इसराइल और ईरान के बीच सालों पुराना तनाव कैसे अलग-अलग इलाक़ों में फैल रहा है?

इसी साल अप्रैल में सीरिया के दमिश्क में हुए हवाई हमले से प्रभावित जगह पर रेस्क्यू वर्कर्स

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    • Author, महमूद अल नग्गर
    • पदनाम, बीबीसी अरबी

इसराइल और फ़लस्तीनी ग्रुप हमास के बीच युद्ध के कारण मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया है.

अब इस संघर्ष में ईरान और इसके प्रॉक्सी गुट भी शामिल हो गए हैं.

हालांकि ईरान ने इसराइल पर 7 अक्टूबर को हमास के हमले में अपनी संलिप्तता से साफ़-साफ़ इनकार किया है लेकिन इसके साथ ही हमास के हमले के ख़िलाफ़ इसराइल के अभियान को समर्थन भी नहीं दिया है.

इसराइल ने हमास के हमले को इसराइल के लिए “डिवेसटेटिंग अर्थक्वैक” यानी विनाशकारी भूकंप जैसा बताया है.

अभी तक ईरान इसराइल के साथ सीधे-सीधे किसी तरह के टकराव में शामिल नहीं रहा है. लेकिन इसराइल हमेशा से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान समर्थित समूहों के निशाने पर रहा है.

इन समूहों को जिसे ईरान “विरोध की धुरी” (एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस) कहता रहा है उनमें लेबनान का हिज़बुल्लाह, यमन का हूती विद्रोही और ईराक़ के कई सशस्त्र समूह शामिल हैं.

इनमें से कई समूहों को अमेरिका, ब्रिटेन और कई देश आतंकी संगठन मानते हैं.

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हिज़बुल्लाह की भूमिका

इसराइली इलाके में शेबा फार्म्स जिस पर हिज़बुल्लाह ने निशाना बनाया

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ग़ज़ा की लड़ाई ने इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच तनाव को फिर से बढ़ा दिया है.

इसके बाद हिज़बुल्लाह ने “हमास के समर्थन में” इसराइल के उत्तरी इलाक़ों को निशाना बनाना शुरू कर दिया.

अक्टूबर 8 को हमास के हमलों के कुछ घंटे बाद ही हिज़बुल्लाह ने भी इसराइली इलाके शेबा फार्म्स पर हमला कर दिया.

इसके बाद तुरंत ही हिज़बुल्लाह ने हमास के 7 अक्टूबर के हमलों को समर्थन का ऐलान कर दिया.

शेबा फार्म्स पर हमले के बदले में इसराइली सेना ने भी जवाबी कारवाई में हिज़बुल्लाह टेंट्स को निशाना बनाया.

लेबनान की सेना ने इसराइली सेना की इस जवाबी कार्रवाई में लेबनानी नागरिकों के घायल होने की बात कही.

हूती विद्रोहियों का प्रवेश

यमन के हूती विद्रोहियों का एक सदस्य

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ग़ज़ा की लड़ाई के एक महीने के अंदर ही यमन के हूती विद्रोही भी इसराइल के ख़िलाफ़ इस लड़ाई में शामिल हो गए.

14 नवंबर को हूती नेता अब्दुल मलिक ने साफ़-साफ़ ऐलान कर दिया कि हूती इसराइली कंपनियों के जहाज़ को निशान बनाएगा.

बाद में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में विशेष रूप से बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास इसराइल जाने वाले सभी जहाज़ों को निशाना बनाने का ऐलान कर दिया.

इन एलानों के बाद हुए हमलों का व्यापक प्रभाव विश्व व्यापार पर पड़ा. इसके कारण जहाज़ों को हज़ारों मील लंबे दूसरे रूट को अपनाना पड़ा.

2023 के दिसंबर में दो इसराइली जहाज़ों पर हमला करने का दावा हूती विद्रोहियों ने किया. हूती विद्रोहियों के अनुसार इन दो जहाज़ों ने उनकी नौसेना की चेतावनियों को इग्नोर किया था. इसके बाद एक जहाज़ जिसका मालिक एक इसराइली व्यापारी था उसे हूती विद्रोहियों ने अपने कब्ज़े में ले लिया था.

इस साल जनवरी में अदन की खाड़ी में एक ब्रिटिश तेल टैंकर पर हूती मिसाइल हमले के बाद अमेरिका ने यमन में हवाई हमला किया था।

हूती विद्रोहियों का दावा था कि अमेरिकी और ब्रिटिश एयरक्राफ्ट ने यमन के पश्चिमी प्रांत अल हुदैदाह में रास इस्सा तेल क्षेत्र को निशाना बनाया. जो कि इस क्षेत्र में समुद्री यातायात की सुरक्षा के लिए बनाए गए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा था.

लेबनान में इसराइली हमले की शुरुआत

हमास नेता सालेह अल-अरौरी की शव यात्रा

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इसराइल ने लेबनान पर हवाई हमले तेज़ कर दिए.

2 जनवरी 2024 को बेरूत के शिया बहुल दक्षिणी उपनगर दहियेह में हवाई हमला कर हमास के उप प्रमुख और वेस्ट बैंक में हमास के नेता सालेह अल-अरौरी को मार दिया.

इसराइल के अनुसार हमास और हिज़बुल्लाह के बीच सालेह अल-अरौरी एक अहम लिंक था.

कुछ ही दिनों बाद, हिज़बुल्ला ने इसराइल के उत्तर में मेरोन एयरबेस पर लगभग 40 रॉकेट दागे जिसे अरौरी की हत्या के जवाब में "प्रारंभिक प्रतिक्रिया" कहा.

8 जनवरी को फिर एक इसराइली हवाई हमले में हिज़बुल्लाह के रदवान फोर्स के डिप्टी कमांडर विसाम अल-ताविल मारे गए. विसाम अल-ताविल को मेरोन एयरबेस पर हमले की साज़िश रचने का आरोपी माना जाता है.

इराक़ी मिलिशिया पर आईआरजीसी का कितना प्रभाव

ईरान की आईआरजीसी के सुरक्षा कर्मी

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जनवरी के अंत में, सीरियाई सीमा के समीप उत्तर-पूर्वी जॉर्डन में "टॉवर 22" के रूप में जाने जाने वाले अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमले में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे और 34 अन्य घायल हो गए थे.

हालांकि जॉर्डन ने इस बात से साफ़ इनकार कर दिया की ये ड्रोन हमले जॉर्डन के इलाके में हुए थे. जॉर्डन के अनुसार ये हमले सीरिया की सीमा में हुए थे.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि सीरिया और इराक़ में सक्रिय ईरान समर्थित चरमपंथी आतंकवादी समूह इन हमलों में शामिल थे. बाइडन ने इन हमलों के लिए उन सभी ज़िम्मेदार समूहों को सबक़ सिखाने की क़सम भी खाई.

इस हमले की ज़िम्मेदारी कताइब हिज़बुल्लाह और कुछ इराक़ी मिलिशिया ने ली. अमेरिका के अनुसार ये वही इराक़ी मिलिशिया हैं जो ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के संरक्षण में काम करते हैं.

हालांकि इन मिलिशिया पर ईरान का कितना प्रभाव है इसके बारे में कुछ भी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता है.

ईरान ने भी इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार समूहों का समर्थन करने से इनकार किया है.

ईरान का सीधा टकराव

दमिश्क में ईरानी कॉनसुलेट पर हमले के बाद लोगों के जमावड़े का दृश्य

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एक तरफ़ जहां ईरान इसराइल के अस्तित्व को ही नकारता है वहीं इसराइल के साथ सीधे-सीधे टकराव से भी बचता रहा है.

अप्रैल के शुरुआत में इसराइल ने दमिश्क में ईरानी कॉनसुलेट पर हमला कर दिया जिसमें आईआरजीसी के कई अधिकारी भी थे. मृतकों में ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रेज़ा ज़ाहेदी भी थे.

उसी महीने के अंत में ईरान ने इसराइल पर अपने पहले सीधे हमले में ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलों का इस्तेमाल किया. ईरान ने नेगेव में इसराइली एयर बेस को निशाने पर लेने का भी दावा किया था.

हालांकि इसराइली सेना ने कहा की अधिकतर मिसाइलों को इसराइली क्षेत्र में आने से पहले ही रोक लिया था. ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम पर इसराइल का यह एक सीमित जवाबी हमला था. हालांकि इसराइल ने आधिकारिक तौर इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली थी.

अलग-अलग इलाक़ों में बढ़त ख़तरा

 ग़ज़ा पट्टी पर इसराइल और फलिसतिनी विवाद में बमबारी का दृश्य

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इमेज कैप्शन, ग़ज़ा पट्टी पर इसराइल के हमले का एक दृश्य

इस साल जून के अंत से शुरुआती जुलाई तक हिज़बुल्लाह और इसराइल के बीच तनाव बहुत तेज़ी से बढ़ गए.

हिज़बुल्लाह ने हमले तेज़ कर दिए और इनके कई सदस्य भी मारे भी गए.

7 जुलाई को हिज़बुल्लाह ने मेरॉन एयर बेस सहित उत्तरी इसराइल में ज़ोरदार रॉकेट हमला किया.

उसी महीने के अंत में इसराइल के कब्जे़ वाले गोलन हाइट्स में फुटबॉल खेल रहे 12 बच्चे और कई युवा रॉकेट स्ट्राइक में मारे गए.

हालांकि हिज़बुल्लाह ने ज़िम्मेदारी लेने से मना कर दिया लेकिन इसराइल ने लेबनान में हिज़बुल्लाह के सात ठिकानों पर हवाई हमले के रूप में इसका जवाब दिया.

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से इसराइल का सीधा टकराव जुलाई में हुआ जब इसराइल ने यमन में हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले लाल सागर बंदरगाह पर बमबारी की.

इस हमले में नौ की मौत हुई और अस्सी से ज़्यादा घायल हो गए. यह हमला तेल अवीव में एक ड्रोन हमले में एक की मौत और आठ से ज़्यादा के घायल होने के ठीक एक दिन बाद हुआ था.

जुलाई में ही दो हत्याएं हुईं. पहली हिज़बुल्लाह के मिलिटरी कमांडर फुअद शूकर की मौत बेरूत के दक्षिणी उपनगर में हवाई हमले में हुई तो दूसरी मौत कुछ ही घंटे बाद तेहरान में ईरान के नए राष्ट्रपति की ताजपोशी में शामिल होने गए हमास नेता इस्माइल हनिया की हुई.

हालांकि इसकी भी ज़िम्मेदारी इसराइल ने नहीं ली.

इन घटनाओं के कारण चर्चाएँ और तेज़ हो गई हैं कि कहीं ये इसराइल और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव बड़े पैमाने पर सीधे टकराव का रूप न ले ले जिसका असर पूरे क्षेत्र में देखने को मिल सकता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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