तमिलनाडु के राज्यपाल क्यों बन गए हैं एक बड़े विवाद की वजह?

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तमिलनाडु में राज्यपाल आरएन रवि के एक फ़ैसले को लेकर सियासत तेज़ हो गई है.
इस पूरे मामले में कई पार्टियों ने राज्यपाल के साथ-साथ बीजेपी की केंद्र सरकार को भी घेरा है. राज्यपाल ने तमिलनाडु सरकार में मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को बर्ख़ास्त करने की घोषणा कर दी थी.
लेकिन इस पर हुए शोर-शराबे और हंगामे के कारण पाँच घंटे बाद उन्होंने अपना फ़ैसला वापस ले लिया.
राज्यपाल पर ये भी आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने बिना क़ानूनी सलाह के सेंथिल बालाजी को हटाने का फ़ैसला कर लिया.
14 जून को प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में सेंथिल बालाजी को गिरफ़्तार किया था. बाद में चेन्नई की एक अदालत ने इस मामले में उन्हें 28 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
बालाजी पर नौकरी घोटाले के एक केस में कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा है.
बालाजी तमिलनाडु सरकार में बिजली, आबकारी और मद्य निषेध मंत्री थे.
गिरफ़्तारी के समय ही उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया.
फ़िलहाल सेंथिल बालाजी चेन्नई के कावेरी अस्पताल में भर्ती हैं, जहाँ दिल की बीमारी के लिए उनका इलाज चल रहा है.

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राज्यपाल ने स्टालिन को चिट्ठी में क्या लिखा?
इस बीच तमिलनाडु में एमके स्टालिन की सरकार ने उनका विभाग उनसे ले लिया है.
सरकार ने ये भी घोषणा की थी कि सेंथिल बालाजी मंत्री पद पर बने रहेंगे. हालांकि उनके पास कोई विभाग नहीं होगा.
तमिलनाडु सरकार का ये फ़ैसला मद्रास हाई कोर्ट भी पहुँचा.
26 जून को अपनी सुनवाई में मद्रास हाई कोर्ट ने कहा, "गवर्नर ने ये कहाँ कहा है कि वे सेंथिल बालाजी को मंत्री के रूप में नहीं चाहते और राज्यपाल ने कहाँ कहा है कि मंत्री को हटाया जाना चाहिए. सेंथिल बालाजी के मंत्री के रूप में काम जारी रखने को अस्वीकार करने और उनके हटाने के आदेश में अंतर है."
लेकिन इस मामले में गुरुवार शाम को उस समय एक नया मोड़ आ गया जब राज्यपाल आरएन रवि ने सेंथिल बालाजी को मंत्रिपद से हटा दिया.
राज्यपाल दफ़्तर की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में इस पर विस्तार से जानकारी दी गई थी.
इस प्रेस रिलीज़ में कहा गया है है कि सेंथिल बालाजी मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं और वे जाँच को प्रभावित कर सकते हैं.
प्रेस रिलीज़ में ये भी कहा गया है कि कैबिनेट में सेंथिल बालाजी की मौजूदगी क़ानूनी प्रक्रियाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी.
इसके साथ ही राज्यपाल ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को पाँच पन्नों की चिट्ठी भेजी और ये भी बताया कि वे क्यों सेंथिल बालाजी को पद से हटा रहे हैं.
राज्यपाल ने ये भी लिखा है कि सामान्य परिस्थितियों में राज्यपाल मंत्री परिषद की सलाह पर काम करता है, लेकिन मेरी सलाह के बावजूद आपने सेंथिल बालाजी को मंत्री बनाए रखा और ये आपका पक्षपातपूर्ण रवैया दिखाता है.

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अमित शाह के कहने पर पलटे राज्यपाल?
राज्यपाल आरएन रवि ने अपने पहले पत्र में ये लिखा कि सेंथिल बालाजी भ्रष्टाचार के कई मामलों में गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं और ये चिंता है कि अगर वे मंत्री बने रहे तो वे क़ानून की राह में बाधा खड़ी कर सकते हैं.
राज्यपाल ने पत्र में लिखा था, "ऐसी परिस्थिति में संविधान के अनुच्छेद 154, 163 और 164 के अंतर्गत मिली शक्तियों के आधार पर मैं तत्काल प्रभाव से वी सेंथिल बालाजी को मंत्रिपद से हटा रहा हूँ."
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस पर प्रतिक्रिया दी कि राज्यपाल को ये अधिकार नहीं कि वे सेंथिल बालाजी को हटा सकें. उस समय स्टालिन ने कहा था कि वे इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई लड़ेंगे.
लेकिन पाँच घंटे बाद स्थिति बदल गई. राज्यपाल आरएन रवि ने एक अन्य पत्र मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को भेजा और लिखा कि केंद्रीय गृह मंत्री की सलाह पर वे अपना फ़ैसला स्थगित कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को लिखे अपने दूसरे पत्र में राज्यपाल आरएन रवि ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने सलाह दी है कि इस मामले में अटॉर्नी जनरल की राय लेना बेहतर होगा.
उन्होंने आगे लिखा है, "इस कारण मैं अटॉर्नी जनरल की सलाह ले रहा हूँ. इस बीच अगले आदेश तक सेंथिल बालाजी को हटाने का फ़ैसला स्थगित रहेगा."

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विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
तमिलनाडु के गवर्नर के मंत्री सेंथिल बालाजी को हटाने के फ़ैसले और फिर वापस लेने को लेकर कई पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
डीएमके सांसद एनआर इलांगो ने कहा कि राज्यपाल को ये अधिकार नहीं कि वे किसी मंत्री को हटाएँ. उन्होंने असंवैधानिक और ग़ैर क़ानूनी काम किया है. पार्टी अपने अगले क़दम पर फ़ैसला करेगी.
केरल के गवर्नर आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा है कि वे तकनीकी बात में जाने की बजाए नैतिकता की बात करना चाहेंगे.

उन्होंने कहा, "मैं इसके क़ानूनी पक्ष पर नहीं जा रहा हूँ. अगर किसी व्यक्ति पर संदेह है, तो पहले उसे अपना नाम क्लियर करना चाहिए और फिर पद पर आना चाहिए."
कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी ने कहा है कि राष्ट्रपति को तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को तुरंत हटा देना चाहिए.

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में मनीष तिवारी ने कहा, "राज्यपाल अपनी सीमा नहीं जानते हैं. उन्हें इस तरह का असंवैधानिक क़दम नहीं उठाना चाहिए था. इससे ये भी पता चलता है कि उन्हें संविधान की जानकारी नहीं है और न ही वे अपनी ज़िम्मेदारियों से वाकिफ़ हैं."
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के पोलित ब्यूरो ने तमिलनाडु के राज्यपाल के क़दम की कड़ी आलोचना की है.
पार्टी ने इस बारे में एक बयान जारी किया है.
इस बयान में पार्टी ने कहा है, "राज्यपाल का फ़ैसला पूरी तरह असंवैधानिक है. मुख्यमंत्री की सलाह के बिना राज्यपाल न तो किसी मंत्री को नियुक्त कर सकता है और न ही हटा सकता है."
सीपीएम का कहना है कि तमिलनाडु के राज्यपाल अपने पद पर बने रहने के लायक नहीं हैं.
पार्टी ने मांग की है कि राष्ट्रपति को उन्हें वापस बुला लेना चाहिए.

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राज्यपाल के क्या हैं अधिकार?
राज्यपाल आरएन रवि ने अपने पहले पत्र में संविधान के अनुच्छेद 154, 163 और 164 का ज़िक्र किया था और ये कहा था कि इसी के आधार पर वे मंत्री सेंथिल बालाजी को बर्ख़ास्त कर रहे हैं.
आइए जानते हैं इन अनुच्छेदों के तहत राज्यपाल के क्या अधिकार हैं.
अनुच्छेद 154 के तहत ये कहा गया है कि राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी और वह इसका प्रयोग इस संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा.
जबकि अनुच्छेद 163 के तहत कहा गया है कि-
1. मुख्यमंत्री और उसकी मंत्रिपरिषद राज्यपाल को उसके कामकाज में सहयोग और सलाह देगी. लेकिन संविधान के तहत जिन कार्यों में राज्यपाल से उसके विवेक के अनुसार काम करना अपेक्षित है, वो ऐसा कर सकते हैं.
2. अगर इस पर कोई सवाल उठता है, तो राज्यपाल का अपने विवेक के अनुसार किया गया फ़ैसला अंतिम होगा. राज्यपाल के किसी फ़ैसले की वैधानिकता पर इस आधार पर सवाल नहीं उठाए जाएँगे कि उन्हें विवेक के अनुसार काम करना चाहिए या नहीं.
3. किसी प्रश्न की इस आधार पर किसी न्यायालय में जाँच नहीं की जाएगी कि क्या मंत्रियों ने राज्यपाल को कोई सलाह दी और अगर दी तो क्या दी.
अनुच्छेद 164 में ये कहा गया है कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा. जबकि वो अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा. मंत्री राज्यपाल की इच्छा तक अपने पद पर बने रहेंगे.
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