विद्रोह के बाद भी वागनर ग्रुप के चीफ़ प्रिगोज़िन से मिले थे राष्ट्रपति पुतिन

स्टीव रोज़नबर्ग 

रूस संपादक, बीबीसी न्यूज़

वागनर ग्रुप के नेता येवगेनी प्रिगोज़िन और रूस का राष्ट्रपति पुतन का फ़ेस मास्क रूस के बाज़ार में बिकते हुए

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वागनर ग्रुप के लीडर येवगेनी प्रिगोज़िन से मुलाक़ात की थी.

क्रेमलिन के मुताबिक ये मुलाक़ात येवगेनी प्रिगोज़िन के रूस के खिलाफ़ बग़ावत करने के पांच दिन बाद हुई थी.

वागनर ग्रुप की कहानी में क्या नया मोड़ आया है, इसकी जानकारी बीबीसी रूसी सेवा के एडिटर स्टीव रोज़नबर्ग को मिली है.

चलिए सीधे मुद्दे पर आते हैं.

24 जून की सुबह, विद्रोह के दिन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वागनर ग्रुप के चीफ़ पर 'विश्वासघात' और 'पीठ में छुरा घोंपने' का आरोप लगाया था.

उसी दिन देर शाम वागनर सेना ने रूसी वायुसेना के पायलटों को मार गिराया.

जब वागनर ग्रुप के लड़ाके रूस की राजधानी से सिर्फ़ 200 किलोमीटर की दूर थे तभी रूस और वागनर नेता के बीच एक डील हुई.

जिसके बाद बग़ावत ख़त्म हो गई. किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया. किसी पर मुक़दमा नहीं चलाया गया.

वागनर ग्रुप के लीडर येवगेनी प्रिगोज़िन को उनके विद्रोह के लिए कोई सज़ा नहीं दी गई.

कौन कौन मौजूद थे इस मुलाकात में?

पुतिन और प्रोगोज़िन

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अब यह बात सामने आई है कि विद्रोह के पांच दिन बाद येवगेनी प्रिगोज़िन अपने कमांडरों के साथ क्रेमलिन में मौजूद थे, और ये तमाम लोग राउंड टेबल पर राष्ट्रपति पुतिन से बातचीत कर रहे थे.

इस कहानी में इतने मोड़ और रहस्य हैं कि इसे समझना मुश्किल है.

जो बात साफ़ नहीं है, वो ये है कि इस मुलाक़ात में किस बात पर चर्चा हुई और इसका क्या निष्कर्ष निकला.

लेकिन इसके बाद जो कुछ हुआ उससे इतना तो अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि दोनों में सुलह तो नहीं ही हुई है.

हाल के दिनों में सबने देखा कि कैसे रूस के सरकारी मीडिया ने येवगेनी प्रिगोज़िन को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

कथित तौर पर सेंट पीटर्सबर्ग के उनके बंगले में पड़े छापे में कई ऐसी चीज़े मिली जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया और रूसी टीवी चैनलों को लीक की गईं.

तस्वीरों में सोने के बिस्किट, हथियार और बहुत सारे विग देखे जा सकते थे.

बीते दिनों रूस के नंबर वन शो 'न्यूज़ ऑफ़ द वीक' में येवगेनी प्रिगोज़िन को बदनाम करने का सिलसिला जारी रहा.

एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि येवगेनी प्रिगोज़िन रॉबिन हुड नहीं हैं जैसा कि वो खुद को दिखाने की कोशिश करते हैं.

वो आपराधिक अतीत वाले बिज़नेसमैन रहे हैं. उनके कई काम संदिग्ध और ज़्यादातर क़ानून के ख़िलाफ़ रहे हैं.

गहराता राज़

वागनर लड़ाके

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24 जून को क्रेमलिन और वागनर ग्रुप के बीच विद्रोह ख़त्म करने के समझौते का क्या हुआ?

समझौते के मुताबिक, येवगेनी प्रिगोज़िन को अपने वागनर साथियों के साथ रूस छोड़ बेलारूस जाना था.

वागनर लड़ाकों ने उनके साथ जाने की इच्छा जताई थी.

पिछले सप्ताह बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको ने बीबीसी को बताया था कि वागनर नेता और लड़ाके उनके देश बेलारूस में नहीं थे.

संक्षेप में समझें तो वो कह रहे हैं- हो सकता है वो बेलारूस आएं- और ऐसा नहीं भी हो सकता है.

तो क्या सब स्पष्ट है. शायद नहीं.

कहां हैं वागनर लड़ाके? कहां है येवगेनी प्रिगोज़िन? आगे का उनका प्लान क्या है? राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत में वो किस बात पर राज़ी हुए हैं?

काश मुझे इन सारे सवालों के जवाब पता होते.

फ़िलहाल, मैं बस इतना कह सकता हूं: रूस से अगली जानकारी आने तक, विद्रोह और क्रेमलिन के बारे में जानने के लिए हमे पढ़ते रहें.

कौन हैं येवगेनी प्रिगोज़िन?

वागनर ग्रुप के लीडर येवगेनी प्रिगोज़िन

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येवगेनी प्रिगोजिन पहली बार 'पुतिन के शेफ़' के तौर पर चर्चित हुए थे, इसकी स्पष्ट वजह भी थी क्योंकि क्रेमलिन के आधिकारिक कार्यक्रमों में भोजन और पेय की आपूर्ति का ज़िम्मा उनके पास ही था.

रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग के व्यापारी रहे येवगेनी के बारे में कहा जाता है कि वे 1990 के दशक से व्लादिमीर पुतिन को जानते हैं.

यह वह दौर था जब पुतिन मेयर के दफ़्तर में काम करते थे और स्थानीय अधिकारियों में लोकप्रिय येवगेनी के रेस्तरां में अक्सर जाते थे.

2010 के दशक तक, कई पत्रकारीय इन्वेस्टिगेशन में उन्हें सेंट पीटर्सबर्ग के एक कथित ट्रोल फ़ैक्ट्री से संबद्ध बताया गया था.

इस ट्रोल फ़ैक्ट्री का काम रूस के राजनीतिक विपक्ष को बदनाम करने और पुतिन शासन की तारीफ़ वाले कॉन्टेंट तैयर करना और इस दिशा में कैंपेन चलाना था.

2016 में, अमेरिकी वकील रॉबर्ट म्यूलर की एक जांच के अनुसार, ट्रोल फ़ैक्ट्री अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप करने के लिए रूस के प्रयास का हिस्सा थी.

हालांकि प्रिगोजिन ने ट्रोल फ़ैक्ट्री से किसी तरह के जुड़ाव से इनकार किया है.

कई वर्षों तक उन्होंने वागनर ग्रुप नामक एक भाड़े के सैनिक भर्ती करने वाली कंपनी से भी किसी तरह के जुड़ाव से इनकार किया था.

वागनर पहली बार 2014 में पूर्वी यूक्रेन में उभरा और इसके लड़ाके बाद में सीरिया और कई अफ़्रीकी देशों में दिखाई दिए.

हाल ही में उन्होंने वागनर के पीछे होने की बात स्वीकार की, जो यूक्रेन के ख़िलाफ़ मौजूदा युद्ध में सबसे अधिक प्रभावी रूसी इकाइयों में शामिल है.

'दुनिया की सबसे अनुभवी सेना'

वागनर लड़ाके

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येवगिनी प्रिगोज़िन ने बीते सितंबर में कहा था कि उन्होंने 2014 में वागनर ग्रुप की स्थापना की थी.

उन्होंने दावा कि ये ग्रुप रूसी लोगों की रक्षा के लिए बनाया गया है. उन्होंने अपनी कंपनी को 'रूस का एक स्तंभ' बताया.

अक्तूबर की शुरुआत में रूस की सरकार ने उन्हें एक सच्चा नागिरक और एक ऐसा व्यक्ति बताया जिसका दिल रूस के लिए धड़कता है.

एक महीने बाद येवगिनी के शहर सेंट पीटर्सबर्ग में एक वागनर सेंटर खोला गया.

ये बहुत आलीशान ऑफ़िस काम्प्लेक्स है जहां 'रूस की युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए आईटी, मीडिया और बुनियादी सैन्य ट्रेनिंग' को लेकर स्कूली बच्चों और नौजवानों के लिए शैक्षणिक और ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जाते हैं.

पहले रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी वागनर ग्रुप के बारे में बहुत बात नहीं करती थी. लेकिन अब वे दिन में कई बार और खुलकर क़ैदियों की भर्ती रिपोर्ट चलाते हैं.

एक पूर्व कैदी येवगिनी नूझिन को यूक्रेन में पकड़ा गया था, जिन्हें रूस को लौटा दिया गया. इन्हें पीट पीट कर मार डाला गया.

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रूस के सरकारी चैनल एनटीवी ने वागनर ग्रुप पर एक स्टोरी प्रासारित की जिसमें इसे 'दुनिया की सबसे अनुभवी सेना' बताया गया.

पिछले हफ़्ते येवगिनी प्रिगोज़िन ने रूसी संसद के स्पीकर व्याचेस्लाव वोलोडिन को एक चिट्ठी लिख कर उन पत्रकारों की शिकायत की जो "भर्ती किए गए क़ैदियों के बारे में बेकार की जानकारी मांग रहे हैं और उन्हें अपराधी के रूप में दिखा रहे हैं."

प्रिगोज़िन ने क़ानून को और कड़ा करने और वागनर में भर्ती नए लोगों के आपराधिक अतीत के बारे में लिखने से रोकने के लिए मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था.

वोलोडिन ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया और रूसी दंड संहिता में संभावित संशोधन के लिए एक संसदीय समिति गठित करने का आदेश दिया.

रूसी संसद के प्रमुख ने कहा, "हमारे देश की रक्षा करने वाला हरेक व्यक्ति हीरो हैं."

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