यूनिफॉर्म सिविल कोड: कांग्रेस क्यों अपना रही है 'इंतजार करो और देखो' की रणनीति- प्रेस रिव्यू

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शादी, तलाक, विरासत, गोद लेने समेत कई चीजों पर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने का एजेंडा सेट कर पीएम नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों के सामने सीधी चुनौती पेश कर दी है.
लेकिन कांग्रेस फिलहाल इस पर किसी ड्राफ्ट कानून या ठोस प्रस्ताव के बगैर सरकार पर हमलावर नहीं होना चाहती है.
'द हिंदू' ने इस मामले में कांग्रेस की रणनीति पर एक विस्तृत रिपोर्ट छापी है.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पीएम मोदी के एलान के बाद कांग्रेस अभी इस पर सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रही है.
पार्टी के कम्यूनिकेशन महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि लॉ कमीशन ने 14 जून को यूनिफॉर्म सिविल कोड पर फिर से गौर करने का नोटिफिकेशन दिया था.
इसके ठीक एक दिन बाद कांग्रेस ने इस पर अपना रुख साफ किया था.
21वें लॉ कमीशन ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को गैरजरूरी करार देते हुए कहा था कि यह न तो अनिवार्य है और न ही वांछनीय.
इसके ठीक एक दिन बाद यानी 15 जून को कांग्रेस ने साफ कर दिया था कि वो लॉ कमीशन के इस रुख से सहमत है.
बहरहाल, लॉ कमीशन की इस सिफारिश के बाद कांग्रेस ने अपने संसदीय रणनीतिक समूह की बैठक में फिलहाल इस मुद्दे पर सरकार के अगले कदम का इंतजार करने का फैसला किया है.

कांग्रेस की 'इंतजार करो और देखो' की रणनीति
इस बैठक में शामिल एक नेता ने अख़बार को बताया, ''बैठक में ये कहा गया कि पीएम ने पासा फेंक दिया और हम इसके पीछे दौड़ पड़ें, इससे बचना चाहिए''
बैठक में कहा गया कि पार्टी पर्सनल लॉ में बदलाव के ख़िलाफ नहीं है.
इस नेता ने कहा, ''यूपीए के दौर में हिंदू उत्तराधिकार कानून, 1956 में बदलाव किया गया था ताकि महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिल सके.''
अख़बार के मुताबिक़ कानूनों मामलों की संसद की स्थायी समिति बीजेपी राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी के नेतृत्व में यूनिफॉर्म सिविल कोड के मामले में बैठक करेगी.
बैठक में लॉ कमीशन की रिपोर्ट को एजेंडा पेपर के तौर पर बांटा गया है.
कांग्रेस के पांच सदस्य समिति में हैं. बैठक में कांग्रेस, लॉ कमीशन के इसी रुख पर टिकी रहेगी कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना न तो अनिवार्य है और न वांछनीय.

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तृणमूल कांग्रेस का रुख
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस ने इस पर विपक्षी दलों की एकजुटता पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब दिया है.
‘द हिंदू’ की ही एक दूसरी ख़बर के मुताबिक़ पार्टी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा है कि जरूरी नहीं सभी विपक्षी दल एक दूसरे की ‘फोटोकॉपी’ हों.
दरअसल आम आदमी पार्टी ने समान नागरिक संहिता को सैद्धांतिक समर्थन देने का एलान किया था.
शिवसेना का उद्धव ठाकरे गुट भी इसके समर्थन में है.
इस पर ब्रायन ने ट्वीट करते हुए कहा कि जरूरी नहीं कि लोकतंत्र और नौकरियां पैदा करने के लिए लड़ रही विपक्षी पार्टियां एक दूसरे की ‘फोटोकॉपी’ हों.
उन्होंने कहा, ‘’पटना की बैठक के बाद होने वाली दूसरी बैठक में उन मुद्दों पर चर्चा होगी जिसमें सभी पार्टियां सौ फीसदी सहमत हैं. कुछ मुद्दों पर सभी विपक्षी दल एकमत नहीं हो सकते.’’

'भारत में चलने वाली स्लीपर बसें चलता-फिरता ताबूत'
महाराष्ट्र के बुलढाणा में एक्सप्रेस-वे पर चलती बस में आग से 25 लोगों की मौत की जांच शुरू हो गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि स्लीपर बसें चलता-फिरता ताबूत साबित हो रही हैं.
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक ख़बर के मुताबिक़ एमसीआरटीसी की बसों को डिजाइन करने वाले रवि मेंहदले ने बताया कि स्लीपर बसों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि इसमें यात्री लेट सकें.
लेकिन इससे बस में चलने-फिरने की जगह कम हो जाती है. ये बसें आठ-नौ फीट ऊंची होती हैं. इससे यात्री फंस जाते हैं और इमरजेंसी गेट तक नहीं पहुंच पाते.
जो लोग बाहर से लोगों की मदद के लिए पहुंचते हैं उनके लिए ये काम करना कठिन हो जाता है क्योंकि उन्होंने यात्रियों को बचाने के लिए आठ-फीट ऊंचा चढ़ना पड़ता है.
मेंहदेले ने अख़बार को बताया कि महाराष्ट्र के सड़क परिवहन मंत्रालय को इन बसों को बैन करने के लिए कई चिट्ठियां लिखीं, लेकिन अब तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.
उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान को छोड़ कर कहीं भी स्लीपर बसें नहीं चलतीं.

मणिपुर के सीएम फिर विवादों में, ‘ट्वीट’ पर भड़के लोग
हिंसा की आग में जल रहे मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह विवादों से पीछा नहीं छुड़ा पा रहे हैं.
इस्तीफा देने का एलान कर इससे पीछे हटने के बाद उनके आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट ने फिर विवाद पैदा कर दिया है.
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की ख़बर के मुताबिक़ शुक्रवार की रात मुख्यमंंत्री के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में लिखा गया कि जो लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं वो कुकी हैं और म्यांमार के रहने वाले हैं.
हालांकि शनिवार को ये ट्वीट हटा लिए गया, लेकिन शाम तक उनके कार्यालय से इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था.
कुछ ट्विटर यूजर्स ने उन जवाबों के स्क्रीनशॉट सेव कर लिए हैं, जिनमें उनके आधिकारिक हैंडल से जवाब दिए गए थे.

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एक यूजर ने लिखा था कि मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए. इस पर उसे जवाब देते हुए लिखा गया, ‘’ आप भारत के रहने वाले हो या म्यांमार के’’
एक दूसरे यूजर ने लिखा था कि म्यांमार में बड़ी तादाद में मैती रहते हैं. इन सभी मैतियों को यहां ‘बर्मी’ नहीं कहा जाता. इस पर जवाब दिया गया कि म्यांमार में रहने वाले मैतियों ने कभी होमलैंड की मांग नहीं की.
हालांकि एन. बीरेन सिंह की सोशल मीडिया के एक सदस्य ने कहा कि उनकी ओर इस हैंडल से कोई जवाब नहीं दिया गया है.
मणिपुर में लोग सीएम के आधिकारिक हैंडल से दिए गए इन जवाबों की आलोचना करते हुए कह रहे हैं कि उच्च पद पर बैठे किसी व्यक्ति को ये शोभा नहीं देता.

कांग्रेस का तेलंगाना अभियान
‘अमर उजाला’ ने तेलंगाना में कांग्रेस के चुनाव अभियान पर विस्तृत रिपोर्ट छापी है.
अख़बार लिखता है, कर्नाटक जीत ने कांग्रेस में मानो एक बार फिर जान फूंक दी है.
इस साल के अंत में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस एक्टिव मोड में आ चुकी है.
राहुल गांधी अब तेलंगाना में चुनावी बिगुल फूंकेंगे.
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) अध्यक्ष और सांसद ए रेवंत रेड्डी का कहना है कि पार्टी रैली के साथ प्रदेश की बीआरएस सरकार को खत्म करेगी.
रेड्डी ने शुक्रवार को राहुल गांधी के कार्यक्रम का निरीक्षण किया था.
कांग्रेस नेता ने बताया कि राहुल गांधी रविवार को खम्मम में एक सार्वजनिक बैठक करेंगे.
राहुल गांधी कांग्रेस नेता विक्रमार्क को भी सम्मानित करेंगे, जिन्होंने हाल ही में 108 दिन और 1,360 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली थी.
इस दौरान खम्मम के पूर्व सांसद पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी कांग्रेस में शामिल होंगे. हाल ही में, श्रीनिवास रेड्डी और पूर्व मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव ने पार्टी में शामिल होने की घोषणा की थी.

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