौर पर बालू माफ़ियाओं ने हत्या की है. लेकिन बिहार में हत्या का यह ऐसा पहला मामला नहीं जो बालू, शराब या भू माफ़िया का नाम जुड़ा हो.

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पुलिस का क्या है कहना?

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वैशाली ज़िले के भगवानपुर खजुरी गाँव के रहनेवाले प्रभात रंजन (सब इंस्पेक्टर) जमुई ज़िले के गरही थाना क्षेत्र में कार्यरत थे. उन्हें मंगलवार (14 नवंबर, 2023) की सुबह बालू से लदे ट्रैक्टर ने कथित तौर पर रौंद डाला.

पुलिस के अनुसार घटना जमुई-नवादा बॉर्डर पर चन्नवर पुल के पास हुई. इस दौरान उनके साथ छापेमारी के लिए गए होमगार्ड के जवान (राजेश कुमार साह) भी गंभीर रूप से घायल हैं, उनका इलाज चल रहा है.

जमुई के पुलिस अधीक्षक शौर्य सुमन ने इस घटना के बाद मीडिया को बताया, "14 नवंबर (मंगलवार) की सुबह एक दुखद घटना में सब इंस्पेक्टर प्रभात रंजन शहीद हो गए. वे साल 2018 बैच के दरोग़ा थे. वे अवैध बालू खनन की ख़बर मिलने पर जमुई-नवादा और गिरिडीह बॉर्डर पर छापेमारी के लिए गए थे."

"जब उन्होंने अवैध बालू खनन और परिवहन में संलिप्त ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की तो ट्रैक्टर चालक ने उन पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया. इस घटना में एक होम गार्ड के जवान भी घायल हुए हैं और उनका इलाज जारी है.”

जमुई पुलिस ने बाद में इस पर और अपडेट दिया जिसमें बताया गया कि "इस घटना के मद्देनज़र एफ़आईआर दर्ज करते हुए त्वरित कार्रवाई के लिए एसडीएम के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है."

"इसमें संलिप्त दो अभियुक्तों मिथिलेश ठाकुर और पवन दास को गिरफ़्तार कर के कोर्ट से सामने पेश किया गया है. साथ ही इस घटना के मुख्य अभियुक्त नवादा के कृष्णा रविदास की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीम दबिश और तलाशी अभियान चला रही है."

अभयानंद- पूर्व डायरेक्टर जनरल, बिहार पुलिस

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आख़िर क्यों नहीं रुकता अपराध?

बिहार में बालू के अवैध कारोबार से जुड़ी यह पहला घटना नहीं है. राज्य सरकारें बदलती रहीं पर ये अवैध खनन और इससे जुड़े अपराधों पर लगाम नहीं लगा.

अपराध और अवैध कारोबार के गठजोड़ को समझने के लिए बीबीसी ने बिहार पुलिस के पूर्व डायरेक्टर जनरल अभयानंद से संपर्क किया.

अभयानंद कहते हैं, "अपराध और अर्थ के बीच अन्योन्याश्रय (सीधा) संबंध होता है. अर्थ को आप काला अर्थ या (काला धन) भी कह सकते हैं. सरकार की बालू नीति को देखने पर हम पाते हैं कि इस पर किसी का नियंत्रण नहीं है. तो बालू के अवैध खनन से पैदा हो रहा है काला धन."

"इस पर थोड़ा-बहुत नियंत्रण पुलिस का है जबकि यह काम पुलिस के बजाय माइनिंग विभाग का है. हर ज़िले में एक खनन पदाधिकारी होना चाहिए लेकिन कई ज़िलों में वो है ही नहीं. खनन विभाग कहीं दिखता ही नहीं. पुलिस चूँकि हर जगह (थाने) मौजूद होती है तो उसको इसकी ज़िम्मेदारी दे दी गई है."

वे कहते हैं, "चाहे आप बालू के मामले में देखें या फिर शराब को ही ले लें. सरकार की नीति में ही ख़ामी है. सरकार यह समझती है कि पुलिस को लगाकर अपराध को रोका जा सकता है लेकिन ऐसा होता नहीं है. पहले तो पुलिस विभाग के बड़े अफ़सर (जैसे मुझे) भी नीति निर्धारण के दौरान शामिल किया जाता था लेकिन इस बीच तो शायद यह भी नहीं हो रहा."

"चूँकि इस कारोबार पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है तो यहाँ से खुले तौर पर काला धन निकल रहा है. जितना रेवेन्यू जेनरेट हो रहा है उससे कहीं अधिक स्टेट को नुक़सान हो रहा. ऊपर से अपराध भी इसके ही इर्द-गिर्द होता रहता है. तो इस तरह काला धन और अपराध सीधे एक-दूसरे पर आश्रित है. इन दोनों को अलग-थलग किए बग़ैर अपराध रोकना संभव नहीं."

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क्या कह रहे परिजन?

प्रभात रंजन का पैतृक गाँव वैशाली ज़िले के पातेपुर प्रखंड अंतर्गत भगवानपुर खजुरी है. वे साल 2018 में दरोग़ा (सब इंस्पेक्टर) बने थे.

इस घटना के बाद उनके गाँव पहुँची बीबीसी की टीम से बातचीत में उनकी पत्नी (पूजा) कहती हैं, "जिसने मेरे पति की जान ली उसको कड़ी से कड़ी सज़ा मिले. जिस तरह मैं कलप (तड़प) रही हूं उस तरह उसकी फ़ैमिली भी कलपे."

वे कहती हैं, "शादी के वक़्त (मई 2018) तो मैं सिर्फ़ बारहवीं पास थी. वे पढ़ाई का महत्व को समझते थे इसलिए मुझे ग्रैजुएट करा रहे थे. पहले रेलवे के ग्रुप 'डी' में काम करते थे लेकिन अपनी मेहनत के दम पर दरोग़ा बने. मैं एक चीज़ के लिए कहती तो चार चीज़ें लाकर देते. कभी कोई हिसाब नहीं माँगा. अब मैं बच्चों को अकेले कैसे पालूँगी?"

पिता शिव नारायण साह

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अपने जवान बेटे की चिता को आग देकर लौटे पिता शिव नारायण साह ने बीबीसी को बताया, “ऐसी परिस्थिति में कोई माँ-बाप अपने बेटे को पुलिस में कैसे भेजेगा? सरकार और प्रशासन के निकम्मेपन को देखते हुए आगे किसी की हिम्मत नहीं होगी."

सरकार से उम्मीद के सवाल पर वे क़हते हैं, "हमें कम से कम 1 करोड़ रुपये मिले. वो भी कम है. मेरी बहू को सरकारी नौकरी मिले. जल्दी मिले. ये नहीं कि अभी भरोसा दे दिए और बाद में हम पाँच साल दौड़ ही रहे हैं. मेरा बेटा बहुत ही होनहार था. पूरे परिवार और गाँव को उस पर नाज़ था और उसका प्रमोशन भी होने वाला था लेकिन उसका दूसरा ही प्रमोशन हो गया."

माँ (सीता देवी) क़हती हैं, "हमारा तो सहारा ही छिन गया. मैं और मेरे पति कोई काम करने लायक नहीं हैं. प्रभात ही सब किया करता था. वो चल गया तो अब कौन करेगा? उसके बच्चों को कौन पालेगा? बहू को नौकरी मिले और बच्चों के पढ़ाई का ज़िम्मा सरकार उठावे. इससे ज़्यादा हम क्या कहें?"

सम्राट चौधरी- भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष

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दरोग़ा की मौत पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में भिड़ंत

राज्य में बालू के अवैध खनन को लेकर होने वाले ख़ूनी संघर्षों के लिहाज़ से यह कोई पहली घटना नहीं है.

पिछले साल सोन के दियारा में गैंग वॉर हुआ था तो कुछ पाँच-छह महीने पहले ही बेख़ौफ़ बालू माफ़ियाओं ने खनन विभाग के अधिकारियों पर सरेआम हमला कर दिया था.

बस कुछ लोगों की धर-पकड़ हो जाती है लेकिन इससे बालू खनन के अवैध कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ता.

इस घटना पर जब बिहार सरकार के मंत्री चंद्रशेखर से सवाल किए गए तो उनका जवाब था, "क्या पहली बार ऐसा हुआ है? क्या उत्तर प्रदेश में ऐसा नहीं होता? मध्य प्रदेश में ऐसा नहीं होता? अपराध तो होते हैं लेकिन अपराधियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाता है. 24 से 48 घंटे में धरपकड़ हो जा रही है. लोगों को सज़ा हो रही. यही न हो सकता है."

वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा, "इस सरकार में अपराधियों का मन स्पष्ट तौर पर बढ़ा हुआ है. बालू माफ़िया, शराब माफ़िया और भू-माफ़िया सब का मन इतना बढ़ा हुआ है कि वो पुलिसवालों पर ही हमला कर दे रहे हैं. बिहार में शासन नाम की कोई चीज़ नहीं बची. कोई कार्रवाई नहीं हो रही."

जमुई से भाजपा विधायक श्रेयसी सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि "बिहार में बालू माफ़िया तांडव कर रहा है. बिहार के लाल को बालू माफ़िया के काले धंधे की बलि चढ़ा दी गई और बिहार सरकार के माननीय मंत्री कहते हैं कि ये सब तो चलते रहता है."

"समस्त बिहार आज बालू माफ़िया, शराब माफ़िया और भू-माफिया के रहमोकरम पर जी रहा है. माफियाओं की जेबें भरने के लिए बिहार सरकार नित्य दिन मासूमों की बलि दे रही है."

रामानंद यादव, मंत्री

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दरोग़ा की हत्या पर क्या कह रहे हैं विभाग के मंत्री?

बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व मंत्री रामानंद यादव ने बीबीसी से कहा, "अवैध खनन रोकने का प्रयास लगातार जारी है. जिन बालू घाटों की नीलामी नहीं हुई है उनकी भी नीलामी होगी ताकि चोरी न हो. नई नीति के तहत नदी घाटों को छोटे क्लस्टर बनाकर नीलामी की गई है. हमारे विभाग ने बालू के अवैध खनन-बिक्री-ढुलाई से राजस्व के नुक़सान को रोकने के लिए विशेष तैयारी की है."

वे कहते हैं, "निगरानी के लिए बालू घाटों पर ड्रोन की मदद ली जाएगी. बालू ढोने वाली गाड़ियों का निबंधन करवाकर उसमें जीपीएस लगाने, बालू के तय वजन को जाँचने के लिए धर्मकांटा लगाने, चेक पोस्ट बनाने, चालान काउंटर व चेक पोस्ट पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं."

दरोग़ा के कुचले जाने और बालू माफ़िया के खनन पदाधिकारियों पर हमलावर होने के सवाल पर वे बोले, "मैं ख़ुद इस मामले को समझने के लिए स्पॉट पर (जमुई) गया था. वो जगह जंगल के बीच है. झारखंड और बिहार का बॉर्डर इलाका है. मैं तो पहले भी इस तरह की बातें कहता रहा हूँ कि विभाग के लोग अवैध खनन को रोकने के लिए पूरी तैयारी से जाएँ."

वे कहते हैं, "यहाँ देखने-सुनने में आया कि वे बिना किसी विशेष तैयारी के वहाँ चले गए. ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की और ऐसी दुखद घटना हो गई. हमारी कोशिश है कि इस तरह के घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, और विभाग इस बात की निगरानी करे कि बंदोबस्तधारी स्वीकृत क्षेत्र से बाहर किसी भी तरह का अवैध खनन न हो."

बालू खनन

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अवैध बालू खनन बिहार की बड़ी समस्या

बिहार में बालू के अवैध खनन से जुड़ी धर-पकड़ और प्रशासनिक लोगों से भिड़ंत की ख़बरें आये दिन स्थानीय अख़बारों में छपती रहती हैं.

शराबबंदी के बाद से बालू राज्य के राजस्व का एक सबसे बड़ा स्त्रोत बना हुआ है.

राज्य के भीतर बालू के अवैध कारोबार को इस आँकड़े से और बेहतर समझा जा सकता है कि खान एवं भूतत्व विभाग ने साल 2023-24 में कुल 4435 एफ़आईआर दर्ज किए. इसमें बालू का अवैध खनन, परिवहन और भंडारण शामिल है. इन मामलों में 2439 लोगों की गिरफ़्तारी के साथ ही 20 हज़ार से ज़्यादा वाहन ज़ब्त किए गए हैं.

बहरहाल, बिहार में खनन और वर्चस्व की लड़ाई के बीच किसी शख़्स की मृत्यु और भरे-पूरे परिवार का उजड़ जाना कोई नई बात नहीं है.

चाहे ट्रक, पोकलेन (मशीन) और नाव या ट्रैक्टर ज़ब्त किए जाएं, प्रशासन चाहे ड्रोन से निगरानी करे या ख़ुद डीएम और एसपी ही छापेमारी क्यों न करें लेकिन फिर भी खनन माफ़िया के हौसले टूटते नहीं दिखते.

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