अयोध्या: क्या हाल हैं उन व्यापारियों के जिनकी विकास के लिए दुकानें टूटीं?

अयोध्या
    • Author, अनंत झणाणें
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

2022 में जब बीबीसी की टीम अयोध्या पहुँची थी तो वहां पर तीन मार्ग: राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ को चौड़ा करने का काम शुरू हो रहा था.

कुछ दुकानें पूरी तरह तोड़ी जा रही थीं और कई दुकानों को तोड़ कर छोटा किया जा रहा था. इनमें से कई दुकानदार किराए पर कई सालों से अपनी छोटी-छोटी दुकानें चला रहे थे. वो इन सड़कों के निर्माण से परेशान थे, नाराज़ थे. वे अपने परिवार और व्यवसाय के भविष्य को लेकर चिंतित थे.

अब राम मंदिर को जाने वाले ये तीनों रास्ते बनकर तैयार हैं. अयोध्या के बाज़ार श्रद्धालुओं के लिए सजे हुए हैं. रास्तों को चौड़ा करने के लिए छोटी की गईं अधिकतर दुकानें बनकर तैयार हैं.

2022 में जिन दुकानदारों से बात की थी, उन्हीं से हमने एक बार फिर मुलाकात की. इस दौरान हमने यह जानने की कोशिश की कि अब उनके हालात कैसे हैं.

टूटकर बहुत छोटी हो गई हैं दुकानें

अपनी दुकान में खड़े अभिषेक कुमार कसेरा
इमेज कैप्शन, अपनी दुकान में खड़े अभिषेक कुमार कसेरा

2022 में जब हम गैस और हार्डवेयर के व्यवसायी अभिषेक कुमार कसेरा से मिले थे तो राम पथ को चौड़ा करने के लिए उनकी दुकान का कुछ हिस्सा भी तोड़ा जा रहा था.

अभिषेक ने तब कहा था कि वो बस यह जानना चाहते हैं, "राम पथ के लिए जो ज़मीन ली जा रही है, उसके बाद जो ज़मीन बच रही है उसको हम अपनी-अपनी जीविका चलाने के लिए ले सकते हैं कि नहीं?"

एक साल बाद अभिषेक की दुकान टूटकर 10 गुणा 15 फ़ीट से 10 गुणा 5 फ़ीट रह गई है. वो खुश हैं कि भगवान राम का मंदिर बन रहा है, लेकिन दुकान टूटकर छोटी होने का दुख भी उन्हें है. अभिषेक के पिता ने इतने सालों तक परिवार को इसी दुकान के सहारे पाला. लेकिन पिता भी कोविड में चल बसे. अब बस अभिषेक उनकी विरासत संभाल रहे हैं.

अभिषेक इस बात को मानते हैं कि, "बनाने के लिए कुछ विकास ज़रूरी होता है. अगर कुछ टूट रहा है तो आगे बनेगा भी. हम इससे नाराज़ थे लेकिन योगी जी के कार्यकाल से हम बहुत खुश हैं."

अपने पिता को याद करते हुए वो कहते हैं, "हमारे पिता थे तो समझ लीजिए सब कुछ था. अगर पिताजी इस छोटी सी दुकान को देखते तो ऐसे ही मर जाते. शुरू से उन्होंने बहुत मेहनत की. जिस खेत को सींच कर बड़ा किया, अब उसको काटने का समय आया तो वो रहे ही नहीं."

सरकार से अब भी नाराज़ हैं कमला देवी

कमला देवी
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नवंबर 2022 में कमला देवी और उनके परिवार की किराए की दुकान भी टूट रही थी. उस समय वो सरकार से बेहद नाराज़ थीं. उनका कहना था कि उन्हें मुआवज़ा नहीं चाहिए बस दुकान के बदले दुकान चाहिए.

जब 2022 में हम उनसे रामपथ पर मिले तो उन्होंने हमसे पूछा, "हम कहाँ पर जाएँ? हम को बेघर कर रहे हैं. एक लाख रुपए (सरकारी सहायता राशि) में क्या होता है? एक लाख रुपए में बीम भी नहीं खड़ा कर सकते हैं. एक लाख तो हमसे मज़दूरी ले लेंगे. हम पैसा लेकर क्या करेंगे. हमें पैसा नहीं चाहिए दुकान चाहिए."

जनवरी 2024 में कमला देवी की दुकान भी टूटकर छोटी हो गई है. लेकिन दुकान मालिक से विवाद के चलते वो अभी तक उसे बनवा नहीं पाई हैं. उन्हें प्रशासन से एक लाख रुपए की सहायता राशि भी मिली. लेकिन उससे उनकी नाराज़गी दूर नहीं हुई है.

वो कहती हैं, "हम अब भी बहुत नाराज़ हैं. जब रहने का ठिकाना नहीं है, खाने को मोहताज हैं, दिन के दिन बोहनी नहीं होती है. ना मर सकते हैं, ना जी सकते हैं."

मैं कमला देवी से कहता हूं कि अब जब राम मंदिर बन कर तैयार हो गया है तो उसकी ख़ुशी अयोध्या में दिख रही है, मेरे यह कहने पर वो कहती हैं, "मंदिर बनने की हमें बहुत ख़ुशी है. इसलिए कि हम भी सोचते थे कि एक समय आएगा, भगवान आएंगे, विराजमान होंगे. लेकिन मोदी या योगी को राम यह नहीं कहे थे कि हम आएंगे तो जनता को बेघर कर देना. यह तो राम नहीं बोले थे ना? राम कहे थे हम आएंगे, जनता हमारे पीछे सुखी रहेगी."

विवाद के चलते नहीं बन पाई हैं कुछ दुकानें

अयोध्या का भक्ति पथ
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दरअसल, अयोध्या के बाबू बाज़ार में राम पथ पर दुकानदार कई सालों से, कई पीढ़ियों से किराए पर दुकान चला रहे हैं. फिलहाल उनका अपने दुकान मालिक अयोध्या के राजा के साथ विवाद चल रहा है.

अयोध्या ज़िला प्रशासन के मुताबिक़ इन दुकानदारों और दुकान मालिक के बीच में चल रहे विवाद के बावजूद दुकानदारों को वहां से हटाया नहीं गया है. दुकानें चल रही हैं और लोगों की रोज़ी-रोटी पर कोई असर नहीं पड़ा है.

प्रशासन के मुताबिक़, उन्होंने इन किराएदार दुकानदारों की राजा अयोध्या से वार्ता कर समझौता कराने की कोशिश की है, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया है. इनकी दुकानें अब भी टूटी पड़ी हैं. प्रशासन का यह भी कहना है कि उन्होंने इन दुकानों की बाहर से मरम्मत कराने की भी पेशकश की है, लेकिन दुकानदारों और दुकान मालिक में विवाद की वजह से ऐसा नहीं हो सका है.

सरकार का दावा है कि प्रभावित दुकानदारों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी देने की पूरी कोशिश की गई है.

अयोध्या में तीन मार्गों के निर्माण की परियोजना

अयोध्या में निर्माण कार्य
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अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ 2022 से अयोध्या को एक धार्मिक टूरिज़्म हब बनाने का भी काम चल रहा है.

जिसमें 13 किलोमीटर लंबे राम पथ, 800 मीटर लंबे भक्ति पथ और 800 मीटर लंबे जन्मभूमि पथ को चौड़ा करने का काम हुआ है.

राम मंदिर को जाने वाले इन रास्तों को चौड़ा करने के लिए इन पर पहले से मौजूद कई सौ दुकानों का कुछ हिस्सा तोड़ा गया और कुछ दुकानों को पूरी तरह से हटा दिया गया. अयोध्या के व्यापारी नेताओं की मानें तो इन मार्गों के निर्माण के कारण कुल 4700 लोग प्रभावित हुए.

व्यापारी नेता 2022 से ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए बेहतर मुआवज़े, बची हुई दुकानों को फिर से बनवाने और पूरी तरह से विस्थापित दुकानदारों को सरकार द्वारा बनाई गई नई दुकानों को आवंटित करने की मांग कर रहे हैं.

भगवत प्रसाद पहाड़ी का दुख

राम लला के वस्त्र सिलने वाले भगवत प्रसाद पहाड़ी
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भगवत प्रसाद पहाड़ी और उनका परिवार 1985 से रामलला विराजमान के वस्त्र सिलते आ रहा है.उस समय रामलला बाबरी मस्जिद के गुम्बद के नीचे हुआ करते थे. पहले उन्हें केंद्र सरकार से भी रामलला के वस्त्र सिलने का आर्डर मिलता था. लेकिन अब अधिकतर आर्डर दर्शन करने वाले श्रद्धालु दिया करते हैं.

नवंबर 2022 में रामपथ को चौड़ा करने के लिए उनकी किराए की 3 दुकानें पूरी तरह टूट गईं. अब वो बेहद खुश हैं कि बालस्वरूप रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है. लेकिन उन्हें अपनी दुकानें टूटने का दुख भी है.

वो बीबीसी से कहते हैं, "राम पथ पर मेरी तीन दुकानें थीं और उनका मुझे तीन लाख रुपए मुआवज़ा मिला. सरकार ने दो दुकानें अलॉट की हैं. उसका 35 लाख रुपया बैठ रहा है. नुकसान तो हमें बहुत महसूस हुआ लेकिन ख़ुशी इस बात की है कि रामलला को बैठाने में योगदान दे पाए. इसके लिए कितनी जानें चली गईं, मंदिर बनाने में बहुत कुछ संघर्ष हुआ. हमारे योगी और मोदी जो कर्मठ व्यक्ति हैं. उन्हें अवतारी पुरुष माना जा सकता है, इन्हीं के कार्यकाल में भगवान राम का भव्य मंदिर बन रहा है. हमें सबसे अधिक ख़ुशी है."

अंत में वो कहते हैं, "लेकिन जो दाल-रोटी का सहारा है यह छिन गया एकदम."

लीज़ पर मिल रहीं नई दुकानें और बैंक लोन

अयोध्या में बनी नई दुकानें
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भगवत प्रसाद सरकार से अलॉट हुई दो नई दुकानों के आदेश दिखाते हैं. लेकिन लाखों की कीमत वाली इन दुकानों को 30 साल की लीज़ पर लेने के लिए अब वो बैंक लोन लेने की कोशिश में लगे हुए हैं.

अयोध्या प्रशासन का कहना है कि भगवत प्रसाद पहाड़ी जैसे 212 किरायदार दुकानदार जिनकी सड़क निर्माण में पूरी दुकानें टूट गईं उन्हें प्रशासन से नई दुकानें आवंटित की गई हैं.

प्रशासन के मुताबिक़ इन किरायदारों को दुकानों की मार्किट वैल्यू नहीं बल्कि सिर्फ एक बेस प्राइस अदा करना है. मसलन, दुकानों की कीमत 50 से 60 लाख है लेकिन बेस प्राइस के हिसाब से कुछ दुकानों की शुरुआती कीमत सिर्फ 13-14 लाख है.

सरकार का कहना है कि जिन दुकानदारों को अलॉटमेंट लेटर दिया गया है, उन्हें सरकार लोन लेने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है. बैंक से लोन दिलवाने के लिए उन्हें पूरी सहायता की जा रही है.

प्रशासन का यह भी कहना है कि दुकान अगर 30 साल की लीज़ पर दी जा रही है तो लीज़ को आसानी से एक शुल्क देकर 30 साल बाद बढ़ाया जा सकेगा और लीज़ बढ़ जाएगी. लेकिन विस्थापित व्यापारी चाहते हैं कि उन्हें दुकान हमेशा के लिए बेच दी जाए.

अयोध्या में दुकान मालिक, दुकान पर कब्ज़ेदार, दुकान को बनवाने वाले और उस पर किराए से दुकान चलाने वाले, सभी दुकान पर अपना हक़ जताते हैं. इसी वजह से अयोध्या में विकास कार्यों के लिए ज़मीन अधिग्रहित करना काफी चुनौतीपूर्ण कार्य है.

लेकिन यह दुकानदार भी दशकों से यहाँ पर बसे हुए हैं. शहर के विकास के साथ उनका भी भविष्य और उम्मीदें जुड़ी हुई हैं. अयोध्या में राम मंदिर बनने की ख़ुशी उनमें भी झलक रही है.

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