सांसदों का निलंबन: 20 साल में 184 बार कार्रवाई, कांग्रेस काल के मुक़ाबले बीजेपी राज में बढ़ी ‘सख्ती’?

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- Author, अभिनव गोयल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
3 अगस्त, 2015
लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सदन में हंगामा करने के आरोप में कांग्रेस के 25 सांसदों को एक साथ पांच दिन के लिए निलंबित कर दिया.
पिछले बीस सालों में यह पहली बार था, जब एक साथ लोकसभा के इतने सदस्यों को सदन से निलंबित किया गया. इसे तब कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने लोकतंत्र के लिए काला दिन करार दिया था.
ये वो समय है, जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार को सत्ता में आए महज एक साल ही हुआ था. साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र में बहुमत से सरकार बनाई थी.
एक साथ 25 सांसदों को निलंबित करने पर विपक्ष ने तब भारतीय जनता पार्टी पर लोकतंत्र की आवाज को दबाने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए थे.
ऐसा ही एक बड़ा घटनाक्रम साल 2019 में हुआ, जब लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने फिर से एक साथ एआईएडीएमके के 24 सांसदों को सदन से निलंबित कर दिया.
सांसदों को निलंबित करने का यह कोई पहला या दूसरा वाक्या नहीं था. दशकों से अलग-अलग समय पर स्पीकर हंगामा करने के आरोप में सांसदों को लोकसभा और राज्यसभा से निलंबित करते आए हैं.
लेकिन सवाल महज निलंबन का नहीं है. विपक्षी पार्टियां, बीजेपी पर आरोप लगाती आई हैं कि इस सरकार में सबसे ज्यादा विपक्षी सांसदों को निलंबित किया गया है.
विपक्ष के इस आरोप में कितनी सच्चाई है? क्या कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय में सांसदों को निलंबित नहीं किया गया? अगर किया गया, तो कितने सांसद थे?
इसका पता लगाने के लिए सूरत के रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता संजय इज़ावा आगे आए. उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय से जानकारी मांगी, कि पिछले 20 सालों में किस पार्टी के कितने सांसदों को किस नियम के तहत संसद से निलंबित किया.
आरटीआई से जो जानकारी सामने आई, उसे हम आपके सामने रख रहे हैं, जिसकी मदद से आप, इस पूरे मामले को समझ पाएंगे.

लोकसभा से सांसदों का निलंबन
लोकसभा के 543 और राज्यसभा के 245 सांसदों को मिलाकर दोनों सदनों में 788 सांसद होते हैं.
साल 2004 में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(यूपीए) ने मिलकर केंद्र में सरकार बनाई, जिसका चेहरा मनमोहन सिंह रहे. साल 2009 में इस गठबंधन ने फिर से सत्ता हासिल की और मई 2014 तक सरकार चलाने का काम किया.
साल 2014 में देश की जनता, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन को छोड़ भारतीय जनता पार्टी के पीछे खड़ी हो गई और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने. यह पहली बार था, जब बीजेपी केंद्र में पूर्ण बहुमत से सरकार बना रही थी. इस जीत को बीजेपी ने साल 2019 में भी दोहराया.

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कांग्रेस कार्यकाल बनाम बीजेपी कार्यकाल
आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक साल 2004 से लेकर 2023 तक यानी करीब बीस सालों में कुल 184 बार सांसदों को निलंबित किया, जिसमें से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय में 43 बार और पीएम मोदी के समय में अब तक 141 बार सांसदों पर निलंबन की कार्रवाई की गई है.
इससे यह समझा जा सकता है कि कुल निलंबन का करीब 23 प्रतिशत कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में और 73 प्रतिशत, बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में हुआ.

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लोकसभा में निलंबन
लोकसभा से कुल 129 बार सांसदों का निलंबन हुआ. इसमें कुल 121 सांसद शामिल हैं.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में लोकसभा से 36 सांसदों को निलंबित किया गया, वहीं पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में 93 बार सांसदों को निलंबित किया गया, जिसमें कुल 85 सांसद शामिल हैं. कुछ सांसदों का निलंबन एक बार से ज्यादा भी हुआ है.
यहां एक बात गौर करने वाली है कि मनमोहन सरकार के दस साल के कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी के एक भी सांसद को लोकसभा से निलंबित नहीं किया, जबकि कांग्रेस के 25 सांसद ऐसे थे, जिन्हें निलंबन झेलना पड़ा था. इसके अलावा तेलुगू देशम पार्टी के 9 और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 2 सांसद निलंबित हुए थे.
वहीं नरेंद्र मोदी सरकार में लोकसभा से जिन सांसदों का निलंबन हुआ, उसमें करीब आधे सांसद कांग्रेस के थे. आंकड़ों की बात करें तो इस दौरान 9 मौकों पर कांग्रेस के 35 सांसदों को 43 बार निलंबित किया गया.
बीजेपी के अगर पहले कार्यकाल की बात की जाए तो इस दौरान विपक्ष के 240 सांसदों में से 76 को निलंबन का सामना करना पड़ा, जो करीब 30 प्रतिशत है, वहीं यूपीए-1 के समय में एक भी सांसद को लोकसभा से निलंबित नहीं किया गया.
लोकसभा स्पीकर ने ज्यादातर सांसदों को लोकसभा रूल बुक के नियम 374 के तहत निलंबित किया है. यह नियम स्पीकर तब लागू करता है, जब कोई सांसद संसद की कार्यवाही में बाधा डालता है.

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राज्यसभा से सांसदों का निलंबन
साल 2004 से 2014 के बीच मनमोहन सिंह की सरकार में सिर्फ एक बार यानी 9 मार्च, 2010 को सात सांसदों को राज्यसभा से निलंबित किया गया.
राज्यसभा सचिवालय के मुताबिक इसमें समाजवादी पार्टी के चार सांसद, जनता दल (यूनाइटेड) के दो और राष्ट्रीय जनता दल का एक सांसद शामिल था.
नरेंद्र मोदी सरकार में अलग-अलग समय पर कुल मिलाकर 10 बार निलंबन की कार्रवाई राज्यसभा स्पीकर ने की है.

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बीजेपी के पहले कार्यकाल में राज्यसभा से एक भी सांसद को निलंबित नहीं किया गया, जबकि दूसरे कार्यकाल में कुल 40 सांसदों को 48 बार निलंबित किया गया है.
साल 2019 के बाद यानी बीजेपी के दूसरे कार्यकाल में राज्यसभा में विपक्षी के करीब 45 प्रतिशत सांसदों को निलंबन का सामना करना पड़ा.
जिसमें तृणमूल कांग्रेस के सबसे ज्यादा 10 सांसद शामिल हैं, जिन्हें कुल 14 बार निलंबित किया गया है. इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के 10 सांसदों को 11 बार, आम आदमी पार्टी के 4 सांसदों को 6 बार, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के 4 सांसदों को 5 बार, डीएमके के 5 सांसद, भारत राष्ट्र समिति के 3 सांसद, शिवसेना के 2 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के 2 सांसदों को निलंबित किया गया है.
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