यूक्रेन के युद्धबंदियों के साथ रूस की जेल में यातनाओं की कहानियां

रूस-यूक्रेन युद्ध
इमेज कैप्शन, अर्तेम सरेनियाक का कहना है कि तगनरॉग की जेल में उन्हें पीटा गया और बिजली का करंट लगाया गया
    • Author, ह्यूगो बशेगा
    • पदनाम, बीबीसी समाचार, यूक्रेन

यूक्रेन के पूर्व युद्धबंदियों का कहना है कि दक्षिण-पश्चिमी रूस में एक डिटेंशन सेंटर में हिरासत के दौरान उन्हें लगातार पिटाई और बिजली के झटके समेत ऐसी यातनाएं दी गईं, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन करती हैं.

बीबीसी के साथ साक्षात्कार में, कैदियों की अदला-बदली में रिहा किए गए एक दर्जन पूर्व बंदियों ने रूसी अधिकारियों और गार्डों पर शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार का आरोप लगाया.

ये लोग तगनरॉग शहर के प्री-ट्रायल डिटेंशन फै़सिलिटी नंबर दो में थे.

एक सप्ताह तक चली पड़ताल के दौरान जुटाई गईं गवाही, उस डिटेंशन सेंटर में अत्यधिक हिंसा और दुर्व्यवहार के लगातार पैटर्न को दिखाती है.

यह सेंटर उन स्थानों में से एक है जहां रूस में यूक्रेनी युद्धबंदियों को रखा गया था.

यूक्रेनी युद्धबंदियों के आरोप हैं:

  • तगनरॉग में पुरुषों और महिलाओं को बार-बार पीटा गया. उनकी किडनी और छाती पर भी मारा जाता था.
  • प्रतिदिन होने वाली पूछताछ में बिजली के झटके दिए जाते हैं.
  • रूसी गार्ड लगातार बंदियों को झूठे बयान देने के लिए धमकाते और डराते हैं जिन्हें कथित तौर पर ट्रायल में उनके ख़िलाफ़ सबूत के रूप में इस्तेमाल किया गया था.
  • बंदियों को खाना नहीं दिया जाता और जो घायल होते हैं उन्हें उचित इलाज मुहैया नहीं कराया जाता है. इस दौरान बंदियों की मौत की खबरें भी आती हैं.

बीबीसी दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने में सक्षम नहीं है लेकिन इस जानकारी को मानवाधिकार संगठनों के साथ साझा किया गया था. फिर जब संभव हुआ तो कुछ युद्धबंदियों द्वारा इसकी पुष्टि की गई.

रूसी राष्ट्रपति पुतिन

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रूस ने आरोपों पर क्या कहा?

रूसी सरकार ने संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति सहित किसी भी बाहरी संस्था को उस सेंटर का दौरा करने की अनुमति नहीं दी है जिसका उपयोग युद्ध से पहले विशेष रूप से रूसी कैदियों को रखने के लिए किया जाता था.

आरोप पर रूस का पक्ष जानने की कई बार कोशिश हुई लेकिन रूस के रक्षा मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिया. रूस ने इससे पहले बंदियों को यातनाएं देने या उनके साथ दुर्व्यवहार करने से इनकार किया है.

यूक्रेन और रूस के बीच कैदियों की अदला-बदली युद्ध में एक दुर्लभ कूटनीतिक उपलब्धि है और युद्ध की शुरुआत के बाद से 2,500 से अधिक यूक्रेनी नागरिक रिहा किए गए हैं. मानवाधिकार समूहों के अनुसार, माना जाता है कि दस हज़ार बंदी रूसी हिरासत में हैं.

यूक्रेन के मानवाधिकार अधिकारी और मॉस्को के साथ बंदियों के लिए अदला-बदली वाली वार्ता में शामिल अधिकारियों में से एक दिमित्रो लुबिनेत्स ने कहा कि प्रत्येक 10 पूर्व बंदियों में से नौ ने दावा किया कि उन्हें रूसी कैद में प्रताड़ित किया गया था.

लुबिनेत्स ने कहा, "यह मेरे लिए अब सबसे बड़ी चुनौती है कि रूसी इलाक़े में अपने लोगों की सुरक्षा कैसे करें. कोई नहीं जानता कि हम यह कैसे कर सकते हैं."

रूसी क़ैद में यूक्रेनी नागरिकों के अनुभव?

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पिछले साल सितंबर में एक सीनियर लेफ़्टिनेट अर्तेम सरेनियाक लगभग चार महीने से रूसी क़ैद में थे जब उन्हें पचास यूक्रेनी लोगों के साथ प्री-ट्रायल डिटेंशन फैसिलिटी नंबर दो में लाया गया था.

सरेनियाक ने उन दिनों को याद करते हुए कहा, ''तगनरॉग में एक अधिकारी ने उनसे कहा था कि आप अपने जीवन के अंत तक यहीं सड़ोगे.''

सरेनियाक का कहना था कि इतना सुनने के बाद सभी बंदी चुप रहे.

उन्होंने बताया, ''वहां हर दूसरे क़दम पर गार्ड की मौजदूगी थी. वो काले डंडों और धातु की छड़ों से लैस थे और गार्ड बंदियों को पैरों, बाहों या जहां भी मारना चाहते थे, मारते थे. इस वे स्वागत कहते थे.''

पकड़े जाने से पहले, 27 साल के सरेनियाक ने मारियुपोल में अज़ोव रेजिमेंट में एक स्नाइपर प्लाटून का नेतृत्व किया था.

सरेनियाक ने कहा कि उसे दूसरों से अलग कर दिया गया और केवल अंडरवियर पहनाकर पहली बार पूछताछ के लिए एक कमरे में लाया गया.

गार्डों ने उनसे सेना में उनकी भूमिका और उनके द्वारा किए गए कामों के बारे में पूछा.

सरेनियाक ने बताया कि उन्हें पीठ, कमर और गर्दन पर बिजली के झटके दिए गए.

उन्होंने कहा, "वे हर किसी के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार करते थे और आपको कील की तरह ठोक देते थे.''

पिछले साल मई में, जब मारियुपोल रूसी घेराबंदी के तहत था तब यूक्रेनी अधिकारियों ने शहर के अज़ोवस्त्ल स्टीलवर्क्स में छिपे सैकड़ों सैनिकों को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया. सरेनियाक वहां निकाले जाने वाले अंतिम लोगों में से थे.

उन्होंने मुझे बताया, वहां बंदियों की दिन में दो बार जांच की जाती थी और ऐसा प्रतीत होता था कि गार्डों का उनके साथ दुर्व्यवहार करने का कोई मक़सद था.

सीनियर लेफ़्टिनेट अर्तेम सरेनियाक चार महीने तक कैद थे

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एक बार पूछताछ में सरेनियाक से पूछा गया कि क्या उनकी कोई गर्लफ्रे़ंड है. इसके बाद एक गार्ड ने कहा, "हमें उसका इंस्टाग्राम दो. हम तुम्हारी एक तस्वीर लेंगे और उसे भेज देंगे."

सरेनियाक ने झूठ बोला और कहा कि उनकी गर्लफ्रेंड के पास कोई इंस्टाग्राम अकाउंट नहीं है क्योंकि वो गर्लफ्रेंड की पहचान उजागर नहीं करना चाहते थे.

इसके बाद सरेनियाक को पीटा गया और जेल के तहखाने के एक कमरे में लाया गया जहां उनकी मुलाक़ात बीस साल के यूक्रेनी लड़ाके से हुई.

जैसे-जैसे दिन आगे बढ़े, सरेनियाक ने देखा कि जेल के गार्ड उन लोगों के साथ विशेष रूप से क्रूर थे जो अज़ोव रेजिमेंट के थे. अज़ोव रेजिमेंट अतीत में मारियुपोल में मिलिशिया रहा है जिसका कभी दक्षिणपंथ से संबंध था.

सरेनियाक ने कहा बताया कि पूछताछ में उन पर मारियुपोल को लूटने और व्यक्तिगत रूप से अपनी सेना को शहर में नागरिकों को मारने के लिए कहने का आरोप लगाया गया था.

ऊंची और दृढ़ आवाज के साथ तेजी से बोलने वाले सरेनियाक ने दावों का खंडन किया, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा.

उन्होंने मुझसे कहा, "जब तक आप वह नहीं कहेंगे जिसमें उनकी रुचि थी और जिस तरह से वे सुनना चाहते थे तब तक वे आपको पीटना बंद नहीं करेंगे."

ऐसा लगता है कि जेल के कुछ कर्मचारी राष्ट्रपति पुतिन के 'डी-नाज़ीफ़िकेशन' वाली बात से काफी प्रभावित थे. बंदियों को कोई भी व्यक्तिगत वस्तु रखने की अनुमति नहीं थी, इसलिए उनके टैटू ने ज़रूर उन अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया.

सरही रोच्चुक का कहना है कि उन्हें उनके टैटू के कारण परेशान किया गया था.
इमेज कैप्शन, सरही रोच्चुक का कहना है कि उन्हें उनके टैटू के कारण परेशान किया गया था.

रेजिमेंट के 34 वर्षीय वरिष्ठ सार्जेंट सरही रोच्चुक ने भी अंतिम समय में अज़ोवस्त्ल को छोड़ दिया और सरेनियाक के एक हफ़्ते बाद उन्हें तगनरॉग ले जाया गया.

उन्होंने कहा कि गार्ड सबसे पहले स्वास्तिक या उस जैसी चीज़ों की तलाश में थे. लेकिन यदि आपके पास शरीर पर कोई टैटू था, तो आपको एक बुरे आदमी के रूप में देखा जाता था." रोच्चुक एक डॉक्टर हैं और उनके दोनों पैरों, बांहों और छाती पर टैटू हैं.

कुछ हफ़्ते पहले जब हम कीएव में मिले थे तो उन्होंने मुझे एक काला पक्षी दिखाने के लिए अपनी टी-शर्ट उठाई थी, जो उनकी छाती के एक हिस्से को ढका हुआ था.

सरेनियाक ने कहा कि कुछ लड़ाके जिन्होंने यूक्रेनी ध्वज या सोने के त्रिशूल जैसे राष्ट्रवादी प्रतीकों का टैटू गुदवाया था, उन्हें अक्सर निशाना बनाया जाता था.

रोच्चुक को एक अधिकारी की याद आई जो उसकी छाती पर लात मारने में आनंद लेता था, जिससे उसे लगातार दर्द होता था. उन्होंने शिकायत की, लेकिन कोई मदद नहीं मिली.

मार्च में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (ओएचसीएचआर) के कार्यालय की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि रूस उल्लंघन के मजबूत पैटर्न के साथ, कैदियों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने में विफल रहा है.

कार्यालय के एक प्रवक्ता क्रिस जानोस्की ने कहा कि तगनरॉग में बंदियों के साथ बुरे कामों की एक लंबी सूची थी.

उन्होंने कहा, ''तथ्य यह है कि एक जेल का इस्तेमाल बंदियों को रखने के लिए किया जा रहा था, यह अपने आप में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है, क्योंकि उन्हें विशेष रूप से तैयार किए गए स्थानों पर रखा जाना चाहिए.''

मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन को भी बंदियों के साथ दुर्व्यवहार के कुछ आरोपों का सामना करना पड़ा लेकिन, कुल मिलाकर यूक्रेन ने बंदियों के साथ बेहतर ढंग से व्यवहार किया.

इरिना स्तोहनी के अनुसार, महिला बंदियों को बाल पकड़कर घसीटा जाता था
इमेज कैप्शन, इरिना स्तोहनी के अनुसार, महिला बंदियों को बाल पकड़कर घसीटा जाता था

56वीं ब्रिगेड की 36 वर्षीय वरिष्ठ लड़ाकू चिकित्सक इरिना स्तोहनी ने बातचीत में बंदियों को लगातार कुपोषित बताया.

स्तोहनी कहती हैं, "उन्होंने हमें खाना नहीं खिलाया. उन्होंने हमें बाहर भी नहीं जाने दिया...हम केवल खिड़कियों में लगे सलाखों के जरिए आसमान देख सकते थे."

स्तोहनी ने कहा कि गार्डों ने दिन में दो बार अपनी पूछताछ में उन्हें और अन्य महिलाओं को तनाव की स्थिति में रहने के लिए मजबूर कर दिया था और कुछ ने तो हमें बालों के सहारे भी खींचा.

अन्य महिला बंदियों ने बताया कि महिलाओं को पुरुष कर्मचारियों के सामने नग्न होने का आदेश दिया जाएगा जो कभी-कभी उनके शरीर के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां करते थे.

स्तोहनी ने कहा कि बलात्कार के अलावा उन्होंने हमारे साथ सब कुछ किया.

देनिस हाईदुक का कहना है कि उनके बंधकों ने उन पर रूसी कैदियों को नपुंसक बनाने का आरोप लगाया था
इमेज कैप्शन, देनिस हाईदुक का कहना है कि उनके बंधकों ने उन पर रूसी कैदियों को नपुंसक बनाने का आरोप लगाया था

एक सैन्य सर्जन देनिस हाईदुक ने कहा कि गार्ड ने उन्हें और दूसरे बंदियों को उनके स्वागत के दौरान मारपीट के बीच में सिर झुकाकर भागने के लिए मजबूर किया. साथ ही जमीन पर गिरने के बाद भी बंदियों को मारा गया, वे खड़े तक नहीं हो पा रहे थे.

हाईदुक अज़ोवस्त्ल में घायलों की मदद कर रहे थे. पूछताछ में हाईदुक पर रूसियों को क़ैद में रखने और नपुंसक बनाने का आरोप लगाया गया था. उन्होंने इसका खंडन करते हुए कहा कि केवल यूक्रेनी लड़ाके ही उनके पास लाए गए थे.

मैंने उनसे पूछा कि उनके गार्ड यूक्रेनी बंदियों के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ''क्योंकि वे कर सकते हैं. तुम बंदी हो और वे तुम्हारे साथ दुर्व्यवहार करते हैं."

जब मैंने सरेनियाक से वही सवाल पूछा, तो उन्होंने मुझे अधिक व्यावहारिक उत्तर दिया था. सरेनियाक ने बताया था कि वे कुछ जानकारी प्राप्त करने के लिए तुम्हें पीटते हैं.

यूक्रेनी अधिकारी लुबिनेत्स ने कहा कि रूसी अधिकारियों ने यूक्रेनी बंदियों के लिए विशेष रूप से डिटेंशन सेंटर, रूस और यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में यातना की व्यवस्था बनाई है.

लुबिनेत्स ने कहा, "रूसी सैनिक यूक्रेनी कैदियों के साथ कुछ भी कर सकते हैं".

जेल में मौत

अपने स्वागत के दौरान 36वीं मरीन ब्रिगेड के 40 वर्षीय सार्जेंट मेजर अर्तेम देबलन्को ने गार्डों को बंदियों के साथ फुटबॉल खेलने के बारे में बात करते हुए सुना. वह उत्सुक थे. देबलन्को ने कहा, "मुझे नहीं पता था कि हम ही गेंद होंगे. आंखों पर पट्टी बांधकर, मुझे भागने का आदेश दिया गया, लगातार किक लग रही थीं. आपको फुटबॉल जैसा महसूस हुआ."

मीडिया इनिशिएटिव फॉर ह्यूमन राइट्स एक यूक्रेनी संगठन, ने तगनरॉग जेल में कम से कम तीन मौतों के आरोप दर्ज किए, जो स्पष्ट रूप से यातना, खाने और स्वास्थ्य देखभाल की कमी के कारण थे.

संगठन के जांचकर्ताओं में से एक मारिया क्लाइमिक ने कहा कि यह "रूस में यूक्रेनी बंदियों के लिए सबसे खराब जगहों में से एक है.''

सरेनियाक की रिहा होते हुए तस्वीर.
इमेज कैप्शन, सरेनियाक की रिहा होते हुए तस्वीर.

बंदियों की सेहत में सुधार

लगभग 12 महीने तक कैद में रहने के बाद सरेनियाक को 44 अन्य यूक्रेनी लड़ाकों के साथ छह मई को कैदी की अदला-बदली में रिहा कर दिया गया. उन्होंने कहा कि इस तारीख़ को ऐसे मनाया जाएगा जैसे कि यह उनका दूसरा जन्मदिन हो.

उसी अदला-बदली में डॉक्टर सरही रोच्चुक भी शामिल थे, जिन्हें बाद में पता चला कि उनके सीने की हड्डी में फ्रैक्चर था, जिसके लिए उन्होंने अपने साथ हुए दुर्व्यवहार को जिम्मेदार ठहराया है.

उनकी वापसी के चार सप्ताह बाद मैंने कीएव में एक आवासीय परिसर के एक फ्लैट में सरेनियाक से मुलाक़ात की. डॉक्टरों ने पाया कि उनकी पसली टूटी हुई थी और लीवर और किडनी में अल्सर का पता लगाया था, जो संभवतः पिटाई के कारण हुआ था.

सरेनियाक ने पहले ही अपना खोया हुआ कुछ वजन वापस पा लिया था, लेकिन फिर भी पीठ के निचले हिस्से में दर्द रहता था और कभी-कभी चलने में भी कठिनाई होती थी.

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