रूस-यूक्रेन युद्धः बेलारूस और पोलैंड सीमा पर क्यों बढ़ रहा है तनाव?

पोलैंड सीमा

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पोलैंड ने बेलारूस के साथ लगती सीमा पर 10 हज़ार अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं. पोलैंड ने आरोप लगाया है कि बेलारूस के सैन्य हेलीकॉप्टर ने उसकी सीमा में घुसपैठ की है.

पोलैंड की सरकार का कहना है कि ये अतिरिक्त सैनिक, बेलारूस पहुंची रूस की प्राइवेट आर्मी वागनर ग्रुप के ख़िलाफ़ सीमा की सुरक्षा में मदद करेगी.

ये कहा जा रहा है कि वागनर ग्रुप के लड़ाके सीमा की ओर बढ़ रहे हैं.

पोलैंड की सरकार का कहना है कि एक अगस्त को बेलारूसी सेना के हेलीकॉप्टर बायलोवीज़ा इलाक़े में उसकी सीमा के अंदर दो किलोमीटर तक कम ऊंचाई पर उड़ान भरी.

उस समय बेलारूस की सशस्त्र सेना सीमाई इलाक़े में युद्धाभ्यास कर रही थी.

पोलैंड सीमा

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ताज़ा घटनाक्रम

बेलारूस की सरकार ने कहा है कि ‘एमआई-8 और एमआई-24 हेलिकॉप्टरों ने सीमाई इलाक़े का कोई उल्लंघन नहीं किया है’ और इस आरोप को ‘पोलैंड का पुराना राग’ बताया है.

बायलोवीज़ा के निवासियों ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट की हैं जिसमें बेलारूसी लोगो वाले एमआई-8 और एमआई-24 हेलीकॉप्टर के कस्बे के ऊपर उड़ने के दावे किए गए हैं.

बीबीसी वेरीफ़ाई ने इनमें से एक हेलीकॉप्टर के सीरियल नंबर को 2018 में मैशुलीशी एयरफ़ील्ड में देखे गए एक हैलिकॉप्टर से मिलान किया है.

बेलारूस की ओर से हज़ारों प्रवासियों के पोलैंड की सीमा में ग़ैरक़ानूनी रूप से घुसने की ख़बरों के बीच ये सैन्य घुसपैठ की ख़बर आई है.

पोलैंड का दावा है कि 2021 से बेलारूस पश्चिमी एशिया और अफ़्रीका के लोगों को बेलारूस आने और फिर यहां से ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से सीमा पार करने को प्रोत्साहित कर रहा है.

हालांकि दो साल पहले के मुकाबले सीमा पार करने की कोशिशों में कमी आई है, लेकिन पोलैंड के सीमा सुरक्षा बलों का कहना है कि इस साल अब तक 19,000 प्रवासियों ने सीमा पार करने की कोशिश की, जबकि पिछले साल ये संख्या 16,000 थी.

पोलैंड सरकार ने बेलारूस की इस रणनीति को ‘हाइब्रिड वॉरफ़ेयर’ का नाम दिया है.

बेलारूस और पोलैंड सीमा

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क्या वागनर ग्रुप पोलैंड में घुसने की तैयारी में है?

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जून में एक नाकाम बग़ावत के बाद रूस की प्राइवेट आर्मी वागनर ग्रुप के बहुत सारे लड़ाकों को बेलारूस भेज दिया गया है.

बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के दौरान मज़ाक में कहा था, "वे पश्चिम में जाने की इजाज़त मांग रहे हैं, वारसा के टूर पर जाना चाहते हैं....लेकिन बेशक, जिस बात पर हम सहमत हुए थे, मैं उन्हें सेंट्रल बेलारूस में रोके हुए हूं."

पोलैंड के प्रधानमंत्री माटेउज़ मोरावीकि ने कहा कि 100 वागनर लड़ाकों का एक ग्रुप ग्रोड्नो की ओर जा रहा है. ये पोलैंड की सीमा के करीब बेलारूस के उत्तरी पश्चिमी इलाके का शहर है. और इस हालात को अत्यधिक ख़तरनाक क़रार दिया गया है.

उन्होंने चेतावनी दी है कि बेलारूस में मौजूद वागनर लड़ाके पोलैंड में प्रवासियों के भेष में दाख़िल हो सकते हैं या वे बेलारूसी बॉर्डर गार्ड की जगह लेकर अधिक से अधिक ग़ैरक़ानूनी प्रवासियों को पोलैंड में सीमा पार करा सकते हैं.

बेलारूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वागनर सैनिक पोलैंड की सीमा से 10 किलोमीटर दूर, देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित ब्रेस्त्स्की कैंप में मौजूद हैं और बेलारूसी फौज को ट्रेनिंग दे रहे हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफॉ लैंकास्टर में अंतरराष्ट्रीय संबंध में लेक्चरर डॉ. बारबारा योक्सॉन का कहना है, "प्राइवेट आर्मी होने के नाते इसके लड़ाके सीमा पर गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं जिसके लिए रूस या बेलारूस को सीधे दोषी नहीं ठहराया जा सकता."

बेलारूसी सीमा सुरक्षा बल

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सीमाई इलाक़ा क्यों संवेदनशील है?

पोलैंड और लिथुआनिया के बीच एक सीमा रेखा है जिसे सुवाल्की गैप कहते हैं.

करीब 95 किलोमीटर की ज़मीन की यह पट्टी बेलारूस और रूस के सबसे किलाबंद कालिनिग्राद के बीच लिंक है.

कई रक्षा विश्लेषक मानते हैं कि अगर नेटो देशों और रूस के बीच टकराव हुआ तो सुवाल्की गैप जंग का संभावित मैदान हो सकता है.

डर ये है कि अगर बेलारूस के साथ रूस सेना के इस्तेमाल से इस गैप को बंद कर देते हैं तो इससे लिथुआनिया, लात्विया और एस्टोनिया जैसे बाल्टिक देश अपने यूरोपीय नेटो सहयोगियों से पूरी तरह कट जाएंगे.

योक्सॉन के मुताबिक, "ये बहुत संकरा रास्ता है. रूस और बेलारूस मिलकर बाल्टिक देशों को बचाने के लिए भेजी गई नेटो की मदद को यहां रोक सकते हैं."

कुछ सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि ये कथित घुसपैठ संकेत है कि रूस बाल्टिक देशों पर हमले की फिराक में है.

हालांकि थिंक टैंक रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ आर्गेनाइजेशन के प्रोफ़ेसर मैलकम शाल्मर्स का कहना है, "ये असल में रूस और बेलारूस की टोह लेने की कोशिश है और वे देखना चाहते हैं कि नेटो इलाके में घुसपैठ को लेकर नेटो क्या प्रतिक्रिया दे सकता है, या कोई प्रतिक्रिया नहीं देगा."

हाल के सालों में रूस और बेलारूस ने कई सैन्य समझौते किए हैं.

बेलारूस ने यूक्रेन पर आक्रमण करने के लिए रूसी सेनाओं को अपनी सीमा से जाने की इजाज़त दी और अब उसने अपनी ज़मीन पर रूस को टैक्टिकल न्यूक्लियर मिसाइल तैनात करने की इजाज़त दी है.

अंतरराष्ट्रीय मामलों के थिंक टैंक चैटम हाउस के डॉ. अनाइस मैरीन के अनुसार, कथित घुसपैठ रूस का आइडिया हो सकता है, ये सुनिश्चित करने के लिए बेलारूस अभी भी पोलैंड और नेटो का प्रतिद्वंदवी है और रूस का पक्का दोस्त है.

पोलैंड के सुरक्षा कर्मी

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पोलैंड अपनी सीमा पर क्या कर रहा है?

पोलैंड के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसने बेलारूस से सटी सीमा पर 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं. इनमें 4,000 सीमा सुरक्षा बलों को सीधे मदद देंगे, जबकि 6,000 रिज़र्व में रहेंगे.

जुलाई में सरकार ने 1,000 अतिरिक्त सैनिक सीमा पर वागनर ग्रुप की संभावित घुसपैठ से निपटने के लिए भेजे थे.

हालांकि कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हो सकता है कि पोलैंड के राजनेता वागनर ग्रुप और बेलारूस के ख़तरे को बढ़ा चढ़ा कर दिखा रहे हों क्योंकि वहां जल्द ही चुनाव होने वाले हैं और वे ये दिखाना चाहते हों कि वे सुरक्षा के मुद्दे को लेकर प्रतिबद्ध हैं.

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