नीतीश कुमार के रुख से बिहार में राजनीतिक सरगर्मी, दिनभर चला बयानबाज़ी का सिलसिला

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बिहार में नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होने की अटकलें तेज़ हो गई हैं, साथ ही इसे लेकर वहां बयानबाज़ी का सिलसिला शुरू हो गया है.
गणतंत्र दिवस के मौके पर राजभवन में आयोजित कार्यक्रम (हाई टी) के दौरान उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के नाम की कुर्सी खाली दिखने के बाद इन अटकलों को और बल मिला.
यहां तक कि इस दौरान तेजस्वी के नाम की पर्ची भी वहां से हटा दी गई और उस कुर्सी पर अशोक चौधरी बैठ गए.
राजभवन में आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस के नेता भी शामिल नहीं हुए.
क्या गठबंधन में सब कुछ ठीक है?
राजभवन में आयोजित सरकारी कार्यक्रम में पहुंचे नीतीश कुमार से जब पूछा गया कि तेजस्वी राजभवन क्यों नहीं आए और क्या गठबंधन में सबकुछ ठीक है?
उन्होंने जवाब दिया, जो राजभवन नहीं आए, उन्हीं से पूछिए.
इस पूरे प्रकरण में लालू प्रसाद यादव या तेजस्वी यादव की ओर से कोई बयान नहीं आया है.
तेजस्वी यादव की ओर से अंतिम ट्वीट 13 घंटे पुराना है जिसमें उन्होंने सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं.
वहीं, लालू यादव के एक्स अकाउंट से अंतिम पोस्ट कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने के संदर्भ में थी.
हालांकि, आरजेडी सांसद मनोझ झा ने दो टूक कहा है कि नीतीश कुमार को लेकर जो भ्रम की स्थिति बनी हुई है उसे ख़ुद उन्हें (नीतीश कुमार) स्पष्ट करना चाहिए.
पटना पहुँचे आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि महागठबंधन को बुनियाद तानाशाही का विरोध करना था, हमारी ओर से इस पूरे प्रकरण को लेकर कोई बयान नहीं आया है और जो कुछ हो रहा है उससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है.
मनोज झा ने कहा कि नीतीश कुमार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
हालांकि, शाम होने तक नीतीश कुमार की ओर से किसी तरह का स्पष्टीकरण नहीं आया है.
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बीजेपी के रुख में बदलाव
इस बीच नीतीश कुमार के लिए बीजेपी के रुख में बदलाव आता दिख रहा है.
इसकी एक झलक बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के बयानों में मिल रही है.
सिंह अब तक नीतीश के लिए बीजेपी के दरवाज़े बंद करने की बात किया करते थे.
लेकिन अब उन्होंने कहा है कि 'मैं किसी के विरोध या स्वागत में नहीं हूं, बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व राज्य और पार्टी के हित में फैसला करेगा.'
वहीं, बीजेपी नेता सुशील मोदी ने भी कहा है कि राजनीति में किसी के लिए दरवाज़ा स्थायी तौर पर बंद नहीं होता है.
उन्होंने कहा, "राजनीति में कोई दरवाज़ा बंद नहीं होता है. आवश्यकता अनुसार दरवाजा बंद होता रहता है, खुलता रहता है.''
हालांकि, बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी की ओर से इस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने नहीं आई हैं.
चौधरी ने कहा, ''हमारे स्तर पर ऐसी कोई बात नहीं है. एकदम स्पष्ट रहिए. बिहार बीजेपी जिस तरह से लड़ती रही है, आगे भी लड़ती रहेगी.''
इस पर सम्राट चौधरी से जब सुशील मोदी के बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा - ' जो बोले हैं, उनसे पूछिए.'
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कांग्रेस से आई प्रतिक्रिया?
बिहार कांग्रेस नेता शकील अहमद ख़ान ने कल यानी शनिवार को दो बजे पूर्णिया में अपनी पार्टी के विधायकों की बैठक बुलाई है.
वहीं, बिहार में कांग्रेस नेता प्रेम चंद्र मिश्रा ने कहा है कि पार्टी इस मामले पर नज़र रख रही है.
उन्होंने कहा, "कांग्रेस इस मामले पर निगाह बनाए हुए हैं. ऐसा नहीं है कि बीजेपी जो भी चाहेगी वो हो जाएगा. इस समय हमारा ध्यान कांग्रेस की न्याय यात्रा पर है. लेकिन हम इस पर भी नज़र रख रहे हैं. कांग्रेस एकजुट है."
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चिराग पासवान क्या बोले?

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इस बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान की प्रतिक्रिया आई है.
चिराग पासवान ने कहा, ''बदलती परिस्थितियों पर हमने नज़र रखी हुई है. कयास बहुत लगाए जा रहे हैं. ऐसे में किसी सवाल का जवाब देना अभी सही नहीं होगा. एक बार स्थिति साफ हो जाए गठबंधन, नई पुरानी सरकारों को लेकर, उसके बाद ही हम अपनी पार्टी का रुख साफ़ करेंगे.''
चिराग बोले, ''मौजूदा हालात में 40 की 40 सीटें बिहार में एनडीए जीत सकती है. मुझे नहीं पता कि ऐसे हालात में नीतीश जी गठबंधन का हिस्सा बनते हैं या नहीं. काफी अलग तरह की जानकारियां, अफ़वाहें, संभावनाएं तैयार हो रही हैं. कुछ वक़्त की बात है, उसके बाद तस्वीर साफ़ हो जाएगी.''
चिराग बोले, ''जैसी सरगर्मियां हैं, उससे लगता है कि कुछ तो हलचल है. पहले भी ऐसी हलचलों का दौर हम देख चुके हैं. ये वाली हलचल अंजाम तक पहुंचती है या नहीं, ये समय ही बताएगा.''
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वे कहते हैं, ''बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व लगातार मेरे संपर्क में है. लोकसभा चुनाव क़रीब है. चुनाव की रणनीतियों को लेकर मेरी वैसे भी बातचीत चल रही है.''
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