पुतिन और प्रिगोज़िन: एक गहरी दोस्ती जो दुश्मनी में बदल गई...

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- Author, एंद्रेई गोरियानोव
- पदनाम, बीबीसी रूसी सेवा
रूसी राष्ट्रपति पुतिन और वागनर ग्रुप के चीफ़ येवगेनी प्रिगोज़िन की दोस्ती संदेहास्पद हालातों में शुरू हुई और इसका अंत भी उतना ही अस्पष्ट और अप्रिय तरीके से हुआ.
ये एक दूसरे पर निर्भरता वाला रिश्ता था जो ऐसे समय विकसित हुआ जब सरकारी सुरक्षा एजेंसियां की अंडरवर्ल्ड के अपराधियों के साथ साठगांठ थी और इसका अंत हमेशा से बुरा ही होना था.
कुछ ही दशकों में वागनर ग्रुप रूस की सबसे प्रभावी संस्था बन गया और कुछ का मानना था कि पुतिन सरकार का अस्तित्व, यूक्रेन युद्ध में प्रिगोज़िन की सफलता पर निर्भर हो गया था.
अब, ऐसा लगता है कि राजनीतिक प्रभाव के लिए क्रेमलिन सभी प्रतिद्वंद्विता को ख़त्म करना चाहता है.
ये 1990 के दशक की शुरुआत का कोई समय रहा होगा जब येवगेनी प्रिगोज़िन की मुलाक़ात व्लादिमीर पुतिन से हुई. उनकी पहली मुलाक़ात की ठीक वजह क्या थी हमें नहीं पता लेकिन माना जाता है कि प्रिगोज़िन जेल से छूट कर अभी अभी बाहर आए थे और दूसरी ओर पुतिन सोवियत सिक्योरिटी सर्विस, केजीबी, की ओर से पूर्वी जर्मनी में मिशन से वापस लौटे थे और राजनीति में जाने का रास्ता तलाश रहे थे.
अपराधी, केजीबी और सेंट पीटर्सबर्ग का सीन
इस मुलाक़ात की पृष्ठभूमि में 1990 के दशक में रूस की उथल पुथल भरे राजनीतिक हालात थे. जब 1991 में सोवियत संघ अफरा-तफरी के माहौल में बिखर गया, तो ऐसे समय अंडरवर्ल्ड अपराधियों का बोलबाला हो गया और उनके हाथ में अच्छी ख़ासी ताक़त आ गई.
ऐतिहासिक रूप से सोवियत संघ में सिक्योरिटी सर्विसेज़ अलग-अलग कामों के लिए अपराधियों की मदद लेती थी, उनसे सौदेबाज़ी करती और उन्हें भर्ती करती थी.
इस तरह की साठगांठ से अपराधियों को फायदा होता था और वे भी ख़ुश रहते थे.
येवगेनी प्रिगोज़िन और व्लादिमीर पुतिन दोनों सेंट पीटर्सबर्ग से थे, जो रूस का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और अधिकांश लोगों के लिए ये सांस्कृतिक राजधानी है. यहां हर्मिटेज आर्ट म्यूजियम और इम्पीरियल विंटर पैलेस है.
इस शहर को 'रूस की आपराधिक राजधानी' भी कहा जाता है, जहां छोटे छोटे चोरों से लेकर कई बड़े ताक़तवर आपराधिक गैंगों का बोलबाला है.

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वागनर के बॉस
येवगेनी प्रिगोज़िन कोई अपवाद नहीं थे. 1970 के दशक में उनपर चोरी का मुकदमा चला और कोर्ट से चेतावनी मिली.
1981 में उन्हें दोबारा दोषी ठहराया गया, इस बार लूट का आरोप था और उन्हें 13 साल जेल की सज़ा मिली.
इस बर्बर आपराधिक घटना के हालात के बारे में वर्णन कुछ इस प्रकार किया गया थाः प्रिगोज़िन और उनके दो अन्य सहयोगियों ने सड़क पर एक महिला पर हमला किया, उस महिला की गर्दन पकड़ी और गला घोंटने की कोशिश की. इसके बाद वे महिला के जाड़े के बूट और कान की बालियां लेकर फरार हो गए.
भविष्य में वागनर के बॉस बनने वाले प्रिगोज़िन 1990 में जेल से रिहा हुए और जब वो बाहर आए तो जेल जाते समय जो दुनिया थी, वो पूरी तरह बदल चुकी थी.
पुराने सोवियत प्रमुख लियोनिड ब्रेझनेव की जगह सुधारवादी नेता मिखाइल गोर्बाचेव सत्ता में आ गए थे, प्रेस्त्रोइ का जोर था और बर्लिन की दीवार गिर चुकी थी.
पुतिन और अमेरिका
1990 के दशक के मध्य येवगेनी प्रिगोज़िन ने सेंटर पीटर्सबर्ग में एक रेस्तरां खोला जिसका नाम था 'द ओल्ड कस्टम हाउस', जहां आपराधिक गिरोहों के प्रमुखों के अलावा सेंट पीटर्सबर्ग के मेयर अनातोली सोबचाक आते जाते रहते थे.
उस समय पुतिन 40 साल के थे और सोबचाक के सहयोगी के रूप में काम करते थे.
लेकिन प्रिगोज़िन के लिए रास्ते बहुत कठिनाई भरे थे. उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग में रेस्तरांओं की एक शृंखला शुरू की, जहां देश विदेश के ग्राहकों के अलावा राजनेता भी जाते थे.
2002 की एक फ़ोटो है जिसमें प्रिगोज़िन व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को डिनर परोसते दिखते हैं.
माना जाता है कि उसी दौरान उनका निक नेम 'पुतिन्स शेफ़' पड़ा.
केजीबी के अतीत और शक्की दिमाग वाले पुतिन जैसे व्यक्ति के लिए अपना निजी शेफ़ रखना बेहद अहम था जो उनके भोजन के सुरक्षित होने को सुनिश्चित करे.

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शेफ़ से ट्रोल और भाड़े के सैनिक तक
2000 के दशक की शुरुआत में व्लादिमीर पुतिन क्रेमलिन में दाखिल हुए और रूस की सिक्योरिटी सर्विसेज़ ने अपना नियंत्रण फिर से हासिल करना शुरू किया.
2000 के दशक के मध्य से येवगेनी प्रिगोज़िन ने क्रेमलिन के कई तरह के काम करने शुरू कर दिए, ख़ासकर वे काम जो सिक्योरिटी सर्विसेज़ के दायरे के बाहर थे.
उन्होंने एक मीडिया हाउस खड़ा किया जिसका मुख्य काम था रूस और विदेशों में ग़लत सूचनाएं फैलाना.
ये मीडिया मशीन में तैयार होने वाली कहानियां अक्सर इतनी शानदार हुआ करती थीं कि कोई भी सरकारी प्रोपेगैंडा तंत्र उन्हें फैलाने की हिम्मत नहीं करेगा.
लेकिन जब सोशल मीडिया का ज़माना आया और इसका असर बढ़ा, प्रिगोज़िन ने अपनी 'ट्रोल फ़ैक्ट्री' की स्थापना की.
रूस समर्थित अलगाववादी
कई टिप्पणीकार मानते थे कि यह फ़ैक्ट्री रूसियों के बीच इस धारणा को फैलाने का काम करती थी कि सच्चाई जैसी कोई चीज़ नहीं होती और इसके पीछे पड़ने का कोई मतलब नहीं.
2013-14 में यूक्रेनी मैदान क्रांति और क्राइमिया को रूस में मिलाने के बाद, प्राइवेट मिलीटरी कंपनी वागनर ग्रुप पहली बार चर्चा में आया.
वागरन ग्रुप ने क्राइमिया और पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थित अलगाववादियों का समर्थन किया था.
उस समय क्रेमलिन में यूक्रेन पर पूरी तरह कब्ज़े की हिम्मत नहीं थी और इसकी बजाय उसने सीरिया में एक सैन्य अभियान की शुरुआत की.
कई विश्लेषक मानते हैं कि सीरिया में रूस की दखलंदाज़ी का मकसद, पूर्वी यूक्रेन के दोनबास में युद्ध से ध्यान भटकाना था.
ये वही समय था जब हमने प्रिगोज़िन के क़रीबी सहयोगी दमित्री उत्किन के बारे में सुना, जो वागनर ग्रुप का कमांडर बने और अपने कट्टर दक्षिणपंथी विचारों, बर्बरता और निर्दयता के लिए जाने जाते थे.

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प्राइवेट मिलिट्री
पुतिन की सत्ता के लिए खुद येवगेनी प्रिगोज़िन और उनकी प्राइवेट आर्मी लगातार अहम होती जा रही थी, लेकिन रूसी सरकार ने 2022 के बसंत तक ये दावा करना जारी रखा कि सरकार का प्रिगोज़िन से कोई नाता नहीं है.
रूस के क़ानून में प्राइवेट मिलिट्री रखना प्रतिबंधित है.
क्रेमलिन के आधिकारिक प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने लगातार इस बात का खंडन किया कि वागनर की गतिविधियों की कोई जानकारी भी है.
वो कहते कि क्रेमलिन को पता है कि कुछ निजी बिज़नेसमैन हैं जो शामिल हो सकते हैं.
लेकिन दूसरी तरफ़ हर किसी को ये भी साफ़ था कि यूक्रेन और सीरिया में मिलिट्री ऑपरेशन, जहां वागनर गोपनीय तरीक़े से शामिल था, और अफ़्रीका के कई देशों में रूस के शीर्ष अधिकारियों की मंज़ूरी के बिना ये बिल्कुल भी नहीं हो सकता था.
'वागनर सेंटर'
2022 की गर्मियों में रूसी मीडिया में ऐसी ख़बरें आनी शुरू हो गई कि सेंट पीटर्सबर्ग के बिज़नेसमैन का हथियारबंद ग्रुप यूक्रेन में जंग लड़ रहा है.
कुछ ही हफ़्तों में येवगेनी प्रिगोज़िन रूस की जेलों का दौरा करने लगे और युद्ध के लिए कैदियों की भर्ती करने लगे.
साल 2022 के शरद तक आते आते क्रेमलिन के आधिकारी प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव प्रिगोज़िन को एक ऐसे शख़्स के रूप में बताने लगे जिसका 'दिल जो कुछ भी हो रहा है उसके लिए दुखी' होता है और वो व्यक्ति 'बड़ा योगदान कर रहा है.'
नवंबर 2022 तक येवगेनी प्रिगोज़िन ने सेंट पीटर्सबर्ग में 'वागनर सेंटर' खोला, जबकि रूसी सेना और रक्षा मंत्रालय के प्रति उनका आलोचना तीखी होती गई.
जब रूसी सेना यूक्रेन के दक्षिणी हिस्से और पूरब के कुछ हिस्सों से पीछे हटी, तो रक्षा मंत्रालय के ख़िलाफ़ प्रिगोज़िन की आलोचना चरम पर पहुंच गई.

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बग़ावत
वागनर प्रमुख ने शिकायत की कि सेना कमांड जंग में प्राइवेट आर्मी के योगदान को मानने से इनकार कर रही थी.
बाद में उन्होंने रक्षा मंत्री सेर्गेई शोइगू और चीफ़ ऑफ़ जनरल स्टाफ़ वैलेरी गेरासिमोव पर आरोप लगाए कि पूर्वी यूक्रेन के बखमूत कस्बे में जंग के दौरान उन्होंने वागनर को पर्याप्त गोला बारूद नहीं दिया.
क्रेमलिन ने इस बढ़ते टकराव पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं की.
लेकिन जून की शुरुआत में रक्षा मंत्रालय ने सभी प्राइवेट मिलिट्री ग्रुपों को एक कमांड के मातहत आने और सेना के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर करने की मांग रखी. प्रिगोज़िन ने इससे सीधे सीधे इनकार कर दिया.
ये टकराव 23 जून को सुबह सुबह उच्च स्तर पर पहुंच गया जब येवगेनी प्रिगोज़िन ने रूसी सेना पर वागनर के ठिकानों को निशाना बनाने के आरोप लगाए. हालांकि ऐसे किसी हमले के कोई सबूत नहीं हैं.

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प्रिगोज़िन की आशंका
प्रिगोज़िन ने मॉस्को की ओर 'मार्च ऑफ़ जस्टिस' का एलान कर दिया.
बीबीसी और अन्य मीडिया ने जिन स्रोतों से बात की, उनके मुताबिक ये प्रिगोज़िन की हताशा के संकेत थे और रूसी सेना के ख़िलाफ़ उनके टकराव में राष्ट्रपति पुतिन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश थी.
येवगेनी प्रिगोज़िन से परिचित एक स्रोत ने बीबीसी को बताया, "वो अपनी स्वायत्तता छिनने को लेकर चिंतित थे."
वागनर ग्रुप ने दो सैन्य हेलीकॉप्टर और एक विमान को मार गिराया और क़रीब 15 रूसी सैनिकों को मार डाला.
जब प्रिगोज़िन इन अतिरेक की कार्रवाइयों की ओर चले गए तो रूसी सिक्योरिटी सर्विस एफ़एसबी ने उनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामला शुरू कर दिया, जबकि राष्ट्रपति पुतिन ने उनका नाम लिए बिना 'गद्दार' कहा, जिसने 'देश की पीठ में छूरा भोंका' और सभी बाग़ियों को सज़ा देने की घोषणा की.
रूस से आर्थिक मदद
24 जून की शाम तक हालात में अचानक नर्मी आई, जब येवगेनी प्रिगोज़िन ने वागनर ग्रुप के मार्च को रोक दिया.
29 जून को राष्ट्रपति पुतिन प्रिगोज़िन और अन्य कमांडरों से मिले. बाद में राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने वागनर ग्रुप को रूसी सेना के एक कमांडर के मातहत काम करने के लिए मनाया है.
प्रिगोज़िन ने खंडन किया कि उन्होंने रक्षा मंत्रालय के मातहत काम करने पर रज़ामंदी दी है.
बग़ावत के बाद व्लादिमीर पुतिन ने अचानक खुलासा किया कि वागनर को शुरू से ही रूसी सरकार की ओर से आर्थिक मदद मिलती थी. हालांकि सालों तक क्रेमलिन प्राइवेट आर्मी के साथ अपने किसी भी कनेक्शन को खारिज करता रहा था.
जुलाई के अंत में कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि येवगेनी प्रिगोज़िन सेंट पीटर्सबर्ग में हुए रूस-अफ़्रीका सम्मेलन में दिखाई दिए थे.
अंतिम सार्वजनिक संबोधन
कई अफ़्रीकी देशों में वागनर ग्रुप की मौजूदगी के इतिहास को देखते हुए कई जानकारों को लगा कि प्रिगोज़िन भी अफ़्रीकी महाद्वीप में अपनी गतिविधि को केंद्रित करेंगे.
तवेर इलाक़े में विमान दुर्घटना के दो दिन पहले ऑनलाइन एक वीडियो सामने आया था जिसे पश्चिमी अफ़्रीकी देश माली में शूट किया गया था.
इसमें दिखता है कि प्रिगोज़िन हैट पहने हुए एक मैदान में खड़े हैं और कह रहे हैं, "आईएसआईएस, अल क़ायदा और बाकी दूसरे लुटेरों के दिल में ख़ुदा का ख़ौफ़ भरने के बाद, हम यहां हैं."
अभी तक की जानकारी में ये उनका अंतिम सार्वजनिक संबोधन है.
ऐसा लगता है कि प्रिगोज़िन की कहानी रूसी इतिहास के जाने पहचाने दूसरे उदाहरणों से मेल खाती है, जब क्रेमलिन की सबसे क्रूर नीतियों को लागू करने वाले बाद में खुद सज़ा पाए और नष्ट हो गए.
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