इसराइली पीएम ने ऐसा क्या कहा कि क़तर हुआ नाराज़

इमेज स्रोत, ABIR SULTAN/POOL/EPA-EFE/REX/Shutterstock
- Author, डेविड ग्रिटन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ संवाददाता
क़तर ने कहा है कि इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के कथित तौर पर दिए एक बयान से उसे 'हैरानी' हुई है.
इसराइल और हमास के बीच तीन महीने से जारी जंग में क़तर की मध्यस्थता को नेतन्याहू ने कथित तौर पर 'संदिग्ध' कहा था.
मिल रही ख़बरों के अनुसार, इसराइली टेलीविज़न पर एक रिकॉर्डिंग प्रसारित हुई थी. इसके बारे में बताया गया कि हमास के पास मौजूद बंधकों के परिजनों से बात करते हुए नेतन्याहू ने कहा था, "आप मुझे क़तर का शुक्रिया अदा करते नहीं सुनेंगे."
उन्होंने कथित तौर पर आगे कहा, "वो फ़ायदे की स्थिति में हैं क्योंकि वो उन्हें (हमास को) आर्थिक मदद देते हैं."
नेतन्याहू की इस टिप्पणी पर क़तर ने प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि अगर ये बयान सच है तो ये "ग़ैर ज़िम्मेदाराना" है लेकिन "चौंकाने वाला नहीं है."
इसराइल और हमास के साथ क़तर के रिश्ते
खाड़ी का छोटा सा मुल्क क़तर 1990 के दशक से ही इसराइल के साथ संबंध बनाए हुए है.
हालांकि उसने आधिकारिक तौर पर अब तक इसराइल के साथ कूटनीतिक संबंध कायम नहीं किया.
क़तर लंबे वक़्त से फ़लस्तीनियों के अधिकारों का समर्थन करता रहा है. जहाँ इसराइल, यूके, अमेरिका और दूसरे कई देश फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हसाम को आतंकवादी गुट मानते हैं, वहीं हमास के नेताओं को उसे अपने यहाँ जगह दी है.
क़तर ग़ज़ा के लिए लाखों डॉलर की आर्थिक मदद भी देता रहा है. 2006 में ग़ज़ा में हमास के चुनाव जीतने के बाद से इसराइल और मिस्र ने ग़ज़ा पर कई तरह की पाबंदियां लगाईं जिसका गंभीर आर्थिक असर वहां के लोगों पर पड़ा.
इसके बाद इन पाबंदियों को तब और सख़्त कर दिया गया, जब हमास ने ग़ज़ा में मौजूद फ़लस्तीनी प्राधिकरण को सुरक्षाबलों ने वहाँ से जबरन बाहर निकाल कर अपनी ताक़त को और मज़बूत किया.
इसके बाद 2018 से इसराइली सरकारों ने क़तर को इसकी इजाज़त दी कि वो ग़ज़ा में हमास की चलाई जा रही सरकार के हज़ारों अधिकारियों की तनख़्वाह दे.
ग़ज़ा में रह रहे ग़रीब परिवारों तक आर्थिक मदद पहुंचाए और इस इलाक़े के एकमात्र पावर प्लांट के लिए तेल ख़रीदने के लिए ज़रूरी पैसों की व्यवस्था करे.

इमेज स्रोत, HAITHAM IMAD/EPA-EFE/REX/Shutterstock
क़तर हमेशा से कहता रहा है कि ग़ज़ा को दी जा रही आर्थिक मदद केवल नागरिक और मानवीय कामों के लिए है.
हालांकि ग़ज़ा के लिए क़तर की मदद को लेकर इसराइली नीति की इसराइल के भीतर कड़ी आलोचना हुई.
आलोचकों ने कहा कि क़तर हमास को सत्ता में बनाए रखने में उसकी मदद कर रहा है और उसकी सैन्य गतिविधियों को भी फंड कर रहा है.
लेकिन बीते क़रीब 15 सालों से लगातार इसराइल की सत्ता पर काबिज़ रहे बिन्यामिन नेतन्याहू (बीच में कुछ वक्त के लिए नेफ्ताली बेनेट और येर लैपिड पीएम थे) का कहना था कि ये इसराइल पर किसी तरह के हमले को रोकने और ग़ज़ा में मानवीय संकट को न बढ़ने देने के लिए था.
लेकिन बीते साल सात अक्तूबर को हमास के ग़ज़ा की सीमा की तरफ से इसराइल पर हमला किया. इस हमले में क़रीब 1,300 इसराइली नागरिक मारे गए और क़रीब 250 इसराइलियों को हमास के लड़ाके अपने साथ बंधक बना कर ग़ज़ा ले गए.
इस हमले के बाद नेतन्याहू ने इस बात को सिरे से ख़ारिज कर दिया कि उन्होंने ग़ज़ा से फ़लस्तीनी प्राधिकरण को बाहर निकलने दिया और ग़ज़ा के लिए आर्थिक मदद को मंज़ूरी देकर हमास के हाथ मज़बूत किए. उन्होंने इन दावों को "बड़ा झूठ" करार दिया.
हमास के हमले का इसराइल ने सख्ती से जवाब दिया. हमास को जड़ के ख़त्म करने के उद्देश्य से उसने ग़ज़ा में पहले हवाई और फिर ज़मीनी कार्रवाई शुरू की.
इसके बाद क़तर ने हमास के साथ अपने संबंधों की मदद से दोनों पक्षों के बीच अस्थायी युद्धविराम कराया. ये युद्धविराम क़रीब सप्ताह भर लागू रहा. इस बीच इसराइली जेलों में क़ैद 240 फ़लस्तीनियों की रिहाई के बदले हमास के कब्ज़े में मौजूद 105 इसराइली बंधकों और विदेशी नागरिकों को छुड़ाया गया.
इसके बाद से क़तर एक बार फिर दोनों के बीच युद्धविराम की कोशिशें कर रहा है लेकिन अब तक उसे इसमें सफलता नहीं मिल सकी है.
इस बीच एक तरफ ग़ज़ा में मानवीय संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है तो दूसरी तरफ़ इसराइल के भीतर सरकार पर बचे बंधकों को छुड़ाने के लिए दबाव बढ़ रहा है.
नेतन्याहू ने क्या कहा?
मंगलवार को इसराइल के चैनल 12 टीवी ने कथित तौर पर पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू की एक रिकॉर्डिंग दिखाई जिसमें वो बंधकों के परिवार वालों से कह रहे हैं, "आपने मुझे क़तर का शुक्रिया अदा करते नहीं सुना होगा. क्या आपने कभी ग़ौर किया है?"
"क्यों? क्योंकि मेरे लिए वो संयुक्त राष्ट्र या रेड क्रॉस से अलग नहीं है, और कुछ मायनों में वो अधिक संदेहास्पद है- उसके बारे में मुझे कोई शक़ नहीं है. लेकिन मैं किसी और व्यक्ति या समूह का इस्तेमाल करने के लिए भी तैयार हूं, जो मुझे बंधकों की रिहाई में मदद करे."
इसराइल ने संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस पर आरोप लगाया है कि वो बंधकों की मदद के लिए या उन्हें छुड़ाने के लिए कुछ अधिक नहीं कर रहे.
प्रधानमंत्री ने कथित तौर पर कहा कि क़तर इस मामले में मदद कर पा रहा है क्योंकि हमास के साथ वो अपने संबंधों का "फ़ायदा" उठा रहा है.
"और वो उसके साथ संबंधों की फ़ायदा क्यों ले पा रहा है? क्योंकि वो उन्हें आर्थिक मदद देता है."

इमेज स्रोत, REUTERS/Imad Creidi
क़तर की प्रतिक्रिया
बुधवार रात क़तर के विदेश मंत्री माजिद अल-अंसारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "अगर ये टिप्पणी सच है तो ये ग़ैर-ज़िम्मेदाराना है और मासूम ज़िंदगियों को बचाने की कोशिश को बिगाड़ने वाली है, हालांकि ये चौंकाने वाली नहीं है."
उन्होंने लिखा, "बीते साल क़तर की मदद से दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता हुई, जिसके बाद 100 से अधिक बंधकों की रिहाई का रास्ता साफ़ हुआ. इसके बाद से कई महीनों से क़तर लगातार सभी पक्षों से बातचीत कर रहा है, जिसमें इसराइली संस्थाएं भी शामिल हैं. क़तर की कोशिश है कि बंधकों को छुड़ाने और ग़ज़ा में तुरंत मानवीय राहत पहुंचाने के लिए किसी फ्रेमवर्क तक पहुंचा जा सके."
उन्होंने कहा कि "ऐसा लगता है कि अपने राजनीतिक करियर को बचाने के लिए" नेतन्याहू मध्यस्थता की कोशिशों को कम कर देख रहे हैं.
इसके जवाब में इसराइली वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मॉट्रिच ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "क़तर ऐसा देश है जो आतंकवाद का समर्थन करता है और उसका वित्तपोषण करता है. वो हमास का संरक्षक है और इसराइली नागरिकों पर हमास के हमले के लिए काफी हद तक ज़िम्मेदार है."
उन्होंने लिखा, "एक बात साफ़ है. युद्ध शुरू होने के बाद से ग़ज़ा में क़तर की रत्ती भर भी भागीदारी नहीं रही होगी."

इमेज स्रोत, REUTERS/Tyrone Siu
क़तर के विदेश मंत्रालय ने अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
इस बीच अमेरिका में बीबीसी के सहयोगी सीबीएस ने इसकी पुष्टि की है कि ग़ज़ा में हमास के पास मौजूद बचे हुए इसराइली बंधकों को छुड़ाने के उद्देश्य के साथ एक नए युद्धविराम की संभावना तलाशने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के निदेशक विलियम बर्न्स को जल्द रवाना करने वाले हैं.
विलियम बर्न्स फ्रांस पहुंचेंगे जबं वो क़तर के प्रधानमंत्री, इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद के अधिकारियों से मुलाक़ात करेंगे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)


















