अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बीच क्या सोचते हैं वहाँ के कुछ मुसलमान

अयोध्या
    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, अयोध्या

अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होनी है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे.

इस भव्य आयोजन में हिस्सा लेने के लिए मंदिर के निर्माण कार्य की देखरेख कर रही राम मंदिर कमेटी ने 7,000 साधु-संतों के अलावा 4,000 लोगों को न्योते दिए हैं.

इस बीच क़रीब 70 एकड़ वाले राम मंदिर परिसर के ठीक पीछे एक मोहल्ला है, कटरा, जहाँ एक छोटे से घर में चार लोगों का परिवार दिन रात काम करने में जुटा है, क्योंकि प्राण प्रतिष्ठा की तारीख़ पास आ रही है.

इस घर में कई पीढ़ियों से मिठाई के डिब्बे बनते रहे हैं. यहाँ से इन्हें मिठाई की दुकानों पर भेजा जाएगा जहाँ इनमें प्रसाद ख़रीदा और चढ़ाया जाएगा.

डिब्बे बनाने वाली फूलजहाँ महज़ 9 साल की थी, जब 7 दिसंबर 1992 के दिन एक ग़ुस्साई भीड़ ने इनके घर हमला किया था और इनके पिता फ़तेह मोहम्मद को मार दिया था.

उस दिन को याद कर फूलजहाँ आज भी भावुक हो जाती हैं.

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

साझी संस्कृति में कैसे बढ़ी दूरियाँ

फूलजहां
इमेज कैप्शन, अयोध्या की फूलजहां को 1992 के दंगे का दर्द याद है

उन्होंने कहा, “हमारे अब्बू तो सीधे-साधे इंसान थे जो मंदिरों के लिए मिठाई के डिब्बे बनाते थे. उन्हें बाहरी लोगों ने मार दिया जिसके बाद हम लोग बहुत दिक़्क़त में रहे."

"फ़िलहाल तो अयोध्या में सुकून से हैं, कोईं परेशानी नहीं है. जब उतनी बड़ी मंज़िल पार कर ली तो जो भी होगा आगे वो देखा जाएगा. घबराहट रहेगी कि कभी कुछ हो न जाए अयोध्या में लेकिन अभी फ़िलहाल ठीक ही है.”

फूलजहाँ के घर से महज़ 50 मीटर की दूरी पर हफ़ीज़-उर-रहमान रहते हैं, जिन्होंने 31 साल पहले हुए दंगों में एक हिंदू परिवार के यहाँ शरण लेकर अपनी जान बचाई थी.

दंगों में अपने ताऊ और बड़े भाई को खो चुके हफ़ीज़-उर-रहमान के मुताबिक़, “उस हादसे के बाद से तो यहाँ अमन-चैन रहा है लेकिन जब भी अयोध्या में कोई बड़ा आयोजन होता है और लाखों लोग आते तो हम ख़ौफ़ज़दा रहते हैं. इस बार भी डरे-सहमे तो हैं. उम्मीद यही है कि सब शांत रहे”.

16वीं शताब्दी में बनी बाबरी मस्जिद को 1992 में गिरा दिया गया था.

इसके बाद अयोध्या समेत देश के कई हिस्सों में हुए दंगों में लगभग 2,000 लोगों की मौत हुई थी.

क़ानूनी लड़ाई

अयोध्या
इमेज कैप्शन, हामिद ज़ाफ़र

फिर हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के बीच पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में एक लंबी क़ानूनी लड़ाई चली.

हिंदू संगठनों का मानना रहा है कि बाबरी मस्जिद दरअसल राम जन्मभूमि है और उसे एक मंदिर को तोड़ कर बनाया गया था.

आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट (पाँच जजों की संविधान पीठ) ने 2019 के ऐतिहासिक फ़ैसले में ये कहते हुए कि “बाबरी मस्जिद ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से गिराई गई थी”, ये भी तय किया कि अयोध्या की विवादित भूमि पर मंदिर बनाया जाएगा.

अदालत के आदेश पर अयोध्या से क़रीब 20 किलोमीटर दूर, धन्नीपर में, एक नई मस्जिद के लिए जगह भी तय हुई है.

हक़ीक़त ये भी है कि राम मंदिर परिसर के इर्द गिर्द क़रीब एक दर्जन मस्जिदें, मदरसे और मज़ारें हैं, जहाँ सदियों से पूजा-पाठ और अज़ान साथ-साथ होती रही है.

इनमें प्रमुख हैं तहरीबाज़ार जोगियों की मस्जिद, ख़ानखाहे मुज़फ़्फ़रिया, मस्जिद दोराही कुआँ, मस्जिद क़ज़ियाना, मस्जिद बदर पंजीटोला, मस्जिद मदार शाह और मस्जिद इमामबाड़ा.

अयोध्या के मुसलमान

अयोध्या
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

क़रीब 30 लाख आबादी वाले अयोध्या ज़िले में पाँच लाख मुस्लिम रहते हैं, जिनमें क़रीब पाँच हज़ार नए राम मंदिर के इर्द-गिर्द रहते आए हैं.

अनुमान है कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद हर महीने राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद 25-30 लाख हो सकती है.

पुराने नुक़सान को याद करके अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोगों के मन में बेचैनी भी है.

अयोध्या से सटे फ़ैज़ाबाद टाउन में मोहम्मद ख़लीक ख़ान की स्टेशनरी की दुकान और और उनकी कई पीढ़ियाँ यहीं रहती रही हैं.

उन्होंने बताया, “अभी आठ-दस दिन पहले टाटशाह मस्जिद पर कुछ लोग आए थे अयोध्या से, ये बताने के लिए कि हम लोग घर छोड़ कर जा रहे हैं क्योंकि बड़ी भीड़ होगी. लेकिन यहाँ के उलेमा लोगों ने उन्हें समझाया कि आप लोग छोड़ के न जाइए, हम अधिकारियों से बात कर रहे हैं. इसके बाद कुछ पुलिसवालों ने भी उन्हें रोका कि आप लोग अयोध्या छोड़ के न जाइए हम आपकी हिफ़ाज़त करेंगे”.

इन ख़बरों के बीच कि “अयोध्या के कई मुस्लिम परिवार आगामी प्राण प्रतिष्ठा से पहले कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहे हैं.”

स्थानीय प्रशासन और प्रदेश सरकार ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि इस आयोजन और उसके बाद की सुरक्षा के लिए इंतज़ाम पूरे हैं और किसी को घबराने की ज़रूरत नहीं.

बीजेपी सांसद का आश्वासन

मोहम्मद आज़म क़ादरी

अयोध्या से सत्ताधारी भारतीय जानता पार्टी सांसद लल्लू सिंह ने बीबीसी से कहा, “सभी की सुरक्षा की जाएगी और अल्पसंख्यक समुदाय के किसी भी व्यक्ति को परेशान होने या डरने की ज़रूरत नहीं है”.

उन्होंने कहा, “जिस प्रकार अयोध्या के अन्य नागरिक रहते हैं उसी रूप में वो रहते हैं और हम आपसी भाईचारे का व्यवहार बना कर रखते हैं. हमारे प्रधानमंत्री जी तो विकास के जितने भी काम कर रहे हैं वह सबके लिए कर रहे हैं. उसमें कोई ये नहीं कह सकता कि इस धर्म का ज़्यादा हुआ या उस धर्म का कम हुआ. हमारे संगठन ने कभी हमसे ये नहीं कहा कि किसी से दूरी बनाकर रखिए क्योंकि सब भारत के नागरिक हैं.”

वैसे कुछ हफ़्ते पहले हम राम मंदिर से महज़ 100 मीटर की दूरी पर बने एक बड़े मदरसे गए थे जहाँ हाजी हाफ़िज़ सैय्यद एखलाक़ के साथ बातचीत भी हुई थी. तब उन्होंने कहा था, “इस परिसर के आसपास अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की कई ज़मीनें हैं और कुछ लोग इस दुविधा में भी हैं कि यहाँ कब तक रहना चाहिए.”

गुरुवार को जब उनसे मिलने दोबारा पहुँचे तो उन्होंने हमसे बात करने से मना कर दिया और उनके एक कर्मचारी ने गेट से हमें लौटते हुए कहा, “मीडिया वालों से बात नहीं करेंगे हाजी साहब”.

गंगा-जमुनी तहज़ीब

अयोध्या

बहराल, हमारी मुलाक़ात अयोध्या में सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष मोहम्मद आज़म क़ादरी से हुई जिनका मत है कि, “अयोध्या में अल्पसंख्यकों को लगता है उन्हें कम पूछा जा रहा है.”

उन्होंने कहा, “मेरे भी धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार होते तो हमको भी ख़ुशी मिलती और इस गंगा-जमुनी तहज़ीब में चार चाँद लग जाते कि हाँ, प्रधानमंत्री जी सभी कम्यूनिटी के हैं, किसी एक के नहीं.''

''यहाँ की कम्यूनिटी किसी राजनीति में नहीं पड़ना चाहती और न तो राजनीति का हिस्सा बनना चाहती है कि अब किसी भी तरह से हम हिंदू-मुस्लिम को लड़ाने का कोई काम करे या हम लोगों के ऊपर कोई राजनीति करे. जो चीज़ें जहां जैसे हैं वो महफ़ूज़ रहें, यही चाहते हैं यहाँ के लोग”.

प्राण प्रतिष्ठा के बाद राम मंदिर को तैयार होने में दो साल तक लग सकते हैं.

निर्माण कार्य चौबीसों घंटे जारी है और भक्तों का आगमन भी बढ़ रहा है.

चौक इमामबाड़े के पास रहने वाले हामिद जाफ़र मीसम अयोध्या की शिया वक़्फ़ कमेटी के अध्यक्ष हैं और कहते हैं, “जब सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आ गया तो उस पर किसी भी तरीक़े का कोई विवाद नहीं है. मस्जिद भी धन्नीपुर में बन रही है और मंदिर भी बन रहा है, इस पर मुसलमान को कहीं भी कोई आपत्ति नहीं है.''

''लेकिन 22 जनवरी वाले कार्यक्रम पर मीडिया के कुछ लोगों का यहाँ के मुसलमानों से पूछना कि आप क्या करेंगे 22 को, ये सही नहीं है. अरे भई 22 को भी वो वही करेंगे जो वो 21 को कर रहे थे.”

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)