वागनर ग्रुप के येवगेनी प्रिगोज़िन क्या रूस में तख़्तापलट की कोशिश में है?

पॉल किर्बी

बीबीसी संवाददाता

येवगनी प्रिगोज़िन

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यूक्रेन के ख़िलाफ़ 16 महीनों पहले छेड़ा गया रूस का 'विशेष सैन्य अभियान' अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. ये युद्ध अब उस जगह पहुंच गया है जहां रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सत्ता को सीधे चुनौती मिलने की आशंका है.

रूसी राष्ट्रपति ने वागनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन पर आरोप लगाया है कि वो सशस्त्र विद्रोह कर रूस को धोखा दे रहे हैं. पुतिन ने कहा है कि उन्होंने "देश की पीठ में छुरा घोंपा है".

रूस के बेहद महत्वपूर्ण लोगों में से एक प्रिगोज़िन का कहना है कि उनका उद्देश्य "सैन्य विद्रोह नहीं है बल्कि जो वो कर रहे हैं वो न्याय के लिए किया जा रहा मार्च है."

व्लादिमीर पुतिन

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रूस में हो क्या रहा है?

यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के सैन्य अभियान में प्रिगोज़िन और उनकी प्राइवेट सेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इस युद्ध के दौरान उनकी प्राइवेट आर्मी के हज़ारों लड़ाकों ने रूस की तरफ से ज़मीनी लड़ाई में हिस्सा लिया. इनमें से अधिकांश लड़ाकों की नियुक्ति रूस की जेलों से हुई थी.

हालांकि यूक्रेन युद्ध से पहले भी दूसरी कई जगहों पर प्रिगोज़िन की प्राइवेट आर्मी रूस के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आ रही है.

यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध के दौरान संघर्ष की कमान संभाल रहे सेना प्रमुखों से उनका विवाद नया नहीं है, लेकिन अब ये विवाद विद्रोह की शक्ल ले रहा है.

पूर्वी यूक्रेन की सीमा के पास तैनात वागनर ग्रुप के लड़ाके सीमा पारकर दक्षिणी रूस के शहर रोस्तोव-ऑन-डॉन में प्रवेश कर गए हैं. उनका दावा है कि उन्होंने वहां मौजूद सैन्य ठिकानों को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि स्थिति मुश्किल है लेकिन वो रूस की रक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

येवगनी प्रिगोज़िन

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क्या ये तख्तापलट की कोशिश है?

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इसे सैन्य तख्तापलट कह रहे सभी तरह के दावों को प्रिगोज़िन ने खारिज किया है.

रूसी सेना और प्रिगोज़िन के बीच इस बात को लेकर विवाद था कि सेना उनके ग्रुप के लड़ाकों को ज़रूरी मात्रा में हथियार और गोलाबारूद नहीं पहुंचा पा रही है. लेकिन अब ये युद्ध की कमान संभाल रहे दो आला अधिकारियों रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ वालेरी गेरासिमोव के साथ सीधी चुनौती वाला मामला बनता जा रहा है.

कहा जाए तो अब तक इसे तख्तापलट नहीं कहा जा सकता क्योंकि अब तक सरकार के हाथों से सत्ता छीनने जैसी कोई कोशिश नहीं हुई है.

प्रिगोज़िन की "प्राइवेट मिलिटरी कंपनी" औपचारिक तौर पर देश की सेना का हिस्सा नहीं है. लेकिन वो दावा करते हैं कि उन्हें देश के भीतर लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है.

लेकिन ये रूस के आला सैन्य अधिकारियों को उनकी कुर्सी से हटाने की कोशिश है, जो सीधे तौर पर राष्ट्रपति पुतिन की सत्ता को चुनौती है. ये बात सच है कि प्रिगोज़िन के प्राइवेट आर्मी सेना बनाने और उसे बढ़ाने में रूसी नेतृत्व का बड़ा हाथ रहा है लेकिन ये भी स्पष्ट है कि अब प्रिगोज़िन पर उनका नियंत्रण नहीं रहा है.

वागनर ग्रुप

स्पष्ट तौर पर क्रेमलिन भी स्थिति को गंभीरता से ले रहा है. "आतंकवाद-रोधी अभियान" के तहत मॉस्को के पूरे के पूरे इलाक़े को हाई अलर्ट पर रखा गया है और यहां सभी बड़े आयोजनों को रद्द कर दिया गया है.

यूक्रेन के उत्तर-पूर्व से सटी रूसी सीमा के पास वोरोनेज़ में भी इसी तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं.

प्रगोज़िन ने कहा है, "यहां हम 25 हज़ार लोग हैं. लेकिन जो कोई भी जो हमारे साथ आना चाहता है, उसका स्वागत है."

उनका ये कहना सैन्य नेतृत्व को चुनौती तो है लेकिन राष्ट्रपति को धमकी देने जैसा कुछ नहीं है.

वो अपने लड़ाकों को साथ लेकर सीमा पार कर रोस्तोव शहर आ गए हैं जहां उन्होंने सेना को उस मुख्यालय को अपने कब्ज़े में ले लिया है जहां से यूक्रेन युद्ध का संचालन हो रहा है. उनका दावा है कि मंत्री और चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ जगह छोड़कर भाग गए हैं.

हालांकि वो कहते हैं कि वो रूस को धोखा नहीं दे रहे हैं. वो राष्ट्रपति की आलोचना करते हुए कहते हैं कि वो जो कर रहे हैं वो "ग़लत हैं."

वीडियो कैप्शन, यूक्रेन रूसी सैनिकों को खदेड़ने की पुरज़ोर कोशिश कर रहा है.

प्रिगोज़िन चाहते क्या हैं?

प्रिगोज़िन का कहना है कि वो "न्याय के लिए मार्च" कर रहे हैं, लेकिन उनका ये दावा अस्पष्ट लगता है. हालांकि ये बात सही है कि सैन्य नेतृत्व के साथ उनका तनाव अब इस कदर बढ़ चुका है कि वो चीज़ों को दुरुस्त करने के लिए नेतृत्व अपने हाथों में लेना चाहते हैं.

प्रिगोज़िन का एक वीडियो शुक्रवार को सामने आया है जिसमें वो उप रक्षा मंत्री और रोस्तोव में मौजूद एक जनरल से कहते हैं कि अगर रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और वालेरी गेरासिमोव से रूबरू मुलाक़ात नहीं कराई जाती है तो वे मॉस्को की तरफ़ 1000 मील का सफ़र तय करने के लिए कूच करेंगे.

प्रिगोज़िन का कहना है कि यूक्रेन में ज़मीन पर लड़ रहे रूसी सैनिकों के साथ उनकी कोई दुश्मनी नहीं है, बल्कि उनकी लड़ाई उन "जोकरों" से है जो उनका नेतृत्व कर रहे हैं. कई जनरल उनसे शांत रहने को कह चुके हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि इसमें अब देरी हो चुकी है.

येवगनी प्रिगोज़िन

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पुतिन और प्रिगोज़िन के बीच क्या है नाता?

वागनर ग्रुप के प्रमुख प्रिगोज़िन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाते हैं. कहा जाता है कि उनका उभार पुतिन की सत्ता के साथ ही हुआ है. वो पहले एक धनी व्यापारी हुआ करते थे, बाद में वो प्राइवेट आर्मी के प्रमुख बने.

यूक्रेन के पूर्व में बख़मूत पर कब्ज़ा करने के खूनी संघर्ष में उनके सैंकड़ों लड़ाकों की जान गई. ये संघर्ष कई महीनों तक जारी रहा लेकिन उनका ये उद्देश्य कभी पूरा नहीं हो सका.

प्रिगोज़िन ने सैन्य नेतृत्व पर हथियारों की सप्लाई में कमी करने का आरोप लगाया. उन्होंने सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो पोस्ट किए जिनमें रूसी सेना की कमियों और नाकामियों के बारे में विस्तृत जानकारी थी.

हालांकि उन्होंने कभी भी सीधे तौर पर रूसी राष्ट्रपति को निशाने पर नहीं लिया. लेकिन अपने वीडियोज़ में कई बार उन्होंने "हैप्पी ग्रैंडफादर" का ज़िक्र किया, माना जा रहा है कि उनका ये इशारा परोक्ष तौर पर पुतिन की ही तरफ था.

बीते महीने उन्होंने सवाल किया था कि अगर ये पता चल जाए "ये हैप्पी ग्रैंडफादर पूरी तरह से बेवकूफ़ हैं" तो, रूस किस तरह युद्ध जीत सकेगा.

इसके बाद 23 जून को उन्होंने एक लंबा वीडियो जारी कर रूसी नागरिकों से कहा कि इस युद्ध की पूरी कहानी ही झूठी है.

"बदमाशों के एक छोटे से समूह" ने इस बहाने खुद की तरक्की का रास्ता बनाने की कोशिश की है और उन्होंने ऐसा कर जनता और राष्ट्रपति को धोखा दिया है.

इसके बाद से घटनाक्रम तेज़ी से बदला है.

वागनर ग्रुप

वागनर ग्रुप एक प्राइवेट आर्मी है जिसका आधिकारिक नाम पीएमसी वागनर है.

रूस में प्राइवेट आर्मी अवैध हैं, लेकिन वागनर ग्रुप ने साल 2022 में एक कंपनी के तौर पर खुद को पंजीकृत किया है. सेंट पीटर्सबर्ग में इसनें अपना एक नया मुख्यालय भी खोला है.

थिंकटैंक रॉयल यूनाइटेड सर्विसेस इंस्टीट्यूट के सैमुएल रमानी कहते हैं कि "वागनर ग्रुप रूसी शहरों में खुले तौर पर बिलबोर्ड पर विज्ञापन दे कर नियुक्तयां करता है. रूस की मीडिया में इसे एक देशभक्त संगठन के तौर पर पेश किया जाता है."

रोस्तोव में सैन्य ठिकाने पर कब्ज़ा

प्रिगोज़िन ने आरोप लगाया है कि सेना ने यूक्रेन में उनके लड़ाकों पर गोलीबारी की है. सेना ने उनके इन आरोपों से इनकार किया है और प्रिगोज़िन जो अक्सर अपनी कही बातों के समर्थन में सबूत देते हैं, वो अपने इस दावे के समर्थन में सबूत नहीं दे पाए.

इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने घोषणा की कि वो "न्याय के लिए मार्च" करेंगे. उनका कहना था कि उनके 25 हज़ार लड़ाके उनके लिए "टैक्टिकल रिज़र्व" हैं.

यूक्रेन में रूसी सेना के डिप्टी कमांडर जनरल सर्गेई सुरोविकिन ने प्रिगोज़िन से अपील की कि वो अपने कदम पीछे हटा लें और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सत्ता के सामने हथियार डाल दें.

लेकिन सवेरे तक प्रिगोज़िन अपने लड़ाकों के साथ रोस्तोव-ऑन-डॉन पहुंच गए थे. उन्होंने एलान किया कि "हम सेना के मुख्यालय के भीतर हैं."

इस तरह की भी ख़बरें मिल रही हैं कि वागनर ग्रुप के लड़ाकों ने मॉस्को से आगे उत्तर में वोरोनेज़ में सेना के ठिकानों को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

वागनर ग्रूप के लड़ाके

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इमेज कैप्शन, रोस्तोव-ऑन-ऑन शहर में वागनर ग्रूप के लड़ाके

रूस और पुतिन के लिए स्थिति गंभीर

प्रिगोज़िन की कोशिश न तो यूक्रेन में जारी रूस के युद्ध के लिए चुनौती है और न ही राष्ट्रपति पुतिन की सत्ता के लिए.

लेकिन ये मुद्दा इतना गंभीर ज़रूर है कि पुतिन ने टेलीविज़न पर इसे लेकर पांच मिनट का संदेश जारी किया. पुतिन ने इसे देश को धोखा बताया और कहा कि देश के भीतर किसी भी सूरत में गृहयुद्ध जैसी स्थिति नहीं बनेगी.

प्रिगोज़िन ने न केवल रोस्तोव में अपने पैर जमाए रखने की धमकी की दी है कि बल्कि ये भी कहा है कि अगर उनकी प्राइवेट आर्मी की मांग पूरी नहीं की गई तो वो राजधानी मॉस्को की तरफ कूच करेंगे.

अब तक वो हथियारों की मांग को लेकर केवल सैन्य नेतृत्व के साथ विवादों में शामिल रहे हैं, लेकिन अब वो खुद आगे बढ़कर नेतृत्व संभाल रहे हैं.

रूस में प्रिगोज़िन को काफी जन समर्थन हासिल है. भले ही उन्होंने जो दी है चुनौती वो नाकाम हो जाए, ये कम से कम रूस की उस सेना के लिए संकट की घड़ी है जो यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध में भाड़े के लड़ाकों पर निर्भर है.

ये कहना सही होगा कि ये पुतिन के नेतृत्व के लिए अहम घड़ी है और रूसी नागरिकों के लिए भी वेक-अप कॉल है. हालांकि अभी ये कहना मुश्किल होगा कि आगे क्या होगा.

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