वागनर ग्रुप के चीफ़ अभी हैं कहां, बेलारूस में दिखे संगठन के संदिग्ध कैंप
फ़्रैंक गार्डनर और जेक हॉर्टन
बीबीसी संवाददाता

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बीबीसी को एक ऐसी हाई रिज़ॉल्यूशन सैटलाइट तस्वीर मिली है, जिसमें बेलारूस के एक संदिग्ध वागनर कैम्प में सैकड़ों की संख्या में टेंट जैसे सैन्य ढांचे दिख रहे हैं.
यह तस्वीर हाल में रूसी सेना के ख़िलाफ़ बग़ावत करने वाले वागनर समूह और उसके प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन को बेलारूस भेजे जाने के लिए किए गए समझौते के बाद सामने आई है.
इस बीच वागनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन को लेकर भी अटकलों का बाज़ार गर्म है.
बीते कुछ दिनों से वो ऑनलाइन नहीं देखे गए हैं. वो कहां हैं इसके बारे में भी अभी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.
सैटलाइट तस्वीर में क्या दिख रहा है?
सैटलाइट से मिली तस्वीर में उस मिलिट्री बेस में कुछ हलचल देखी जा सकती है जो अब उपयोग में नहीं है. यह जगह बेलारूस के शहर असिपोविचि से क़रीब 21 किलोमीटर की दूरी पर है और राजधानी मिंस्क से लगभग 103 किलोमीटर दूर है.
रूसी मीडिया रिपोर्ट्स में इसे उस जगह के तौर पर दिखाया गया है जहां हो सकता है कि वागनर लड़ाके रह रहे हों.
बीबीसी वेरिफ़ाई ने बीते दो हफ़्तों के दौरान इस जगह पर क़रीब 300 टेंट जैसे ढांचे खड़े होने की पहचान की है.
उपग्रह से मिली 15 जून की एक तस्वीर में इसी जगह पर एक भी ऐसे टेंट मौजूद नहीं थे.
लेकिन उपग्रह से मिली इसी जगह की 30 जून की एक और हाई रिज़ोल्यूशन ताज़ा तस्वीर में देखा जा सकता है कि बीते कुछ दिनों में यहां बड़े पैमाने पर काम किया गया है.

यह पुष्टि करना संभव नहीं है कि ये ढांचे वागनर लड़ाकों को रखने के इरादे से तैयार किए गए हैं या नहीं, लेकिन बीते दिनों बेलारूस के शासक राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको वागनर लड़ाकों को अपने देश में रखने के लिए राज़ी हुए थे.
बेलारूस में वागनर प्राइवेट आर्मी की मौजूदगी का अर्थ यह होगा कि यूक्रेन को अपनी उत्तरी सीमा पर सेना तैनात करने की चिंता करनी होगी. वहीं दूसरी तरफ पोलैंड, लातविया और लिथुआनिया जैसे पड़ोसी देश जो नेटो के सदस्य भी हैं, उन्हें बेलारूस की ज़मीन से वागनर के कभी भी आक्रामक रुख़ अख्तियार करने जैसी भविष्य की आशंकाओं को लेकर चिंतित रहना पड़ेगा.
साथ ही अभी यह भी किसी को नहीं पता कि वागनर के कुल कितने लड़ाके बेलारूस की तरफ जाएंगे, उनमें से कितने यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध में शिरकत करने के लिए रूसी सेना से साथ आएंगे और कितने युद्ध से तौबा कर अपने घरों को लौट जाएंगे. संभवतः रूस को भी अभी इसका पता नहीं है.
बीबीसी वेरिफ़ाई को टेलीग्राम पर अलग-अलग चैटरूम से एकत्र की गई जानकारियों के आधार पर कुछ संकेत मिले हैं. यहां ख़ुद को वागनर लड़ाका बताने वाले एक ब्लॉगर ने लिखा कि यह (वागनर) समूह "अभी भी सक्रिय है और अपना काम जारी रखे हुए है".
रूस में बग़ावत के तुरंत बाद पैदा हुई स्थिति में यह माना जा रहा है कि कई वागनर लड़ाके पूर्व यूक्रेन के रूस के क़ब्ज़े वाले इलाक़े में अपने पहले के ठिकानों पर लौट गए हैं.

वागनर आख़िर इतना अहम क्यों हैं?
इसका पहला कारण ये है कि 24 जून को क़रीब 24 घंटे के भीतर ही वागनर समूह के लड़ाकों ने रूस के एक पूरे शहर रोस्तोव-ऑन-डोन पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया था.
इसके बाद उन्होंने वहां से भारी हथियारों से लदे दस्तों को उत्तर की तरफ भेजना शुरू किया, इस रास्ते में रूसी सेना का विमान गिरा दिया और राजधानी मॉस्को से लगभग 200 किलोमीटर दूर जा कर रुक गए.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने आई अब तक की सबसे बड़ी चुनौती थी. हालांकि वागनर प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन ने दावा किया था कि वो विद्रोह नहीं कर रहे हैं.
संक्षेप में कहें तो इस घटना के कारण दुनिया का सबसे बड़े परमाणु हथियारों के ज़खीरे वाला देश भयानक गृह युद्ध के बेहद क़रीब पहुंच गया था.
इसका दूसरा कारण ये है कि यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के अभियान में रूस का अब तक का सबसे प्रभावशाली सैन्य ताकत वागनर ग्रुप के लड़ाके ही रहे हैं. इस समूह के लड़ाकों में अनुभवी और अपराधी दोनों शामिल हैं जिन्हें ज़्यादातर मामलों में नियमित सेना की तुलना में बेहतर पैसे दिए जाते हैं लिहाज़ा ये लड़ाके अधिक उत्साही भी होते हैं.
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्टालिनगार्ड की गलियों में महीनों तक चली क़रीबी लड़ाई के बाद वागनर लड़ाकों ने ही रूस को युद्ध में जीत का एक बेहतर तोहफ़ा दिया था. इसके लड़ाकों ने कई सप्ताह चले ख़ूनी संघर्ष के बाद यूक्रेन के शहर बख़मूत पर कब्ज़ा किया था.
अब पुतिन क्या करेंगे?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने फिलहाल एक दुविधा खड़ी हो गई है.
वागनर ने देश के भीतर बग़ावत शुरू की थी लिहाज़ा भविष्य के लिए भी ये समूह संभावित ख़तरा बना रहेगा. फिर भी ये समूह न केवल यूक्रेन में बल्कि और जगहों में भी रूस के लिए बेहद उपयोगी रहा है.
सीरिया, लीबिया समेत अन्य अफ़्रीकी देशों में वागनर समूह की तैनाती ने दुनिया भर में रूस की रणनीतिक ताक़त और प्रभाव को दिखाया है. हालांकि इस दौरान रूस ने हमेशा यही कहा कि रूसी सरकार का वागनर से उसका कोई लेना-देना नहीं है.
हालांकि हाल ही में पुतिन के आख़िरकार ये स्वीकार कर लिया कि वागनर को रूस से अरबों रूबल (रूसी रुपये) की वित्तीय सहायता मिलती है.
वागनर की बग़ावत को रोकने के बाद रूस ने ये कहा था कि वागनर लड़ाकों को एक जुलाई तक यह तय करना है कि वह रूसी सेना में शामिल होते हैं या नहीं (अधिकतर वागनर लड़ाकों के लिए ये बेहद आकर्षक सौदा नहीं है).
रूसी सरकार का कहना है कि अगर वागर लड़ाके सेना में शामिल नहीं होते तो या तो वो वापस अपने घर वापिस लौट सकते हैं या फिर पड़ोसी बेलारूस जा सकते हैं जहां इस समूह के प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन को पहले ही कथित तौर पर निर्वासित किया जा चुका है.

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वागनर प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन कहां हैं?
वागनर प्रमुख कभी रूसी सेना का हिस्सा नहीं रहे हैं.
वे एक पूर्व सज़ायाफ़्ता कैदी हैं जो हॉट डॉग के व्यापारी हुआ करते थे.
प्रिगोज़िन के बारे में कहा जाता है कि वो वागनर के टेलीग्राम चैनल पर सैन्य वर्दी में दिखना पसंद करते हैं, जहां वे रूस के सैन्य नेतृत्व की अक्षमता को लेकर अपशब्द कहते और उन पर तीखे प्रहार करते दिखते हैं.
लेकिन बीते कुछ दिनों से वो ऑनलाइन नहीं देखे गए हैं. साथ ही वो कहां हैं इसके बारे में भी अभी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.

फ़्लाइट ट्रैकिंग डेटा की मदद से प्रिगोज़िन से जुड़े एक विमान का रास्ता ट्रैक करने पर पता चला है कि वो विमान इसी हफ़्ते बेलारूस की राजधानी मिंस्क में उतरा है. बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने भी प्रिगोज़िन के बेलारूस पहुंचने की पुष्टि की है.
ये विमान सेंट पीटर्सबर्ग और मॉस्को में ठहरते हुए अब वापस रूस लौट आया है.

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बीबीसी वेरिफ़ाई उस तस्वीर की पड़ताल भी कर रहा है जो पहली बार एक रूसी अख़बार में छपी थी. इस तस्वीर में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति विमान में बैठ रहा है. तस्वीर के नीचे अख़बार ने लिखा था कि प्रिगोज़िन 29 जून को एक हेलिकॉप्टर में सवार हो रहे हैं.
इसी हेलिकॉप्टर की एक तस्वीर इसी साल 26 मई को भी ली गई थी, जब प्रिगोज़िन उसमें सवार हुए थे. हेलिकॉप्टर को उसकी टेल पर लिखे नंबर से पहचाना जा सकता है.
तस्वीर में एक व्यक्ति हेलिकॉप्टर में घुसते हुए दिखता है. उसके सिर पर बेसबॉल कैप है और चेहरे पर सर्जिकल मास्क है जिसकी वजह से उसे पहचानना बहुत मुश्किल है.
एक और बात जो इस रहस्य को और बढ़ाती है वो ये कि प्रिगोज़िन के बाएं हाथ की एक उंगली का कुछ हिस्सा ग़ायब दिख रहा है. लेकिन अख़बार में छपी नई तस्वीर में जो व्यक्ति दिख रहा है उसके हाथ की सभी उंगलियां पूरी तरह सामान्य दिख रही हैं.

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युद्ध पर इसका क्या होगा असर ?
बीबीसी वेरिफ़ाई ने वागनर के विद्रोह के बाद से ज़मीन पर यूक्रेनी सेना की बढ़त से जुड़े सबूत जुटाने की कोशिश की है, लेकिन अब तक उसे फ्रांटलाइन में किसी तरह के बदलाव की तस्दीक करने वाले कोई सबूत नहीं मिले हैं.
लंदन के किंग्स कॉलेज में रूसी सेना मामलों की एक्सपर्ट मरीना मिरॉन कहती हैं, "मुझे नहीं लगता कि इसका तुरंत कोई असर दिखने वाला है क्योंकि रूस फिलहाल रक्षात्मक मुद्रा में है."
वो कहती हैं, "अगर रूस की सेना में वागनर लड़ाके शामिल हो गए और रूस ने उन्हें सेना के कमांड स्ट्र्क्चर में सही जगह रखा तो इससे रूसी पक्ष के कमज़ोर होने की संभावना ख़त्म हो जाएगी."
हालांकि कहा जा रहा है कि इसका असर रणभूमि में तैनात रूसी सेना के उत्साह पर पड़ सकता है. अगर उन्हें इस बात का आभास हुआ कि देश के भीतर उनके कमांडर आपस में लड़ रहे हैं तो इससे उनका उत्साह कम हो सकता है.
रही वागनर की बात, तो रूसी सेना से अलग हो कर काम करने के उसके दिन अब ख़त्म हो गए हैं.
अपने हथियारों को सेना के सुपुर्द करने और करिश्माई व्यक्तित्व वाले अपने प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन के इसके शीर्ष पर न रहने से ये प्राइवेट आर्मी अब पहले की तरह मज़बूत नहीं रह जाएगी. ये यूक्रेन के लिए निश्चिय ही राहत की ख़बर होगी.
(जेक हॉर्टन, डेनियल पालुम्बो, पॉल ब्राउन और बेनेडिक्ट गार्मेन की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ)
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