तमिलनाडु: कलाक्षेत्र कॉलेज की छात्राओं ने लगाया सालों से यौन उत्पीड़न होने का आरोप

- Author, मुरलीधरन काशीविश्वनाथन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, तमिल सेवा
भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के चेन्नई में मौजूद जाना माना कलाक्षेत्र कॉलेज इन दिनों विवादों में है.
इस जाने-माने शिक्षण संस्थान की छात्राओं ने अपने ही शिक्षकों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. उनका ये भी आरोप है कि प्रबंधन इस मुद्दे पर लापरवाही बरत रहा है.
कलाक्षेत्र फ़ाउंडेशन चेन्नई के सबसे अहम सांस्कृतिक संगठनों में से एक है. यहां भरतनाट्यम, कथकली जैसे नृत्यों में चार साल के डिप्लोमा के अलावा गीत-संगीत की भी शिक्षा दी जाती है.
1936 में स्थापित इस संस्थान को 1993 में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता दी गई थी.
संस्था के शिक्षकों पर उन्हीं की छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है.

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क्या है मामला?
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर कुछ क्लोज़्ड ग्रुप्स में इस बारे में शिकायतें मिली थीं. लेकिन उस समय मीडिया से बात करने के लिए कोई सामने नहीं आया.
अनीता रत्नम जैसी जानी-मानी कुछ डांसर्स ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर इस बात की जानकारी दी है.
इन आरोपों के अनुसार, कलाक्षेत्र में काम कर रहे चार पुरुष शिक्षक छात्राओं का यौन उत्पीड़न कर रहे थे और प्रबंधन से बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई.
21 मार्च को, राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी अपने ट्विटर पेज पर कहा कि तमिलनाडु पुलिस के प्रमुख को इस मामले की जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए. महिला आयोग ने इस बारे में नोटिस भी भेजा था.
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इसके बाद कलाक्षेत्र फ़ाउंडेशन ने केंद्र सरकार के ज़रिए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है.
कलाक्षेत्र ने कहा है, "इस मामले को लेकर उचित कार्रवाई की जा रही है. केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को इस बारे में सूचित कर दिया गया है."
हालांकि संस्था ने शिकायतों को ख़ारिज करते हुए कहा है, "पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया के ज़रिए कई शिक्षकों और कलाक्षेत्र को बदनाम किया जा रहा है. कलाक्षेत्र की अति सक्रिय आंतरिक जांच समिति (आईसीसी) ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए इसकी विस्तृत जांच शुरू की. लेकिन ढाई महीने बाद शिकायतें आधारहीन पाई गईं."
इसके बाद, राष्ट्रीय महिला आयोग ने 25 मार्च को बताया कि आंतरिक जांच समिति ने मामले की जांच की है. जांच के दौरान पीड़ित छात्रा ने इस घटना से इनकार किया जिसके बाद ये मामला बंद कर दिया गया है.
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राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने गुरुवार को कलाक्षेत्र का दौरा किया और इस मामले में जांच की.
छात्राओं का आरोप है कि उन्हें आयोग की चेयरपर्सन से खुलकर बात करने का मौक़ा नहीं दिया गया और साथ ही जांच सभी लोगों की मौजूदगी में खुले में हुई.
रेखा शर्मा के इस दौरे से बाद गुरुवार को छात्राओं ने यहां विरोध प्रदर्शन किया.
कलाक्षेत्र के प्रबंधन ने पहले मीडिया को कैम्पस के भीतर जाने की इजाज़त नहीं दी. लेकिन बाद में जब प्रेस को भीतर जाने की अनुमति मिली तो छात्राओं ने शिकायत और कुछ शिक्षकों की हरकतों के बारे में लगाए आरोपों की बात की.

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परिसर में पुलिस का प्रबंध
जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शन तूल पकड़ने लगा कलाक्षेत्र ने घोषणा की कि कॉलेज मार्च 30 तारीख़ से लेकर 6 अप्रैल तक बंद रहेगा. हॉस्टल में रहने वालों को दो दिनों के भीतर अपने कमरे खाली करने को कहा गया.
कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि इस दौरान जो परीक्षाएं होनी हैं वो बाद में आयोजित की जाएंगी.
हालांकि छात्रों का कहना है कि उनके विरोध को देखते हुए ये घोषणा की गई जिसके बाद उन्होंने विरोध प्रदर्शन को रात में भी जारी रखने का फ़ैसला किया.
इसके बाद ज़िले के राजस्व अधिकारी, तहसीलदार, डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर कॉलेज परिसर में आए और उन्होंने मामले की जांच की.
जब संस्थान की निदेशक रेवती रामचंद्रन विरोध कर रही छात्रों के बीच आईं तो मीडिया ने उनसे कई सवाल पूछे.
उन्होंने कहा, "छात्राओं की सुरक्षा हमारे लिए सबसे अहम प्राथमिकता है और हम इस मामले में छात्राओं की शिकायतों की जांच करेंगे. हम इस बारे में सभी से चर्चा भी करेंगे."
ढाई महीने तक जांच चलने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई न किए जाने के बारे में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने इसका कोई उत्तर नहीं दिया और कॉलेज परिसर से बाहर निकल गईं.

अभी तक लिखित शिकायत नहीं मिली
रात को क़रीब दो बजे छात्राओं ने कहा कि वो अगले दिन सवेरे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगी. ये कह कर वो अपने-अपने कमरों में लौट गईं. इसके बाद शुक्रवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा.
राज्य की विधानसभा में भी शुक्रवार को इस मुद्दे पर चर्चा हुई. एसएस बालाजी, टी. वेलमुरुगन और के सेल्वापेरुन्तगई ने इस मुद्दे पर सवाल किए. उनके सवालों का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि "अब तक पुलिस विभाग को इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है."
उन्होंने बताया, "विरोध प्रदर्शनों के कारण कॉलेज को बंद कर दिया गया है और छात्राओं से हॉस्टल खाली करने को कहा गया है. छात्राओं की सुरक्षा के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए गए हैं और एक महिला इंस्पेक्टर की निगरानी में वहां कई पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है."
उन्होंने कहा कि इस मामले में दोषी पाए गए लोगों को बख्सा नहीं जाएगा. उन्होंने कहा, "इस मामले में पूरी जांच की जाएगी और अगर ये शिकायत सही साबित हुई तो ज़रूरी कार्रवाई की जाएगी."
अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर प्रेम आनंद सिन्हा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस संबंध में अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है.
उन्होंने कहा, "कलाक्षेत्र वाले मुद्दे में अब तक हमें किसी तरफ से कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है. अगर शिकायत मिली तो इस पर ज़रूर कार्रवाई की जाएगी."
उन्होंने लोगों से गुज़ारिश की कि वो सोशल मीडिया पर इस मामले में जुड़ी भ्रामक जानकारी शेयर न करें.

अभिभावकों को चुप कराने की कोशिश
इस बीच तमिलनाडु महिला आयोग की चेयरपर्सन एएस कुमारी ने भी कलाक्षेत्र का दौरा कर मामले की जांच की है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में वो सरकार को रिपोर्ट सौंपेंगी.
छात्राओं का आरोप है कि यौन हिंसा से जुड़े इस मामले में चार लोग शामिल हैं. इस मामले में 2008 से बार-बार शिकायत दर्ज कराई गई है लेकिन इसके बावजूद भी प्रबंधन ने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया.
गुरुवार को कुछ छात्राओं के अभिभावक भी कॉलेज परिसर में आए थे. उन्होंने कहा कि कलाक्षेत्र में जिस तरह मामले को हैंडल किया जा रहा है उसे लेकर काफी गोपनीयता बरती जा रही है, वो इससे नाराज़ हैं.
केरल से आए एक अभिभावक ने कहा, "इससे पहले हम एक बार एडमिशन के वक्त ही यहां आए थे. उसके बाद से हम कभी यहां प्रवेश नहीं कर पाए. कोर्स ख़त्म होने पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होना है, उसके लिए हमें ऑडिटोरियम में जाने की इजाज़त दी जाएगी. इसके अलावा हम परिसर में न तो कहीं और जा सकते हैं और न ही किसी से बात कर सकते हैं. अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए हमें चुप रहने को बाध्य किया जाता है."
साल 1936 में रुक्मिणी देवी अरुंडेल और जॉर्ज अरुंडेल नेअद्यार में थियोसोफ़िकल सोसायटी के परिसर में कलाक्षेत्र फ़ाउंडेशन की स्थापना की थी. बाद में 1962 में इसे थिरुवनमयूर में शिफ्ट कर दिया गया था.
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